वर्ष 1947 में स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में आधुनिक बैंकिंग के पहले चरण का शुभारंभ हुआ जब सरकार ने बड़े (प्रमुख) बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया और वित्तीय समावेशन और समाज कल्याण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सुधारों को अन्तःस्थापित किया। दूसरे चरण का शुभारंभ 1990 के दशक में उस समय हुआ जब अर्थव्यवस्था के उदारीकरण तथा प्रौद्योगिकी के अविष्कार के फलस्वरूप नए निजी और विदेशी बैंकों का प्रादुर्भाव हुआ और इससे ग्राहकों को प्रतिस्पधीं एवं नवोन्मेषी उत्पाद उपलब्ध हुए। वर्ष 2000 |
के दशक में तीसरे चरण का शुभारंभ हुआ जब इंटरनेट और मोबाइल का आच्छादन बढ़ा और इस के फलस्वरूप ऑनलाइन एवं मोवाइल बैंकिंग में वृद्धि होने के साथ-साथ गैर-बैंककारी वित्तीय कम्पनियाँ (एन बी एफ सी) और फिनटेक स्टार्ट अप की प्रविष्टि हुई जिनके माध्यम से समष्टि (जनसमूह) जो बैंकिंग से सहयोजित नहीं थी अथवा कम संख्या में बैंकिग कार्यकलाप के सहबद्ध थी, उनकी आवश्यकता पूर्ति के लिए डिजिटल समाधान उपलब्ध कराया गया। भारत में बैंकिंग का चतुर्थ और वर्तमान चरण नवीन (नव मुकुलित) बैंक के प्रादुर्भाव से अभिलक्षित है जो केवल डिजिटल बैंक हैं और ये भौतिक शाखाओं के बिना ही कार्य करते हैं तथा मोबाइल ऐप और वेब प्लेटफार्म के माध्यम से बहुत सी बैंककारी और वित्तीय सेवा प्रदान करते हैं।
नवमुकुलित बैंक प्रायः ग्राहकों को सेवा उपलब्ध कराने के लिए लाइसेंस प्राप्त बैंकों के साथ साझेदारी कर कार्य करते हैं। जबकि डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से उद्विकास हो रहा है, अभी भी बहुत सी चुनौतियों और अंतराल का निवारण किया जाना शेष है। प्रमुख चुनौतियों में से एक पारितंत्र में विभिन्न भागीदारों, प्लेटफार्म और प्रणालियों के मध्य मानकीकरण और अन्तः प्रचालनीयता का अभाव है।
उदाहरणार्थ, बहुविध संदाय विधियाँ (पद्धतियाँ) हैं यथा यूपी आई, आई एम पी एस, एन ई एफ टी, आर टी जी एस, कार्ड, वॉलेट औ क्यू आर कोड इत्यादि इनमें से प्रत्येक उपागमों की अपने स्वयं की विशेषताएँ, सीमाएँ (दोष) और प्रभार हैं। इसके कारण उन ग्राहकों को उलझन और असुविधा होती है जो अलग-अलग ऐप और इंटरनेट के मध्य स्विच करना चाहते हैं और इस प्रकार इनके माध्यम से भूगतान तथा खाते का अभिगम प्राप्त करना चाहते हैं।
कृत्रिम बुद्धि (ए आई) एक सशक्त प्रौद्योगिकी है जिसके माध्यम से डिजिटल बैंक उपरवर्णित चुनौतियों और अंतराल का निवारण करने में सफल हो सकते हैं और इस प्रकार अपने ग्राहकों और हितधारकों का महत्व बढ़ा सकते हैं। ए आई की सहायता से डिजिटल बैंक आँकड़ा और विश्लेषण, मशीन अधिगम, प्राकृतिक भाषा प्रक्रमण, कंप्यूटर विजन और अन्य समुन्नत तकनीकों को बढ़ावा देकर विभिन्न बैंकिंग प्रक्रम को स्वचालित कर सकते हैं
यथा ग्राहक पहचान और सत्यापन, ग्राहक सेवा और सहायता, उत्पाद संस्तुति और अनुप्रस्थ विक्रय, धोखाधड़ी संसूचन और जोखिम प्रबंध, क्रेडिट स्कोरिंग और अभिगोपन तथा 958 विनियामक अनुपालन और प्रतिवेदन करना।
कृत्रिम बुद्धि (ए.आई) चुनौतियों से निपटन में डिजिटल बैंक के लिए किस प्रकार सहायक हो सकता है?
Correct Answer: (c) समुन्नत विश्लेषण प्रदान कर
Solution:कृत्रिम बुद्धि (ए. आई.) डिजिटल बैंकों को चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है समुन्नतं विश्लेषण प्रदान करके। ए. आई. बड़ी मात्रा में डाटा को प्रोसेस करके पैर्टन की पहचान कर सकता है, ग्राहकों के व्यवहार का पूर्वानुमान लगा सकता है, धोखाधड़ी का पता लगा सकता है। इससे बैंक डेटा- आधारित निर्णय ले सकते हैं, ग्राहक अनुभव को बेहतर बना सकते है और अपने संचालान को अनुकूलित कर सकते है।