Solution:'प्रिय प्रवास' हरिऔध का महाकाव्य है। निम्न छन्दों में रची गयी है जो इस प्रकार है:-- द्रुतविलम्बित
- शार्दुलविक्रीड़ित
- मन्दाक्रांता
द्रुतविलम्बितः- इस वर्णिक समवृत्त छंद के प्रत्येक चरण में नगण भगण, भगण, रगण के क्रम कुल 12 वर्ण होते है।
शार्दूलविक्रीडितः - इस छन्द में चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 19 वर्ण होते हैं। 12 वर्णों के बाद तथा चरणान्त में यति होती है। गणों का क्रम इस प्रकार है मगण, सगण, सगण, तगण तगण गुरु।
मंदक्रान्ताः - इस वर्णिक समवृत्त छंद के प्रत्येक चरण में भगण, भगण, नगण, तगण और दो गुरु के क्रम से 17 वर्ण होते है तथा 10-7 वर्णों पर यति होती है।
• 'प्रियप्रवास (1914 ई.)' को हिन्दी का पहला महाकाव्य माना गया है। यह संस्कृतनिष्ट हिन्दी (तत्सम प्रधान) में लिखित है।