A. विलय अथवा अधिग्रहण की राशि यदि 2000 करोड़ रुपए से अधिक की है तो सी सी आई को सूचित किये जाने की आवश्यकता होगी।
B. संयोजन के मूल्य के निर्धारण हेतु समग्र समय सीमा को 210 दिनों में घटाकर 150 दिन कर दिया गया है।
C. अनन्य विक्रय करार' को 'अनन्य सौदेबाजी करार' से प्रतिस्थापित किया गया है।
D. वे प्रतिष्ठान जो कि समरूप अथवा समान व्यापार में संलग्न नहीं हैं, वे भी अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत प्रतिस्पर्धा विरोधी करार के भाग माने जायेंगे।
E. टाई-अप करारों' पुनर्विक्री मूल्य अनुरक्षण और 'अनन्य विवरण करार' जैसे प्रतिस्पर्धा विरोधी आचरण को पुनर्परिभाषित किया गया है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
Correct Answer: (d) A, B, C, D और E
Solution:प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करता है और प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं जैसे -प्रमुख बाजार स्थिति का दुरूपयोग, कार्टेल और विलय तथा अधिग्रहण को प्रतिबंधित करता है। जो प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। अधिनियम को प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित किया गया है। प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम में निम्नलिखित संशोधन किया-
(i) विधेयक सी सी आई के लिए संयोजन पर प्रथम दृष्टया राय बनाने की समय सीमा को 30 कार्य दिवसों से घटाकर 30 दिन कर देती है।
(ii) विलय अथवा अधिग्रहण की राशि यदि 2000 करोड़ रूपये से अधिक की है तो सी सी आई को सूचित किया जाने की आवश्यकता होगी।
(iii) विधेयक में सी सी आई के लिए ऐसे लेनदेन पर आदेश पारित करने की समय सीमा को 210 दिन से घटाकर 150 दिन करने का प्रस्ताव है।
(iv) 'अनन्य विक्रय करार' को 'अनन्य सौदेबाजी करार' से प्रतिस्थापित किया गया है।
(v) विधेयक अधिनियम के तहत कुछ अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाता है और दंड की प्रकृति को जुर्माना लगाने से बदलकर नागरिक दंड में बदल देता है।
(vi) वे प्रतिष्ठान जो कि समरूप अथवा समान व्यापार में संलग्न नहीं हैं वे भी अधिनियम की धारा 3 (3) के अन्तर्गत प्रतिस्पर्धा विरोधी करार के भाग माने जायेंगे।
(vii) 'टाई-अप करारों' पुर्नर्बिक्री मूल्य अनुरक्षण और 'अनन्य विवरण करार' जैसे प्रतिस्पर्धा विरोधी आचरण को पुनर्परिभाषित किया गया है।