Solution:"पवित्रता की माप है मलिनता, सुख का आलोचक है दुःख, पुण्य की कसौटी में पाप।" उपर्युक्त संवाद 'स्कंदगुप्त' नाटक में देवसेना का है। इसके प्रमुख पात्रों में स्कन्दगुप्त, कुमार गुप्त, गोविन्दगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, बन्धुवर्मा, भीमवर्मा मातृगुप्त, प्रपञ्चबुद्धि, शर्वनाग, कुमारदास, धातुसेन, पुरगुप्त, भटार्क, पृथ्वीसेन, प्रख्यातकीर्ति, देवकी, अनन्तदेवी देवसेना, विजया, कमला, रामा आदि। स्कन्दगुप्त का कथन है- "अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन होता है।" जयशंकर प्रसाद का नाटक है- सज्जन (1910), कल्याणी परिणय (1912), करुणालय (1912) प्रायश्चित (1913), राज्यश्री (1915), विशाख (1921), अजातशत्रु (1922), जनमेजय का नागयज्ञ (1926) कामना (1927), स्कन्दगुप्त (1928), एक घूँट (1930) चन्द्रगुप्त (1931), ध्रुवस्वामिनी (1933)।