NTA यू.जी.सी. नेट/जेआरएफ परीक्षा, जून-2025 योगा (Yoga)

Total Questions: 100

71. बृहदरण्यकोपनिषद के अनुसार परमेश्वर निम्न भागों में विभक्त हुआ।

A. अग्नि
D. सूर्य
B. जल
E. रंग
C. वायु

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (b) केवल A, C, D
Solution:बृहदारण्यक उपनिषद (1.4.7-1.4-11) में वर्णन आता है कि -

'स ऐतस्मिन्नेव आत्मनि तमोमूत्वा नानात्वा सृजति.......स एष प्रजापतिः ...."

फिर आगे खण्डों में यह भी कहा गया है कि -

• उस एक अद्वितीय ब्रह्म ने अग्नि, वायु, सूर्य आदि रूपों में स्वयं को विभाजित किया है। अग्नि-मुख (वाणी) से उत्पन्न वायु - नासिका से
• सूर्य नेत्रों से ये तीनों - अग्नि (मुख), वायु (नासिका), सूर्य (नेत्र) - प्रेविध्य रूप से ब्रह्माण्ड की रचना से जुड़े हैं।

72. यौगिक आहार के अनुसार सूची-1 का सूची-II से मिलान कीजिए।

सूची-I सूची-II
(A) स्निग्ध(I) अपथ्य
(B) तिल(II) सात्विक
(C) सोठ(III) राजसिक
(D) अम्ल रस(IV) पथ्य
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIVIII
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (a)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) स्निग्ध(II) सात्विक
(B) तिल(I) अपथ्य
(C) सोठ(IV) पथ्य
(D) अम्ल रस(III) राजसिक

73. ग्रहीतृविषयक समाधि के साधन से क्या प्राप्त होता है?

A. प्रातिभ D. महिमा B. स्थूलावस्था C. श्रावण E. आदर्श नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) केवल A, C, E
Solution:

ग्रहीतृ विषयक समाधि योग दर्शन का एक विशिष्ट स्तर है जिसमें ग्रहिता (ज्ञाता), ग्रहण (ज्ञान प्रक्रिया) और ग्राह्य (विषय) तीनों का अन्तर समाप्त हो जाता है। और योगी को विशुद्ध ज्ञान की प्राप्ति होती है। जो निम्न है-

पतंजलि योग सूत्र (याद 3- विभूतिवाद) में बताया गया कि समाधि से प्राप्त सिद्धियाँ हैं।

• प्रतिभा (Pratibha)
• श्रावणः (Shravana)
• आदर्शः (Adarsha)

74. निम्न में से संधि के प्रकार कौन से हैं?

A.ग्लाइडिंग
B. इनवरजन
C. कोन्डीलयड
D. प्रोटेक्सन
E. सैडल

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (d) केवल A, C, E
Solution:मानव शरीर में सन्धियों के प्रकार को आमतौर पर संरचनात्मक और कार्यात्मक आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। इनमें ग्लाइडिंग, कोन्डीलयड, सैडल आदि संरचनात्मक प्रकार (Synovial joints) से संबंधित है।

1. Gliding Joint (ग्लाइडिंग संधि) जैसे कि कलाई में Carpals
2. Condyloid Joint (कोन्डीलयड संधि) जैसे कि अंगुलियों के जोड़।
3. Saddle Joint (सैंडल संधि) जैसे कि अंगूठे की संधि (Thumb- Carpometa carpal)

75. योगकुण्डल्युपनिषद के अनुसार प्राणायाम का भेद नहीं हैं।

Correct Answer: (a) सीत्कारी
Solution:

योगकुण्डल्युपनिषद, कृष्ण यजुर्वेद की शाखा का उपनिषद है। जो हठयोग और कुण्डलिनी जागरण की क्रियाओं का विस्तार रूप है। वर्णित प्राणायाम :

• नाड़ी शोधन, शीतली, उज्जायी भस्त्रिका, भ्रामरी, प्लाविनी, मूर्छा, सूर्यभेदी।
• सीत्कारी प्राणायाम का उल्लेख नहीं मिलता।

76. योगचुडामणि उपनिषद के अनुसार योगाङ्ग नहीं है।

A. यम
B.आसन
C. प्राणविरोध
D. प्रत्याहार
E. असमाधि

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (d) केवल A, C, E
Solution:

योगचूडामणि उपनिषद एक हठयोग और तंत्रप्रधान उपनिषद है जो योग की विशेष क्रियाओं और साधना मार्ग को विस्तार से प्रस्तुत करता है। इसमें कई योग साधानाएँ दी गई हैं। लेकिन पातंजल योग सूत्र के अष्टाङ्ग योग आठ हैं जैसे- यम, नियम, आसन, प्रणायाम, प्रत्याहार धारणा, ध्यान, समाधि पूरे रूप में नहीं मिलते ।

• यह उपनिषद मुख्य रूप से कुण्डलिनी जागरण, नाड़ी शुद्धि, प्राणायाम, ध्यान और बिन्दु धारणा जैसे हठयोग विषयों पर केन्द्रित है।

A= यम - (नैतिक आचरण)
C = प्राण विरोध (संभवतः प्राणायाम का विकृत रूप)
E = असमाधि यह कोई योगांग नहीं है।

77. ईशावास्योपनिषद के अनुसार अविद्या से किसको पार करते हैं?

Correct Answer: (b) मृत्यु
Solution:

ईशावास्योपनिषद (मंत्र 11) में कहा गया है। विद्यां चा विद्या च यस्तद्वेदोभयं सहं । अविद्यया मृत्युं तीर्वा विद्यया अमृतमश्रुते ।। "जो व्यक्ति अविद्या (कर्म) और विद्या (आत्मज्ञान) दोनों को एक साथ जानता है। वह अविद्या के माध्यम से मृत्यु को पार करता है और विद्या के माध्यम से अमरत्व को प्राप्त करता है।"

78. हठयोग के अनुसार किस मुद्रा के अभ्यास में इडा व पिंगला मरण अवस्था में पहुँच जाती है?

Correct Answer: (e) c और d
Solution:D. महामुद्रा - हठ योग में एक प्रमुख मुद्रा है, जिसका वर्णन हठयोगप्रदीपिका (अध्याय-3) और अन्य योग ग्रंथों में मिलता है। हठयोगप्रदीपिका 3. 10-11 में कहा गया है। "महामुद्रां च संपद्य यथा सिंघे मरु स्थले । इडा च पिंगला मृत्युः सुषुम्नायां प्रवर्तते ।।" में

जब योगी महामुद्रा का अभ्यास करता है, तब इडा और पिंगला नाड़ियाँ मृत्युपथ (निष्क्रिय) हो जाती, और प्राण सुषुम्ना नाड़ी प्रवेश करता है।

• इडा और पिंगला चन्द्र और सूर्य नाड़ी हैं, जो द्वैत को दर्शाती हैं।
• महामुद्रा के अभ्यास से दोनों नाड़ियों की क्रियात्मकता शान्त (मरण समान हो जाती है)।
• प्राण सुषुम्ना में प्रवेश कर ध्यान समाधि की अवस्था संभव बनती है।

C. महाबोध मुद्रा इसका संबंध भी प्राण के ऊपर उठाव और सुषुम्ना में प्रवेश से है। हठयोग प्रदीपिका के अनुसार महाबेधमुद्राः

"प्राण चोदितुमर्हति सुषुम्णायां न संशयः ।।" यह महावेध मुद्रा प्राण को सुषुम्ना में प्रवेश कराने में सक्षम है और इड़ा-पिंगला के प्रभाव को भी न्यून करता है। नोट - उत्तर होना चाहिए NTA ने c, d दोनों माना है।

79. हठयोगप्रदीपिका के अनुसार गोमुखासन में सर्वप्रथम क्या करें?

Correct Answer: (a) बॉये पृष्ठ के पास दाहिनी एड़ी।
Solution:

हठयोग प्रदीपिका अध्याय 1, श्लोक 20, 11 गुल्कौ च पृष्ठयोः कृत्वा जानूनि चोपरि स्थितौ । दक्षिणे पृष्ठसंस्थे तु दक्षिणे गुल्फपद्यके ।। गौमुखाख्यं तदासीन धीमतां मोक्षसाधन् ।।" गुल्फौ च पृष्ठयोः कृत्वा दोनों एड़ियों को पृष्ठ (जाँघ नितंब) के पास रखें। दक्षिणे पृष्ठसंस्थे तु पहले दाहिनी एड़ी को बाएं पृष्ठ के पास रखें।

फिर दूसरी एड़ी को उसकी विपरीत दिशा में रखें। इस प्रकार जब घुटने एक के ऊपर एक आ जाएं, तब वह गोमुखासन कहलाता है।

80. घेरण्ड के अनुसार षट्‌कर्म का भाग है।

A. वातसार
B. चक्रि
C. दन्तमूलधौति
D.शीतक्रम
E. गजकरणी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (b) केवल A, C. D
Solution:घेरण्ड के अनुसार षट्‌कर्म का भाग है-

A= वातसार यह धौति की एक विधि हैं
C = दन्तमूल धौति - यह श्री धौतिका भाग है।
D = शीतक्रम - यह धौति की उपविधि है। विशेषतः जल से शुद्धि हेतु ।

घेरण धौति अन्तः शुद्धि करण के प्रयोग लाते हैं।