प्राण एक ऐसी सूक्ष्म शक्ति है जिससे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड संचालित हो रहा है। समष्टि प्राण एवं व्यष्टि प्राण के भेद से प्राण दो प्रकार का है। जिस प्रकार समष्टि प्राण के द्वारा सृष्टि का कण-कण स्पन्दित हो रहा है, उसी प्रकार हमारा यह व्यष्टि शरीर भी प्राण द्वारा ही संचालित हो रहा है। प्राण ही जीवनशक्ति के रूप में इस शरीर को गतिशील बनाये हुए है।
शरीर में इसका प्रवावह नाड़ियों के माध्यम से होता है। नाड़ियों के द्वारा ही सभी कोशिकाओं के क्रियाकलाप नियन्त्रित होते हैं। प्राण के प्रवावह में रुकावट उत्पन्न होने पर शरीर में विषाक्त तत्व जमा होने लगते हैं। प्राण का प्रवाह सुचारु होते ही शरीर से विषैले तत्व निष्कासित हो जाते हैं। परिणाम स्वरूप शरीर के सभी संस्थान स्वस्थ हो जाते है।
प्राण के सुचारु होने से शरीर में लोच उत्पन्न हो जाता है, परिणाम स्वरूप योग की क्रियाओं को सहजता से अभ्यास किया जा सकता है। इसी के साथ शरीर में स्थिरता और सौम्यता उत्पन्न हो जाती है। इसीलिए प्राण ही जीवन का आधार है। तभी शास्त्रों में प्राण को सबसे बड़ा भाई, सखा आदि बताया है।
कोशिकाओं के क्रियाकलाप किसके द्वारा नियन्त्रित होते हैं?
Correct Answer: (b) नाड़ियों के द्वारा
Solution:कोशिकाओं के क्रियाकलापनाडियों के द्वारा नियंत्रित होते है।