NTA यू.जी.सी. नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 योगा (Yoga)

Total Questions: 100

91. नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्राण एक ऐसी सूक्ष्म शक्ति है जिससे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड संचालित हो रहा है। समष्टि प्राण एवं व्यष्टि प्राण के भेद से प्राण दो प्रकार का है। जिस प्रकार समष्टि प्राण के द्वारा सृष्टि का कण-कण स्पन्दित हो रहा है, उसी प्रकार हमारा यह व्यष्टि शरीर भी प्राण द्वारा ही संचालित हो रहा है। प्राण ही जीवनशक्ति के रूप में इस शरीर को गतिशील बनाये हुए है।

शरीर में इसका प्रवावह नाड़ियों के माध्यम से होता है। नाड़ियों के द्वारा ही सभी कोशिकाओं के क्रियाकलाप नियन्त्रित होते हैं। प्राण के प्रवावह में रुकावट उत्पन्न होने पर शरीर में विषाक्त तत्व जमा होने लगते हैं। प्राण का प्रवाह सुचारु होते ही शरीर से विषैले तत्व निष्कासित हो जाते हैं। परिणाम स्वरूप शरीर के सभी संस्थान स्वस्थ हो जाते है।

प्राण के सुचारु होने से शरीर में लोच उत्पन्न हो जाता है, परिणाम स्वरूप योग की क्रियाओं को सहजता से अभ्यास किया जा सकता है। इसी के साथ शरीर में स्थिरता और सौम्यता उत्पन्न हो जाती है। इसीलिए प्राण ही जीवन का आधार है। तभी शास्त्रों में प्राण को सबसे बड़ा भाई, सखा आदि बताया है।

कोशिकाओं के क्रियाकलाप किसके द्वारा नियन्त्रित होते हैं?

Correct Answer: (b) नाड़ियों के द्वारा
Solution:कोशिकाओं के क्रियाकलापनाडियों के द्वारा नियंत्रित होते है।

92. किसके सुचारु होने से शरीर में लोच उत्पन्न होता है?

Correct Answer: (b) प्राण
Solution:प्राण के सुचारू होने से शरीर में लोच उत्पन्न होता है।

93. जीवन का आधार क्या है?

Correct Answer: (c) प्राण
Solution:जीवन का आधार प्राण है।

94. किसके प्रवाह में रुकावट उत्पन्न होने पर शरीर में विषाक्त तत्व जमा होते हैं?

Correct Answer: (c) प्राण
Solution:प्राण के प्रवाह में रूकावट उत्पन्न होने पर शरीर में विषाक्त तत्व जमा होते हैं।

95. सृष्टिके कण-कण किस प्राण से स्पन्दित हो रहा है?

Correct Answer: (a) समष्टि प्राण
Solution:सृष्टि के कण-कण समष्टि प्राण से स्पन्दित हो रहा है।

96. नीचे दिए गए गधांश को पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

जब चित्त विषय वासनाओं से अनासक्त हो जाता है तब वह सर्वत्र गमन करने में समर्थ हो जाता है। ऐसा साधक चित्त को पुरुषार्थ के द्वारा उद्देश्य प्राप्ति में सफल साधन के रूप में उपभोग कर सकता है। चित्त के वशीभूत होने पर शोकरहित अवस्था की प्राप्ति होती है।

चित्त को वशीभूत करने का प्रमुख साधन अष्टांग योग है, जिसके अभ्यास से निर्विकल्प समाधि एवं कैवल्य की प्राप्ति होती है। अष्टांग योग का अभ्यास अनेक प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति कराता है। संसारिक स्तर पर शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य का आधार है। शरीर और मन के स्वस्थ होने प तनावमुक्त एवं आनन्दमय जीवन की प्राप्ति होती है।

तनावमुक्त मन लक्ष्य प्राप्ति में सहायक है। विद्यार्थी जीवन में योग अभ्यास अतिआवश्यक है। योग अभ्यास नियमित एवं श्रद्धा सहित करने पर दृढ़ निश्चय आत्मबल, आत्मविश्वास एवं तीक्ष्ण बुद्धि की प्राप्ति होती है। विद्यार्थी जीवन की यह सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि है। अष्टांगयोग का अभ्यास योगी को कैवल्य की प्राप्ति एवं संसारिक जीव को सफल जीवन की उपलब्धि कराता है।

शरीर एवं मन के स्वस्थ होने पर किसकी प्राप्ति होती है?

Correct Answer: (b) आननदमय जीवन
Solution:शरीर एवं मन के स्वस्थ होने पर आनन्दमय जीवन की प्राप्ति होती है।

97. अनेक प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति किसके अभ्यास से होती है?

Correct Answer: (c) अष्टांग योग
Solution:अनेक प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति अष्टांग योग के अभ्यास से होता है।

98. लक्ष्य प्राप्ति में क्या सहायक है?

Correct Answer: (a) तनावमुक्त मन
Solution:लक्ष्य प्राप्ति में तनावयुक्त मन सहायक है।

99. सर्वत्र गमन करने में कौन सा चित्त समर्थ होता है?

Correct Answer: (d) विषय वासनाओं से अनासक्त
Solution:सर्वत्र गमन करने में विषय वासनाओं से अनासक्त चित्त समर्थ होते हैं।

100. अष्टांग योग किसका प्रमुख साधन है?

Correct Answer: (b) चित्त को वशीभूत करने का
Solution:अष्टांग योग चित्त को वशीभूत करने का प्रमुख साधन है।