पूर्व दत्त भुगतान माध्यम के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यू पी आई) के साथ अंतः प्रचालित संबंधी मार्ग दर्शन डिजिटल वॉलेट को और अधिक व्यवहारिक बनाता है। यू पी आई के माध्यम से वर्धित शुल्क रहित लेन-देन भुगतान बैंक ग्राहकों और व्यापारियों के लिए वॉलेट की स्वीकार्यता में विस्तार कर सकता है।
यह मुख्यतः यू पी आई की व्यवहार्यता परस्पर समान स्तर पर जो एक बैंक से दूसरे बैंक में मध्य लागत रहित भुगतान और बैंक से व्यापारी के मध्य लेनदेन को बढ़ाता है।
यू पी आई के माध्यम से तेजी बढ़ते हुए लेन-देन के अवसर को ध्यान में रखकर ग्राहकों के व्यवहार जो उनके बैंक खातों से शून्य शुल्क से निर्धारित होता है।
अपने अस्तित्व के लिए भुगतानकर्ता बैंक जो जमा राशि स्वीकार कर सकता है परन्तु उन्हें ऋण देने की मनाही है उन्हें यू पी आई इकोसिस्टम का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। उन्हें यू पी आई इकोसिस्टम का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। उन्हें एक भिन्न व्यावसायिक इकाई बनने की आवश्यकता है जिसके अंतर्गत उन्हें पूर्ण सेवा बैंक का लाभ मिलता हो।ऐसे प्रयोग से यू पी आई को विस्तार मिलेगा और इससे परस्पर देशों के सीमा पार से प्रेषित धन के तौर पर विविधीकरण होगा, ग्राहकों को रू-पे क्रेडिट कार्ड के माध्यम से विदेशी पर्यटकों को मुद्रा विनिमय द्वारा राशि दी जा सकेगी और स्थायी निर्देश का उपयोग कर बिलों के भुगतान में वृद्धि होगी।
यू पी आई का डिजिटल रुपये के साथ एकीकृत होना होगा जिसका परीक्षण खुदरा एवं थोक लेन-देन के सन्दर्भ में चल रहा है। डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म स्पर्श रहित पेमेंट्स के बुनियादी ढाँचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहेगा।
इसमें डिजिटल लेन-देन जैसे बिलिंग और क्रेडिट प्रोफाइलिंग के लिए अतिरिक्त यू पी आई कांटेक्टलेस (संसर्ग रहित) सुविधा शामिल है। आरंभिक आशावादी अपेक्षाओं को पार कर गया। लेकिन सिद्धांततः व्यापारी छूट दर में दी गई रियायतों के कारण हुआ है। अगले चरण में व्यापार करने के लिए यू पी आई समाधान देने का कार्य करेगा। इसे कभी न कभी ऋण देने संबंधी व्यवस्था को भी अपने क्रिया कलाप में शामिल करना होगा ताकि यह वाणिज्य का व्यापक माध्यम बन सकें।
बुनियादी ढाँचा में फिटनेस को प्रोत्साहित करना होगा जिससे वित्त के क्षेत्र में नवाचार संभव हो। पेमेंट बैंकों का डिजिटल लेन-देन के साथ सुदृढ़ सह संबंध है। यह निर्माण हो रहे तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यू पी आई दिशा निर्देश के अंतः प्रचालनीयता इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाता है।
नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक अभिकथन A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R के रूप में
अभिकथन A: भुगतानकर्ता बैंक, जो जमा स्वीकार कर सकता है लेकिन ऋण नहीं दे सकता, को उसे यूपीआई इकोसिस्टम का हिस्सा बनाए जाने की आवश्यकता है।
कारण R : यूपीआई के माध्यम से लेन-देन पर वर्धित शुल्क भुगतानकर्ता बैंक ग्राहकों तथा व्यापारियों के बीच वॉलेट की स्वीकृति को बढ़ा सकता है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए
Correct Answer: (a) A और R दोनों सही है और R, A की सही व्याख्या है।
Solution:अभिकथन A: भुगतानकर्ता बैंक, जो जमा स्वीकार कर सकता है लेकिन ऋण नहीं दे सकता, को उसे यूपीआई इकोसिस्टम का हिस्सा बनाए जाने की आवश्यकता है। अतः अभिकथन (A) सही है।
कारण R : यूपीआई के माध्यम से लेन-देन पर वर्धित शुल्क भुगतानकर्ता बैंक ग्राहकों तथा व्यापारियों के बीच वॉलेट की स्वीकृति को बढ़ा सकता है। अतः कारण (R) भी सही है और (R,A) की सही व्याख्या है।