Solution:मुण्डकोपनिषद में पराविद्या के अनुसार ब्रह्मा अद्देश्य, अग्राह्य और नित्य है।
B. अद्रेश्य इसका अर्थ जिसे देखा नहीं जा सकता, यानी ब्रह्मा इंद्रियों से परे है।
D. अग्राह्य - इसका अर्थ है जिसे पकड़ा नहीं जा सकता, यानि ब्रह्मा भौतिक रूप से ग्रहण करने योग्य नहीं है।
E. नित्य - इसका अर्थ है जो शाश्वत है, जिसका कभी नाश नहीं होता। मुण्डकोपनिषद में ब्रह्मा को 'अद्देश्य' और 'अग्राह्य' कहा गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह अस्तित्वहीन है बल्कि, यह कहा गया है कि ब्रह्मा इंद्रियों और मन से परे है, और उसे केवल ज्ञान और अनुभव से ही जाना जा सकता है।