NTA यू.जी.सी. नेट/ जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

11. भामह ने समस्त अलंकारों का मूल किस अलकार को माना है?

Correct Answer: (c) वक्रोक्ति
Solution:भामह ने समस्त अंलकारों काका मूल वक्रोक्ति अलंकार को माना है।
भामह मूलरूप से अलंकार सम्प्रदाय के आचार्य थे। इनकी अलंकार संबंधी रचना 'काव्यांलकार' है। इसी ग्रंथ में भामह ने वक्रोक्ति की परिभाषा निम्नवत की है-
"लोकातिक्रांतगोचरं वचनम्।"
अर्थात लोक (संसार) की सामान्य कथन प्रणाली से भिन्न वक्रोक्ति है। वे लिखते हैं- "सर्वत्र वक्र अर्थ ही शोभा पाते हैं। इसी से कविता होती है और इसके बिना अलंकार ही नहीं हो सकते।
" शेष अन्य अलंकारों का विवरण निम्नवत् है-
उपमा अलंकार- यह अर्थालंकार का प्रमुख भेद है। उपमा अलंकार वहाँ होता है, जहाँ पर किसी वस्तु की रूप-गुण संबंधी विशेषता स्पष्ट करने के लिए, दूसरी परिचित वस्तु से जिसमें वे विशेषताएँ अधिक प्रत्यक्ष है उसकी समता की जाती है। उपमा के चार प्रमुख अंग हैं- उपमेय, उपमान, वाचक शब्द और धर्म। जैसे:- 'पीपर पात सरिस मन डोला।'
रूपक अंलकारः उपमेय पर उपमान का भेद रहित आरोप ही रूपक अलंकार है।
जैसे:- उदित उदयगिरिमंच पर, रघुवर बालपतंग ।
बिकसे संत सरोज सब, हरषे लोचन भृंग ।।
यमक अलंकारः - यह शब्दालंकार का एक प्रमुख भेद है। जहाँ पर शब्द की अनेक बार भिन्न अर्थों में आवृत्ति होती है, वहाँ पर यमक अलंकार माना जाता है।
जैसे:- तो पर वारौं उरबसी, सुनु राधिके सुजान ।
तू मोहन के उर बसी है उरबसी-समान ।।
1898 ई. में इन्होनें 'सेंट्रल हिन्दु स्कूल और कॉलेज' की स्थापना की।

12. श्रीमती एनी बेसेंट का भारत आगमन किस वर्ष हुआ?

Correct Answer: (c) सन् 1893 ई.
Solution:एनी बीसेंट का भारत आगमन सन् 1893 ई. में हुआ। इनका ज्यादातर समय बनारस (काशी) में बीता। सन् 1907 ई. में थियोसोफिकल सोसायटी की अध्यक्षा बनी। इनका एक कथन अत्यंत प्रसिद्ध है- "यह अत्यन्त अमानवीय कानून है जिसने बच्चों को उनकी माँ से अलग करवा दिया है। मैं अपने दुःखों का निवारण दूसरों के दुःख दूर करके करूँगी और सब अनाथ एवं असहाय बच्चें की माँ बनूँगी।"
इनका जन्म लंदन शहर में (1847 ई.) हुआ था। एनी बेसेंट 1917 ई.में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की अध्यक्षा भी बनी थी।

13. निम्नलिखित में से किस चिंतक ने धर्म को शास्त्रार्थ का विषय न मानकर उसके मूल तत्व को अपने जीवन में अपनाकर विश्व को संदेश दिया।

Correct Answer: (c) रामकृष्ण परमहंस
Solution:

प्रसिद्ध चिंतक एवं संत रामकृष्ण परमहंस ने धर्म को शास्त्रार्थ का विषय न मानकर उसके मूल तत्व को अपने जीवन में अपनाकर विश्व को संदेश दिया। उनका जन्म बंगाल के कामार पुकुर ग्राम में हुआ था। इनके बचपन का नाम गदाधर था। रामकृष्ण कहते थे कि कामिनी, कंचन, ईश्वर प्राप्ति के सबसे बड़े बाधक हैं।
शेष अन्य समाज सुधारकों का परिचय निम्नवत् हैः-

संस्थापकसंस्थास्थापना वर्ष
राजा राममोहन रायब्रह्म समाज1828 ई.
स्वामी दयानन्द सरस्वतीआर्य समाज1875 ई.
केशवचन्द्र सेनप्रार्थना समाज1867 ई.
देवेन्द्रनाथ ठाकुरतत्वबोधिनी सभा1839 ई.
ज्योतिबाबाबाई फूलेसत्यशोधक समाज1873 ई.

14. "अब एक सभ्यता का सूर्य सुदूर पश्चिम से उदय हो रहा है, जिसने इस नारकीय महाजनवाद या पूँजीवाद की जड़ खोदकर फेंक दिया है।" यह कथन किस लेखक का है?

Correct Answer: (b) प्रेमचंद
Solution:"अब एक सभ्यता का सूर्य सुदूर पश्चिम से उदय हो रहा है, जिसने इस नारकीय महाजनवाद या पूँजीवाद की जड़ खोद कर फेंक दिया है।" यह कथन उपन्यास सम्राट प्रेमचंद का है।
• "अव्यक्त की अभिव्यक्ति जगत है अतः कविता अभिव्यक्ति की अभिव्यक्ति है।" आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
• "अंतःकरण की वृत्तियों के चित्र का नाम कविता है।" - महावीर प्रसाद द्विवेदी

15. हिन्दी का पहला दैनिक समाचार-पत्र कौन सा है?

Correct Answer: (b) समाचार सुधावर्षण
Solution:'समाचार सुधावर्षण' हिंदी का पहला दैनिक समाचार पत्र है। इसका सम्पादन श्यामसुन्दर सेन ने किया। इसका प्रकाशन 1854 ई. में कलकत्ता से हुआ। अन्य समाचार पत्र इस प्रकार हैं-
समाचार पत्रसम्पादकप्रकारवर्षस्थान
बनारस अखबारराजा शिवप्रसाद सिंहसाप्ताहिक1845 ई.काशी
अवध अखबार (उर्दू)मुंशी नवल किशोरदैनिक1858 ई.लखनऊ
उदन्त मार्तण्डजुगल किशोरसाप्ताहिक1826 ई.कलकत्ता
बंगदूतराजा राममोहन रायसाप्ताहिक1829 ई.कलकत्ता
प्रजा हितैषीराजा लक्ष्मण सिंह-1855 ई.आगरा

16. 'असाध्यवीणा' कविता में प्रियवंद ने किसको वीणा का रचयिता मानकर याद किया है?

Correct Answer: (b) वज्रकीर्ति
Solution:'असाध्यवीणा' कविता में प्रियंवद ने वज्रकीर्ति को वीणा का रचयिता मानकर याद किया है।
अज्ञेय के काव्य संग्रह 'आँगन के पार द्वार' (1961 ई.) में संकलित 'असाध्य वीणा' एक लम्बी कविता है। इसका मूल भाव 'अहं का विसर्जन' है।
अज्ञेय के अन्य काव्य संग्रह - भग्नदूत (1933 ई.), चिन्ता (1942), इत्यलम् (1946 ई.), हरी घास पर क्षण भर (1949 ई.), बावरा अहेरी (1954 ई.), इन्द्र-धनु रौदे हुए थे (1957 ई.), कितनी नावों में कितनी बार (1967 ई.), सागर मुद्रा (1970 ई.), पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ (1973 ई.), नदी की बाँक पर छाया (1981 ई.) आदि।

17. सूरदास का पद 'आयो घोष बड़ो व्योपारी' किसकी ओर संकेतित है?

Correct Answer: (b) उद्धव
Solution:

सूरदास का पद 'आयो घोष बड़ो व्योपारी' उद्धव की ओर संकेतित हैं। उपर्युक्त पद 'आचार्य रामचंद्र शुक्ल' द्वारा संपादित ग्रंथ 'भ्रमरगीतसार' से है।
सूरदास द्वारा रचित ग्रंथ- सूरसागर, सूरसारावली और साहित्य लहरी।

सूरदास की रचनाओं का सर्वप्रथम सम्पादन कलकत्ता में सन् 1841 ई. में 'रागकल्पद्रुम' नाम से हुआ।

18. 'शासन की बंदूक' कविता किस छन्द में है?

Correct Answer: (c) दोहा
Solution:'शासन की बंदूक' कविता दोहा छंद में है।
नागार्जुन कृत 'शासन की बंदूक' (1966 ई.), कविता 'युगधारा' (1953 ई.) काव्य संग्रह में संकलित है।
नागार्जुन के अन्य काव्य संग्रह- सतरंगे पंखों वाली (1959 ई.), प्यासी पथराई आँखें (1962 ई.), भस्मांकुर (1971), तालाब की मछलियाँ (1975 ई.), खिचड़ी विप्लव देखा हमने (1980 ई.), हजार हजार बाँहों वाली (1981 ई.), पुरानी जूतियों का कोरस (1983 ई.) आदि।
• नागार्जुन ने मैथिली भाषा में 'पत्रहीन नग्न गाछ' शीर्षक से काव्य लिखा। इसमें 52 कविताएँ संकलित हैं। इस कृति पर उन्हें सन् 1968 ई. में 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार मिला। कवि नागार्जुन का मूल नाम 'वैद्यनाथ मिश्र' है।

19. 'सुनी है कै नाहीं यह प्रगट कहावति जू, काहू कल्पाय है सु के कल पाय है।'

घनानंद की इस पंक्ति में कौन सा अलंकार है?

Correct Answer: (c) यमक
Solution:'सुनी है के नाहीं यह प्रगट कहावति जू, काहू कल्पाय है सु के कल पाय है।।'
उपर्युक्त घनानंद की इस पंक्ति में 'यमक' अलंकार है। यमक अलंकार - जहाँ एक या एक से अधिक शब्द एक से अधिक बार प्रयुक्त हो एवं अर्थ भी प्रत्येक बार भिन्न हों, वहाँ यमक अलंकार होता है।
संदेह रूप, रंग आदि का सादृश्य होने के कारण उपमेय में उपमान का संशय होने में सन्देह अलंकार होता है।
जैसे- वदन सुधानिधि जानिके, तुव संग फिरयो चकोर ।
वदन किधी यह सीतकर, किधी कमल भए मोर ।।
भ्रांतिमान - रूप, रंग, कर्म आदि की समानता के कारण जहाँ एक वस्तु में अन्य किसी वस्तु का चमत्कार पूर्ण भ्रान्ति कल्पित हो जाय, वहाँ भ्रान्तिमान अलंकार माना जाता है।
जैसे- परत भ्रमर सुक तुंड पर, भ्रम धरि कुसुम पलास ।
धलि ताको पकरन चहत, जम्बू फल की आस ।।
श्लेष- जहाँ एक शब्द के साथ अनेक अर्थ चिपके रहते हैं, वहाँ, श्लेष अलंकार होता है।
जैसे- मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोई। जा तन की झाई परै स्यामु हरित दुति होय ।।

20. 'सभी संथालों को दामुल हौज हो गया' - 'मैला आँचल' उपन्यास के इस वाक्य में 'दामुल हौज' का अर्थ है:

Correct Answer: (d) आजीवन कारावास
Solution:'सभी संथालों को दामुल हौज हो गया', 'मैला आँचल' उपन्यास के इस वाक्य में 'दामुल हौज' का अर्थ 'आजीवन कारावास है।

फरणीश्वरनाथ 'रेणु' कृत मैला आँचल उपन्यास का प्रकाशन 1954 ई. में हुआ। इसमें पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव की कथा है।

फरीश्वरनाथ 'रेणु' आँचलिक उपन्यासकार हैं। इनके अन्य प्रमुख उपन्यास हैं- परती परिकथा (1957 ई.), दीर्घतपा (1963 ई.), जुलूस (1965 ई.), कितने चौराहे (1966 ई.), पल्लू बाबू रोड़ (1979 ई.), रामरतन राय (1971 ई.) आदि।