NTA यू.जी.सी. नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 योगा (Yoga)

Total Questions: 100

41. हठ प्रदीपिका के अनुसार स्वास्थ्यवर्धन हेतु निम्न में से के क्या वर्जित है?

A. अधिक खट्ठा
B. षष्टिक
C. अधिक नमक
D. पुनः गर्म किया हुआ भोजन
E. विहित भोजन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, C, D
Solution:

हठ प्रदीपिका के अनुसार, योगाभ्यासियों के लिए कुछ आहार वर्जित माने गए है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

A. अधिक खट्टा - खट्टे पदार्थों का अत्यधिक सेवन वर्जित है।
C. अधिक नमक अत्यधिक नमक का भी वर्जित है
D. पुनः गर्भ किया हुआ भोजन बार-बार गर्भ किया हुआ भोजन स्वास्थ्य के लिए उचित नही माना जाता है।

42. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (जटिलता) सूची-II (लक्षण) 
(A) द्वितीयक जीवाणु संक्रमण(I) सूजन, जमाव और गाढ़ा पूययुक्त स्त्रात
(B) साइनुसाइटिस(II) ट्रेकाइटिस लैरिजाइटिस ब्रोकाइटिस, और लोब्यूलर निमोनिया
(C) मध्य कान का संक्रमण(III)  स्राव गाढ़ा और पूययुक्त हो जाता है।
(D) निचले श्वसन तंत्र का संक्रमण(IV) जीवाणु संक्रमण नासाँफैरिक्स से यूस्टेशियन ट्यूब के माध्यम से फैलता है।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIVII
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I (जटिलता) सूची-II (लक्षण) 
(A) द्वितीयक जीवाणु संक्रमण(III) स्राव गाढ़ा और पूययुक्त हो जाता है।
(B) साइनुसाइटिस(I) सूजन, जमाव और गाढ़ा पूययुक्त स्त्रात
(C) मध्य कान का संक्रमण(IV) जीवाणु संक्रमण नासाँफैरिक्स से यूस्टेशियन ट्यूब के माध्यम से फैलता है।
(D) निचले श्वसन तंत्र का संक्रमण(II) ट्रेकाइटिस लैरिजाइटिस ब्रोकाइटिस, और लोब्यूलर निमोनिया

43. नादविन्दु उपनिषद् के अनुसार सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I सूची-II
(A) तृतीय मात्रा(I) ब्राह्मी
(B) छठवीं मात्रा(II) धृति
(C) दसवीं मात्रा(III) ऐन्द्री
(D) बारहवीं मात्रा(IV) पातङ्गी
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IVIIIIII
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) तृतीय मात्रा(I) ब्राह्मी
(B) छठवीं मात्रा(II) धृति
(C) दसवीं मात्रा(III) ऐन्द्री
(D) बारहवीं मात्रा(IV) पातङ्गी

44. निम्न में से बौद्धों के त्रिरत्न है-

A. सम्यक् दर्शन
B. प्रज्ञा
C. शील
D. सम्यक्ज्ञान
E. समाधि

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल B, C, E
Solution:

बुद्ध धर्म में त्रिरत्न (तीन रत्न) का तात्पर्य है।

1. बुद्ध - जागृत एवं अनंत ज्ञानी मनुष्य, जिन्होंने स्वयं के प्रयासों से बुद्धत्व प्राप्त किया।
2.धम्म (धर्म) बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ
3. संघः - बौद्ध भिक्षुओं और उपासकों का समुदाय इन तीन रत्न पर ही बौद्ध धर्म आधारित है और प्रज्ञा, शील, और समाधि बौद्ध धर्म के त्रिशिक्षा (तीन शिक्षाएँ) है जो नैतिकता, ध्यान और ज्ञान को संदर्भित करती है।

45. योगसूत्र के अनुसार सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए:

सूची-I सूची-II
(A) मृदुमध्याधिमातृत्वात्तो ऽपिविशेषाः(I) विभूति पाद
(B) ते हृादपारिताफलाः पुण्यापुण्यहेतुत्वात्(II) कैवल्य पाद
(C) तद्वैराग्यादपि दोषबीजक्षये कैवल्यम्(III) समाधि पाद
(D) हानमेषां क्लेशवदुक्तम्(IV) साधन पाद
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (c)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) मृदुमध्याधिमातृत्वात्तो ऽपिविशेषाः(III) समाधि पाद
(B) ते हृादपारिताफलाः पुण्यापुण्यहेतुत्वात्(IV) साधन पाद
(C) तद्वैराग्यादपि दोषबीजक्षये कैवल्यम्(I) विभूति पाद
(D) हानमेषां क्लेशवदुक्तम्(II) कैवल्य पाद

46. हठयोग प्रदीपिका में प्राणायाम जन्यश्रम से उत्पन्न पसीने को शरीर पर मर्दन करने के लाभ बताये हैं-

A. स्थिरता
B. दृढ़ता
C. धीरता
D. लघुता
E. शोधन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल B, D
Solution:

हठयोग प्रदीपिका में कहा गया है कि प्राणायाम करने से उत्पन्न पसीने को शरीर में मर्दन (मालिश) करने से दृढ़ता और लघुता प्राप्त होती है। दृढ़ता - शरीर को मजबूत और स्थिर होता है। लघुता - शरीर हल्का और फुर्तीला हो जाता है।

47. कौन सा चक्र प्राण के वितरण हेतु नियंत्रण केन्द्र के रूप में कार्य करता है?

Correct Answer: (d) आज्ञा चक्र
Solution:

• आज्ञा चक्र को प्राण के वितरण और नियंत्रण का मुख्य केन्द्र माना गया है।
• यह भौहों के बीच स्थित होता है और पूरे प्राण तंत्र को नियंत्रित करने वाला कमांड सेंटर की भूमिका निभाता है।
• योग शास्त्रों में इसे प्राण नियंत्रण का सर्वोच्च केन्द्र कहा गया हैं। जहाँ से पूरे शरीर में प्राण ऊर्जा का संचालन होता है।

48. "सर्वार्थतैकाग्रतयोः क्षयोदयौ " चित्त का कौन सा परिणाम है?

Correct Answer: (c) समाधि परिणाम
Solution:

"सर्वार्थतैकाग्रतयोः क्षयोदयौ " का अर्थ है चित की सर्वार्थता (बहुविषयक चंचलता) और एकाग्रता (एक विषय पर स्थिरता) का क्षय और उदय (यह स्थिति) चित्त के समाधि परिणाम का लक्षण है। जहाँ चित पूर्ण रूप से एकाग्र और स्थिर हो जाता है। नोट:- इसका उल्लेख पंतजलि योगसूत्र में भी मिलता है।

49. योगाभ्यास की शिक्षण विधियाँ पुस्तक के अनुसार और नियम को निम्नलिखित के रूप में भी जाना जाता है।

Correct Answer: (c) अभिवृत्ति प्रशिक्षण अभ्यास
Solution:योगाभ्यास की शिक्षण विधियों पुस्तक के अनुसार, यम और नियम को अभिवृत्ति प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में जाना जाता है।

नोट:- इसका उद्देश्य सही सोच, सही दृष्टिकोण और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करना है। जो योग साधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

50. कब्ज के लिए अनुशंसित ध्यान अभ्यास ।

Correct Answer: (a) अन्तर मौना
Solution:

अन्तर मौना ध्यान अभ्यास कब्ज जैसी समस्याओं के लिए अनुशंसित है। यह एक गहन ध्यान तकनीक है। जिसमें व्यक्ति अपने भीतर की आवाजों, विचारों और भावनाओं को देखता और स्वीकार करता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है।

जो पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। और कब्ज में राहत मिलती है। योग अभ्यास की शिक्षण विधियों पुस्तक में भी इसका उल्लेख मिलता है।