NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

21. नृपगुणैः अघृष्यः अभिगम्यश्च दिलीपः केन उपमितः ?

Correct Answer: (a) समुद्रेण
Solution:नृपगुणैः अघृष्यः अभिगम्यश्च दिलीपः समुद्रेण उपमितः |

यहाँ राजा दिलीप के गुणों का उपमान समुद्र से दिया गया है।
भीमकान्तैः नृपगुणैः स बभूवोपजीविनाम् ।
अघृष्यश्चाभिगम्यश्च यादोरत्नैरिवार्णवः ।।
रघुवंश महाकाव्य में महाराज दिलीप के वर्णन में प्राप्त होता है।

22. अधोलिखितेषु ऊष्माणो न भवन्ति-

A. व
B. र
C. ह
D. भ
E. ष

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) A, B, D केवलम्
Solution:उपरिलिखितेषु व, र, भ इति ऊष्माणो न भवति उपरिलिखितों में व, र, भ यह ऊष्म वर्ण नहीं हैं, शलो उष्माणः' शल् (श ष स ह) प्रत्याहार में आने वाले वर्णों की ऊष्म संज्ञा होती है। यहाँ ह, तथा ष उष्म वर्ण है व, र, भ ये उष्म संज्ञक नहीं है।

23. स्वधाकारपूर्वकम् अन्नं प्रदीयते-

Correct Answer: (b) पितृभ्यः
Solution:स्वधाकारपूर्वकं पितृभ्यः अन्नं प्रदीयते । स्वधापूर्वक पितरों को अन्न दिया जाता है। "नमः स्वस्ति स्वाहा स्वधाऽलं वषड् योगाच्च" सूत्र से नमः, स्वस्ति, स्वाहा, स्वधा, अलं वषड् शब्दों के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।

24. 'परेषः' इति सूत्रे कस्य गणस्य मृष्धातोः ग्रहणम्?

Correct Answer: (a) दिवादिगणस्य
Solution:"परे षः” इति सूत्रे दिवादिगणस्य मृष्धातोः ग्रहणम् भवति । “परेषः" इस सूत्र में मृष् धातु का ग्रहण दिवादिगण से हुआ है। यह सूत्र परि + मृष् दिवादिगणी धातु से परस्मैपद का विधान होता है।

25. समुचितं मेलयत -

सूची १सूची २
A. ज्ञानविज्ञानयोगः1. चतुर्थ अध्यायः
B. ज्ञानकर्मसन्न्यासयोगःII. त्रयोदशाध्यायः
C. अक्षरब्रह्मयोगःIII. सप्तमाध्यायः
D. क्षेत्र क्षेत्रज्ञविभागयोगःIV. अष्टमाध्यायः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) A-III, B-I, C-IV, D-II
Solution:गीताध्यायानां समुचित मेलनं भवति ।
सूची १सूची २
A. ज्ञानविज्ञान योगIII. सप्तमाध्यायः
B. ज्ञानकर्मसंन्यासयोगःI. चतुर्थ अध्यायः
C. अक्षरब्रह्मयोगःIV. अष्टमाध्यायः
D. क्षेत्र-क्षेत्रविभागयोगःII. त्रयोदशाध्यायः

गीतोपनिषद् में 18 अध्याय तथा 700 श्लोक प्राप्त होते हैं। अतः विकल्प (b) सही है।

26. मेध्यस्य अश्वस्य, क्रमशः शिरः व्याप्तमुख आत्मउदर-पृष्ठानि भवन्ति-

A. संवत्सरः
B. द्यौः
C. वैश्वानराग्निः
D. अंतरिक्षम्
E. उषा

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत - 

Correct Answer: (b) E, C, A, D, B
Solution:मध्यस्य अश्वस्य, क्रमशः शिरः व्याप्तमुखः - आत्मउदर पृष्ठानि 'उषा, वैश्वानराग्निः, संवत्सरः, अन्तरिक्षम्, द्यौः भवति । मेध्य अश्व का क्रमशः शिर-व्याप्त मुख - आत्म-उदर पृष्ठ उषा, वैश्वानराग्नि, संवत्सर, अन्तरीक्ष द्यौः होते हैं।

27. समीचीनं मेलयत-

सूची १सूची २
A. ऐतरेयब्राह्मणम्I. सामवेदः
B. शाट्यायनब्राह्मणम्II. शाङ्खायनः
C. कौषीतकिब्राह्मणम्III. यजुर्वेदः
D. शतपथब्राह्मणम्IV. ऋग्वेदः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A-IV, B-I, C-II, D-III
Solution:ब्राह्मणानां समुचित समीचीनं मेलनं अस्ति-
सूची १सूची २
A. ऐतरेयब्राह्मणम्महिदासः
B. शाट्यायनब्राह्मणम्सामवेदः
C. कौषीतकिब्राह्मणम्शाङ्खायनः
D. शतपथब्राह्मणम्यजुर्वेदः

ऐतरेय ब्राह्मण का सम्बन्ध महिदास ऐतरेय से है। शाट्यायन ब्राह्मण का सम्बन्ध सामवेद से है कोषितकि ब्राह्मण का सम्बन्ध शाखायन से है। शतपथब्राह्मण का सम्बन्ध यजुर्वेद से है।

28. आचार्यकपिलदेवद्विवेदिमतानुसारेण ध्वनिपरिवर्तनस्य आभ्यन्तरकारणानामयं क्रमः विद्यते -

A. अशिक्षा
B. अनुकरणस्यापूर्णता
C. भावावेशः
D. लघुकरणप्रवृत्तिः
E. शीघ्रभाषणम्

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (c) D, B, A, E, C
Solution:आचार्यकपिलदेवद्विवेदी मतानुसारेण ध्वनिपरिवर्तनस्य आभ्यन्तरकारणानामयं "लघूकरण प्रवृत्तिः अनुकरणस्यापूर्णता, अशिक्षा, शीघ्रभाषणम्, भावावेशः” क्रमः अस्ति। आचार्य कपिलदेव द्विवेदी के अनुसार ध्वनि परिवर्तन आभ्यन्तर कारणों का क्रम "लघुकरण प्रवृत्ति, अनुकरण की अपूर्णता, अशिक्षा, शीघ्रभाषणम् भावावेश है।

29. परस्परं समुचितं मेलयत -

सूची १सूची २
A. सीम्1. परिग्रहार्थीयः
B. नूनम्II. परिभयार्थीयः
C. त्वIII. विचिकित्सार्थीयः
D. न + इत्IV. विनिग्रहायर्थीयः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) A-I, B-III, C-IV, D-II
Solution:कथनानां समुचितं मेलनं अस्ति।
सूची १सूची २
A. सीमपरिध्यर्थः
B. तुनुम्विचिकित्सार्थः
C. त्वनिश्चितार्थः
D. न + हिपरिभाषार्थः

निपात तीन प्रकार के होते हैं-

प्रकारउदाहरण
उपमार्थक निपातइव, न, चित्, नु
कर्मोपसंहारार्थक निपातन, वा, आ, ह
पूर्णवाचक निपाततुनुम्, खलु, हि, अथ

30. अधोलिखितेषु शाखायनारण्यके जनपदाः वर्णिताः-

A. कुरुपाञ्चालः
B. कङ्गोदः
C. उशीनरः
D. मत्स्यः
E. कलिङ्गः

 अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (c) A, C, D केवलम्
Solution:उपरिलिखितेषु शाखायनारण्यके कुरु पाञ्चालः उशीनरः मत्स्यः जनपदाः वर्णिताः सन्ति । उपरिलिखितों में शाखायन आरण्यक में कुरुपाञ्चाल, उशीनर, मत्स्य जनपद का उल्लेख है।