Solution:योगचूडामण्युपनिषद के अनुसार, मृत्यु उपरान्त भी शरीर में 'घनञ्जय' वायु स्थित रहता है। धनञ्जय वायु पाँच उपप्राणों में से एक है और यह शरीर के विघटन के बाद भी कुछ समय तक उसमें बना रहता है।
ऐसा कहा जाता है कि यह मृत शरीर में कुछ गतिविधियों को बनाए रखता है। जैसे त्वचा में संकोचन या अंगों की हल्की हरकत ।