NTA यू.जी.सी. नेट/ जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

81. 'स्कंदगुप्त' नाटक के प्रथम अंक में आए संवादों को पहले से बाद के क्रम में लगाइयेः

A. कविता करना अनंत पुण्य का फल है।
B. अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है।
C. केवल संधि नियम से ही हम लोग बाध्य नहीं है- शरणागत की रक्षा भी क्षत्रिय का धर्म है।
D. राष्ट्रनीति, दार्शनिकता और कल्पना का लोक नहीं है।
E. पुरुष है कुतूहल और प्रश्न, और स्त्री है विश्लेषण, उत्तर और सब बातों का समाधान।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) B, D, C, A, E
Solution:स्कंदगुप्त नाटक के प्रथम अंक में आए संवादो को पहले से बाद का सही क्रम निम्न है-
1. अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन है।
2. राष्ट्रनीति, दार्शनिकता और कल्पना का लोक नही है।
3. केवल संधि नियम से ही हम लोग बाध्य नहीं है। शरणागत की रक्षा भी क्षत्रिय का धर्म है।
4.कविता करना अनंत पुण्य का फल है।
5. पुरुष है कुतूहल और प्रश्न और स्त्री है विश्लेषण उत्तर और सब बातों का समाधान।

82. निबंध 'मजदूरी और प्रेम' के उपशीर्षकों को पहले से बाद के क्रम में लगाइए

A. गड़रिये का जीवन
B. हल चलाने वाले का जीवन
C. मजदूर की मजदूरी
D. मजदूरी और कला
E. प्रेम मजदूरी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) B, A, C, E, D
Solution:निबंध मजदूरी और प्रेम के उपशीर्षकों का पहले से बाद के क्रम निम्न है-
1. हल चलाने वाले का जीवन
2. गड़रिये का जीवन
3. मजदूर की मजदूरी
4. प्रेम मजदूरी
5. मजदूरी और कला

83. 'अरे यायावर रहेगा याद' में निम्नलिखित अध्यायों को पहले से बाद के क्रम में लगाइए

A. देवताओं के अंचल में
B.एलुरा
C. किरणों की खोज में
D.परशुराम से तूरखम
E. मौत की घाटी में
नीचे दिए गए विकल्पोस में से सही उत्तर चुनें:

Correct Answer: (b) D, C, A, E, B
Solution:अरे यायावर रहेगा याद तथा एक बूँद सहसा उछली अज्ञेय के प्रमुख यात्रा वृत्तांत हैं।
'अरे यायावर रहेगा याद' में अध्यायों का पहले से बाद का क्रम निम्न है-
1.परशुराम से रखम
2. किरणों की खोज में
3. देवताओं के अंचल में
4. मौत की घाटी में
5. एलुरा

84. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन - I : जिस भाषा के माध्यम से राष्ट्र की अधिकांश जनता विचार - विनिमय करती है, वही राष्ट्रभाषा होती है।
कथन-II : किसी राष्ट्र में सभी प्रचलित भाषाएँ राष्ट्रभाषाएँ होती है, किन्तु जो भाषा सम्पूर्ण देश की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक परम्पराओं को धारण करने में सक्षम होती है, वह भाषा राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित होती है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन । और II दोनों सत्य है।
Solution:कथन I और कथन - II दोनों सत्य हैं। जिस भाषा के माध्यम से राष्ट्र की अधिकांश जनता विचार विनिमय करती है, वही राष्ट्रभाषा होती है तथा किसी राष्ट्र में सभी प्रचलित भाषाएं राष्ट्रभाषाएं होती है, किन्तु जो भाषा संपूर्ण देश की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक परम्पराओं को धारण करने में सक्षम होती है, वह भाषा राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित होती है।

85. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन-I: 'साकेत' के वियोग वर्णन के भीतर कवि ने पुरानी पद्धति के आलंकारिक चमत्कारपूर्ण पद्य तथा आजकल की नयी रंगत की वेदना लाक्षणिक वैचित्र्य वाले गीत, दोनों रखे हैं।
कथन-II : प्रेम के शुभ प्रभाव से उर्मिला के हृदय की उदारता का और भी प्रसार हो गया है। वियोग की दशा में प्रिय लक्ष्मण के गौरव की भावना उसे संभाले हुए है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सत्य हैं।
Solution:

साकेत के वियोग वर्णन के भीतर कवि ने पुरानी पद्धति के आलंकारिक चमत्कार पूर्ण पद्य तथा आजकल नयी रंगत की वेदना लाक्षणिक वैचित्य वाले गीत दोनों रखे है तथा प्रेम के शुभ प्रभाव से उर्मिला के हृदय की उदारता का और भी प्रसार हो गया है। वियोग की दशा में प्रिय लक्ष्मण के गौरव की भावना उसे संभाले हुए है। कथन- I और II दोनों सत्य है।

86. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन - I: इलियट की दृष्टि मे परंपरा की व्यापक अर्थवत्ता है। उसे दान या विरासत के रूप में प्राप्त नहीं किया जा सकता उसकी प्राप्ति के लिए कठोर परिश्रम आवश्यक है।
कथन - II: परंपरा कोई मृत या अनुपयोगी वस्तु नहीं है। वस्तुतः जो मृत या अनुपयोगी है, उसे परंपरा की संज्ञा देना ही अनुचित है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन । और II दोनों सत्य हैं।
Solution:कथन- इलियट की दृष्टि में परंपरा की व्यापक अर्थवत्ता है। उसे दान या विरासत के रूप में प्राप्त नहीं किया जा सकता, उसकी प्राप्ति के लिए कठोर परिश्रम आवश्यक है। तथा परंपरा कोई मृत या अनुपयोगी वस्तु नहीं है। वस्तुतः जो मृत या अनुपयोगी है, उसे परंपरा की संज्ञा देना ही अनुचित है। अतः कथन । तथा कथनII दोनों सत्य हैं।

87. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन - I : हिंदी नवजागरण में महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के योगदान का मूल्यांकन करते हुए ध्यान रखना चाहिए कि वे किसी क्रांतिकारी पार्टी के गुप्त रूप से प्रकाशित होने वाले गैर कानूनी पत्र के लिए नहीं लिख रहे थे।
कथन - II : सरस्वती में रचना प्रकाशन का निर्णय करते समय महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रेस मालिक का दबाव नहीं मानते थे। उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) कथन I सही है, किन्तु कथन II गलत है।
Solution:हिन्दी नवजागरण में महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के योगदान का मूल्यांकन करते हुए ध्यान रखना चाहिए कि वे किसी क्रांतिकारी पार्टी के गुप्त रूप से प्रकाशित होने वाले गैर कानूनी पत्र के लिए नहीं लिख रहे थे, यह कथन सत्य है। जबकि सरस्वती में रचना प्रकाशन का निर्णय करते समय महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रेस मालिक का दबाव नहीं मानते थे यह कथन गलत है। क्योंकि सरस्वती में रचना प्रकाशन का निर्णय करते समय महावीर प्रसाद द्विवेदी को प्रेस मालिक का दबाव मानना पड़ता था। अतः कथन-I सही है, किन्तु कथन II गलत है।

88. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है और दूसरा उसके कारण के रूप में है:

अभिकथन A: प्रेमचन्द, स्त्री स्वतंत्रता के समर्थक थे, परन्तु वे विवाह को बनाए रखना चाहते थे।
कारण R: 'गोदान' उपन्यास में महत्वपूर्ण स्त्री-चरित्र सक्षम, शक्तिशाली और परिस्थितियों को अनुकूल बनाने के लिए संघर्षरत है। इनमें से अनेक का वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण है, परन्तु वे इसे बनाये रखना चाहती हैं।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं।
Solution:प्रेमचन्द, स्त्री स्वतंत्रता के समर्थक थे, परन्तु वे विवाह को बनाए रखना चाहते थे। कारण गोदान उपन्यास में महत्वपूर्ण स्त्री- चरित्र सक्षम, शक्तिशाली और परिस्थितियों को अनुकूल बनाने के लिए संघर्षरत है। इनमें से अनेक का वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण है, परन्तु वे इसे बनाये रखना चाहती है।
अतः कथन I और II दोनों सही हैं।

89. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन I: 'सिंदूर की होली' नाटक की दुःखान्त परिणति हमें नाटक में आयी परिस्थितियों तथा जजन्य समस्याओं को सोचने-समझने के लिए बाध्य करती है। और विचारों में डुबो देती है।
कथन - II: 'सिंदूर की होली' अद्भुत, गहन, गंभीर, सामान्य से परे नाटक है तथा उसके पात्र अत्यंत सहज हैं और स्वाभाविक मनोवृत्ति की प्रकृत भूमि पर विचरते नज़र आते है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं।
Solution:कथन सिंदूर की होली नाटक की दुःखान्त परिणति हमें नाटक में आयी परिस्थितियों तथा जदजन्य समस्याओं को सोचने- समझने के लिए बाध्य करती है और विचारों को डुबो देती है। कारण सिंदूर की होली अद्भुत, गहन, गंभीर, सामान्य से परे नाटक है तथा उसके पात्र अत्यन्त सहज है और स्वाभाविक मनोवृत्ति की प्रकृत भूमि पर विचरते नजर आते है। अतः कथन-I और II दोनों सही है।

90. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

'शिवशंभु के चिट्ठे' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन - I : इन चिट्ठों में से आठ चिट्ठे लार्ड कर्जन के नाम और दो लार्ड मिण्टो के नाम हैं।
कथन - II : खतों में से एक ख़त गुप्त जी ने शाइस्ता खाँ के नाम से फूलर साहब को तथा एक सर सय्यद अहमद के नाम से अलीगढ़ कॉलेज के छात्रों को लिखा है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन । और II दोनों सही हैं।
Solution:कथन- I इन चिट्टे में से आठ चिट्टे लार्ड कर्जन के नाम और दो लार्ड मिण्टो के नाम हैं। कथन II खतों में से एक खत गुप्त जी ने शाइस्ता खाँ के नाम से फूलर साहब को तथा एक सर सय्यद अहमद के नाम से अलीगढ़ कालेज के छात्रों को लिखा है।
कथन- और कथन-II दोनों सही हैं।
'शिवशंभु के चिट्ठे' बालमुकुंद गुप्त का निबन्ध है।
'शिवशंभु के चिट्ठे' का अनुक्रम है-

• बनाम लार्ड कर्जन
• श्रीमान का स्वागत
• वायसराय का कर्तव्य
• पीछे मत फेंकिये
• आशा का अन्त
• एक दुराशा
• विदाई सम्भाषण
• बंग विच्छेद
• लार्ड मिन्टो का स्वागत
• मार्ली साहब के नाम
• आशीर्वाद
• शाइस्ता खां का खत-1
• शाइस्ता खां का खत 2
• सर सय्यद अहमद का खत