A. प्रपूजया नोसिक्तः
B. वसेदविसृष्टः
C. स्त्रियः पानं च वर्जयेत्
D. परेषु बलित्वं न मन्यते
E. वाक्यमनिष्टं सहेत
अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-
Correct Answer: (c) B, A, D, E, C
Solution:दूतप्रणिधिप्रकरणे दूतकर्मणामयं क्रमः अस्ति-वसेदविसृष्टः प्रपूजया नोसिक्तः परेषु बलित्वं न मन्यते वाक्यं अनिष्टं सहेत स्त्रियः पानं च वर्जयेत्।
अर्थात् दूत प्रणिधि प्रकरण में दूत के कार्यों का क्रम है- अविसृष्ट निवास, पूजा से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए, दूसरों पर बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए, अनिष्ट वाक्यों को भी सहन नहीं करना चाहिए, अनुचित स्त्रियों एवं मदिरापान को त्यागना चाहिए अतः विकल्प (c) सही है।