NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा (निरस्त), जून 2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

भारत बहुजातीय देश है। यहाँ किसी जाति की अपनी विशेषताओं के साथ सामान्य राष्ट्रीय विशेषताओं पर ध्यान देना उचित है। किन्तु राष्ट्रीय एकता का अर्थ जातीय विशेषताओं का लोप नहीं होता।
हिन्दी जाति की संस्कृति भारतीय संस्कृति का ही एक अंग है। और उसके संदर्भ में ही उसका विकास और महत्व समझा जा सकता है। जब वेद मंत्र रचे गये, तब उस युग के आस पास सिन्धु घाटी की महान् सभ्यता विकसित हुई थी। संस्कृत के विशाल वाडूमय के एक छोर पर तक्षशिला में पाणिनि हैं और दूसरे छोर पर केरल में शंकराचार्य हैं। आधुनिक भाषाओं में लगभग चौथी ईस्वी शताब्दी से अब तक तमिल साहित्य की अटूट गौरवशाली परंपरा है। जातीय चेतना का प्रसार महाराष्ट्र में सन्तों के द्वारा हुआ और समर्थ गुरु रामदास ने समस्त मराठी भाषियों से एक झंडे के नीचे संगठित होने को कहा। जन साधारण को अपना आधार बनाकर शिवाजी ने भारतीय युद्ध कौशल में क्रान्तिकारी परिवर्तन किया और उन्होंने संसार में सबसे पहले छापेमार लड़ाई का विकास किया। महाराष्ट्र में उन्होंने मराठी भाषी जाति की जातीय राज्यसत्ता स्थापित की। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के बंगाल ने भारतीय नवजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
किसी भी बहुजातीय देश के सामाजिक सांस्कृतिक इतिहास में |सभी जातियों का योगदान एक सा नहीं होता यद्यपि वे एक दूसरे को प्रभावित करती रहती हैं। 1857 के स्वाधीनता संग्राम का केन्द्र हिन्दी प्रदेश था, इससे यह सिद्ध नहीं होता कि उसका राष्ट्रीय महत्व नहीं था या दूसरे प्रदेशों में उसके प्रति सहानुभूति नहीं थी या वहां साम्राज्य विरोधी संघर्ष न हुए थे।
सन् सत्तावन की राज्यक्रान्ति में पंजाब, सीमान्त प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्णाटक, हैदराबाद, और विशाल हिन्दी भाषी प्रदेश की जनता ने भाग लिया। इन प्रदेशों में क्रान्ति का विकास एक सा नहीं था, न हो सकता था।
जातियों के विचार से स्वाधीनता संग्राम में हिन्दुस्तानियों की भूमिका प्रमुख थी। हिन्दी प्रदेश में नवजागरण 1857 के स्वाधीनता संग्राम से शुरू होता है।
उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी प्रदेश में नवजागरण की शुरूआत होती है:

Correct Answer: (b) 1857 की स्वाधीनता संग्राम से
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी प्रदेश में नवजागरण की शुरुवात 1857 की स्वाधीनता संग्राम से होती है।

92. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार किसने महाराष्ट्र में मराठीभाषी जाति का जातीय राज्यसत्ता स्थापित की?

Correct Answer: (a) शिवाजी
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार शिवाजी ने महाराष्ट्र में मराठीभाषी जाति की जातीय राजसत्ता स्थापित की।

93. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के स्वाधीनता संग्राम का केन्द्र था :

Correct Answer: (d) हिन्दी प्रदेश
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 1857 के स्वाधीनता संग्राम का केन्द्र हिन्दी प्रदेश था।

94. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार पाणिनि का संबंध है:

Correct Answer: (b) लक्षशिला से
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार पाणिनी का संबंध तक्षशिला से है। वर्तमान समय में तक्षशिला, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिंडी जिले में स्थित है।

95. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भारत कैसा देश है?

Correct Answer: (d) बहुजातीय
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भारत बहुजातीय देश है।

96. निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

भारत में सामन्तवाद के मूल लक्षण अन्य देशों में सामन्तवाद के मूल लक्षणों से बहुत भिन्न नहीं थे। भूमि, जो कृषि उत्पादन का बुनियादी साधन है, सामन्ती प्रभु की सम्पत्ति होती थी। उत्पादन के साधनों के मालिक लोग किसानों के समुदाय द्वारा पैदा किये गये अतिरिक्त माल को अपने इस्तेमाल के लिए हड़प लेते थे।
भारत एक विशाल देश है। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि यहाँ अलग-अलग क्षेत्रों में सामन्ती सम्बन्धों के रूप अलगअलग थे। इतने पर भी कुछ ऐसे समान लक्षण थे जो भारतीय सामन्तवाद की अपनी विशिष्टता थे- युगों पुराने ग्राम समुदाय, कृषि और दस्तकारी का एक-दूसरे से घुला मिला होना,बिरादरी के कबीली सम्बन्धों का जारी रहना, जाति प्रथा और अस्पृश्यता का विकास, और इस सबके साथ-साथ दास प्रथा के अवशेषों और यहाँ तक कि आदिम साम्यवाद के अवशेषों का भी जारी रहना। इस देश में सामन्तवाद का धीरे-धीरे ही विकास हुआ और उसका आगमन भयंकर सामाजिक उथल-पुथल और वर्ग संघर्षों से संबंधित नहीं रहा। भारतीय सामन्तवाद की एक दूसरी विशिष्टता थीः भूमि का सामूहिक स्वामित्व । यह सामूहिक स्वामित्व प्राचीन काल से ही चला आ रहा था। और यह सामन्तवाद के साथ भी जारी रहा, यद्यपि औपचारिक रूप में ही। किन्तु समान स्वामित्व के साथ-साथ निजी स्वामित्व भी जारी था।
भारतीय सामन्तवाद का एक दूसरा लक्षण यह था कि भूमि कभी-कभी मंदिरों को दान कर दी जा जाती थी। इन मंदिरों की देखभाल प्रायः ब्राह्मण पुजारी करते थे। कभी-कभी ब्राह्मणों को सीधे-सीधे जमीन दान कर दी जाती थी। इस प्रकार के एक दान का उल्लेख रा.श. शर्मा ने अपनी पुस्तक में किया है। इस राजा का नाम प्रवरसेन  द्वितीय था। एक हजार ब्राह्मणों को एक ग्राम दान में देते हुए दान-पत्र में कहा गया था कि ब्रह्मण इस शर्त पर ही गाँव को अपने कब्जे में रख सकते हैं कि "वे राज्य के विरूद्ध राजद्रोह न करें, ब्राह्मणों, की हत्या न करें, चोरी और व्यभिचार न करें, राजाओं को विष देकर उनकी हत्याएं न रचाएं, युद्ध न छेडें और दूसरे गांवों को त्रस्त न करें।" चीनी यात्री फाहियान (ईस्वी सन् चौथी शताब्दी) ने बताया है कि उन दिनों मठों को खेत, बगीचे और चौपये दान में दिये जाते थे।
उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भारतीय सामंतवाद की विशिष्टता है :

Correct Answer: (b) जाति प्रथा और अस्पृश्यता का विकास
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार, 'जाति प्रथा और अस्पृश्यता का विकास' भारतीय सामंतवाद की विशिष्टता है।

97. उपर्युक्त अनुच्छेद में किस चीनी यात्री का उल्लेख है?

Correct Answer: (d) फाहियान
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद में चीनी यात्री फाहियान का उल्लेख है। फाहियान ने ई. सन् चौथी शताब्दी में बताया कि उन दिनों मठों को खेत, बगीचे और चौपाये दान में दिये जाते थे।

98. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार रा.श. शर्मा ने ब्राह्मणों को सीधे-सीधे जमीन देने वाले किस राजा का उल्लेख किया है?

Correct Answer: (a) प्रवरसेन द्वितीय
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार रा.श. शर्मा ने ब्राह्मणों को सीधे-सीधे जमीन देने वाले प्रवरसेन द्वितीय राजा का उल्लेख किया है।

99. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भारतीय सामंतवाद की विशेषता नहीं है :

Correct Answer: (d) भूमि पर किसान अथवा रैयत का संपूर्ण अधिकार
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भूमि पर किसान अथवा रैयत का संपूर्ण अधिकार भारतीय सामंतवाद की विशेषता नहीं है।

100. उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार भारतीय सामंतवाद के बारे में असत्य कथन है :

Correct Answer: (a) भारत में सामंतवाद के मूल लक्षण अन्य देशों में सामन्तवाद के मूल लक्षणों से बहुत भिन्न थे।
Solution:उपर्युक्त अनुच्छेद के अनुसार - 'भारत में सामंतवाद के मूल लक्षण अन्य देशों में सामंतवाद के मूल लक्षणों से बहुत भिन्न थे' यह कथन भारतीय सामंतवाद के बारे में असत्य है।