A. इसमें युद्ध से उत्पन्न होने वाली मूल्यहीनता, अमानवीयता, विकृति, कुंठा, वैयक्तिक एवं सामूहिक विघटन का सजीव चित्र प्रस्तुत किया गया है।
B. इसके तृतीय अंक का शीर्षक 'गांधारी का शाप' में गांधारी कृष्ण को शाप देती है।
C. इस नाटक पर इलियट के वेस्टलैंड का प्रभाव माना गया है।
D. इसमें ऋषि व्यास अश्वत्थामा को अमरता का वरदान देते हैं।
E. 'अंधायुग' के किसी भी पात्र का चरित्र नितांत उज्जवल और निर्मल नहीं है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
Correct Answer: (a) केवल A, C और E
Solution:अंधायुग (1955 ई.) धर्मवीर भारती द्वारा रचित गीतिनाट्य हैं। इसमें युद्ध से उत्पन्न होने वाली मूल्यहीनता अमानवीयता, विकृति, कुण्ठा वैयक्तिक एवं सामूहिक विघटन का सजीव चित्र प्रस्तुत किया गया है। अंधायुग के किसी भी पात्र का चरित्र नितांत उज्जवल और निर्मल नहीं है। इस नाटक पर इलियट के वेस्टलैण्ड का प्रभाव माना गया है। इस नाटक के प्रमुख पात्र है- अश्वत्थामा, गान्धारी, विदुर, धृतराष्ट्र, युधिष्ठिर, कृपाचार्य, संजय, युयुत्सु, वृद्धयाचक, गूंगा भिखारी आदि। इस नाटक में पाँच अंक हैं-
(1) कौरवनगरी
(2) पशु का उदय
(3) अश्वत्थामा का अर्धसत्य
(4) गांधारी का शाप
(5) विजय एक क्रमिक आत्महत्या।