Solution:योगचूडामणि उपनिषद एक हठयोग और तंत्रप्रधान उपनिषद है जो योग की विशेष क्रियाओं और साधना मार्ग को विस्तार से प्रस्तुत करता है। इसमें कई योग साधानाएँ दी गई हैं। लेकिन पातंजल योग सूत्र के अष्टाङ्ग योग आठ हैं जैसे- यम, नियम, आसन, प्रणायाम, प्रत्याहार धारणा, ध्यान, समाधि पूरे रूप में नहीं मिलते ।
• यह उपनिषद मुख्य रूप से कुण्डलिनी जागरण, नाड़ी शुद्धि, प्राणायाम, ध्यान और बिन्दु धारणा जैसे हठयोग विषयों पर केन्द्रित है।
A= यम - (नैतिक आचरण)
C = प्राण विरोध (संभवतः प्राणायाम का विकृत रूप)
E = असमाधि यह कोई योगांग नहीं है।