NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

51. "जयति तरुणयोषित् लोचनानां विलासः इति कुत्रोक्तम्?

Correct Answer: (c) नलचम्प्वाम्
Solution::"जयति तरुणयोषित् लोचनानां विलासः” इति 'नलचम्प्वाम्' विद्यते । यह सूक्ति नलचम्पू में प्राप्त होती है। जयति मधुसहायः सर्वसंसारवल्लीजननजरठकन्दः कोऽपि कन्दर्पदेवः । नदनुपुनरपाङ्गोत्सङ्गसञ्चारितानां जयति तरुणयोषिल्लोचनानां विलासः ।

52. अधोलिखितेषु वेदपुरुषस्य मुख श्रोत्र-पाद हस्त चक्षुः- स्थानानि भवन्ति क्रमशः-

A. ज्योतिषम्
B. छन्दः
C. निरुक्तम्
D. कल्पः
E. व्याकरणम्

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत - 

Correct Answer: (b) E, C, B, D, A
Solution:उपर्युक्तेषु वेद पुरुषस्य मुख श्रोत पाद हस्त चक्षुः एतानि क्रमशः भवन्ति मुखं व्याकरणम्, श्रोतं निरुक्तं, पादौ छन्दौ (मात्रिकं, वर्णिकम्) हस्तौ कल्पम्, चक्षुः ज्योतिषम् भवति । अर्थात् पाणिनीयशिक्षा में कहा गया है-

|छन्दः पादौ तु वेदस्य हस्तौः कल्पोऽथ पठ्यते |
ज्योतिषामयनं चक्षुर्निरुक्तं श्रोतमुच्यते।।
शिक्षा प्राणं तु वेदस्य मुखं व्याकरणं स्मृतम्।
तस्मात्साङ्गमधीत्यैव ब्रह्मलोके महीयते ।।
अतः विकल्प (b) सही है।

53. रुद्रदाम्नः गिरनाराभिलेखे आहत्य कति वाक्यानि सन्ति?

Correct Answer: (d) द्वादश
Solution:ुद्रदाम्नः गिरनाराभिलेखे आहत्य द्वादश वाक्यानि सन्ति । अर्थात् रुद्रदाम्न गिरनार अभिलेख में बारह वाक्य खुदे हुए है। भाषा संस्कृत है और इस अभिलेख की लिपि ब्राह्मी है इस अभिलेख का समय 150 ई., इस अभिलेख का विषय सुदर्शन तड़ाग का इतिवृत्त और पुनर्निर्माण तथा रुद्रदामन की राजनीतिक उपलब्धियों का वर्णन है।

इसमें सुदर्शन झील का वर्णन - "सिद्धं इदं तड़ागं सुदर्शनं गिरिनगराद्' उल्लिखित है और सुदर्शन का निर्माता पुष्यगुप्त था और पुनर्निर्माता - चक्रपालित था गिरिनार के तड़ाग से सम्बन्धित कनिष्क कुषाण है अतः विकल्प (d) सही है।

54. अर्थापत्तेः फलं किम्?

Correct Answer: (b) उपपादकज्ञानम्
Solution:र्थापत्तेः फलं उपपादक ज्ञानम् अस्ति। अर्थात् अर्थापति का फल उपपादक ज्ञान होता है, मीमांसक और वेदान्तियों के अनुसार अर्थापत्ति का लक्षण है-

"अनुपपद्यामानार्थदर्शनात् तदुपपादकीभूतार्थान्तर कल्पनम् अर्थापत्तिः” अनुपद्यमान अर्थ को देखकर उसके उपपादक अर्थ की कल्पना करना अर्थापत्ति कहलाती है अतः विकल्प (b) सही है।

55. "कस्मै देवाय हविषा विधेम" इति मकुटपादः कस्मिन् सूक्ते प्राप्यते ?

Correct Answer: (d) हिरण्यगर्भसूक्ते
Solution:"कस्मै देवाय हविषा विधेम” इति मकुटपादः हिरण्यगर्भ सूक्ते प्राप्यते। इस सूक्त में 10 मंत्र है, इस सूक्त के ऋषि प्रजापति यह दार्शनिक सूक्त है। इसके अंतिम मंत्र को छोड़कर सभी मंत्रों के अंतिम पाद में "कस्मै देवाय हविषा विधेम" कहा गया है। इस सूक्त में त्रिष्टुप् छन्द है। अतः विकल्प (d) सही है।

56. परस्परं समुचितं मेलयत -

सूची १सूची २
A. सुनुयातI. लङ्लकारः
B. सूयात्II. आशिर्लिङ्लकारः
C. असोषतIII. विधिलिङ्लकारः
D. असुनुतIV. लुट्लकारः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (a) A-III, B-II, C-IV, D-I
Solution:परस्परं समुचितं अस्ति।
सूची १सूची २
A. सुनुयातIII. विधिलिङ्लकारः
B. सूयात्II. आशिर्लिङ्लकारः
C. असोषतIV. लुट्लकारः
D. असुनुत्I. लङ्लकारः

57. कुन्तकस्य षड्विधवक्रतासु नान्तर्भवन्ति-

A. रसपूर्वार्थवक्रता
B. वर्णविन्यासवक्रता
C. प्रकरणपरार्धवक्रता
D. रीतिवक्रता
E. पदपूर्वार्धवक्रता

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-  

Correct Answer: (a) A, C, D केवलम्
Solution:कुन्तकस्य षड्विधवक्रतासु, रसपूर्वार्थवक्रता प्रकरणपरार्धवक्रता रीतिवक्रता नान्तर्भवति । अर्थात् कुन्तक के छः प्रकार की वक्रता में रसपूर्वार्थवक्रता, प्रकरणपरार्धवक्रता और रीति वक्रता का अन्तभाव नहीं किया जाता है।

कुन्तक की वक्रता के भेद हैं-

1. वर्णविन्यास वक्रता
2. पदपूर्वार्द्धवक्रता
३.प्रत्ययाश्रितवकता
4. वाक्य वक्रता
5. प्रकरणवक्रता
6. प्रबन्धवक्रता

अतः विकल्प (a) सही है।

58. दूतप्रणिधिप्रकरणे दूतकर्मणामयं क्रमः सूचितः-

A. प्रपूजया नोसिक्तः
B. वसेदविसृष्टः
C. स्त्रियः पानं च वर्जयेत्
D. परेषु बलित्वं न मन्यते
E. वाक्यमनिष्टं सहेत

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (c) B, A, D, E, C
Solution:दूतप्रणिधिप्रकरणे दूतकर्मणामयं क्रमः अस्ति-

वसेदविसृष्टः प्रपूजया नोसिक्तः परेषु बलित्वं न मन्यते वाक्यं अनिष्टं सहेत स्त्रियः पानं च वर्जयेत्।

अर्थात् दूत प्रणिधि प्रकरण में दूत के कार्यों का क्रम है- अविसृष्ट निवास, पूजा से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए, दूसरों पर बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए, अनिष्ट वाक्यों को भी सहन नहीं करना चाहिए, अनुचित स्त्रियों एवं मदिरापान को त्यागना चाहिए अतः विकल्प (c) सही है।

59. परस्परं समुचितं मेलयत -

सूची १सूची २
A. तनुष्यताम्I. लुट् लकारः
B. तनितास्यथII. लोट् लकारः
C. तडुनम्III. आशिर्लिङ् लकारः
D. तन्नाताम्IV. विधिलिङ् लकारः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) A-IV, B-I, C-II, D-III
Solution:परस्परं समुचितं अस्ति-
सूची १सूची २
A. तनुष्यताम्IV. विधिलिङ् लकारः
B. तनितास्यथI. लुट् लकारः
C. तनुष्याम्II. लोट् लकारः
D. तन्नाताम्III. आशिर्लिङ्

60. "मातरि साधुर्निपुणो वा" इत्यत्र कस्मिन् अर्थे सप्तमी?

Correct Answer: (c) अर्चायाम्
Solution:“मातरि साधुर्निपुणो वा” इत्यत्र आचार्यम् अर्थ सप्तमी। सूत्र-साधुनिपुणाभ्यामर्चायां सप्तम्यत्रतेः। अर्थात् साधु और निपुण शब्द जब पूजा (आदर) अर्थ में हो तो इनके साथ सप्तमी विभक्ति होती है और यदि इनके साथ प्रति का प्रयोग हुआ हो तो सप्तमी नहीं होगी जैसे मातरि साधुर्निपुणो वा। अतः विकल्प (c) सही है।