NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 दृश्य कला (VISUAL ART)

Total Questions: 100

91. रिलीफ की रचना राजा के विजयोत्सव के उपलक्ष में की गयी

Correct Answer: (a) रसिंह वर्मन-
Solution:

रिलाफ की रचना राजा नरसिंह वर्मन-1 के विजयोत्सव के उपलक्ष्य में की गयी थी। चालुक्य राजा पुलकेशिन-II पर नरसिंह वर्मन प्रथम की जीत का जश्न मनाने के लिए राहत बनाई गई थी। वह स्थान, जिसे अब मामल्लपुरम के नाम से जाना जाता है, पहले पल्लव राजवंश के राजा नरसिंह वर्मन प्रथम को मामल्लन 'महान पहलवान' या 'महान योद्धा' कहा जाता था।

92. स्मारक स्थित है-

Correct Answer: (c) महाबलीपुरम
Solution:

स्मारक महाबलीपुरम में स्थित है। मामल्लपुरम चेन्नई से लगभग 48 कि.मी. दक्षिण समुद्र तट पर स्थित है। वर्तमान में इसे 'महाबलीपुरम' कहा जाता है। भारतीय वास्तु और मूर्तिकला के विकास में दक्षिण भारत के पल्लव राजवंश का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहाँ पर 600 ई. के मध्य से 900 ई. तक पल्लव साम्राज्य रहा, जिसकी राजधानी कांची थी।

93. रिलीफ की रचना किस राजवंश में की गयी?

Correct Answer: (b) पल्लव
Solution:

गंगा अवतरण नामक रिलीफ की रचना पल्लव राजवंश में की गई थी। पल्लव विरासत स्थल पर गंगा के अवतरण और अर्जुन की तपस्या को पत्थर में चित्रित किया गया है। यह मामल्लपुरम् में स्मारकों के समूह में से एक है जिसे 1984 से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया था।

94. गंगा अवतरण इस रूप भी जाना जात है

Correct Answer: (d) अर्जुन की तपस्या
Solution:

गंगा अवतरण जिसे स्थानीय रूप से अर्जुन की तपस्या के रूप में जाना जाता है। भारत के तमिलनाडु राज्य के चेंगलप जिले में, बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर मामल्लपुरम् में एक स्मारक है। 96x43 फीट (29 मीटर × 13 मीटर) माप है। यह एक विशाल खुली हवा वाली चट्टान है जो दो अखण्ड चट्टान के शिला खण्डों पर उकेरी गई है।

95. रिलीफ मूर्तिशिल्प के उत्कीरण में किस प्रकार के पत्थर का उपयोग किया गया है?

Correct Answer: (b) ग्रेनाइट
Solution:

गंगा अवतरण नामक रिलीफ मूर्तिशिल्प के उत्कीर्णन में ग्रेनाइट पत्थर का उपयोग किया गया है। इसे खुली हवा में गुलाबी ग्रेनाइट के दो बड़े शिलाखण्डों पर बड़ी कुशलता और कल्पना के साथ बनाया गया था, जो पूरे को प्राकृतिक प्रभाव देता था। खुदी हुई आकृतियाँ आदमकद है। प्राकृतिक फांक, एक बहुत बड़ी लम्बवत् विदर, कुशलता से गढ़ी गई है।

96. यह चित्र किस कला आन्दोलन का प्रतिनिधित्व करता है?

Correct Answer: (c) फ्रेंच आर्ट नोवू
Solution:

यह चित्र फ्रेंच आर्ट नोवू कला आन्दोलन का प्रतिनिधित्व करता है। मौलिन रूज, ला गौलू फ्रांसीसी कलाकार हेनरी डी टूलूज लॉटरेक का एक पोस्टर है। जो संभवतः लगभग 3,000 प्रतियों में छपा है, प्रसिद्ध नर्तकियों ला गॉडले और 'नो- बोन्स' वैलेन्टिन और नए पेरिस डांस हॉल मौलिन रूज का विज्ञापन करता है।

97. इस कलाकृति के रचनाकार कौन है?

Correct Answer: (d) तुलुस लॉवे
Solution:

इस कलाकृति के रचनाकार तुलुस लॉ है। मौलिन रूजः ला गॉल्यू लियोग्राफी में तुलुस लॉने का पहला प्रयास था, इस तरह की माध्यम की सम्भावनाओं की उनकी समझ थी कि यह एक तत्काल सनसनी थी। तुलुज लॉने का जन्म 1864 ई. को अल्बी (फ्रांस) में हुआ था। लॉने दुर्घटनाग्रस्त होकर बचपन में ही वे अपंग नहीं होते तो शायद वे भी परिवार के अन्य सदस्यों की भाँति शिकार, मित्र-सम्मेलन, भोजन, नृत्य, मदिरापान आदि विलासों में अपना जीवन चैन से बिताते

98. कलाकृति किस वर्ष में निर्मित की गयी है?

Correct Answer: (c) 1891
Solution:

1891 में तुलुस लॉने ने मुलें रुज के लिए यह विज्ञापन चित्र बनाया जिससे उनको ख्याति प्राप्त हुई। इतना प्रभावी व क्रान्तिकारी विज्ञापन चित्र पेरिस की दीवारों पर अब तक नहीं लगाया गया था। इस चित्र पर जापानी कला एवं आर्नुवो शैली का प्रभाव था। यह चित्र विज्ञापन कला में लोत्रेक का आरम्भिक चरण था। जिसका बाद में उन्होंने काफी विकास किया।

99. निम्नवत में से यह कलाकृति क्या प्रदर्शित करती है?

Correct Answer: (c) नर्तक
Solution:

निम्नवत् में से यह कलाकृति 'नर्तक' प्रदर्शित करती है। मौलिन रूज, ला गॉल्यू एक बोल्ड, चार-रंग का लियोग्राफ है जिसमें प्रसिद्ध कैनकन डांसर ला गाँउले और उनके लचीले साथी वैलेन्टिन ले डेसोसे को लोक प्रिय फ्रेंच क्लब, मौलिन रूज का विज्ञापन करने के लिए बनाया गया है।

100. यह कलाकृति निम्नवत में से किस तकनीकि द्वारा मुद्रित की गयी है?

Correct Answer: (c) लियोग्राफी
Solution:

यह कलाकृति निम्नवत में से लियोग्राफी तकनीकि द्वारा मुद्रित की गई है। मौलिन रुज, ला गॉल्यू लिथोग्राफी में टुलूज लॉ का पहला प्रयास था। हेनरी डी टुलूज लॉने (1864-1901 ई.) एक फ्रांसीसी चित्रकार, प्रिन्टमेकर, ड्राफ्ट्समैन, कैरिक्युरिस्ट और इलस्ट्रेटर थे, जिनकी 19वीं शताब्दी के अन्त में पेरिस के रंगीन और नाटकीय जीवन में विसर्जन ने उन्हें उत्पादन करने की अनुमति दी थी।