NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-I

Total Questions: 100

81. अंधेर नगरी नाटक में पहले से बाद में आए संवादों का क्रम निर्धारित कीजिए:

A. चना चुरमुर चुरमुर बोलै, बाबू खाने को मुँह खोलै ।।
B. लोभ पाप को मूल है, लोभ मिटावत मान ।
C. चूरन जब से हिन्द में आया। इसका धन बल सभी घटाया।।
D. चूरन साहेब लोग जो खाता। सारा हिन्द हजम कर जाता।।
E. चना खाते मियाँ जुलाहे। दाढ़ी हिलती गाहे बगाहे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (d) B, A, E, C, D
Solution:अंधेर नगरी नाटक में पहले से बाद में आये संवादो का सही क्रम निम्न है-
1. लोभ पाप को मूल है, लोभ मिटावत मान
2. चना चुरमुर-चुरमुर बोलें, बाबू खाने को मुँह खोलै ।।
3. चना खाते मियाँ जुलाहे। दाढ़ी हिलती गाहे बगाहे ।।
4. चूरन जब से हिन्द में आया। इसका धन-बल सभी घटाया।।
5. चूरन साहेब लोग जो खाता। सारा हिन्द हजम कर जाता।।

82. नीचे दो कथन दिए गए है: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथनः A: भौगोलिक परिवेश का भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण योगदान रहता है।
कारण R : भाषा मूलतः सामाजिक उत्पाद है, सामाजिक परिवेश किसी भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया को गति प्रदान करने वाला सबसे सबल कारण है।
उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A और R दोनों सही है और R, A की सही व्याख्या है।
Solution:अभिकथन A- भौगोलिक परिवेश का भाषा के मानकी करण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कारण
(R) भाषा मूलतः सामाजिक उत्पाद है, सामाजिक परिवेश किसी भाषा के मानकीकरण की प्रक्रिया को गति प्रदान करने वाला सबसे सबल कारण है- अतः Aऔर R दोनों सहीं हैं और R, A की सही व्याख्या है।

83. नीचे दो कथन दिए गए है:

कथनः I 'बघेली' बोली के अन्य दो नाम 'लरिया' और 'खल्टाही' भी है।
कथनः II डॉ. उदय नारायण तिवारी के अनुसार अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी में बहुत कम अंतर है। उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (d) कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य हैं।
Solution:कथन-1 बघेली बोली के अन्य दो नाम लरिया और खल्टाही भी है यह गलत है।
कथन-II उदयनारायण तिवारी के अनुसार अवधी, बघेली. छत्तीसगढ़ी में बहुत कम अन्तर है। उपर्युक्त कथन के आलोक में कथन-I असत्य है लेकिन कथन-II सत्य है। क्योंकि कथन I लरिया और खल्टाही छत्तीसगढ़ी बोली की उपबोली हैं। बघेली बोली के अन्य दो नाम 'रिमही' और 'रिवई' है।

84. नीचे दो कथन दिए गए है: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथनः A गांधीजी के सभी धार्मिक विचार उनके निजी अनुभवों से निकले थे, इसलिए उनकी भाषा में वही वैधता और सच्चाई मिलती है जो उपनिषदों में दिखाई देती है, जो बुद्ध और ईसा तथा परमहंस रामकृष्ण के उद्‌गारों में भरी हुई है।
कारणः R गांधी जी ने धार्मिक सत्यों को खोजा नहीं, अपने जीवन में उनकी अनुभूति की थी।
उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) A और R दोनों सत्य है और R, A की सही व्याख्या है।
Solution:

अभिकथन (A) गांधी जी के सभी धार्मिक विचार उनके निजी अनुभवों से निकले थे, इसलिए उनके भाषा में वही वैधता और सच्चाई मिलती है जो उपनिषदों में दिखाई देती है, जो बुद्ध और ईसा तथा परमहंस रामकृष्ण के उद्‌गारों से भरी हुई है। कारण (R) गांधी जी ने धार्मिक सत्यों को खोजा नहीं, अपने जीवन में उनकी अनुभूति की थी। उपर्युक्त कथन के आलोक में A और R दोनों सत्य हैं और R. A की सही व्याख्या है।

85. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथनः A: आपका बंटी उपन्यास में विवाह की असफलता और तलाक की ट्रेजडी के त्रास को बेगुनाह बंटी ही सबसे अधिक भोगता है।
कारणः R बंटी पिता के होते हुए भी बिना पिता का और मां के रहते बिना माँ का हो गया। अंततः उसे मिला भटकाव, असमंजस और अकेलापन ।
उपयुक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) A और R दोनों सत्य है और R, Aकी सही व्याख्या है।
Solution:अभिकथन (A) आपका बंटी उपन्यास में विवाह की असफलता और तलाक की ट्रेजडी के त्रास को बेगुनाह बंटी ही सबसे अधिक भोगता है। कारण (R) बंटी पिता के होते हुए भी बिना पिता का और माँ के रहते बिना माँ का हो गया। अंततः उसे मिला भटकाव, असमंजस और अकेलापन। उपर्युक्त कथन के आलोक में A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है।
• आपका बंटी (1971 ई.) तथा महाभोज (1979 ई.) मन्नू भण्डारी का उपन्यास है।

86. नीचे दो कथन दिए गए हैं-

कथनः । सिंदूर की होली नाटक में कुल दो अंक है। नज़ीर, माहिर अली, चंद्रकला और कृष्णलाल इसके प्रमुख पात्र हैं।
कथनः II 'सिंदूर की होली' नाटक की कथा प्रातःकाल 9 बजे शुरू होती है तथा कथा की अंतिम घटना लगभग 10 बजे रात्रि में बीत जाती है।
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (d) कथन 1 असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।
Solution:कथन (I) सिंदूर की होली' नाटक में कुल दो अंक हैं। नजीर, महिर अली, चन्द्रकला और कृष्णलाल इसके प्रमुख पात्र हैं। कथन (II) 'सिंदूर की होली' नाटक की कथा प्रातः काल 9 बजे शुरु होती है तथा कथा की अंतिम घटना लगभग 10 बजे रात्रि में बीत जाती है। उपर्युक्त कथन के आलोक में कथन (I) असत्य है, लेकिन कथन (II) सत्य है।

'सिंदूर की होली'(1934 ई.) नाटक लक्ष्मी नारायण मिश्र का है। इस नाटक में तीन अंक है। इसके प्रमुख पात्र रजनीकांत, मनोजशंकर, माहिर अली, मुरारीलाल, भगवंत सिंह, हरनंदन सिंह डॉक्टर, चन्द्रकला, मनोरमा। इस नाटक में तीन दृश्य है। पहला दृश्य 9 बजे, दूसरा दृश्य संध्याकाल और तीसरा दृश्य रात्रि 10 बजे का है।

लक्ष्मीनारायण मिश्र के प्रमुख नाटक- अशोक (1926 ई.), राजयोग (1933 ई.), आधी रात (1936 ई.) आदि।

87. नीचे दो कथन दिए गए है: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथनः A: एक और द्रोणाचार्य नाटक के माध्यम से समकालीन शिक्षा जगत की यथार्थ विसंगतियों एवं विद्रूपताओं को उजागर किया गया है।
कारणः R एक और द्रोणाचार्य नाटक वर्तमान शिक्षा-व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, पक्षपात, शिक्षक समुदाय के पंगु, असहाय, बेबस और अपाहिज चरित्र को पौराणिक कथा के माध्यम से प्रस्तुत करता है।
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A और R दोनों सत्य है और R, A की सही व्याख्या है।
Solution:अभिकथन (A) एक और द्रोणाचार्य नाटक के माध्यम से समकालीन शिक्षा जगत की यथार्थ विसंगतियों एवं विद्रूपताओं को उजागर किया गया है। एक और द्रोणाचार्य के सम्बन्ध में कथन सत्य है।

कारण (R) एक और द्रोणाचार्य नाटक वर्तमान शिक्षाव्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, पक्षपात, शिक्षक समुदाय के पंगु, असहाय, बेबस और अपाहिज चरित्र को पौराणिक कथा के माध्यम से प्रस्तुत करता है। कारण (R) भी सत्य है और R, A की सही व्याख्या है। 'एक और द्रोणाचार्य नाटक शंकर शेष का है। नाटक को दो भागों में बांटा गया है- पूर्वार्ध और उत्तरार्ध। पूर्वार्ध में चार दृश्य हैं। उत्तरार्द्ध में सात दृश्य है।
पौराणिक पात्र - द्रोणाचार्य, एकलव्य, कृपी (द्रोणाचार्य की पत्नी), अश्वत्थामा (द्रोणाचार्य का पुत्र), भीष्म, अर्जुन, युधिष्ठिर, सैनिक ।
आधुनिक पात्र - अरविंद, लीला, यदू, प्रिंसपल, चंदू, विमलेंदु, अनुराधा।
एक और द्रोणाचार्य नाटक' में महाभारत कालीन गुरु द्रोणाचार्य के जीवन के प्रसंगो की संवेदनशील झाँकिया प्रस्तुत की गई है। पौराणिक प्रसंगो के आधार पर प्रोफेसर अरविंद के जीवन की त्रासदी को अभिव्यक्त किया गया है।
'महाभारत' कालीन प्रसिद्ध पात्र द्रोणाचार्य के जीवन प्रसंगो को आधार बनाकर वर्तमान विसंगति को दिखाया गया है। शंकर शेष के अन्य प्रमुख नाटक हैं मूर्तिकार, रत्नगर्भा, बेटों वाल बाय, तिल का ताड़, बिन बाती के दीप, बंधन अपने-अपने, खजुराहों का शिल्पी, फंदी, कालजयी, घरौंदा, अरे मायावी सरोवर, रक्तबीज, राक्षस, पोस्टर, चेहरे, त्रिकोण का चौथा कोण, कोमल गांधार, आधी रात के बाद इत्यादि ।

88. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथनः A: 'शिवशंभु के चिट्ठे' तथा 'दुबे जी का चिट्ठा' की परंपरा में विद्यानिवास मिश्र ने 'भ्रमरानंद' उपनाम से 'सरस्वती' संपादक श्रीनारायण चतुर्वेदी को चिट्ठियाँ लिखी है।
कारणः R ललित निबंध की विविध शैलियाँ विद्यानिवास मिश्र के हाथों में जीवंत हुई हैं। उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, Aकी सही व्याख्या नहीं है।
Solution:कथनः (A) शिव शंभु के चिडे' तथा 'दुबे जी का चिट्ठा' की परम्परा में विद्यानिवास मिश्र ने 'भ्रमरानंद' उपनाम से 'सरस्वती' संपादक श्रीनारायण चतुर्वेदी को चिट्ठियाँ लिखी है। कथन सत्य है। कारण (R)ललित निबन्ध की विविध शैलियाँ विद्यानिवास मिश्र के हाथों में जीवन्त हुई हैं। कथन (R) सत्य है लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

शिवशंभू के चिट्टे निबन्ध-बालमुकुन्द गुप्त जी का है। इसमें अंग्रेजों की नीति को दर्शाया गया है। ये चिट्ठे उस समय की राजनीतिक गुलामी और लार्ड कर्जन की निर्मम क्रूरताओं को जितने सटीक रूप में प्रस्तुत करती हैं, उतनी पूर्णता के साथ उस समय का कोई दूसरा अभिलेख नहीं करता।

'दूबे जी का चिट्ठा' व्यंग्य विश्वम्भर नाथ शर्मा 'कौशिक' का है। विद्यानिवास मिश्र 'भ्रमरानन्द' उपनाम से 'सरस्वती' के संपादक श्रीनारायण चतुर्वेदी को पत्र लिखते थे।

जिनमें चीनी आक्रमण, अंग्रेजी भाषा के प्रमुख एवं सामयिक समस्याओं पर चर्चा किया करते थे। ललित निबंध में सरसता, रोचकता, सारगर्भिता, संक्षिप्तता और संगति विशेषताएं है। इसमें कल्पना, विचार वर्णन, रागात्मकता और व्यंग्य तथा हास्य जैसे गुण विद्यमान होते हैं। यह सब विशेषताएं विद्यानिवास के निबन्धों में मिलती हैं। इसीलिए कहा जाता है कि ललित निबंध की विविध शैलियाँ विद्यानिवास मिश्र के हाथों में जीवंत हुई हैं।

89. नीचे दो कथन दिए गए है: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथनः A: यात्राएं यहाँ पर जितनी बाहर की जाती हैं, उतनी ही अंदर की ओर भी।
कारणः R: यात्रा संस्मरण 'टूरिस्ट गाइड' का स्थान लेने के लिए नहीं लिखे और पढ़े जाते। ऐसी पुस्तकों में प्रस्तुत ब्यौरा एक व्यक्ति की यात्रा का ब्यौरा होता है, और वह यात्रा जितनी बाहरी होती है उतनी ही भीतर भी।
उपर्युक्त कथन के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
Solution:

कथन (A) यात्राएं यहाँ पर जितनी बाहर की जाती हैं उतनी ही अंदर की ओर भी। कथन सत्य है तथा कारण (R) यात्रा संस्मरण 'टूरिस्ट गाइड' का स्थान लेने के लिए नहीं लिखे और पढ़े जाते। ऐसी पुस्तकों में प्रस्तुत ब्यौरा एक व्यक्ति की यात्रा ब्यौरा होता है और वह यात्रा जितनी बाहरी होती है उतनी ही भीतरी भी। कथन (R) भी सत्य है तथा R,A की सही व्याख्या है।

मनुष्य अनादि काल से यात्राएँ करता आ रहा है। निश्चय ही वह इन यात्रा-वृत्तान्तों को अपने सम्पर्क में आने वाले जिज्ञासुओं को सुनाता भी रहा होगा; किन्तु भारतीय साहित्य में इन वृत्तान्तों को लिपिबद्ध करने की परम्परा लक्षित नहीं होती थी। हिन्दी साहित्य में यात्रा- वृत्तान्त लिखने की परम्परा का सूत्रपात्र भारतेन्दु से माना जाता है। भारतेन्दु ने सरयूपार की यात्रा, 'मेंहदावल की यात्रा' 'लखनऊ' की यात्रा' आदि यात्रा वृत्तान्तों की रचना की।

90. निम्नलिखित निबंधों को कालक्रमानुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

A. गवई गंध गुलाब
B. आम रास्ता नहीं है
C. जीवन अज्ञात का गणित है
D. उठ जाग मुसाफिर
E. चली फगुनहट बौरे आम
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (e) (*)
Solution:कालक्रमानुसार आरोही क्रम -
निबन्धप्रकाशन वर्ष
चली फगुनहट बौरे आम1975 ई.
गँवई गंध गुलाब1980 ई.
आम रास्ता नहीं है1988 ई.
जीवन अज्ञात का गणित है2004 ई.
उठ-जाग मुसफिर2012 ई.

उपयुक्त निबंध विवेकी राय के हैं। विवेकी राय स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद उत्तर भारत के बदलते हुए गाँवो की संक्रान्ति चेतना के समर्पित शिल्पी हैं। विवेक राय के प्रमुख निबंध है-
1. किसानों का देश (1956 ई.)
2. गाँवो की दुनिया (1957 ई.)
3. त्रिधारा (1958 ई.)
4. फिर बैतलवा डाल पर (1962 ई.)
5. जुलुस रूका है (1977 ई.)
6. गँवई गंध गुलाब (1980 ई.)
7. नया गाँव नाम (1984 ई.)
8. आम रास्ता नहीं है (1988 ई.)
9. आस्था और चिन्तन (1991 ई.)
10. जगत तपोवन सो कियो (1995 ई.)
11. वन तुलसी की गंध (2002 ई.)
12. जीवन अज्ञात का गणित है (2004 ई.)
13. उठ जाग मुसाफिर (2012 ई.)
नोटः आयेग ने इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया क्योंकि इसमें विवेकी राय के निबंध 'चली फगुनहट बौरेआम' का प्रकाशन वर्ष के अनुसार विकल्प का कूट असंगत है। चली फगुनहट बौरे आम नामक लेख विवेकी राय के द्वारा कहानी पत्रिका के होली अंक 23 मार्च 1975 में प्रकाशित किया गया।