NTA यू.जी.सी. नेट/जेआरएफ परीक्षा, जून-2025 योगा (Yoga)

Total Questions: 100

81. नारद-भक्ति सूत्र के अनुसार भक्ति के लक्षण का क्रम बतायें।

A. गूँगे के रसास्वादन की भाँति
B.किसी किसी पात्र में प्रकाशित होती है।
C. प्रेम का स्वरूप अनिर्वचनीय है।
D. कामना रहित होता है।
E. गुण रहित होता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (a) C, A, B, E, D
Solution:नारद भक्ति सूत्र में भक्ति के लक्षणों का वर्णन अत्यंत सूक्ष्म, भावमय और अनिर्वचनीय शैली में किया गया है। विभिन्न सूत्रों में भक्ति के गुणों व लक्षणों की व्याख्या क्रम से की गई है।

C. प्रेम का स्वरूप अनिर्वचनीय है।
A. गूंगे के रसास्वादन की भाँति।
B.किसी पात्र में प्रकाशित होती है।
B. गुण रहित होता है।
D. कामना रहित होता है।

82. कौन सी वायु विशुद्धि चक्र से संबन्धित शारीरिक क्रियाओं को नियन्त्रित करती है?

Correct Answer: (b) उदान-वायु
Solution:यह पाँच प्रमुख प्राणवायुओं (Pancha Prana) में एक है।

• स्थान : गला: (कंठ) क्षेत्र
• चक्र से सम्बन्ध विशुद्धि चक्र मुख्य कार्य

वाणी, अभिव्यक्ति, गले व सिर की क्रियाएँ, उच्च चेतना की ओर उठाना, उर्ध्वगामी शक्ति (ऊपर उठने की)

83. जन्म-काल के अनुसार क्रमबद्ध करें।

A.टी. कृष्णामाचार्य
B. स्वामी शिवानन्द सरस्वती
C. महर्षि महेश योगी
D. स्वामी राम
E. श्रीश्यामाचरण लाहिड़ी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (c) E, B, A, C, D
Solution:
क्रम और नामजन्म-वर्ष
E. श्री श्यामचरण लाहिड़ी(I) 1828
B. स्वामी शिवानन्द सरस्वती(II) 1887
A. टी कृष्णामाचार्य(III) 1888
D. स्वामी राम(IV) 1925
C. महर्षि महेश योगी(V) 1918 (परन्तु कुछ स्रोत 1917 बताते हैं ये प्रमाणिक नहीं है)

84. नादबिन्दूपनिषद के अनुसार सूची-I और सूची-II को मिलाएं।

सूची-I सूची-II
(A) अकार(I) उत्तर पक्ष
(B) उकार(II) दक्षिण पक्ष
(C) मकार(III) पुच्छ
(D) अर्धमात्रा(IV) मस्तक
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (a)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) अकार(II) दक्षिण पक्ष
(B) उकार(I) उत्तर पक्ष
(C) मकार(III) पुच्छ
(D) अर्धमात्रा(IV) मस्तक

85. हठयोगप्रदीपिका के अनुसार कफजन्य दोष को दूर करने तथा जठराग्नि को प्रदीप्त करने वाला प्राणायाम कौन-सा है?

Correct Answer: (c) उज्जायी
Solution:हठयोग प्रदीपिका अध्याय 2, श्लोक 51-53 में उज्जायी प्राणायाम का वर्णन है। उज्जायी नाम प्राणायामं वक्ष्ये गल्योपरि वायुना। पूरयेदुत्तमं सूक्ष्मं रेचयेत् इवोदं ततः ।।

• कफ दोषविनाशाय क्लेशदोषविनाशनम्।
• उज्जायी प्राणायाम कफदोष विनाशक है।
• जठराग्नि को प्रदीप्त करता है।
• यह साथ ही श्लेष्म (कफ) से उत्पन्न रोगों का नाश करता है।

86. अच्छी पाठ्ययोजना का गुण नहीं है।

Correct Answer: (a) सभी योग अभ्यासों हेतु सामान्य पाठ्य योजना
Solution:• सभी योग अभ्यासों हेतु सामान्य पाठ्य योजना गुण नहीं है, बल्कि यह एक दोष है।

• यह सभी के लिए एक जैसी योजना बनाता है, जो साधकों की योग्यता, क्षमता और आवश्यकता का ध्यान नहीं रखता।
• यह अच्छी पाठ्य-योजना का गुण नहीं है। क्योंकि अच्छी योजना में व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में रखा जाता है।

87. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I सूची-II
(A) अधिवृक्क मज्जा(I) कार्टिसोल
(B) पिट्यूटरी ग्रंथि(II) एस्ट्रोजन
(C) अधिवृक्क कर्टेक्स(III) एपिनेफ्रिन
(D) अण्डाशय(IV) ऑक्सीटोसिन
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IIIIVIII
Correct Answer: (d)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) अधिवृक्क मज्जा(III) एपिनेफ्रिन
(B) पिट्यूटरी ग्रंथि(IV) ऑक्सीटोसिन
(C) अधिवृक्क कर्टेक्स(I) कार्टिसोल
(D) अण्डाशय(II) एस्ट्रोजन

88. योगी के क्लेश और कर्मों का नाश किससे होता है?

Correct Answer: (d) धर्ममेध समाधि
Solution:

(पतंजलि योग सूत्र के आधार पर) पतंजलि योग सूत्र (अध्याय 4, सूत्र 29-30) - "ततः क्लेशकर्म निवृत्ति अर्थात् धर्ममेध समाधि की अवस्था में पहुँचने के बाद योग के क्लेश (दुःख के कारण) और कर्म (संस्कारजन्य बंधन) समाप्त हो जाते हैं।

धर्ममेध समाधि योग के सबसे उच्च अवस्था मानी जाती है जहाँ योगी धर्ममय बादल की तरह दिव्य ज्ञान के परिपूर्ण होता है, वहाँ पहुँचने के बाद कोई बंधन शेष नहीं रहता।

89. घेरण्ड के अनुसार मुद्रा का क्रम श्लोकों के अनुसार है।

A. काकी
B. अश्विनी
D.उड्डीयान
E.महावेध
C. विपरीतकरणी

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

Correct Answer: (a) D, E, C, B, A
Solution:घेरण्ड संहिता अध्याय 3 (मुद्रा प्रकरण) घेरण्ड ऋषि ने मुद्रा अभ्यास के अन्तर्गत 25 मुद्राओं का उल्लेख किया है। श्लोकों के अनुसार मुद्राओं का क्रम आता है उसकी मुद्राएँ निम्नलिखित क्रम में आती है-

D. उड्डीयान मुद्रा।
E. महावेध मुद्रा।
C. विपरीत करणी।
B. अश्विनी।
A. काकी।

90. घेरण्डसंहिता के अनुसार सूची-I को सूची-II से मिलान करें।

सूची-I सूची-II
(A) शोधन(I) प्रत्याहार
(B) स्थैर्य(II) षट्कर्म
(C) लाघव(III) मुद्रा
(D) धैर्य(IV) प्राणायाम
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
कूट:ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIVI
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (b)
Solution:सूची का सही सुमेलन निम्नवत है-
सूची-I सूची-II
(A) शोधन(II) षट्कर्म
(B) स्थैर्य(III) मुद्रा
(C) लाघव(IV) प्राणायाम
(D) धैर्य(I) प्रत्याहार