Solution:प्रतापनाराण मिश्र को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने 'हिंदी का एडीसन' कहा है। निबंध के क्षेत्र में उन्हें आत्मव्यंजक निबंधों का जन्मदाता माना जाता है। उनके निबंधों में संस्कृत और उर्दू के शब्दों के साथ बैसवाड़े की ग्रामीण कहावतों और शब्दों का भी प्रयोग मिलता है। प्रतापनारायण मिश्र के प्रमुख निबंध हैं- धोखा, दाँत, बालक, वृद्ध, आप, बात, खुशामद, भौ, नारी, मनोयोग, मुच्छ, परीक्षा, समझदार की मौत, घूरे का लत्ता बिनै, कनातन के दौल बाँधे इत्यादि ।