Solution:(पतंजलि योग सूत्र के आधार पर) पतंजलि योग सूत्र (अध्याय 4, सूत्र 29-30) - "ततः क्लेशकर्म निवृत्ति अर्थात् धर्ममेध समाधि की अवस्था में पहुँचने के बाद योग के क्लेश (दुःख के कारण) और कर्म (संस्कारजन्य बंधन) समाप्त हो जाते हैं।
धर्ममेध समाधि योग के सबसे उच्च अवस्था मानी जाती है जहाँ योगी धर्ममय बादल की तरह दिव्य ज्ञान के परिपूर्ण होता है, वहाँ पहुँचने के बाद कोई बंधन शेष नहीं रहता।