Solution:श्वेताश्वतरोपनिषद उपनिषद के अनुसार ध्यान के लिए उपयुक्त स्थान और स्थिति - श्वेताश्वतरोपनिषद अध्याय 2, मंत्र 10-11 “शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः। नात्युच्चं नातिनीचं च चैलाजिन कुशोत्तरम् ।। तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतिचित्तेन्द्रियक्रियः । उपवश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मवि-शुद्धयो ।।"
उपयुक्त बातें -
A.कंकर, अग्नि और बालू से रहित स्थान।
B. नेत्रों को प्रिय या आराम देने वाला स्थान ।
E. सभी प्रकार से शुद्ध हों। नोट - जो वर्णित नहीं है -
C. जल में ध्यान हेतु जल में बैठने को कोई निर्देश नहीं है।
D. व्याघ्र चर्म के ऊपर बैठे-
यह बात श्री मद्भावद्गीता (अध्याय 6, श्लोक 11) में हैं। श्वेताश्वतर उपनिषद में नहीं है।