NTA यू.जी.सी. नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 योगा (Yoga)

Total Questions: 100

21. ग्रन्थों के साथ परिभाषाओं का मिलान कीजिए:

सूची-I (ग्रंथ) सूची-II (परिभाषा)
(A) कठोपनिषद्(I) शिव शक्ति का मिलन ही योग है
(B) भगवद्गीता(II) मन के प्रशमन का उपाय की योग है
(C) महोपनिषद्(III) इन्द्रियों की स्थिर धारणा ही योग है
(D) शिव संहिता(IV) दुःखों के संयोग का वियोग ही योग है।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIVIII
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (a)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I (ग्रंथ) सूची-II (परिभाषा) 
(A) कठोपनिषद्(III) इन्द्रियों की स्थिर धारणा ही योग है
(B) भगवद्गीता(IV) दुःखों के संयोग का वियोग ही योग है।
(C) महोपनिषद्(II) मन के प्रशमन का उपाय की योग है
(D) शिव संहिता(I) शिव शक्ति का मिलन ही योग है

22. योगकुण्डल्युपनिषद् के अनुसार सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए

सूची-I सूची-II
(A) सूर्यभेदन, उज्जायी, शीतली, भस्त्रिका(I) गुल्म, पित्त, तृषा आदि का शमन
(B) शीतली प्राणायाम के अभ्यास से(II) तीनों गुणों से उत्पन्न तीनों ग्रंथियों का भेदन
(C) कपाल शोधन क्रिया के अभ्यास से(III) धीरे-धीरे रेचन करना चाहिए
(D) भस्त्रिका के अभ्यास से(IV) सहित कुम्भक कहे गए हैं
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IVIIIIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (c)
Solution:
सूची-I सूची-II
(A) सूर्यभेदन, उज्जायी, शीतली, भस्त्रिका(IV) सहित कुम्भक कहे गए हैं
(B) शीतली प्राणायाम के अभ्यास से(I) गुल्म, पित्त, तृषा आदि का शमन
(C) कपाल शोधन क्रिया के अभ्यास से(III) धीरे-धीरे रेचन करना चाहिए
(D) भस्त्रिका के अभ्यास से(II) तीनों गुणों से उत्पन्न तीनों ग्रंथियों का भेदन

23. मनोन्मनी अवस्था ही एकमात्र अवस्था है'- यह कथन हठ प्रदीपिका के किस उपदेश के किस श्लोक में आया है?

Correct Answer: (c) 3/53
Solution:

हठ प्रदीपिका के तीसरे उपदेश के 53वे श्लोक में यह कहा गया है।

"मनोन्मनी समायाति मतं तन्मटिना ततः।
मनोन्मनी बिना पुंसां मुक्तिः किं वा कदाचन।।

अर्थ- मनोन्मनी अवस्था ही एक मात्र अवस्था है, जिसके बिना मुक्तिः किं संभव नहीं है।

24. सामान्य साँस लेने कि प्रक्रिया के दौरान मांस पेशियों की हरकत का सही क्रम चूने।

A. रेक्टस एब्डोमिनस
B. छोटी इन्टर कॉस्टल मांसपेशियाँ।
C. बाहरी इंटर कॉस्टल मांसपेशियाँ ।
D. आंतरिक इन्टर कॉस्टल मांस पेशियाँ
E. पेट की मांसपेशिया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) B. C. D, E, A
Solution:

B. छोटी इंटर कॉस्टल मांसपेशियाँ- ये पसलियों के बीच की मांसपेशियाँ है। जो साँस लेने की प्रक्रिया की शुरूआत में सक्रिय होती है।

C. बाहरी इन्टर कॉस्टल मांसपेशियाँ-ये पसलियों को ऊपर उठाने में मदद करती हैं। जिससे फेफड़ों के लिए जगह बढ़ती है।

D. आन्तरिक इन्टर कॉस्टल मांसपेशियाँ- ये मुख्य रूप से साँस छोड़ने के सक्रिय होती है; लेकिन कुछ हिस्से खांस लेने में मदद करते है।

E. पेट की मांसपेशियाँ- यह शिथिल होती है ताकि डायक्रम नीचे जा सके और फेफड़ों में हवा भरने की जगह बन सके।

A. रेक्टस एब्डोमिनस- यह मुख्य रूप से साँस छोड़ने सक्रिय होती है लेकिन सामान्य साँस प्रक्रिया में इसका अप्रत्यक्ष योग दान रहता है।

25. व्यक्तित्व के प्रकार, जिनकी फ्रिडमैन एवं रोसेनमैन ने व्यक्तित्व शील क्रम एवं कोरोनरी हृदय रोग पर अपने प्रयोगों के पश्चात् व्याख्या की हैं-

Correct Answer: (c) टाइप ए - टाइप बी
Solution:

फ्रिडमैन एवं रोसेनमैन ने व्यक्तित्व शैलियों का अध्ययन किया और इन्होंने टाइप Aऔर टाइप B में वर्गीकृत किया। टाइप A व्यक्तितत्व - अत्यधिक प्रतिस्पर्धी, महत्वाकाक्षी समय को लेकर हमेशा तनाव में इन व्यक्तियों में कोरोनरी हृदय रोग का खतरा अधिक होता है। टाइप B- शांत स्वभाव, तनावमुक्त, कम प्रतिस्पर्धी, आराम से कम करने वाले ।

26. 'योगाभ्यासों की अध्यापन विधियाँ पुस्तक के अनुसार क्रियाओं द्वारा शुद्ध होने वाले क्षेत्रों को अनुक्रम में बताइए।

A. कपाल
B. ग्रसनी
C. मुख
D. जठर
E. नासा

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) E, B, C, A, D
Solution:

E. (Nose) नासा = नासिका की शुद्धि (नेति क्रिया जैसे अभ्यास) से शुरूआत
B. ग्रसनी = प्रसनी (गला) की शुद्धि (जैसे गजकरणी या धौति)
C. मुख = मुख की शुद्धि
A. कपाल = कपाल की शुद्धि (जैसे कपाल भाति)
D. जठर = आंत में जठर (पेट) की शुद्धि (जैसे वमन धौति) जिससे पेट और पाचन तंत्र की सफाई होती है।

27. घेरण्ड संहिता के अनुसार समाधि के प्रकार को उस तक ले जाने वाले अभ्यास से मिलान कीजिए :

सूची-I सूची-II
(A) नाद समाधि(I) शाम्भवी
(B) ध्यान समाध(II) योनि मुद्रा
(C) लय सिद्धि समाधि(III) खेचरी
(D) रसानन्द समाधि(IV) भ्रामरी
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (d)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) नाद समाधि(IV) भ्रामरी
(B) ध्यान समाध(I) शाम्भवी
(C) लय सिद्धि समाधि(II) योनि मुद्रा
(D) रसानन्द समाधि(III) खेचरी

28. वास धौति से निम्नलिखित में से किस रोग का उपचार किया जाता है?

A. गुल्म
B. ज्वर
C. प्लीहा रोग
D. कोष्ठकाठिन्य
E. कुष्ठ

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल A, B, C, E
Solution:

A. गुल्म (पेट में गांठ या ट्यूमर) वास धौति से पेट की सफाई होती है, जिससे गुल्म जैसे विकारों में लाभ होता है।
B. ज्वर (बुखार) - शरीर से विषाक्त पदार्थों के निष्कासन के माध्यम से वास धौति ज्वर के उपचार में सहायक हो सकती है।
C. प्लीहा रोग - (तिल्ली संबंधी विकार) यह क्रिया पाचन तंत्र के सुधार कर प्लीहा से संबंधित समस्याओं में लाभकारी होती है।
D. कुष्ठ - (कोढ़) वास धौति से रक्त शुद्धि होती है, जो त्वचा संबंधी रोगों, जैसे कुष्ठ, के उपचार में सहायक हो सकती है।

29. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, जीवन की गुणवत्ता उन कारकों से निर्धारित होती है जो निम्नलिखित को निर्धारित करते हैं:-

A. भौतिक वातावरण और स्वास्थ्य में आराम
B. अभिव्यक्ति और कार्य की स्वतंत्रता
C. जीवन की दीर्घायु
D. उच्च वेतन वाली नौकरियां
E. बौद्धिक, शैक्षिक और सामाजिक उपलब्धियां।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) केवल A, B, E
Solution:विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार जीवन की गुणवत्ता व्यक्ति की अपनी जीवन में स्थिति की धारणा है, जो उनके सांस्कृतिक मूल्य प्रणाली, व्यक्तिगत लक्षणों, मानको और चिंताओं के सन्दर्भ में होती है।

A. भौतिक पर्यावरण और स्वास्थ्य में आराम।
B. अभिव्यक्ति और क्रिया की स्वतंत्रता।
E. बौद्धिक शैक्षिणिक और सामाजिक।

नोट:- विकल्प C (जीवन की दीर्घायु) और D (उच्च वेतन वाली नौकरियाँ) WHO के गुणवत्ता जीवन के निर्धारण कारकों में सीधे शामिल नहीं है।

30. सांख्य दर्शन के अनुसार पुरुष की सिद्धि के लिए सांख्यकारिका की कौन सी कारिका में तर्क दिए गए हैं?

Correct Answer: (c) सत्रहवीं
Solution:

साख्य दर्शन के प्रमुख ग्रंथ 'सांख्यकारिका' में पुरुष की सिद्धि के तर्क 17वी कारिका में प्रस्तुत किए गए हैं। इस कारिका में पुरुष के अस्तित्व के प्रमाण दिए गए है।