मानवीय श्वसन तंत्र की विशेषता है कि यह ऐच्छिक तथा अनैच्छिक दोनों रूपों में कार्य करता है। अतः प्राणायाम के माध्यम से हम ऐच्छिक (शरीर क्रियाओं का चैतन्य नियंत्रण) से अनैच्छिक (शारीरिक क्रियाओं का अल्प नियन्त्रण) तक गति होती है। प्राण एवं मन मस्तिष्क के उच्चतम केन्द्रों द्वारा क्रियान्वित होता है।
भौतिक शरीर में उच्चस्तरीय मस्तिष्कीय केन्द्र जिनकी सर्वश्रेष्ठ क्रियाशीलता होती है, वह निचले मस्तिष्कीय केन्द्रों को नियन्त्रित करते हैं साथ ही अन्य शारीरिक क्रियाओं का भी नियमन करते हैं। यह उच्च स्तरीय मस्तिष्कीय केन्द्र मिड ब्रेन के माध्यम से क्रियान्वित होते हैं तथा निचले मस्तिष्कीय क्रियाकलापों को नियन्त्रित एवं परिवर्तित करता है।
हाइपोथैलेमस जो कि मिड ब्रेन के ऊपर स्थित होता है, जो निचले केन्द्रों को नियन्त्रित करता है। हाइपोथैलेमस शरीर के समस्त स्वायत्तशासी क्रियाओं को भी नियन्त्रित करता है। हाइपोथैलेमस स्वायत्तशासी तन्त्र तथा अन्तःस्रावी तंत्र के माध्यम से शारीरिक क्रियाओं को नियन्त्रित करता है। तथा शारीरिक क्रियाओं में परिवर्तन लाता है।
हाइपौथेलेमस तथा ऐच्छिक तन्त्रिका तन्त्र का सम्बन्ध मस्तिष्क के उच्चस्थ केन्द्रों द्वारा होता है यह सामान्य मनुष्यों में स्वाभाविक प्रक्रिया है। सामान्य रूप से ऐच्छिक तन्त्रिका श्वसन तंत्र से सम्बन्धित होता है। अतः हम ऐच्छिक रूप से श्वास्-प्रश्वास, की गति, स्वरूप, लय आदि को स्वेच्छा से परिवर्तित कर सकते हैं इसी प्रकार ऐच्छिक तंत्रिका तंत्र, हाइपोथैलेमस स्वायत्त नियंत्रण को पार कर अपना नियंत्रण बना लेता है।
श्वास प्रश्वास प्रक्रिया है।
Correct Answer: (c) ऐच्छिक एवं अनैच्छिक
Solution:• अनैच्छिक रूप से हमारा मस्तिष्क (विशेषकर Medulla oblongata) स्वचालित रूप से श्वास प्रश्वास को नियंत्रित करता है जिससे हम बिना सोचे-समझे सांस लेते हैं।
• ऐच्छिक रूप से हम कुछ समय के लिए सांस रोक सकते हैं या तेज धीमा कर सकते हैं,जैसे ध्यान या योग करते समय ।