NTA यू.जी.सी. नेट/जेआरएफ परीक्षा, जून-2025 योगा (Yoga)

Total Questions: 100

61. घेरण्ड के अनुसार दण्ड धौति से नष्ट होता है।

Correct Answer: (c) हृद् रोग
Solution:

घेरण्ड संहिता के शुद्धिक्रियाओं (षटकर्म) में धौति क्रिया का वर्णन है।

1. वमन धौति,
2. वस्त्र धौति,
3. दण्ड धौति,
4. अन्न धौति
5. ध्यान धौति।

दण्ड धौति से हृद संबंधी रोग का नाश होता है। “दण्ड धौतिं तु यो नित्यं कुय्यति प्रयत्नतः । हद्रोगं च क्षयं चैव कण्ठरोग विनाशयेत् ।।" दण्ड धौति से विशेष रूप से हृद रोग के साथ ही कण्ठ रोग का नष्ट होते हैं। नोट- NTA ने हृदय रोग उत्तर माना है।

62. योगदर्शन के अनुसार सूची-I और सूची-IIको मिलाएं।

सूची-I सूची-II
(A) विक्षेपसहभुव(I) पुण्यात्मा
(B) चित्तप्रसादनम्(II) भोग
(C) प्रमाण(III) दौर्मनस्य
(D) कर्माशय(IV) शब्द (आगम)
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:सही सुमेलित है।
सूची-I सूची-II
(A) विक्षेपसहभुव(III) दौर्मनस्य
(B) चित्तप्रसादनम्(I) पुण्यात्मा
(C) प्रमाण(IV) शब्द (आगम)
(D) कर्माशय(II) भोग

63. तड़ागी मुद्रा के संदर्भ में कौनसी बात सत्य नहीं है

A. पश्चिमोत्तानासन में बैठें।
B. इसके अभ्यास से बाल नहीं पकते।
C. शरीर पर झुर्रियां नहीं पड़ती।
D. यह मुद्रा जरा का विनाश करती है।
E. यह मुद्रा मृत्यु का विनाश करती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) केवल B,C
Solution:तड़ागी मुद्रा के सन्दर्भ में सत्य बात

• पश्चिमोत्तानासन में बैठें।
• यह मुद्रा जरा का विनाश करती है।
• यह मुद्रा मृत्यु का विनाश करती है।

नोट :- B = इसके अभ्यास से बाल नहीं पकते-

• यह दावा अतिश्योक्ति हो सकता है- ऐसा शास्त्रीय रूप से प्रमाणिक नहीं है। C = शरीर पर झुर्रियां नहीं पड़ती। यह भी अतिश्योक्ति है।

64. श्वेताश्वतरोपनिषद के अनुसार ध्यान के लिए उपयुक्त है।

A. कंकर, अग्नि और बालू से रहित
B. नेत्रों को आराम देने वाले
C. जल में
D. व्याघ्र चर्म के ऊपर बैठें
B. सभी प्रकार से शुद्ध हों

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (d) केवल A, B, E
Solution:

श्वेताश्वतरोपनिषद उपनिषद के अनुसार ध्यान के लिए उपयुक्त स्थान और स्थिति - श्वेताश्वतरोपनिषद अध्याय 2, मंत्र 10-11 “शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः। नात्युच्चं नातिनीचं च चैलाजिन कुशोत्तरम् ।। तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतिचित्तेन्द्रियक्रियः । उपवश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मवि-शुद्धयो ।।"

उपयुक्त बातें -

A.कंकर, अग्नि और बालू से रहित स्थान।
B. नेत्रों को प्रिय या आराम देने वाला स्थान ।
E. सभी प्रकार से शुद्ध हों। नोट - जो वर्णित नहीं है -
C. जल में ध्यान हेतु जल में बैठने को कोई निर्देश नहीं है।
D. व्याघ्र चर्म के ऊपर बैठे-

यह बात श्री मद्भावद्गीता (अध्याय 6, श्लोक 11) में हैं। श्वेताश्वतर उपनिषद में नहीं है।

65. प्रश्नोपनिषद के अनुसार क्रमबद्ध करें।

A. प्राण और रयि का संयोग
B. प्राण की उत्पत्ति विषयक आश्वालायन के प्रश्न
C. ऊँकार उपासना विषयक सत्यकाम का प्रश्न
D. गार्ग्य मुनि के जीवात्मा और परमात्मा विषयक प्रश्न
E. प्रजा के आधार के विषय में भार्गव के प्रश्न

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) A, E, B, D, C
Solution:प्रश्नोपनिषद के अनुसार क्रमबद्ध है -

A. प्राण और रयि का संयोग
E. प्रजा के आधार के विषय में भार्गव के प्रश्न
B. प्राण की उत्पत्ति विषयक आश्वालायन के प्रश्न
D. गार्ग्य मुनि के जीवात्मा और परमात्मा विषयक प्रश्न
C. ॐकार उपासना विषयक सत्यकाम का प्रश्न

66. हठयोग के अनुसार सूची-I और सूची-II को मिलाए।

सूची-I सूची-II
(A) हृदाकाश(I) महाशून्य
(B)  विशुद्धि आकाश(II) अतिशून्य
(C) भूमध्याकाश(III) शून्य
(D) कण्ठस्थान(IV) मध्यचक्र
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (a)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) हृदाकाश(III) शून्य
(B)  विशुद्धि आकाश(II) अतिशून्य
(C) भूमध्याकाश(I) महाशून्य
(D) कण्ठस्थान(IV) मध्यचक्र

67. यौगिक श्वसन के प्रकार हैं।

A. दीर्घ श्वसन
B. उदरीय श्वसन
C. वक्षीय श्वसन
D. सामान्य श्वसन
E. वक्षीय उदरीय श्वसन

नीचे दिएगए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) केवल B, C, E
Solution:

यौगिक श्वसन के प्रकार हैं उदरीय श्वसन, वक्षीय श्वसन और वक्षीय उदरीय श्वसन

B. उदरीय श्वसन इसमें डायाफ्राम का उपयोग किया जाता है, जो पेट की मांसपेशियों को संकुचित करता है।
C. वक्षीय श्वसन इसमें पसलियों और छाती की मांसपेशियों का उपयोग किया जाता है।
B. वक्षीय उदरीय श्वसन - इसमें डायाफ्राम और वक्षीय मांसपेशियों का उपयोग किया जाता है।

68. शिवसंहिता में वर्णित विषयों को अध्यायों के अनुसार क्रमबद्ध करें।

A. योग की चार अवस्थाएँ
B. दश मुद्राओं का विवेचन
C. दार्शनिक सिद्धान्त
D. तत्वाज्ञान-प्रकरण
E. आत्मसाक्षात्कार

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (a) C, D, A, B, E
Solution:शिवसंहिता में वर्णित विषयों को अध्यायों के अनुसार क्रमबद्ध है-

C. दार्शनिक सिद्धांत
D. तत्व ज्ञान प्रकरण
A. योग की चार अवस्थाएं
B. दश मुद्राओं का विवेचन
E. आत्मसाक्षात्कार

69. योग-तत्त्वोपनिषद के अनुसार योग की कितनी अवस्थाएँ हैं?

Correct Answer: (b) चार
Solution:

योग-तत्वोपनिषद के अनुसार योग की चार अवस्थाएं होती हैं।

1. मंत्रयोग
2. हठयोग
3. लययोग
4. राजयोग

70. निम्न में से कौन-से आसन हठयोगप्रदिपिका में नहीं वर्णित हैं?

A. सिद्धासन
B. बकासन
C. मतस्यासन
D. वीरभद्रासन
E. धनुरासन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (b) केवल B, C, D
Solution:हठयोगप्रदिपिका (स्वात्माराम द्वारा रचित) में कुल 15 आसनों का वर्णन है।

1. स्वस्तिकासन
2. गोमुखासन
3. वीरासन
4. कुर्मासन
5. कुक्कुटासन
6. उत्तर कुर्मासन
7. धनुरासन
8. मत्स्येन्द्रासन
9. पश्चिमोत्तानासन
10. मयूरासन
11. शवासन
12. सिद्धासन
13. पद्मासन
14. सिंहासन
15. भद्रासन

नोट:- बकासन, मतस्यासन और वीरभद्रासन हठयोगप्रदिपिका में वर्णित नहीं हैं।