हजारी वर्षों में एक ही भू-भाग में, एक जैसी जलवायु में रहने के कारण भारतीय समाज के सभी लोगों में रूप-रंग, वेशभूषा, जीवन दृष्टि, आचार विचार में इतनी समानताएँ आ गई हैं कि नस्लों की अलग-अलग पहचान करना मुश्किल है। जनविज्ञान रंग के आधार पर संसार में तीन तरह की नस्लों को मानता है। पहली नस्ल गोरे लोगों की यानी जिसे काकेशियन कहा गया। दूसरी नस्ल पीले रंग वालों की जिन्हें मंगोल समाज के रूप में देखा गया। तीसरे नस्ल काले रंग की जिन्हें इथोपिया से जोड़ा गया। भारतीय समाज में आर्य, द्रविड, आदिवासी और मंगोल जातियों का प्रभाव देखा जा सकता है। भाषा के आधार पर मंगोल जाति के लोगों की भाषा पर आर्य भाषा का प्रभाव होते हुए भी वे तिब्बती चीनी परिवार से संबद्ध है। द्रविड़ परिवार की भाषाएँ तमिल, मलयालम, कन्नड़ व तेलुगु हैं। भारत से बाहर आर्य भाषाएँ हिन्द-जर्मन भाषा समूह से जुड़ी हैं।
जनविज्ञान के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
Correct Answer: (b) जनविज्ञान पहली नस्ल के लोगों को सर्वश्रेष्ठ घोषित करता है।
Solution:'जनविज्ञान पहली नस्ल के लोगों को सर्वश्रेष्ठ घोषित करता है।' जनविज्ञान के सन्दर्भ में असत्य कथन है।