"बिना दुख के सब निस्सार,
बिना आँसू के जीवन भार,
दीन दुर्बल है रे, संसार
इसी से दया, क्षमा औ' प्यार !"
Correct Answer: (a) सुमित्रा नन्दन पन्त
Solution:उपर्युक्त कवितांश सुमित्रा नंदन पंत द्वारा रचित 'परिवर्तन' कविता से है। इसका प्रकाशन 1924 ई. में हुआ। यह रोला छंद में रचित एक लम्बी कविता है। यह 'पल्लव' काव्य संग्रह में संकलित है।
पंत की रचनाएँ - वीणा, पल्लव, चिदंबरा, युगवाणी, लोकायतन, युगपथ, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूलि, कला और बूढ़ा चाँद आदि।
मैथिलीशरण गुप्त - साकेत, यशोधरा, जयद्रथ वध, भारत-भारती, पंचवटी, द्वापर, सिद्धराज, नहुष, किसान, गुरूकुल, जयभारत, शंकुतला, विष्णुप्रिया, उर्मिला आदि।
रामधारी सिंह 'दिनकर' - कुरूक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, हुंकार, परशुराम की प्रतीक्षा, हारे को हरिनाम, रश्मिलोक आदि।
नागार्जुन - हजार- हजार बाहों वाली, सतरंगे पंखोवाली, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, युगधारा, इस गुब्बारे की छाया में, मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा, पुरानी जूतियों का कोरस, भूमिजा आदि।