NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

91. अधोलिखितानुच्छेदं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तरं देयम्- विषयस्यानिगर्णस्यान्यतादात्मयप्रतीतिकृत्। सारोपा, स्यान्निगीर्णस्य मता साध्यवसानिका ।।

विषयिणा अनिगीर्णस्य अतिरोहितस्य विषयस्य तेनैव सह तादात्म्यप्रतीतिकृत् सारोपा। इयमेव रूपकालङ्कारस्य बीजम्। रूढावुपादानलक्षणा सारोपा, यथा अश्वः श्वेतो धावति । अत्र हि श्वेतगुणवानश्वोऽनिगीर्णस्वरूपः स्वसमवेतगुणतादात्म्मयेन प्रतीयते ।

प्रयोजने यथा - एते कुन्ताः प्रविशन्ति । अत्र सर्वनाम्ना कुन्तधारिपुरुषनिर्देशात् सारोपत्वम् । रूढौ लक्षणलक्षणा सारोपा, यथा- कलिङ्गः पुरुषो युध्यते। अत्र कलिङ्गपुरुषयोराधाराधेयभावः सम्बन्धः । प्रयोजने यथा आयुर्घतम्। अत्रायुष्कारणमपि घृतं प्रतीयते ।

कार्यकारणभावसम्बन्ध्यायस्तादात्म्येन अन्यवैलक्षण्येनाव्यभिचारेणायुष्करत्वं प्रयोजनम्। यथा वा राजकीये पुरुषे गच्छति इति। अत्र स्वस्वामिभावलक्षणः सम्बन्धः । यथा वा अग्रमात्रेऽवयवभागे 'हस्तोऽयम्।' अत्रावयवावयविभावलक्षणसम्बन्धः । ब्राह्मणेऽपि तक्षाऽसौ । अत्र तात्कर्म्यलक्षणः ।

आयुर्वृतमित्यत्र आयुषः जनकं किम्?  

Correct Answer: (d) घृतम्
Solution:आयुर्वृतमित्यत्र आयुषः जनकं घृतम् अस्ति। आचार्य मम्मट कृत काव्यप्रकाश के अनुसार लक्षणा के 6 प्रकार होते हैं। आचार्य विश्वनाथ कृत साहित्यदर्पण के अनुसार लक्षणा के 80 भेद होते हैं।

92. अनिगीर्णशब्दस्य कोऽर्थः ?

Correct Answer: (a) अतिरोहितः
Solution:अनिगीर्णशब्दस्य अतिरोहितः अस्ति। अर्थात् अनिगीर्णशब्द का अर्थ अतिरोहित है। अर्थात् जो किसी विषयवस्तु के द्वारा आक्षेपित न किया जाए उसे अनिगीर्ण कहते हैं। अतः विकल्प (a) सही है।

93. रूपकालङ्कारस्य बीजं किम्?

Correct Answer: (c) सारोपालक्षणा
Solution:रूपकालङ्कारस्य बीजं 'सारोपालक्षणा' अस्ति। अर्थात् रूपकअलङ्कार का बीज का सारोपालक्षणा है। अर्थात् वस्तु का आरोप वस्तु द्वारा अनिगीर्ण (निगला नहीं गया) और उसके द्वारा नष्ट न किया गया, उसके साथ तादात्म्य का अनुभव करता है। यही रूपक अलंकार का बीज है। यथा अश्वः श्वेतो धावति । सफेद घोड़ा दौड़ता है। यहाँ श्वेत गुणों वाला घोड़ा, अनिगीर्ण रूप है। अपने संयुक्त गुणों की पहचान से पहचाना जाता है।

94. 'कलिङ्गः पुरुषो युध्यते' इत्यत्र कलिङ्ग-पुरुषयोः कः सम्बन्धः ?

Correct Answer: (b) आधाराधेयभावसम्बन्धः
Solution:'कलिङ्गः पुरुषो युध्यते' इत्यत्र कलिङ्ग-पुरुषयोः आधाराधेयभावसम्बन्धः अस्ति। अर्थात् 'कलिङ्ग पुरुषो युध्यते' यहाँ कलिङ्ग पुरुष का आधाराधेयभाव सम्बन्ध है। स्व स्वामिभाव सम्बन्ध 'राजा का नौकर' 'नृपेषु भृत्यः में स्वस्वामिभाव सम्बन्ध है। अपने अन्दर से अपनी कलाओं को प्रकट करना ही जन्य जनक भाव सम्बन्ध है।' अतः विकल्प (b) सही है।

95. हस्त तदग्रभागयोः कः सम्बन्धः ?

Correct Answer: (c) अवयवावयविभावसम्बन्धः
Solution:हस्त तदग्रभागयोः अवयवावयविभाव सम्बन्धः अस्ति। अर्थात् हाथ और उसके अग्र भाग को अवयवावयविभाव सम्बन्ध है। और कार्य कारण भावसम्बन्ध में घट और मिट्टी का सम्बन्ध है। मेज पर पुस्तक आधार आधेय सम्बन्ध है। चर्मकार, कर्मकार को तात्पर्य सम्बन्ध है। अतः विकल्प (c) सही है।

96. अधोलिखितानुच्छेदं पठित्वा प्रश्नाम् उत्तरं देयम्-

यदा चक्षुरादिना घटगतरूपादिकं गृह्यते घटे श्यामरूपमस्तीति, तदा चक्षुरिन्द्रियं घटरूपमर्थः, अनयोः सन्निकर्षः संयुक्तसमवाय एव, चक्षुः संयुक्ते घटे रूपस्य समवायात्। एवं मनसाऽऽत्मसमवेते सुखादो गृह्यमाणे अयमेव सन्निकर्षः ।

यदा पुनश्चक्षुषा घटरूपसमवेतं रूपत्वादिसामान्यं गृह्यते तदा चक्षुरिन्द्रियं रूपत्वादिसामान्यमर्थःस अनयोः सन्निकर्षः संयुक्तसमवेतसमवाय एव, यतश्चक्षुस्संयुक्ते घटे रूपं समवेतं तत्र रूपत्वस्य समवायात्। यदा श्रोत्रेन्द्रियेण शब्दो शब्दत्वस्य समवायात्।

यदा च मनस्संयुक्त आत्मनि सुखाद्यभावो गृह्यते 'अहं सुखरहितः इति तदा मनः संयुक्तस्यात्मनः सुखाद्यभावो विशेषणम्।' यदा श्रोत्रसमवेते ग कारे घत्वाभावो गृह्यते तदा श्रोत्रसमवेतस्य गकारस्य घत्वाभावो विशेषणम् ।

सुखप्रत्यक्षे कः सन्निकर्षः ?

Correct Answer: (c) संयुक्तसमवायसन्निकर्षः
Solution:सुखप्रत्यक्ष 'संयुक्तसमवायसन्निकर्षः' भवति । अर्थात् सुख प्रत्यक्ष में 'संयुक्तसमवायसन्निकर्ष' होता है। न्यायदर्शन के अनुसार सन्निकर्ष छः प्रकार का होता है, जिसे इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष भी कहते हैं-

1. संयोग
2. संयुक्त समवाय
3. संयुक्त समवेत समवाय
4. समवाय
5. समवेत समवाय
6. विशेषण विशेषभाव व सन्निकर्ष ।

97. आत्मनि सुखाभावस्य प्रत्यक्षे कः सन्निकर्षः ?

Correct Answer: (b) विशेषणविशेष्यभावसन्निकर्षः
Solution:आत्मनि सुखाभावस्य प्रत्यक्षे 'विशेषणविशेष्यभावसन्निकर्षः' भवति । आत्मा में सुख का अभाव यह प्रत्यक्ष प्रमाण में 'विशेषणविशेष्यभाव सन्निकर्ष' है। 'विशेषणविशेष्यभावसन्निकर्ष' जब चक्षु से संयुक्त भूतल में घट के अभाव का प्रत्यक्ष होता है,

जिसे 'इह भूतले घटो नास्ति- इस भू- भाग में घटा नहीं।' इसी प्रकार जब मन से संयुक्त आत्मा में सुखादि गुणों के अभाव का प्रत्यक्ष होता है जिसे 'अहं सुखरहितः सुखहीन हूँ ऐसे शब्दों से व्यवहृत किया जाता है

तब भी मन से संयुक्त आत्मा में सुखाभाव के विशेषण होने से विशेषणविशेष्यभाव मनः संयुक्तविशेषणतः सन्निकर्ष होता है और जब श्रोतसमवेत 'ग' वर्ण में घत्व के अभाव का प्रत्यक्ष है उस समय भी विशेषणविशेष्भाव अर्थात श्रोतसमवेतविशेषणता सन्निकर्ष होता है।

98. रूप-रूपत्वयोः कः सम्बन्धः ?

Correct Answer: (b) समवायसम्बन्धः
Solution:रूप रूपत्वयोः 'समवायसम्बन्धः' भवति । अर्थात् रूप और रूपत्व में समवायसम्बन्ध सन्निकर्ष होता है। जब चक्षु से घट रूपादिक् का ग्रहण होता है घट में श्याम रूप है, तब चक्षु इन्द्री का घट रूप अर्थ है इनका सन्निकर्ष होता है।

99. शब्दत्वजातिप्रत्यक्षे कः सन्निकर्षः ?

Correct Answer: (d) समवेतसमवायसन्निकर्षः
Solution:शब्दत्वजातिप्रत्यक्षे समवेतसमवायसन्निकर्षः भवति गद्यानुसार शब्दत्व जाति में प्रत्यक्षानुसार 'समवेतसमवाय सन्निकर्ष होता है।'

समवेतसमवायसन्निकर्षः जब शब्द में समवाय सम्बन्ध से रहने वाली शब्दत्व आदि जातियों का श्रोत्र से प्रत्यक्ष होता है तब श्रोत्र इन्द्रिय होता है।

100. समवायेव शब्दः कुत्र तिष्ठति ?

Correct Answer: (a) श्रोत्रे
Solution:समवायेन शब्दः 'श्रोत्रे तिष्ठति ।' गद्यानुसार समवाय सम्बन्ध से शब्द 'श्रोत्र' में रहता है। श्रोत-कान से शब्द का ग्रहण श्रवण होता है, तब श्रोत्र इन्द्रिय होता है, शब्द अर्थ होता है और शब्द के साथ का समवाय सन्निकर्ष होता है।