18वीं शताब्दी से अध्ययन के एक आधुनिक क्षेत्र के रूप में अपने अस्तित्व की अधिकांश अवधि में अर्थशास्त्र ने उपभोक्ता और उत्पादक व्यवहार का तर्कसंगत रूप में वर्णन किया है, इसने स्पष्ट किया है, कि क्रेता किसी उत्पाद का चयन क्यों करते हैं, किस प्रकार से कंपनियां अपने मुनाफे को अधिकतम करने के लिए उत्पादन करती और बाजार किस प्रकार से सर्वाधिक दक्ष कीमतों की खोज करते हैं। महान मंदी के साथ बदल गया, जब समग्र चरों की भूमिका सामने आई जिसके लिए बेहतर समझदारी की आवश्यकता थी बजाय की इस पूर्वाधारण के कि आद्यात के बाद बाजार संतुलन में लौट आता है।
इस प्रकार से बृहत अर्थशास्त्र अस्तित्व में आया जो कि इस निकृष्ट विज्ञान का सर्वाधिक निकृष्ट पक्ष है। तब से अर्थशास्त्र का कुछ अन्य शाखाओं में विविधीकरण हुआ है जिसमें सांख्यिकी और मनोविज्ञान का प्रयोग होता है लेकिन इसकी अधिकांश का बदनामी का कारण यह वित्तीय संकटों का पूर्वानुमान लगाने में विफल रहा है।
जैसा कि मेक्रो अथवा वृहत शब्द की प्रकृति ही है- जीडीपी, रोजगार, मुद्रास्फीति और दूसरे महत्वपूर्ण परंतु निद्राजनक मामले और मानदंड से सब समाचार की शीर्ष पंक्ति के विषय हैं यहां सरकारों की भूमिका का प्रश्न आता है जैसे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का विषय आता है। तथापि वृहत दोहराए गए प्रयोगों के साथ प्राक्कल्पनाओं के परीक्षण की वैज्ञानिक विधि से बचता रहा है अब आद्यात के प्रभावों को स्थापित करने के लिए आप किसी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त तो नहीं कर सकते हैं। इसके स्थान पर वृहत अर्थशास्त्री अपने मॉडलों का ऐसे आंकड़ो के आधार पर परीक्षण मात्र कर सकते हैं जिनके उदगम पर ही प्रश्न हो, इससे शेयर बाजार के अगली बार ध्वस्त होने की भविष्यवाणी करना हेली के धूमकेतु की वापसी से लज्जास्पद रूप से कम सटीक हो जाता है।
सूक्ष्म अर्थशास्त्र जो इस प्रयास का सम्मान जनक भाग है, नियंत्रित प्रयोगों की कम सीमाएं है और यह कम अनिश्चित अंतदृष्टि प्रदान करता है। आधुनिक विश्व में वाणिज्य के विस्फोट का श्रेय सर्वाधिक छोटे आर्थिक एजेंट मनुष्यों द्वारा कृत्यों के पूर्वानुमान को जाता है, यह भी बड़ी-बड़ी अवधारणाएं पर आधारित है, सर्वप्रथम ये कि मनुष्य तार्किक होते हैं और सूचना मुक्त हैं। आर्थिक प्रतिरूपण में संकट करोड़ों-करोड़ों सूक्ष्म सत्यों को जोड़कर एक वृहद सत्य बनाने से उत्पन्न होता है।
इससे मॉडलों में सुधार हो रहा है और मात्रात्मक सामर्थ्य में भी, जिनसे वृहत नीति के चालक गुणात्मक निर्णय और अधिक परिष्कृत होंगे।
गद्यांश के अनुसार आर्थिक प्रतिरूपण में संकटों का निम्न में से कौन-सा कारण है?