Correct Answer: (c) यमक
Solution:'सुनी है के नाहीं यह प्रगट कहावति जू, काहू कल्पाय है सु के कल पाय है।।'
उपर्युक्त घनानंद की इस पंक्ति में 'यमक' अलंकार है। यमक अलंकार - जहाँ एक या एक से अधिक शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त हो एवं अर्थ भी प्रत्येक बार भिन्न हों, वहाँ यमक अलंकार होता है।
संदेह रूप, रंग आदि का सादृश्य होने के कारण उपमेय में उपमान का संशय होने में सन्देह अलंकार होता है।
जैसे- वदन सुधानिधि जानिके, तुव संग फिरयो चकोर ।
वदन किधी यह सीतकर, किधी कमल भए मोर ।।
भ्रांतिमान - रूप, रंग, कर्म आदि की समानता के कारण जहाँ एक वस्तु में अन्य किसी वस्तु का चमत्कार पूर्ण भ्रान्ति कल्पित हो जाय, वहाँ भ्रान्तिमान अलंकार माना जाता है।
जैसे- परत भ्रमर सुक तुंड पर, भ्रम धरि कुसुम पलास ।
धलि ताको पकरन चहत, जम्बू फल की आस ।।
श्लेष- जहाँ एक शब्द के साथ अनेक अर्थ चिपके रहते हैं, वहाँ, श्लेष अलंकार होता है।
जैसे- मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोई। जा तन की झाई परै स्यामु हरित दुति होय ।।