NTA यू.जी.सी. नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 योगा (Yoga)

Total Questions: 100

31. मौखिक शिक्षण में क्या आवश्यक होता है;

A. अवलोकन शिक्षण विधि
B. सस्वर पाठ
C. स्मरण शक्ति में संवर्धन
D. वैयक्तिक आधारित शिक्षण
E. प्रदर्शन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल B और C
Solution:B. सस्वर पाठ - यह विधि छात्रों को जोर से पठने के लिए प्रेरित करती है, जिससे उनकी उच्चारण क्षमता, प्रवाह, और आत्म विश्वास में वृद्धि होती है।
C. स्मरण शक्ति में संवर्धन मौखिक शिक्षण में छात्रों की समरण शक्ति को बढ़ावा दिया जाता है। जिससे वे सुनी गई जानकारी को याद रख सकें और उसे पुनः प्रस्तुत कर सकें।

32. प्रत्याहार की स्थिति को प्रेरित करने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मुद्रा है-

Correct Answer: (c) षण्मुखी मुद्रा
Solution:

प्रत्याहार, योग के आठ अंगों में से पाँचवा अंग है। जिसका उद्देश्य इन्द्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर आंतरिक ध्यान की ओर ले जाना है। इसे इंद्रियों की वापसी या नियंत्रण के रूप में भी जाना जाता है।

• इंद्रियों को शांत करने और प्रत्याहार की स्थिति को प्रेरित करने के लिए षण्मुखी मुद्रा (षड्मुखी मुद्रा) अत्यन्त उपयुक्त मानी जाती है। इस मुद्रा में, साधक अपने कान, आँखे, नाक और मुँह को अंगुलियों से बंद करता है। जिससे बाहरी ध्वनियों और दृश्य प्रभावों से मन विचलित नहीं होता है और ध्यान अन्दर की ओर केन्द्रित होता है।

33. भगवद्गीता के अनुसार क्षत्रिय के कर्म नहीं हैं-

A. दमः
B. तेजः
C. धृतिः
D. आर्जवम्
E. विज्ञानम्

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल A, D, E
Solution:

भगवद्‌गीता के अध्याय 18, श्लोक 43 में क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्मी का वर्णन किया गया है।

"शौर्य तेजो घृतिर्दाश्यं युद्धे चाप्ययलायनम्।
दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम् ।।

श्लोक के अनुसार, क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म है। शौर्य (वीरता, तेजः) (तेजस्विता), धृति (धौर्य) दाक्ष्यम् (दक्षता), युद्धे अपलायनम् (युद्ध से न भागना), दानम् (दान) ईश्वर भाव (नेतृत्व क्षमता)

नोट:- क्षत्रिय कर्म नही है- Aदंगः, D आर्जवम् (E) विज्ञानम्

34. कुम्भकों के नौ प्रकार किस ग्रन्थ में वर्णित है?

Correct Answer: (c) हठ रत्नावली
Solution:

कुम्भकों के नौ प्रकारों का हठरत्नावली ग्रंथ में मिलता है। इस ग्रंथ में कुम्भकों के नौ प्रकारों का उल्लेख किया गया है। (1) सहित कुम्भक, सूर्यभेदी कुम्भक, भ्रामरी कुम्भक, मुर्छा कुम्भक, प्लाखिनी कुम्भक, केवली कुम्भक । उज्जायी कुम्भक, शीतली कुम्भक, भस्त्रिका कु।

उदाहरण के अन्य ग्रंथों में कुम्भकों की संख्या अलग-पायी जाती है। घेरण्ड संहिता में आठ प्रकार के कुम्भकों का वर्णन है। जबकि छठ प्रदीपिका में भी आठ प्रकार के कुम्भकों का उल्लेख मिलता है।

35. बौद्धों के अष्टांग मार्ग के अंगो का क्रम निर्धारण करें-

A. सम्यक व्यायाम
B. सम्यक् समृति
C. सम्यक् कर्म
D. सम्यक् वाक्
E. सम्यक्संकल्प

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (b) E, D, C, A, B
Solution:बौद्ध धर्म के अष्टांग मार्ग में आठ अंग होते हैं। जो इस प्रकार है।

(I) सम्यक दृष्टि (सही दृष्टि कोण)
(II) सम्यक संकल्प (सही संकल्प)
(III) सम्यक वाक् (सही वाणी)
(IV) सम्यक कर्म (सही कर्म)
(V) सम्यक आजीविका (सही आजीविका)
(VI) सम्यक व्यायाम (सही प्रयास)
(VII) सम्यक स्मृति (सही स्मृति)
(VIII) सम्यक समाधि (सही ध्यान)

(इन अंगों का सही क्रम होगा)

E. सम्यक् संकल्प
D. सम्यक् वाक
C. सम्यक् कर्म
A. सम्यक् व्यायाम
B. सम्यक् समृति

36. दंत धौति में दाँत की जड़ को किसके चूर्ण से मलना (रगड़ना) चाहिए?

Correct Answer: (d) खदिर का पौधा
Solution:

देत धौति (दांतसफाई) की प्रक्रिया में दांतों की जड़ों की विशेष प्रकार, का चूर्ण से मलने की परम्परा है जिससे दंत स्वास्थ्य में सुधार होता है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इस उद्देश्य के लिए खदिर (खैर) के पौधे के चूर्ण का उल्लेख मिलता है जो दांतों की मजबूती और स्वच्छता के लिए उपयोगी माना जाता है। अतः दंत धौति में दांतों की जड़ों को खदिर (खैर) के पौधे के चूर्ण से मलना (रगड़ना) चाहिए।

37. हठप्रदीपिका श्लोक के अनुसार स्वास्थ्य विरोधी अपथ्य कारकों को अनुक्रम में कीजिए।

A. हींग
B. हरी शाक
C. दही
D. लहसुन
E. सरसों

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) B, E, C, A, D
Solution:

हठप्रदीपिका श्लोक के अनुसार स्वास्थ्य विरोधी अपथ्य (हानिकारक) कारकों के सही क्रम बारे में। हरी शाक, सरसों, दही, हींग, लहसुन

नोट:- हठप्रदीपिका में उल्लेखकड़वा, खट्टा, तीखा नमकीन, उष्ण, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, सरसों, तिल का तेल, दही, मट्ठा कुलथी, कोल (काली मिर्च) हींग और लहसुन शामिल है।

38. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I सूची-II
(A) अनुकूली प्रतिरक्षा(I) आनुवंशिक रूप से निर्धा रितविशेष एंटीजन के सम्पर्क मे आने पर प्रतिरक्षा
(B) टी-कोशिका प्रतिक्षा(II) एटीबाड़ी का उत्पादन
(C) जन्मजात प्रतिरक्षा(III) ऊतकों में क्षेत्रीय सूजन और स्थानीय रक्षा
(D) बी-कोशिका प्रतिरक्षा(IV) विशेष एंटीजन के सम्पर्क मे आने पर प्रतिरक्षा
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IVIIIIII
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) अनुकूली प्रतिरक्षा(IV) विशेष एंटीजन के सम्पर्क मे आने पर प्रतिरक्षा
(B) टी-कोशिका प्रतिक्षा(III) ऊतकों में क्षेत्रीय सूजन और स्थानीय रक्षा
(C) जन्मजात प्रतिरक्षा(I) आनुवंशिक रूप से निर्धा रितविशेष एंटीजन के सम्पर्क मे आने पर प्रतिरक्षा
(D) बी-कोशिका प्रतिरक्षा(II) एटीबाड़ी का उत्पादन

39. त्रिशिख ब्राह्मणोपनिषद् के अनुसार उत्तम प्राणायाम के अभ्यास से साधक में हो जाता है:

A. अल्पनिद्रा
B. लघुशरीर
C. सम्पूर्ण पापों का नाश
D. अल्पाहारी
E. समस्त रोगों का नाश

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल A, B, D
Solution:

त्रिशिख ब्राह्मणोयनिषद् में प्राणायाम के अभ्यास की साधक के लिए निम्न है।

A. अल्पनिद्रा (कम नींद की आवश्यकता)
B. लघु शरीर(हल्का शरीर)
D. अल्पहारी (कम भोजन करने वाला)

40. पातञ्जल योगसूत्र के अनुसार अन्तःशुद्धि को अनुक्रम में कीजिए:

A. चित्त की एकाग्रता
B. अन्तः करण की शुद्धि
C. आत्मसाक्षात्कार की योग्यता
D. मन में प्रसन्नता
E. इन्द्रियों का वश में होना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) B, D, A, E, C
Solution:

महार्षि पतंजलि के योगसूत्रों में अष्टांग योग के माध्यम से चित की शुद्धि और आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया का वर्णन किया गया है।

इन आठ अंगों का अभ्यास क्रमिक रूप से साधक को आंतरिक शुद्ध और आत्म ज्ञान की ओर ले जाता है।

B. अन्तः करण की शुद्धि
D. मन में प्रसन्नता
A. चित्त की एकाग्रता
E. इन्द्रियों का वश में होना
C. आत्मसाक्षात्कार की योग्यता