NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2024 वाणिज्य

Total Questions: 100

91. गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

वर्ष 1947 में स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में आधुनिक बैंकिंग के पहले चरण का शुभारंभ हुआ जब सरकार ने बड़े (प्रमुख) बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया और वित्तीय समावेशन और समाज कल्याण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सुधारों को अन्तःस्थापित किया। दूसरे चरण का शुभारंभ 1990 के दशक में उस समय हुआ जब अर्थव्यवस्था के उदारीकरण तथा प्रौद्योगिकी के अविष्कार के फलस्वरूप नए निजी और विदेशी बैंकों का प्रादुर्भाव हुआ और इससे ग्राहकों को प्रतिस्पधीं एवं नवोन्मेषी उत्पाद उपलब्ध हुए। वर्ष 2000 |
के दशक में तीसरे चरण का शुभारंभ हुआ जब इंटरनेट और मोबाइल का आच्छादन बढ़ा और इस के फलस्वरूप ऑनलाइन एवं मोवाइल बैंकिंग में वृद्धि होने के साथ-साथ गैर-बैंककारी वित्तीय कम्पनियाँ (एन बी एफ सी) और फिनटेक स्टार्ट अप की प्रविष्टि हुई जिनके माध्यम से समष्टि (जनसमूह) जो बैंकिंग से सहयोजित नहीं थी अथवा कम संख्या में बैंकिग कार्यकलाप के सहबद्ध थी, उनकी आवश्यकता पूर्ति के लिए डिजिटल समाधान उपलब्ध कराया गया। भारत में बैंकिंग का चतुर्थ और वर्तमान चरण नवीन (नव मुकुलित) बैंक के प्रादुर्भाव से अभिलक्षित है जो केवल डिजिटल बैंक हैं और ये भौतिक शाखाओं के बिना ही कार्य करते हैं तथा मोबाइल ऐप और वेब प्लेटफार्म के माध्यम से बहुत सी बैंककारी और वित्तीय सेवा प्रदान करते हैं।
नवमुकुलित बैंक प्रायः ग्राहकों को सेवा उपलब्ध कराने के लिए लाइसेंस प्राप्त बैंकों के साथ साझेदारी कर कार्य करते हैं। जबकि डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से उद्विकास हो रहा है, अभी भी बहुत सी चुनौतियों और अंतराल का निवारण किया जाना शेष है। प्रमुख चुनौतियों में से एक पारितंत्र में विभिन्न भागीदारों, प्लेटफार्म और प्रणालियों के मध्य मानकीकरण और अन्तः प्रचालनीयता का अभाव है।
उदाहरणार्थ, बहुविध संदाय विधियाँ (पद्धतियाँ) हैं यथा यूपी आई, आई एम पी एस, एन ई एफ टी, आर टी जी एस, कार्ड, वॉलेट औ क्यू आर कोड इत्यादि इनमें से प्रत्येक उपागमों की अपने स्वयं की विशेषताएँ, सीमाएँ (दोष) और प्रभार हैं। इसके कारण उन ग्राहकों को उलझन और असुविधा होती है जो अलग-अलग ऐप और इंटरनेट के मध्य स्विच करना चाहते हैं और इस प्रकार इनके माध्यम से भूगतान तथा खाते का अभिगम प्राप्त करना चाहते हैं।
कृत्रिम बुद्धि (ए आई) एक सशक्त प्रौद्योगिकी है जिसके माध्यम से डिजिटल बैंक उपरवर्णित चुनौतियों और अंतराल का निवारण करने में सफल हो सकते हैं और इस प्रकार अपने ग्राहकों और हितधारकों का महत्व बढ़ा सकते हैं। ए आई की सहायता से डिजिटल बैंक आँकड़ा और विश्लेषण, मशीन अधिगम, प्राकृतिक भाषा प्रक्रमण, कंप्यूटर विजन और अन्य समुन्नत तकनीकों को बढ़ावा देकर विभिन्न बैंकिंग प्रक्रम को स्वचालित कर सकते हैं
यथा ग्राहक पहचान और सत्यापन, ग्राहक सेवा और सहायता, उत्पाद संस्तुति और अनुप्रस्थ विक्रय, धोखाधड़ी संसूचन और जोखिम प्रबंध, क्रेडिट स्कोरिंग और अभिगोपन तथा 958 विनियामक अनुपालन और प्रतिवेदन करना।
कृत्रिम बुद्धि (ए.आई) चुनौतियों से निपटन में डिजिटल बैंक के लिए किस प्रकार सहायक हो सकता है?

Correct Answer: (c) समुन्नत विश्लेषण प्रदान कर
Solution:

कृत्रिम बुद्धि (ए. आई.) डिजिटल बैंकों को चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है समुन्नतं विश्लेषण प्रदान करके। ए. आई. बड़ी मात्रा में डाटा को प्रोसेस करके पैर्टन की पहचान कर सकता है, ग्राहकों के व्यवहार का पूर्वानुमान लगा सकता है, धोखाधड़ी का पता लगा सकता है। इससे बैंक डेटा- आधारित निर्णय ले सकते हैं, ग्राहक अनुभव को बेहतर बना सकते है और अपने संचालान को अनुकूलित कर सकते है।

92. भारत में नवीन बैंकों (नियो बैंक) में मुख्यतः किस पक्ष पर बल दिया गया है?

Correct Answer: (b) बैंक से असम्बद्ध अथवा अधि-संबद्धता वाली समष्टि की बैंकिंग आवश्यकताओं की पूर्ति ।
Solution:

भारत में नवीन बैंक मुख्यतः बैंक से असम्बद्ध अथवा अधि-संबद्धता वाली समष्टि की बैंकिंग आवश्यकताओं की पूर्ति पर ध्यान कंद्रित करते है। ये डिजिटल ओनली बैंक उन व्यक्तियों और व्यवसायों को सुलभ, उपयोगकर्ता अनुकूल और नवीन विभिन्न सेवाएं प्रदान करने पर जोर देते है,
जिन्हें पारंपरिक बैकिंग सेवाओं तक आसान पहुँच हीं है। मोबाइल ऐप और कृत्रिम बुद्धिमता जैसी तकनीको का उपयोग करके सहज और समावेशी बैंकिंग समाधान प्रदान करते है।

93. भरत में आधुनिक बैंकिंग के दूसरे चरण का शुभारंभ निम्नांकित में से किससे फलस्वरूप हुआ

Correct Answer: (b) अर्थव्यवस्था का उदारीकरण
Solution:

भारत में आधुनिक बैंकिंग के दूसरे चरण का शुभारंभ अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के परिणामस्वरूप हुआ 1990 के दशक की शुरुआत में हुए आर्थिक सुधारों ने बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए, जिसमें निजी बैंकों का प्रवेश, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाना शामिल था।
उदारीकरण नीतियों का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को आधुनिक बनाना, दक्षता में सुधार करना और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजारों के साथ एकीकृत करना था।

94. डिजिटल बैंकिंग परितंत्र में मानकीकरण और अन्तः कार्यात्मकता के अभाव का परिणाम क्या हैं?

Correct Answer: (c) ग्राहकों के लिए उलझन और असुविधा
Solution:

ग्राहकों के लिए उलझन और असुविधाः मानकीकरण और अन्तः कार्यात्मकता के अभाव में ग्राहकों को विभिन्न बैंकिंग प्लेटफॉर्म या सेवाओं का उपयोग करने में कठिनाई हो सकती है। इससे उलझन, अक्षमता और खराब उपयोगकर्ता अनुभव हो सकता है, क्योंकि उन्हें अलग-अलग प्रक्रियाओं, प्रारूपों या सिस्टमों को समझने की आवश्यकता हो सकती है।

95. भारत में डिजिटल बैंकिंग के क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में से एक हैं?

Correct Answer: (c) मानकीकरण और अन्तः प्रचालनीयता का अभाव
Solution:

भारत में डिजिटल बैंकिंग के क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में से एक है :
मानकीकरण और अन्तः प्रचालनीयता का अभाव:-
विभिन्न बैंकिंग प्लेटफॉर्म और सेवाओं के बीच एकरूपता और अन्तः प्रचालनीयता की कमी से ग्राहकों और बैंकों दोनों के लिए अक्षमता और उलझन पैदा हो सकती है।

96. माल और सेवा कर के संदर्भ में 'गंतव्य आधारित कर' पद का क्या मतलब है?

Correct Answer: (d) कर उपभोग स्थल पर कराधान प्राधिकरण को प्राप्त होता है।
Solution:

माल और सेवा कर के सन्दर्भ में 'गंतव्य - आधारित कर पद का अर्थ :
कर उपभोग स्थल पर कराधान प्राधिकरण को प्राप्त होता है- गंतव्य आधारित कर का अर्थ है कि कर उस स्थान पर लगाया जाता है जहां माल या सेवाओं का उपयोग होता है, न कि जहां उनका उत्पादन या उद्धम होता है। माल और सेवाओं कर (GST) के सन्दर्भ में, कर राजस्व उस राज्य या क्षेत्र द्वारा एकत्र किया जाता है।
जहां अंतिम उपभोग होता है। यह सुनिश्चित करता है कि कर लाभ उस स्थान को मिले जहां माल या सेवाओं का अंततः उपयोग किया जाता है, जिससे कर प्रणाली में निष्पक्षता और दक्षता बढ़ती है।

97. माल और सेवा कर प्रणाली में कर का बोझ किसे वहन करना पड़ता है?

Correct Answer: (c) अंतिम उपभोक्ता
Solution:

वस्तु एवं सेवा कर में आपूर्ति श्रृंखला के प्रत्येक चरण में जोड़े गए मूल्य पर ही कर लगाया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि एक ही मूल्य पर एक से अधिक बार कर नहीं लगाया जाता है और अंतिम ग्राहक कर दायित्व वहन करतारता है।

98. 'करों का क्रम प्रपाती प्रभाव' पद का तात्पर्य निम्नांकित में से किससे है?

Correct Answer: (c) कर पर कर प्रभाव
Solution:

'करो का क्रम प्रणाली प्रभाव पद का ताय कर पर कर प्रभाव से है :- यह तब होता है जब किसी उत्पाद या सेवा पर आपूर्ति श्रृंखला के प्रत्येक चरण में कर लगाया जाता है, और कर का बोझ बढ़ जाता है क्योंकि प्रत्येक अगला कर पिछले करो सहित मूल्य पर लगाया जाता है। इसमें अंतिम उत्पाद या सेवा पर समग्र कर बोझ बढ़ जाता है,
जिसे "कर पर कर" का प्रभाव कहा जाता है। यह अप्रत्यक्ष करो (जैसे बिक्री कर या मूल्य वर्धित कर) से जुड़ा होता है, जहां इनपुट टैक्स क्रेडिट सही ढंग से लागू नहीं होता है।

99. निम्नांकित में से कौन-सा विभाग भारत सरकार के अधीन ग्राहक केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, केन्द्रीय माल और सेवा कर (सी जी एस टी), आई जी एस टी और स्वापक से संबंधित विषयों (मामलों) के प्रशासन की निगरानी करता है?

Correct Answer: (d) राजस्व विभाग
Solution:

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सी वी आई सी) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन राजस्व विभाग का एक हिस्सा है। यह केंन्द्रीय उत्पाद शुल्क, केन्द्रीय माल और सेवाकर (सी जी एस टी), एकीकृत माल और सेवा कर (आई.जी.एस.टी.) और स्वापक (नारकोटिक्स) से सम्बन्धित मामलों के प्रशासन की निगरानी करता है।
सीबी आई सी भारत में अप्रत्यक्ष करो से सम्बन्धित नीतियों को तैयार करने और उन्हें लागू करने के लिए जिम्मेदार है।

100. माल और सेवाकर में करों के क्रम प्रपाती प्रभाव को किस प्रकार दूर किया जाता है?

Correct Answer: (c) पूर्ववर्ती चरणों में कर क्रेडिट की अनुमति देकर
Solution:

पूर्ववर्ती चरणों में कर क्रेडिट की अनुमति देकरः माल और सेवा कर (जीएसटी) में करों के क्रम प्रपाती प्रभाव (जिसे "टैक्स ऑफ टैक्स" भी कहा जाता है) को समाप्त करने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आई टी सी) की व्यवस्था की गई है। इसक का मतलब है कि व्यवसाय अपने इनपुट (खरीद) पर भुगतान किए गये करों के लिए क्रेडिट का दावा कर सकते है,
जिसे वे अपने आउटपुट (बिक्री) पर देय करों के खिलाफ समायोजित कर सकते है। यह सुनिश्चित करता है कि कर केवल प्रत्येक चरण में जोड़े गए मूल्य पर लगाया जाता है, जिससे क्रम प्रपाती प्रभाव सम्पात हो जाता है।