NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-I

Total Questions: 100

31. ......कि श्रीपत् बेहद् गँवार आदमी है। खाने की मेज पर बैठ कर पसीना सुखाता है। मैं कहता हूँ दीदी, मैं इतनी मुद्दत के बाद यहाँ आया हूँ, तुम्हारा छोटा भाई हूँ तुम लोगों से मिलने की हसरत दिल में लिये हुए न जाने कब से इस महान भारत के नगर-नगर भटक रहा हूँ। और तुम्हें मेरा पल भर को भी यहां बैठना नहीं सुहाता।"

उपर्युक्त संवाद 'अंजो दीदी' नाटक में किसके द्वारा कहा गया है?

Correct Answer: (a) श्रीपत
Solution:"........ कि श्रीपत बेहद ......... .....नहीं सुहाता" उपर्युक्त संवाद 'अंजो दादी' नाटक में श्रीपत के द्वारा कहा गया। यह उपेन्द्रनाथ 'अश्क' का चर्चित नाटक है। 'अंजोदीदी' नाटक नायिका प्रधान नाटक है। इस नाटक में पारिवारिक और मनोवैज्ञानिक कथावस्तु है तथा नारी की कठोर पारिवारिक नियंत्रण से परिवार विघटन की समस्या को उजागर किया गया है।
प्रमुख पांत्रों में अंजली अंजो दीदी (प्रमुख पात्र उम्र लगभग 30 वर्ष)
श्रीपत : अजों दीदी का भाई उम्र 27-28 है।
इन्द्रनारायण : अंजो दीदी का पति, वकील उम्र 38-40 वर्ष
अनिमा: अंजो दीदी की सहेली
नीरज: अंजो का पुत्र 11 वर्ष
मुन्नी: नौकरानी
राधू: नौकर
उपेन्द्रनाथ 'अश्क' के नाटक है जय पराजय, स्वर्ग की झलक, छठा बेटा, अलग-अलग रास्ते, कैद, उड़ान, पैंतरे, अंजो दीदी, अंधी गली, बड़े खिलाडी, भँवर आदि।

32. "जिसकी आत्मा कमज़ोर हो, जिसे लालच, स्वार्थ ने घेर रखा हो वह इस बकरी से क्या पाएगा?" भगवान के पास खाली हाथ न जाने का मतलब यही है। जो फूल लेकर जाता है वह स्वर्ग लेकर लौटता है। इसीलिए श्रद्धा देना जानती है। आप इस बकरी को जितना दे उतना कम है।" उपर्युक्त संवाद 'बकरी' नाटक में किसके द्वारा कहा गया है?

Correct Answer: (b) सत्यवीर
Solution:"जिसकी आत्मा ......... उतना कम है।" उपर्युक्त संवाद 'बकरी' नाटक में 'सत्यवीर' द्वारा कहा गया है। सर्वेश्वर दयाल 'सक्सेना' का लिखा पहला नाटक है। 'सक्सेना' जी के प्रमुख नाटक है- बकरी (1974), लड़ाई (1979), अब गरीबी हटाओं (1981), कल भात आएगा। बकरी नाटक के सम्बन्ध में 'सर्वेश्वर' का कथन" यह नाटक हमारी स्वाधीनता की तलछट का चित्र है तलछट जो समय बीतने के साथ गहरी होती गई है।

" इस नाटक की रचना उत्तर प्रदेश की नौटकी शैली में हुई है। इसमें दोहा, चौबोला, बहरेतबील, कहरवा आदि छंदो का प्रयोग किया गया है। नाटक के पात्र- नट, नटी, भिश्ती, दुर्जनसिंह, कर्मवीर, सत्यवीर, विपती इत्यादि ।

33. "हम दोनों एक ही नाव के यात्री थे" यह कथन किसने किसके बारे में कहा है।

Correct Answer: (c) शिवरानी देवी ने प्रेमचन्द्र के बारे में
Solution:"हम दोनों 'एक ही नाव के यात्री' थे
यह कथन शिवरानी देवी ने प्रेमचन्द के बारे में कहा है। पत्नी द्वारा लिखी गई प्रेमचन्द की जीवनी 'प्रेमचन्द घर में का पहली बार प्रकाशन सन् 1944 में हुआ था। 'प्रेमचन्द' के बारे में तमाम लोगों ने कलम चलाई है, खुद उनके पुत्र अमृतराय ने 'कलम का सिपाही' नाम से मुंशी प्रेमचन्द की जीवनी लिखी है। शिवरानी देवी प्रेमचन्द के साथ रहती हुई उनके जीवन की तमाम छोटी बड़ी घटनाओं की साक्षी रही हैं।

शिवरानी ने क्यों लिखी होगी प्रेमचन्द की जीवनी उन्होने साफ शब्दों में कहा, " इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य उस महान आत्मा की कीर्ति फैलाना नहीं हैं। जैसा की अधिकांश जीवनियों में होता है।" वह यह कहती हैं कि यह पुस्तक साहित्यिक आलोचकों को भी प्रेमचन्द साहित्य समझने में मदद पहुंचायेगी।

34. मैं अब परिधियां लांघ सकती थी, सीमाएँ तोड़ सकती थी। दरअसल सीमा में रहना मुझे सदैव कचोटता है, इसलिए सीमा को तोड़ने मात्र का आभास ही मुझे अत्यधिक सुखकारी लगता है।" उपर्युक्त कथन किस पुस्तक में हैं?

Correct Answer: (b) आपहुदरी
Solution:"मैं अब ....लगता है।” उपर्युक्त कथन 'आपहुदरी' पुस्तक में है। 'आपहुदरी' 'रमणिका गुप्ता' की आत्मकथा है। यह एक जिद्दी लड़की की आत्मकथा है। 'आपहुदरी' पंजाबी भाषा का शब्द है। इस पुस्तक में पंजाब की एक 'कुड़ीमार' नामक कुप्रथा का वर्णन किया है।

'आपहुदरी' रमणिका गुप्ता के जीवन की वास्तविकता को परत दर परत खोलती बोल्ड एवं निर्भीक आत्मस्वीकृति की साहसिक गाथा है, जिसमें लेखिका के बचपन से लेकर धनबाद तक की यात्रा की यात्रा काल, साहित्य, समाज सेवा और राजनीतिक संघर्षों को चिन्हित रचनाकार की अद्वितीय दुनिया थी।

'आपहुदरी' में स्त्री बोल्ड लेखन का फलक बहुत व्यापक है। इस आत्मकथा का एक प्रमुख आयाम 'स्त्री-मुक्ति' से भी संबंधित है।

35. 'चम्पा' पात्र का निम्नलिखित में से किसके जीवनकाल में महत्वपूर्ण स्थान रहा?

Correct Answer: (b) हरिवंशराय बच्चन
Solution:'चम्पा' पात्र का 'हरिवंशराय बच्चन' के जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा। हरिवंशराय बच्चन ने चार आत्मकथाएं लिखी जिसमें 'क्या भूलू क्या याद कंरू', 'नीड़ का निर्माण फिर', 'बसेरे से दूर' और 'दस द्वारा से सोपान तक' । क्या भूलूं क्या करूं इसमें उन्होने अपनी पहली बीबी श्यामा के बारे में लिखा और इस किताब को श्यामा की मौत पर खत्म किया है।

श्यामा से शादी से पहले हरिवंश राय बच्चन का एक अफेयर हुआ अपने दोस्त कर्कल की बीबी 'चंपा' से और ये कर्कल की मर्जी से था। हालांकि 'बच्चन जी' इसे राधा श्यामा के प्रेम की तरह परिभाषित करते है। कर्कल की असामयिक मौत से पहले कर्कल ने उनसे उसका ध्यान रखने का भी वायदा लिया था।

36. अध्यापिका 'शीला अग्रवाल' ने किसके जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?

Correct Answer: (c) मन्नूभंडारी
Solution:मनू भण्डारी के व्यक्तित्व पर दो लोगो का प्रभाव विशेष रूप से देखा जा सकता है। प्रथम उनके पिता तथा द्वितीय उनकी हिन्दी अध्यापिका शीला अग्रवाल। मन् भण्डारी के पिता का व्यवहार उनके जीवन को अत्यधिक प्रभावित किया। उनके पिता उनकी बड़ी उपेक्षा करते थे। इससे इनके मन में आत्मविश्वास की कमी हो गई। भविष्य में अपनी सफलता पर लेखिका को कभी भरोसा नहीं हुआ। पिता द्वारा लोगों पर शक करने की आदत भी उनके व्यक्तित्व में स्वतः ही आ गई। दसवीं कक्षा में उनकी पहचान हिन्दी की प्रध्यापिका शीला अग्रवाल से हुई। उनके साथ हुई चर्चाओं ने लेखिका के साहित्य के ज्ञान को बढ़ाया तथा बचपन के खोए आत्मविश्वास की भावना फिर जागृत हुई। उनका मन स्वतन्त्रता संग्राम की ओर उन्मुख हुआ तथा वे लेखन की ओर कदम बढ़ाया। उनके व्यक्तित्व में वीरता और आत्मविश्वास के गुणों का समावेश भी शीला अग्रवाल के कारण हुआ।

37. "किसी देश में सभी पेट भरे हुए नहीं होते, किन्तु वे लोग जहाँ खेत जोतते-बोते हैं वही उसके साथ यह भी सोचते हैं कि ऐसी कौन नई कल व मसाला बनावें जिससे इस खेत में आगे से दून अनाज उपजै।" उपर्युक्त पंक्ति किस निबंध से उद्धृत है?

Correct Answer: (e) (*)
Solution:किसी देश ....... अनाज उपजे।" उपर्युक्त पंक्ति 'भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' निबंध से उद्‌धृत है। इस निबंध के लेखक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र है। इस निबंध को भारतेन्दु ने 1884 ई.में बलिया के ददरी मेले में भाषण देने के लिए लिखा था।
निबन्धनिबन्धकार
दिल्ली दरबार दर्पणभारतेन्दु
शिवशंभु के चिट्ठेबालमुकुन्द गुप्त
उठ जाग मुसाफिरविवेकी राय

नोट- विकल्प में भारतेन्दु कृत 'भारतवर्षोत्रति कैसे हो सकती है' निबन्ध नहीं गया है। जिसके कारण आयोग ने इस प्रश्न को मूल्याकंन से बाहर कर दिया गया है।

38. "रचनाएँ स्वयं पाठकों से संवाद कर बहुत बताएँगी; और यह भी बताएँगी कि लेखक का ध्यान रचनाओं में दो ही बिन्दुओं पर रहा है, एक तो विचार चिंतन और दूसरा लालित्य, जो कह सके, ललित निबंध ठहरी हुई विधा नहीं है।" उपर्युक्त कथन किस निबंधकार का है?

Correct Answer: (c) विवेकी राय
Solution:"रचनाएँ स्वयं पाठकों ...... विधा नहीं है। उपर्युक्त कथन विवेकीराय का है। यह कथन 'उठ जाग मुसाफिर' से उद्धृत है। विवेकीराय ललित निबन्धकार है। इनके प्रमुख निबंध है-
(1) मनबोध मास्टर की डायरी
(2) गंवई गंध गुलाब 1980 ई.
(3) फिर बैतलवा डाल पर - 1962 ई.
(4) आस्था और चिन्तन - 1991 ई.
(5) किसानों का देश -1956 ई.
(6) उठ जाग मुसाफिर 2012 ई.

हजारी द्विवेदी ललित निबन्धकार है। इनके प्रमुख निबन्ध संग्रह है- (1) अशोक के फूल (2) कल्पलता (3) मध्यकालीन धर्म साधना (4) विचार वितर्क (5) कुटज (6) आलोक पर्व। इनके अन्य निबन्ध है- कल्पतरु, साहित्य सहचर, नाखून क्यों बढ़ते है, देवदारु, बंसत आ गया, वर्षा घनपति से घनश्यामा तक, मेरी जन्मभूमि, परम्परा और आधुनिकता विद्यानिवास मिश्र के निबन्ध है- गांधी का करूण रस, चिड़िया रैन बसेरा, छितवन की छाँह, हल्दी धूप, कदम की फूली डाल, आँगन का पंछी और बंजारा मन, मैने सिल पहुँचाई, फागुन दुइ रे दिन, बसन्त आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं, साहित्य के सरोकार ।

कुबेरनाथ राय के निबन्ध है- प्रिया नीलकंठी, रस आखेटक, गंधमादन, निषाद बांसुरी, विषादयोग, पर्णमुकुट, महाकवि की तर्जनी, पत्र मणिपुतुल के नाम, मन पवन की नौका, किरात नदी में चन्द्रमधु, दृष्टि अभिसार, मराल, आगम की नाव, उत्तर कुरू।

39. निम्नलिखित में से कौन विद्यानिवास मिश्र कृत निबंध नहीं है?

Correct Answer: (c) छोटे-छोटे सुख
Solution:'छोटे-छोटे सुख' विद्यानिवास मिश्र कृत 'निबन्ध' नही है। 'छोटे छोटे सुख' निबन्ध राम दरश मिश्र जी का है। कितने बजे, बबूल और कैक्टस रामदरश मिश्र जी का निबन्ध संग्रह है। साहित्य के सरोकर, कविता का देश, व्यक्तिव्यंजक गद्य निबन्ध विद्यानिवास मिश्र जी का है।

40. मानव शरीर का अध्ययन करने वाले प्राणी-विज्ञानिकों का निश्चित मत है कि मानव चित्र की भांति मानवशरीर में भी बहुत सी अभ्यासजन्य सहज वृत्तियां रह गई है।" उपर्युक्त पंक्तियाँ निम्न में से किस निबंध से उधृत है?

Correct Answer: (b) नाखून क्यों बढ़ते हैं
Solution:"मानव शरीर का अध्ययन करने वाले प्राणी विज्ञानिकों का निश्चित मत है कि मानव चित्र की भाँति मानव शरीर में भी बहुत सी अभ्यास जन्य सहज वृत्तियाँ रह गई है।" उपर्युक्त पंक्तियाँ 'नाखून क्यों बढ़ते है' निबन्ध से उद्धृत है। यह निबन्ध हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित है। इनके अन्य निबन्ध इस प्रकार है:- कल्पतरु, साहित्य सहचर, अशोक के फूल, देवदारु, बंसत आ गया, वर्षा घनपति से घनश्याम तक, मेरी जन्म भूमि, घर जोड़ने की माया। इनके अन्य निबन्ध संग्रह इस प्रकार है:-
अशोक के फूल (1948)
कल्पलता (1951)
मध्यकालीन धर्मसाधना (1952)
विचार और वितर्क (1957)
विचारप्रवाह (1959)
कुटज (1964)
आलोक पर्व (1972)

शेष दिये गए अन्य निबन्ध और उनके निबन्धकार निम्नवत् हैः-

निबन्धनिबन्धकार
शिवशंभु के चिट्ठे– बालमुकुन्द गुप्त
मजदूरी और प्रेम– सरदार पूर्ण सिंह
उठ जाग मुसाफिर– विवेकी राय