NTA यू.जी.सी. नेट/ जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यान से पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तरों का सही विकल्प चुनिएः

हम सब की मिली-जुली जिंदगी में कला के रूपों का खज़ाना हर तरह बेहिसाब बिखरा चला गया हैं। सुंदरता का अवतार हमारे सामने पल-छिन होता रहता है। अब यह हम पर है खासतौर से कवियों पर, कि हम अपने सामने और चारों ओर की इस अनन्त और अपार लीला को कितना अपने अंदर बुला सकते हैं।

इसका सीधा- सादा मतलब हुआ अपने चारों तरफ की ज़िंदगी में दिलचस्पी लेना, उसको ठीक-ठीक यानी वैज्ञानिक आधार पर समझना और अनुभूति और अपने अनुभव को इसी समझ और जानकारी से सुलझाकार स्पष्ट करके, पुष्ट करके अपनी कला-भावना को जगाना । यह आधार इस युग के हर सच्चे और ईमानदार कलाकार के लिए बेहद ज़रूरी है। इस तरह अपनी कला चेतना को जगाना और उसकी मदद से जीवन की सच्चाई और सौंदर्य को अपनी कला में सजीव से सजीव रूप देते जाना : इसी को मैं 'साधना' समझता हूँ, और इसी में कलाकार का संघर्ष छिपा हुआ देखता हूँ।

कला में भावनाओं की तराश खराश, चमक, तेज़ी और गर्मी सब उसी से पैदा होंगी, उसी 'संघर्ष' और 'साधना' से, जिसमें अन्तर-बाह्य दोनों का मेल है। कला के इस सौंदर्य और उससे मिलने वाले आनंद के शत्रु वे जहाँ और जिस वेश में भी होंगे, जो भी होंगे परिस्थितियाँ, व्यक्ति या दल हर ईमानदार कलाकार के शत्रु होंगे।

कला जीवन का सच्चा दर्पण है और आज के सभी देशों के जीवन में कायापलट तेज़ी के साथ आ रही है; क्योंकि आज किसको नहीं दिखाई दे रहा है कि यह क्रान्ति काा युग है। थके हुए पुराने कलाकारों की आहों को भी उससे चमक मिलती है। नयों की तो वह काव्य सामग्री ही है; क्योंकि वही उनके और उनके आगे की पीढ़ियों के लिए नये, उन्मुक्त, सुखी, आदर्श जीवन की नींव डालने वाला है।
उपर्युक्त अनुच्छेद का केन्द्रीय विषय है:

Correct Answer: (c) कला और जीवन
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद का केन्द्रीय विषय कला और जीवन है। कहा जा सकता है कि हम सब की मिली-जुली जिंदगी में कला के रूपों का खजाना हर तरह बेहिसाब बिखरा पड़ा है। कला जीवन का सच्चा दर्पण है।

92. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार कलाकार के लिए जरुरी नहीं है:

Correct Answer: (c) सामाजिक क्रान्ति करना
Solution:

उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार कलाकार के लिए जरूरी है सामाजिक क्रान्ति करना। ईमानदार कलाकार को समाज से ही विषय चयन करना चाहिए, उसके लिए उसे अपने आस-पास के वातावरण में रूचि लेना तथा उसी से अपनी कला चेतना को जगाना चाहिए।

93. उपर्युक्त अनुच्छेद के आधार पर बताइए कि ईमानदार कलाकार के शत्रु कौन हैं?

Correct Answer: (d) परिस्थितियाँ व्यक्ति-दल
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के आधार पर ईमानदार कलाकार के शत्रु परिस्थितियाँ व्यक्ति दल है। कला में भावनाओं की तराश खराश चमक तेजी और गर्मी सब उसी से पैदा होगी, उसी संघर्ष और 'साधना' से जिसमें अन्तर-वाह्य दोनों का मेल है। कला के इस सौंदर्य और उससे मिलने वाले आनंद के शत्रु वे जहाँ और जिस वेश में भी होंगे जो भी होंगे कलाकार के शत्रु ही होंगे।

94. कला चेतना जाग्रत कर जीवन की सच्चाई और सौंदर्य को सजीव रूप देना क्या कहलाएगा?

Correct Answer: (c) साधना
Solution:

कला चेतना जाग्रत कर जीवन की सच्चाई और सौंदर्य की सजीव रूप देना साधना कहलाएगा। कलाकार के लिए अपनी कला चेतना को जगाना और उसकी मदद से समाज की सच्चाई और सौंदर्य को अपनी कला में व्यक्त करना ही कलाकार की असली 'साधना' है।

95. पर्युक्त अनुच्छेद के आधार पर बताइए कि आज का युग किस प्रकार का है?

Correct Answer: (c) क्रांति का
Solution:अनुच्छेद के आधार पर कहा जा सकता है कि आज का युग क्रान्ति का युग है। कला जीवन का सच्चा दर्पण है और आज सभी देशों के जीवन में कायापलट तेजी के साथ आ रही है, क्योंकि आज किस को नहीं दिखाई दे रहा है कि यह क्रान्ति का युग है। थके हुए पुराने कलाकारों की आहों को भी उससे चमक मिलती है।

96. निम्नलिखित अनुच्छेद को ध्यान से पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तरों का सही विकल्प चुनिए:

भक्ति आंदोलन पहले शहरों में बसने वाले लोगों, खासकर छोटे-छोटे व्यापारियों, जुलाहों, टोकरी बनाने वालों और भिश्तियों जैसे लोगों के बीच से शुरू हुआ था। किन्तु सत्रहवीं शताब्दी तक वह किसानों में भी व्याप्त हो गया। इसने एक जन आंदोलन का रूप धारण कर लिया और मुगल शासन तथा सामन्ती सरदारों के विरुद्ध कभी-कभी सशस्त्र विद्रोहों के रूप में भी प्रकट हुआ। इस आंदोलन के नेता अपनी कवितायें और अपने गीत फारसी और संस्कृत जैसी दुरूह और क्लिष्ट भाषाओं में नहीं, वरन जनता की भाषाओं में रचते थे। इससे राष्ट्रीय इकाइयों तथा राष्ट्रीय भाषाओं के विकास को प्रोत्साहन मिला, जो भारतीय राष्ट्र के विकास की एक ऐतिहासिक प्रक्रिया थी।

भक्ति आंदोलन ने देश के भिन्न-भिन्न भागों में, भिन्न-भिन्न मात्राओं में तीव्रता और वेग ग्रहण किया। यह आंदोलन विभिन्न रूपों में प्रकट हुआ। किन्तु कुछ मूलभूत सिद्धांत ऐसे थे जो समग्र रूप से पूरे आंदोलन पर लागू होते थे- पहले, धार्मिक विचारों के बावजूद जनता की एकता को स्वीकार करना; दूसरे, ईश्वर के सामने सबकी समानता; तीसरे, जाति प्रथा का विरोध; चौथे, यह विश्वास कि मनुष्य और ईश्वर के बीच तादात्म्य प्रत्येक मनुष्य के सद्‌गुणों पर निर्भर करता है, न कि ऊँची जाति अथवा धन-संपत्ति पर; पाँचवे, इस विचार पर जोर कि भक्ति की आराधना का उच्चतम स्वरूप है; और अंत में, कर्मकाण्डों, मूर्ति पूजा, तीर्थाटनों और अपने को दी जाने वाली यंत्रणाओं की निन्दा। भक्ति आंदोलन मनुष्य की सत्ता को सर्वश्रेष्ठ मानता था और सभी वर्गगत एवं जातिगत भेदभावों तथा धर्म के नाम पर किये जानेवाले सामाजिक उत्पीड़न का विरोध करता था।

किन्तु भक्ति आंदोलन की अपनी सीमाएं थी। भक्ति आंदोलन ने आम जनता में जागृति तो पैदा की, किन्तु वह सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में मौजूद असंगतियों के वास्तविक कारणों को समझने और मानव के दुखों और पीड़ाओं के नूतन समाधान प्रस्तुत करने में सफल नहीं हुआ। यही एक मुख्य कारण है कि इस आंदोलन की परिणति, जिसने सामन्ती उत्पीड़न और पुरोहिती रूढ़िवाद के विरुद्ध जनता को संयुक्त किया था, अन्ततः घोर संकीर्णता वाद में हुई।
उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, भक्ति आंदोलन की सीमा क्या थी?

Correct Answer: (a) वह मनुष्य की पीड़ाओं का नया समाधान न दे सका।
Solution:

भक्ति आन्दोलन मनुष्य की पीड़ओं का नया समाधान न दे सका, यही भक्ति आन्दोलन की सीमा थी। भक्ति आंदोलन ने आम जनता में जागृति तो पैदा की, किन्तु वह सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में मौजूद असंगतियों के वास्तविक कारणों को समझने और मानव के दुःखों और पीड़ाओं के नूतन समाधान प्रास्तुत करने में सफल नहीं हुआ।

97. उपर्युक्त अनेच्छद के अनुसार भक्ति आंदोलन ने भाषाओं के प्रति क्या नीति रखी ?

Correct Answer: (c) राष्ट्रीय भाषाओं को प्रोत्साहन दिया
Solution:अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आंदोलन ने राष्ट्रीय भाषाओं में साहित्य रचना के प्रोत्साहन की नीति रखी। इस आंदोलन के नेता अपनी कवितायें, अपने गीत फारसी और संस्कृत जैसी दुरूह और क्लिष्ट भाषाओं में नहीं वरन् जनता की भाषाओं में रचते थे। इससे राष्ट्रीय इकाइयों तथा भाषाओं के विकास को प्रोत्साहन मिला, जो भारतीय राष्ट्र के विकास की एक ऐतिहासिक प्रक्रिया थी।

98. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, भक्ति आंदोलन की जाति-व्यवस्था को लेकर क्या नीति थीः

Correct Answer: (b) भक्ति आंदोलन जाति प्रथा का विरोध करता था।
Solution:अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आंदोलन जाति प्रथा का विरोध करता था। भक्ति आंदोलन मनुष्य की सत्ता को सर्वश्रेष्ठ मानता था और सभी वर्गगत एवं जातिगत भेदभावों तथा धर्म के नाम पर किये जाने वाले सामाजिक उत्पीड़न का विरोध करता है।

99. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, भक्ति आंदोलन का केन्द्रीय विश्वास है :

Correct Answer: (a) मनुष्य की सत्ता सर्वश्रेष्ठ है।
Solution:अनुच्छेद के अनुसार, भक्ति आंदोलन का केन्द्रीय विश्वास है कि मनुष्य की सत्ता सर्वश्रेष्ठ है। क्योंकि सभी वर्गगत एवं जातिगत भेदभावों तथा धर्म के नाम पर किये जाने वाले सामाजिक उत्पीड़न का विरोध करता था।

100. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, भक्ति आंदोलन जन आंदोलन बन सका, क्योंकि

Correct Answer: (d) जनता का बड़ा भाग, विशेष रूप से छोटे व्यापारी शिल्पी और किसान किसी न किसी रूप में भक्ति से सम्बद्ध हुए।
Solution:अनुच्छेद के अनुसार भक्ति आंदोलन जन आंदोलन बन सका, क्योंकि जनता का बड़ा भाग, विशेष रूप से छोटे व्यापारी, शिल्पी और किसान किसी न किसी रूप में भक्ति से सम्बद्ध हुए। भक्ति आंदोलन पहले शहरों में बसने वाले लोगों, खासकर छोटे- छोटे व्यापारियों, जुलाहों, टोकरी बनाने वालों और भिश्तियों जैसे लोगों के बीच शुरु हुआ था।