NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

31. साधयवैधभ्यां प्रत्यवस्थानं भवति-

Correct Answer: (c) जातिः
Solution:साधर्म्यवैधर्माभ्यां प्रत्यवस्थानं जातिः भवति । साधर्म्यवैधर्म का प्रत्यवस्थान जाति होता है। न्यायदर्शन के अनुसार सोलह पदार्थ बताये गये हैं। प्रमाण, प्रमेय, संशय, प्रयोजन, दृष्टान्त, सिद्धान्त, अवयव, तर्क, निर्णय, वाद, जल्प, वितण्डा, हेत्वाभास, छल, जाति, निग्रहस्थान ।

32. "अणो व्याचः" इति सूत्रेण किं विधीयते?

Correct Answer: (d) फिञ्
Solution:"अणो व्यचः” इति सूत्रेण फिञ् प्रत्ययः विधीयते । “अणो व्याचः” सूत्र से फि प्रत्यय होता है। 'तस्या पत्यम्' सूत्र से अण् प्रत्यय होता है तद्धित प्रत्यय अपत्य अर्थ में होते हैं। पाणिनीय व्याकरण में अपत्य अर्थ में 11 प्रत्यय होते हैं।

33. गोपथब्राह्मणं एतत्समन्बद्धं भवति -

Correct Answer: (d) अथर्ववेदसम्बद्धम्
Solution:गोपथ ब्राह्मणं अथर्ववेद सम्बद्धं भवति । गोपथ ब्राह्मण अथर्ववेद से सम्बन्धित है। अथर्ववेद का यह अकेला ब्राह्मण प्राप्त होता है। ऋग्वेद सम्बन्धी ब्राह्मण ऐतरेय ब्राह्मण तथा कौषीतकि ब्राह्मण। शुक्ल यजुर्ववेद का ब्राह्मण शतपथ ब्राह्मण, कृष्ण यजुर्वेद का ब्राह्मण तैत्तिरीय ब्राह्मण, मैत्रायणि ब्राह्मण आदि हैं।

सामवेद के ब्राह्मण-
1. प्रञ्चविंश, 2. षड्विंश 3. सामविधान 4. आर्षेय, 5. दैवत 6. छान्दोग्योपनिषद् 7. संहितोपनिषद् 8. वंश ब्राह्मण 9. जैमिनीय (तवलकार) ब्राह्मण अथर्ववेद का एकमात्र गोपथ ब्राह्मण उपलब्ध है।

34. समुचितं मेलयत -

सूची १सूची २
A. कैकेयीवरयाचनाI. सुन्दरकाण्डे
B. अशोकवनविध्वंसनम्II. किष्किन्धाकाण्डे
C. बालीबधम्III. अरण्यकाण्डे
D. जटायुर्मरणम्IV. अयोध्याकाण्डे

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत - 

Correct Answer: (d) A-IV, B-I, C-II, D-III
Solution:कथनानां समुचित मेलनं-
सूची १सूची २
A. कैकेयीवरयाचनाअयोध्याकाण्डे
B. अशोकवनविध्वंसनम्सुन्दरकाण्डे
C. बालीबधम्किष्किन्धाकाण्डे
D. जटायुर्मरणम्अरण्यकाण्डे

"रामायण' महामुनि बाल्मीकि की रचना है। इसमें सात काण्ड तथा 24 हजार श्लोक हैं। कैकेयी वर याचना प्रसंग अयोध्याकाण्ड में प्राप्त होता है। अशोक वन विध्वसेन प्रसंग सुन्दरकाण्ड में प्राप्त होता है। बालीवध प्रसंग रामायण के किष्किन्धा काण्ड में प्राप्त होता है। "जटायुर्मरण" प्रसंग अरण्यकाण्ड में प्राप्त होता है।

35. किंवदन्त्याधारेण कालिदासः अन्तिमसमये कस्य राज्ञः राजत्वकाले वेश्यया हतः ?

Correct Answer: (b) कुमारदासस्य
Solution:किंवदन्त्याधारेण कालिदासः अन्तिम समये कुमारदासस्य राज्ञः राजत्वकाले वेश्यया हतः। किंवदन्ती के आधार पर महाकवि कालिदास अन्तिम समय में कुमार दास राजा के राजत्वकाल में वेश्या द्वारा मारे गये, किंवदन्ती के अनुसार कालिदास के मित्र कुमार दास के आमंत्रण पर महाकवि कालिदास सिंहलदीप लंका जाते हैं,

वहाँ धोखे से एक वेश्या धन के लालच में महकवि कालिदास की हत्या करवा देती है। कालिदास की प्रमुख रचनायें सात हैं-1. ऋतु संहार, 2. मेघदूत, 3. रघुवंश महाकाव्य, 4. कुमारसम्भवमहाकाव्य, 5. विक्रमोर्वशीयम्, 6. मालविकाग्नि मित्रम्, 7. अभिज्ञानशाकुन्तलम् महाकवि कुमारदास की रचना "जानकीहरणम्” है।

36. "परस्तु शब्दसन्तानः प्रचयापचयात्मकः " इत्यादिकारिकायां 'शब्दसन्तानः' इति शब्दस्य कोऽर्थः?

Correct Answer: (b) शब्दतरङ्गः
Solution:"परस्तु शब्दसन्तानः प्रचयापचयात्मकः” इत्यादि कारिकायाम् शब्द सन्तानः इति शब्दस्य 'शब्दतरङ्गः' इति अर्थः अस्ति "परस्तु शब्दसन्तानः प्रचयापचयात्मकः” इस कारिका में "शब्द सन्तान" इस शब्द का अर्थ शब्दतरङ्ग है।

37. एतेषु विकर्षणादिः भवति-

Correct Answer: (c) सन्तानः
Solution:उपपरिलिखितेषु 'सन्तानः' विकर्षणादिः भवति । तैत्तरीय उपनिषद् में शिक्षा के 'छः' भेद बतलाए गए हैं, जो इस प्रकार है- वर्णः, स्वरः, मात्रा, बलम्, साम, सन्तान, इत्युक्तः शिक्षाध्यायः ।।
1.वर्णः वर्णोऽकारादि (वर्ण अकार आदि)
2. स्वरः स्वरोदात्तादि (स्वरों का उदात्त आदि)
3. मात्रा मात्रा हस्वादिः (मात्रा को हस्व आदि)
4. बलम् बलं स्थान प्रयत्नौ (बल को स्थान प्रयत्न)
5. साम-साम निषादादि (निषद आदि स्वरों को साम कहते हैं)
6. सन्तान सन्तानों विकर्षणादिः (सन्तान को विकर्षण) कहते हैं।

38. विवेकानन्दविजयकाव्यस्य रचयिता भवति -

Correct Answer: (c) श्रीधरभास्करवर्णेकरः
Solution:विवेकानन्दविजयकाव्यस्य रचयिता 'श्रीधरभास्करवर्णेकरः' भवति अर्थात् विवेकानन्दविजयकाव्य के रचयिता 'श्रीधरभास्कर वर्णेकर' है। डॉ. श्रीधर भास्कर वर्णेकर संस्कृत के विद्वान तथा राष्ट्रवादी कवि थे। इनका जन्म नागपुर में हुआ था। उन्होंने बहुत से काव्य और श्लोकों की रचना की। 'श्रीशिवराज्योदयम्' उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना है। इसी रचना पर 1974 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (संस्कृत) प्रदान किया गया है।

• अम्बिकादत्तव्यास की रचना 'शिवराजविजयम्' संस्कृत साहित्य का उपन्यास ग्रन्थ है, सामवतम् नाटक, शिव विवाह (खण्डकाव्य) आदि रचना है।
• विल्हण की रचना विक्रमांकदेवचरित, चौरपञ्चाशिका, कर्णसुन्दरी नाटिका।
• बी. राघवन की प्रसिद्ध रचना 'अनारकली' इनकी अन्य रचना है- महाकाव्य-श्री मुत्तुस्वामी दीक्षितचरितम्।

लघुकाव्य-पैशुन्य, महात्मा, फाल्गुन, कर्मयोगी, ऊषा, मध्याह्नः प्रतीक्षा। संस्कृत की अन्य कृतियाँ संस्कृत रविन्द्रम्, वाल्मीकि प्रतिभा, नरीर पूजा, इत्यादि।

अतः विकल्प (c) सही है।

39. शुकनाशोपदेशाधारेण अधोलिखितेषु अनर्थपरम्परायाम् अन्तर्भवन्ति-

A. गर्भेश्वरत्वम्
B. अमानुषशक्तित्वम्
C. अविद्याव्याधित्वम्
D. अप्रतिमरूपत्वम्
E. द्रव्यलोलुपत्वम्

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत - 

Correct Answer: (b) A, B, D केवलम्
Solution:शुकनाशोपदेशाधारेण उपरिलिखितेषु अनर्थपरम्परायाम् अन्तर्भविन्त 'गर्भेश्वरत्वम्, अमानुषशक्तित्वम्, अप्रतिरूपत्वम् अस्ति उपरिलिखितेषु में शुकनाशोपदेश के अनुसार अनर्थों की 'चार' महाशक्ति बताई गई है, जो इस प्रकार है गर्भेश्वरत्वम् - गर्भ में रहने के समय से अर्थात् कुलपरम्परा से ही प्राप्त प्रभुता (स्वामित्व) नई जवानी (नवीन युवावस्था) अनुपम सौन्दर्य तथा अलौकिक (असाधारण) शक्ति का होना, ये सब सुनिश्चित रूप से अनर्थ की लम्बी (बड़ी) परम्परा (कड़ी) है। इस विषय का साम्य हितोपदेश में भी प्राप्त होता है।

"यौवनं धनसम्पत्तिः प्रभुत्वमविवेकिता।
एकैकमव्यनर्थाय किं पुनस्तच्चतुष्टयम्।।"
अतः विकल्प केवल (b) सही है।

40. ऋग्वेदस्य मण्डलक्रमे कति अनुवाकाः भवन्ति ?

Correct Answer: (d) 85
Solution:ऋग्वेदस्य मण्डलक्रमे 85 अनुवाकाः भवन्ति ? अर्थात् ऋग्वेद के मण्डल क्रम में 85 अनुवाक होते हैं। ऋग्वेद का विभाजन दो प्रकार से किया गया है-

(i) ऐतिहासिक विभाजन, (ii) पाठचरक विभाजन ऋग्वेद में कुल 10 (दस) मण्डल है। 1028 सूक्त कुल मन्त्रों की संख्या 10552 है 85 अनुवाक है। ऋग्वेद का दूसरा विभाजन 'अष्टक क्रम' कहलाता है। ऋग्वेद में कुल आठ अष्टक व कुल अध्याय 64, वर्ग 2024, मंत्र 10552 ऋग्वेद में बालखिल्य सूक्तों सहित = 1028 सूक्त है।