NTA यू.जी.सी. नेट/ जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

1. देवनागरी लिपि का विकास क्रम क्या है?

Correct Answer: (b) ब्राह्मी लिपि - गुप्त लिपि - कुटिल लिपि - देवनागरी
Solution:देवनागरी लिपि का विकास क्रम निम्नवत है:- ब्राह्मी लिपि - गुप्तलिपि कुटिल लिपि - देवनागरी। ब्राह्मी लिपिः - यह प्राचीनतम लिपि है। इसके नमूने बस्ती जिले के पिपराला नामक स्तूप से प्राप्त हुए हैं। साथ ही अजमेर के बड़ली नामक गाँव से भी कुछ शिलालेख प्राप्त हुए हैं। ब्राह्मी लिपि नामकरण के बारे में प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं।
• ब्राह्मी लिपि ब्रह्मा द्वारा निर्मित है।
• ब्रह्मा (वेद या ज्ञान) की रक्षार्थ लिपि ब्राह्मी कहलायी।
• ब्राह्मणों द्वारा निर्मित या प्रयुक्त लिपि ब्राह्मी कहलायी।
गुप्त लिपिः- भारत में गुप्त साम्राज्य के काल में संस्कृत लिखने के लिए प्रयोग की गई लिपि 'गुप्त लिपि' के नाम से जानी जाती है। गुप्त लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि के उत्तरी शैली से हुआ है। गुप्त लिपि का समय 4-5वीं सदी के बीच माना जाता है।
कुटिल लिपिः कुटिल लिपि का एक अन्य नाम सिद्धमानिका लिपि है। इसे उत्तरी लिच्छवी लिपि भी कहते हैं। इस लिपि का प्रारम्भ बिन्दु भारत को ही माना जाता है। कुटिल लिपि को भारत में 'विकटाक्षर' भी कहते हैं। डॉ. बूलर ने इस लिपि को 'न्यून कोणीय लिपि' नाम दिया है।
देवनागरी लिपिः- देवनागरी लिपि का विकास कुटिल लिपि या सिद्ध मातृक लिपि से हुआ। इसका विकास 9वीं सदी के आस-पास माना जाता है। देवनागरी के नामकरण के संबंध में निम्नवत तथ्य प्रचलित हैं-
1. नगरों में व्यवहत होने के कारण 'देवनागरी' नाम पड़ा।
2. बौद्ध ग्रंथ ललितविस्तार में वर्णित 'नाग लिपि' से 'नागरी' नामकरण किया गया।
3. पाटलिपुत्र को 'नागर' तथा चंद्रगुप्त को देव कहने के कारण 'देवनागरी' नामकरण हुआ।
4. गुजरात के नागर ब्राह्मणों के नाम पर नागरी नाम पड़ा। देवनागरी का सबसे पहले प्रयोग गुजरात के राजा जयभट्ट के शिलालेख में हुआ है। यह लिपि बायीं से दायीं ओर लिखी जाती है। यह आक्षरिक लिपि है।

2. हिंदी में अनुनासिक व्यंजनों की संख्या कितनी है?

Correct Answer: (c) पाँच
Solution:हिन्दी में अनुनासिक व्यंजनों की संख्या पाँच है। सभी वर्गों के पाँचवे वर्ण ङ, ञ, ण, न, म अनुनासिक वर्ण हैं। ये पंचमाक्षर भी कहे जाते हैं। डॉ. श्याम सुंदरदास और उनके सहयोगियों का कहना है कि सभी पंचमवर्णी व्यंजनों के स्थान पर अनुस्वार का ही प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त हिन्दी व्यंजन वर्णों की श्रेणियाँ निम्नवत हैं-
स्पर्श व्यंजन -
क वर्ग - क, ख, ग, घ, ङ
च वर्ग - च, छ, ज, झ, ञ
ट वर्ग  - ट, ठ, ड, ढ, ण
त वर्ग - त, थ, द, ध, न
प वर्ग - प, फ, ब, भ, म
अंतस्थ व्यंजन - य, र, ल, व
ऊष्म व्यंजन - श, ष, स, ह
संयुक्त व्यंजन - क्ष, त्र, ज्ञ, श्र
द्विगुण व्यंजन - इ, ढ
अनुस्वार - (.), विसर्ग (:)

3. गोविन्द वल्लभ पंत की अध्यक्षता में संयुक्त संसदीय राजभाषा समिति का गठन कब किया गया?

Correct Answer: (d) 1957 ई.
Solution:गोविंद वल्लभ पंत की अध्यक्षता में संयुक्त संसदीय राजभाषा समिति का गठन 1957 ई. में किया गया। इस संसदीय समिति में 30 सदस्य थे। जिनमें लोक सभा के 20 तथा राज्य सभा के 10 सदस्य थे। इस समिति ने अपना प्रतिवेदन 1959 ई. में दिया।

4. बुंदेली बोली की उपबोलियाँ कौन-सी हैं?

Correct Answer: (c) भदौरी, बनाफरी, खटोला
Solution:बुंदेली बोली की उपबोलियाँ हैं- भदौरी, बनाफरी, खटोला। बुंदेली बोली का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है। यह ओकार बहुला बोली है। बुंदेली बोली उत्तर प्रदेश के झाँसी, उरई, जालौन, हमीरपुर और बाँदा तथा मध्य प्रदेश के ओरछा, पन्ना, दतिया, चरखारी, सागर, टीकमगढ़, दमोह, नृसिंहपुर, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद और बालाघाट के अतिरिक्त ग्वालियर और भोपाल में बोली जाती है। आल्हा खण्ड, बुन्देली में ही रचित है।

5. "यूरोप में 'बिहारी सतसई' के समकक्ष कोई रचना नहीं है।" - यह कथन किसका है?

Correct Answer: (a) जॉर्ज ग्रियर्सन
Solution:"यूरोप में 'बिहारी सतसई' के समकक्ष कोई रचना नहीं है।" यह जॉर्ज ग्रियर्सन का कथन है। शेष अन्य लेखकों के कथन निम्नवत् हैं-
रामचन्द्र शुक्ल- “यदि प्रबंध काव्य एक विस्तृत वनस्थली है तो मुक्तक एक चुना हुआ गुलदस्ता है।"
डॉ.नगेन्द्रः - "बिहारी विदग्ध कवि होते हुए भी अत्यंत मौलिक हैं। केवल एक ग्रंथ की रचना करके भी कवियों की पंक्ति में बिहारी का उत्कृष्ट स्थान है।"

6. "लोग कबीर आदि भक्तों को ज्ञानाश्रयी, निर्गुनिया आदि कहते हैं, वे प्रायः भूल जाते हैं कि निर्गुनिया होकर भी कबीरदास भक्त हैं और उनके राम वेदांतियों के ब्रह्म की अपेक्षा भक्तों के भगवान अधिक हैं।" -

किसका कथन है?

Correct Answer: (c) आचार्य हज़ारीप्रसाद द्विवेदी
Solution:"लोग कबीर आदि भक्तों को ज्ञानाश्रयी, निर्गुनिया आदि कहते हैं,वे प्रायः भूल जाते हैं कि निर्गुनिया होकर भी कबीरदास भक्त हैं और उनके राम वेदांतियों के ब्रह्म की अपेक्षा भक्तों के भगवान अधिक हैं।" यह कथन आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का है। शेष दिए गए अन्य लेखकों के कथन निम्नवत् हैं:-
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार- "इसमें कोई संदेह नहीं कि कबीर ने ठीक मौके पर जनता के उस बड़े भाग को संभाला जो नाथ पंथियों के प्रभाव से प्रेमभाव और भक्ति रस से शून्य शुष्क पड़ता जा रहा था।"
परशुराम चतुर्वेदी के अनुसार- "हिंदी वांग्मय के इतिहास में संत साहित्य का अपना एक विशिष्ट स्थान एवं महत्व है, उसकी सरिता का वह प्रमुख मूल स्त्रोत है जो उसके आदि कालीन अपभ्रंश रूप से निरंतर प्रवाहित होता आया है।"
नंददुलारे वाजपेयी के अनुसार- "कबीर महात्मा थे और उनके द्वारा साहित्य में पूत भावनाओं का समावेश हुआ। काव्यत्व के विचार से उन पूत भावनाओं का उत्कर्ष चाहे अधिक न हो पर इससे उनका महत्व किसी प्रकार कम नहीं होता।"

7. 'नई कहानीः संदर्भ और प्रकृति' पुस्तक के संपादक कौन हैं?

Correct Answer: (c) देवीशंकर अवस्थी
Solution:'नई कहानीः संदर्भ और प्रकृति' पुस्तक के संपादक देवीशंकर अवस्थी हैं।
शेष दिए गए अन्य लेखक एवं उनकी पुस्तकें निम्नवत हैं:-

8. महाभारत के अंतिम अंश को आधार बनाकर लिखा गया नाटक है:

Correct Answer: (d) अँधा युग
Solution:महाभारत के अंतिम अंश को आधार बनाकर लिखा गया नाटक 'अँधायुग' है। यह गीतिनाट्य है। इसका प्रकाशन 1955 ई. में हुआ था। इस नाटक के लेखक धर्मवीर भारती हैं। इस नाटक में युद्ध और उसके बाद की समस्याओं का चित्रण किया गया है। इस नाटक का कथानक महाभारत के अठारहवें दिन से लेकर श्रीकृष्ण की मृत्यु तक के समय का वर्णन किया गया है। 'नदी प्यासी थी' धर्मवीर भारती का अन्य नाटक है। शेष नाटकों का विवरण निम्नवत् है-
नाटकसमयलेखक (नाटककार)
शक विजय1949 ई.उदयशंकर भट्ट
पहला राजा1969 ई.जगदीशचन्द्र माथुर
कोणार्क1951 ई.जगदीशचन्द्र माथुर

9. "यह 'परीक्षागुरू' से भी एक वर्ष पूर्व लिखा गया, लेकिन प्रकाशित न हो पाने के कारण इसे प्रथम उपन्यास या 'परीक्षागुरू' से पूर्व लिखे जाने के श्रेय से वंचित रखा गया।" यह उक्ति किस उपन्यास से संबंधित है?

Correct Answer: (d) निःसहाय हिंदू
Solution:"यह परीक्षा गुरु से भी एक वर्ष पूर्व लिखा गया, लेकिन प्रकाशित न हो पाने केके कारण इसे प्रथम उपन्यास या 'परीक्षा गुरू' से पूर्व लिखे जाने के श्रेय से वंचित रखा गया"। यह उक्ति निःसहाय हिंदू उपन्यास से संबंधित है।

'निःसहाय हिन्दू' (1890 ई.) के रचनाकार श्री राधाकृष्णदास हैं। यह उपन्यास मूलतः गोवध निवारण के दृष्टिकोण को लेकर लिखा गया है। शेष अन्य रचनाओं का विवरण इस प्रकार है-

उपन्याससमयउपन्यासकार
वामा शिक्षक1872 ई.ईश्वरी प्रसाद
भाग्यवती1877 ई.श्रद्धाराम फिल्लौरी

10. लक्षणामूला ध्वनि का भेद है:

Correct Answer: (c) अर्थान्तर संक्रमित वाच्य ध्वनि
Solution:लक्षणामूला ध्वनि का भेद 'अर्थान्तर संक्रमित वाच्य ध्वनि' है।
आनन्दवर्धन ने सर्वप्रथम ध्वनि के दो भेद किये हैं:-
i. अविवक्षित वाच्य ध्वनि अथवा लक्षणामूला ध्वनि
ii. विवक्षितान्यपर वाच्य ध्वनि अथवा अभिधामूला ध्वनि ।

अर्थान्तर संक्रमित वाच्य ध्वनिः- जिस ध्वनि में वाच्यार्थ अपना पूर्ण तिरोभाव न करके अपना अर्थ रखते हुए भी अन्य अर्थ में संक्रमण करता है, वह अर्थान्तर संक्रमित वाच्य ध्वनि है। जैसे यह घर अच्छा है', यहाँ पर घर का तात्पर्य केवल घर ही नहीं, कुल समृद्धि, सम्पत्ति आदि सबसे है, जो उपादान लक्षणा से निकलता है।