NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-I

Total Questions: 100

21. 'नैन चुवहिं जस महवट नीरु' 'नागमती वियोग खंड' की इस पंक्ति में 'महवट' का सटीक अर्थ है:

Correct Answer: (c) माघ की झड़ी
Solution:'नैन चुवहिं जस महवट नीरु' नागमती वियोग खण्ड की इस पंक्ति में महवट का सटीक अर्थ 'माघ की झड़ी' है। 'नागमती वियोग खण्ड' जायसी के पद्मावत से लिया गया है। 'पद्मावत' (1540 ई.) को सूफी काव्य पंरपरा का प्रौढ़तम रचना माना जाता है। इसकी कथावस्तु को आलोचकों ने दो खड़ों रत्नसेनपद्मावती के विवाह का पूर्वार्द्ध भाग एवं शेष उत्तरार्द्ध भाग में विभाजित करते हुए पूर्वार्द्ध को कल्पनाप्रसूत एवं उत्तरार्द्ध को ऐतिहासिक माना है।

वस्तुतः जायसी ने अपना प्रयोजन स्पष्ट शब्दों में व्यक्त करते हुए लिखा है: "औ मन जानि कवित अस कीन्हा, मकु यह रहे जगत महं चीन्हा।” अर्थात जगत में अपना चिह्न छोड़ जाने के लिए यह काव्य लिख रहा हूँ, किन्तु फिर भी यह भ्रान्त धारणा प्रचलित है कि इसकी रचना सूफीमत के प्रचार के उद्देश्य से हुई थी। जायसी द्वारा रचित और भी अनेक काव्य उपलब्ध हुए हैं, जिनमें 'अखरावट', 'आखिरी कलाम, 'चित्ररेखा' कहरनामा, मसलनामा आदि उल्लेखनीय हैं।

22. 'झूठा सच' में किस शहर का वर्णन नहीं है?

Correct Answer: (b) कानपुर
Solution:'झूठा सच' उपन्यास में कानपुर शहर का वर्णन नहीं है। 'झूठा सच' उपन्यास में जालंधर, लखनऊ तथा नैनीताल का वर्णन है। 'झूठा सच' उपन्यास यशपाल का सातवाँ उपन्यास है। दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, मनुष्य के रूप, अमिता, बारह घण्टे, अप्सरा का शाप, क्यों फँसे, मेरी तेरी उसकी बात, उपन्यास यशपाल का है।

'झूठा-सच' दो खण्डों 'वतन और देश' तथा 'देश का भाविष्य' में पूरा हुआ है।

'झूठा सच' के प्रमुख पात्र हैं- जयदेवपुरी, तारा, कनक, सूद, गिल, सोमराज, डा. प्राणनाथ इत्यादि ।

उपन्यास के अन्त में डा. प्राणनाथ गिल से कहते हैं- "गिल, अब तो विश्वास करोगे, जनता निर्जीव नहीं है। जनता सदा मूक भी नहीं रहती। देश का भाविष्य नेताओं और मंत्रिओं की मुट्ठी में नही है, देश की जनता के ही हाथ में है।"

23. मुझे उन लोगों से जरा भी हमदर्दी नहीं है, जो बातें तो करते हैं कम्यूनिस्टों की सी मगर जीवन है रईसों का सा उतना विलासमय, उतना ही स्वार्थ से भरा हुआ।" यह कथन किस उपन्यास का है?

Correct Answer: (b) गोदान
Solution:"मुझे उन लोगों ....... .भरा हुआ।"
यह कथन गोदान उपन्यास का है। 'गोदान' उपन्यास प्रेमचन्द्र का है. वे कथा-साहित्य के सम्राट है। प्रेमचन्द्र ने हिन्दी जगत को सेवा सदन 1918 ई., वरदान 1921 ई., प्रेमाश्रम (1921 ई.), रंग भूमि 1925 ई., कायाकल्प 1926 ई. निर्मला 1927 ई., प्रतिज्ञा 1929 ई., 'गबन' 1931 ई., कर्मभूमि 1932 ई., गोदान 1936 ई. मंगलसूत्र- कुल ग्यारह उपन्यास दिये।

'गोदान' प्रेमचन्द का चिर अमर कीर्ति स्तम्भ है। 'गोदान' में प्रेमचन्द का सम्पूर्ण जीवन अनुभव सिमटकर केन्द्रीभूत हो गया है। 'गोदान' के पात्र हैं- होरी, धनिया, गोबर, झुनिया, दातादीन, नोखेराम, पटेश्वरी, झिंगुरी सिंह, पं. ओंकारनाथ, श्यामबिहारी तंखा, मिस्टर खन्ना, मिर्जा, मालती, रायसाहब अमरपाल सिंह आदि ।

'होरी' उपन्यास का नायक है। झूठा सच यशपाल, मैला आँचल - रेणु, जिन्दगीनामा कृष्णा सोबती के उपन्यास हैं।

24. उपन्यास - 'बाणभट्ट की आत्मकथा' के 'कथामुख (प्रस्तावना वक्तव्य) के अनुसार मिस कैथराइन किस राष्ट्र की निवासी थी?

Correct Answer: (d) आस्ट्रिया
Solution:

उपन्यास 'बाणभट्ट की आत्मकथा' के कथामुख (प्रस्तावना वक्तत्य) के अनुसार मिस कैथराइन 'आस्ट्रिया' राष्ट्र की निवासी थीं। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कुल चार उपन्यास लिखे हैं। 'बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचन्द्रलेख, पुनर्नवा, तथा अनामदास का पोथा। मिस कैथराइन आस्ट्रिया के एक संभ्रांत ईसाई परिवार की कन्या है। मिस कैथराइन का भारती विधाओं के प्रति आसीम अनुराग था। अपने देश में रहते हुए ही उन्होने संस्कृत और ईसाई हिंदी का अच्छा अभ्यास कर लिया था।

25. किस उपन्यास में पारंपरिक गीतों के साथ ही बाबा फरीद शाह लतीफ़ और बुल्लेशाह की कविताओं की बहुतायत से प्रयोग किया गया है?

Correct Answer: (c) ज़िन्दगीनामा
Solution:'जिन्दगीनामा' उपन्यास में पारंपरिक गीतों के साथ ही बाबा फरीद, शाह लतीफ़ और बुल्लेशाह की कविताओं का बहुतायत से प्रयोग किया गया है। कृष्णा सोबती ने अब तक कुल छह उपन्यास 'सूरजमुखी अंधेरे के' (1972 ई.), जिन्दगीनामा (1979 ई.), 'दिलो-दानिश' (1993 ई.) 'समय सरगम' (2000 ई.), गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिन्दुस्तान (2017 ई.) विशेष प्रसिद्ध है।

'जिन्दगीनामा' एक बड़ा उपन्यास है। इसमें पंजाब की जिन्दगी का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया गया है। 'जिन्दगी नामा' उपन्यास के प्रमुख पात्र-शाहनी, शाह जी, महरी चाची, राबिया, करम बीबी, सरफराज, जोरावर आदि हैं।

उपन्यास-रचनाकार
तमस-भीष्म साहनी
झूठा-सच-यशपाल
शेखर एक जीवनी-अज्ञेय

26. 'लाल पान की बेगम' कहानी में बिरजू की माँ किसे 'टीशनवाली' कहकर संबोधित करती है?

Correct Answer: (b) जंगी की पतोहू
Solution:'लाल पान की बेगम' कहानी में बिरजू की माँ 'जंगी की पतोहू' को 'टीशन वाली' कहकर सम्बोधित करती है। कथन इस प्रकार है-

'अरी टीशन वाली,तो रोती है काहे!' बिरजू की माँ ने पुचकार कर कहा, आ जा झट से कपडा पहन कर। सारी गाड़ी पड़ी हुई है! बेचारी ! ..... आ जा जल्दी !” 'लाल पान की बेगम' कहानी के प्रमुख पात्र बिरजू की माँ, चंपिया, सुनरी, मखनीफुआ, जंगी की पतोहू, राधे की बेटी ।

ठुमरी, अगिनखोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप, सभी कहानी संग्रह है 'रेणु' जी की। 'रेणु' की कहानियाँ है- रसप्रिया, ठेस, तीसरी कसम उर्फ मारे गये गुलफाम, एक आदिम रात्रि की महक, पंचलाईट, पहलवान की ढोलक, संवदिया, अक्ल और भैंस, तीन बिन्दिया इत्यादि ।

27. 'चन्द्रदेव से मेरी बातें' शीर्षक कहानी सर्वप्रथम किस वर्ष प्रकाशित हुई थी?

Correct Answer: (a) सन् 1904
Solution:

'चन्द्रदेव से मेरी बातें' शीर्षक कहानी सर्वप्रथम सन् 1904 में प्रकाशित हुई थी। 'चंद्रदेव से मेरी बातें 'कहानी राजेन्द्रबाला घोष (बंग महिला) की है। इनकी कहानियाँ है चन्द्रदेव से मेरी बातें (1904), कुंभ में छोटी बहू (1906), दुलाईवाली (1907) दालिया (1909) इत्यादि 'सरस्वती' पत्रिका में प्रकाशित । यह पत्रात्मक शैली में लिखी पहली कहानी है, जिस पर 'शिवशम्भू के चिट्ठे' निबन्ध का प्रभाव देखा जा सकता है। इस कहानी में 'लार्ड कर्जन' पर व्यग्य किया गया है। कहानी में दो मुख्य पात्र है- भगवान चन्द्रदेव और स्वयं लेखिका (बंग महिला)।

28. "आज तक कभी ऐसा न हुआ, न कभी सुना। गजब हो गया, अन्धेर पड़ गया।" 'सिक्का बदल गया' कहानी में उपर्युक्त कथन किसने किसे कहा ?

Correct Answer: (a) नवाब बीबी ने शाहनी से
Solution:"आज तक कभी ..........पड़ गया।" 'सिक्का बदल गया' कहानी में उपर्युक्त कथन नवाब बीबी ने शाहनी से कहा। यह कहानी कृष्णा सोबती की है इसमें देश-विभाजन की पृष्ठभूमि में नाते-रिश्तों के यकायक बदल जाने और झूठ में पड़ जाने की पीड़ा का संवेदनशील साक्ष्य है। इसमें प्रमुख पात्र बेगू पटवारी, इस्माइल मसीत के मुल्ला, जैलदार, रसूली, नवाब बीबी इत्यादि। इनकी रचनाएँ है- डार से बिछुड़ी, मित्रों मरजानी, सूरजमुखी अँधेरे के, यारों के यार, तिनपहाड़, दिलो- दानिश, जिंदा रूख, जिन्दगीनामा, ऐ लड़की उपन्यास है। कहानी 'बादलों के घेरे' तथा संस्मरण 'हम हशमत' है।

29. "पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी में पाप।" उपर्युक्त संवाद 'स्कन्दगुप्त' नाटक में किस पात्र के द्वारा कहा गया?

Correct Answer: (b) देवसेना
Solution:

"पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी में पाप।" उपर्युक्त संवाद 'स्कंदगुप्त' नाटक में देवसेना का है। इसके प्रमुख पात्रों में स्कन्दगुप्त, कुमार गुप्त, गोविन्दगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, बन्धुवर्मा, भीमवर्मा मातृगुप्त, प्रपञ्चबुद्धि, शर्वनाग, कुमारदास, धातुसेन, पुरगुप्त, भटार्क, पृथ्वीसेन, प्रख्यातकीर्ति, देवकी, अनन्तदेवी देवसेना, विजया, कमला, रामा आदि। स्कन्दगुप्त का कथन है- "अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन होता है।" जयशंकर प्रसाद का नाटक है- सज्जन (1910), कल्याणी परिणय (1912), करुणालय (1912) प्रायश्चित (1913), राज्यश्री (1915), विशाख (1921), अजातशत्रु (1922), जनमेजय का नागयज्ञ (1926) कामना (1927), स्कन्दगुप्त (1928), एक घूँट (1930) चन्द्रगुप्त (1931), ध्रुवस्वामिनी (1933)।

30. "मानव कब दानव से भी दुर्दान्त, पशु से भी बर्बर और पत्थर से भी कठोर, करुणा के लिए निरवकाश हृदय वाला हो जाएगा, नहीं जाना जा सकता। अतीत सुखों के लिए सोच क्यों, अनागत भविष्य के लिए भय क्यों और वर्तमान को मैं अपने अनुकूल बना ही लूंगा; फिर चिन्ता किस बात की?"

उपर्युक्त संवाद 'चंद्रगुप्त' नाटक में किसके द्वारा कहा  गया है?

Correct Answer: (d) सिंहरण
Solution:"मानव कब दानव से भी दुर्दान्त, पशु से भी बर्बर और पत्थर से भी कठोर, करुणा के लिए निरवकाश हृदय वाला हो जाएगा, नहीं जाना जा सकता है अतीत सुखों के लिए सोच क्यों, अनागत भविष्य के लिए भय क्यों और वर्तमान को मैं अपने अनुकूल बना ही लूंगा; फिर चिन्ता किस बात की?" उपर्युक्त संवाद 'चन्द्रगुप्त' नाटक में 'सिंहरण' का है। चंद्रगुप्त नाटक जयशंकर प्रसाद का है। इसके अन्य प्रमुख कथन है-
(1) "मुझे इस देश से जन्म भूमि के समान स्नेह होता जा रहा है।"
(2) “यदि प्रेम ही जीवन का सत्य है तो, संसार ज्वालामुखी है।"
(3) "महत्त्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है।"
(4) "अरुण यह मधुमय देश हमारा ! जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।"
(5) “हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुध्द शुद्ध भारती स्वयं प्रभा समुज्वला स्वतन्त्रता पुकारती ।।"