NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

11. हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा कितने खंडों में लिखी है?

Correct Answer: (b) चार
Solution:हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार खंडों में लिखी है-
हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथाः-
→ चार खण्डों में प्रकाशित बच्चन जी की आत्मकथा स्वयं उन्ही के शब्दों में एक 'स्मृति यात्रा-यज्ञ' है। इस स्मृति यज्ञ में प्रकारान्तर से स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद का हिन्दी-भाषा और साहित्य का पूरा संघर्ष ही मूर्त हो गया है। इस आत्मकथा में संस्मरण, यात्रावृत्त, कविता, साक्षात्कार, नैरेशन आदि अनेक विधाएँ और शैलियाँ गुंफित है। सबसे बड़ी बात है- लेखक के आत्म-स्वीकार का साहस । धर्मवीर भारती ने ठीक ही कहा है- "हिन्दी में अपने बारे में सब कुछ इतनी बेबाकी, साहस और सद्भावना से कह देना यह पहली बार हुआ है।

12. हजारी प्रसाद द्विवेदी के 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' निबंध के अनुसार मानव शरीर का अध्ययन करने वाले किन वैज्ञानिकों का निश्चित मत है कि मानव-चित्त की भाँति मानव शरीर में भी बहुत सी अभ्यासजन्य सहज वृत्तियाँ रह गई हैं?

Correct Answer: (c) प्राणी वैज्ञानिकों
Solution:हजारी प्रसाद द्विवेदी के 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' निबंध के अनुसार मानव शरीर का अध्ययन करने वाले प्राणी वैज्ञानिकों का निश्चित मत है कि मानव चित्त की भाँति मानव शरीर में भी बहुत सी अभ्यासजन्य सहज वृत्तियाँ रह गई है।
→  'नाखून क्यों बढ़ते हैं' हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबन्ध है। अपनी छोटी लड़की के यह पूछने पर कि 'नाखून क्यों बढ़ते हैं', आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबन्धकार की प्रवृत्ति जाग उठती है और वे इसका उत्तर खोजने के लिए मनुष्य के आदिमकाल से अब तक के जीवन पर दृष्टिपात करते है और इस ललित निबन्ध में इस निष्कर्ष पर पहुंचते है कि नाखून पशुता के प्रतीक हैं और उनका काटना मनुष्यता की निशानी है। ये अस्त्र-शस्त्रों, अणु, परमाणु बमों का बनना भी पशुता की प्रवृत्ति है।
→ हजारी प्रसाद द्विवेदी छायावादोत्तर निबन्धकारों में सर्वश्रेष्ठ है। इनके निबन्धों की आधारभूमि भारतीय संस्कृति है। किसी भी पौधे, पशु या पक्षी को माध्यम बनाकर एक मनोरम भावभूमि की सृष्टि करते हुए भारत के अतीत और वर्तमान सांस्कृतिक जीवन की सरसता को छू लेना द्विवेजी के लिए एक सहज व्यापार है। इनके निबन्ध संग्रह इस प्रकार हैं- अशोक के फूल (1948), कल्पलता (1951), मध्यकालीन धर्मसाधना (1952), विचार और वितर्क (1957), विचार प्रवाह (1959), कुटज (1964), साहित्यसहचर (1965), आलोक पर्व (1972)।

13. 'जामुन का पेड़' के आधार पर सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I (पात्र)सूची-II (वाक्य)
A. सेक्रेटरी1. अच्छा हुआ कि तना तुम्हारे कूल्हे पर गिरा, अगर कमर पर गिरता तो रीढ़ की हड्डी टूट जाती।
B. क्लर्क2. मगर इस तरह तो मैं मर जाऊँगा।
C. माली3. हमारा विभाग किसी हालत में इस फलदार वृक्ष को काटने की इजाजत नहीं दे सकता।
D. आदमी4. मगर एक आदमी की जान का सवाल है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (b)
Solution:'जामुन का पेड़' के आधार पर सूची-I का सूची-II सही मिलान इस प्रकार है-
पात्र  वाक्य  
A. सेक्रेटरी3. हमारा विभाग किसी हालत में इस फलदार वृक्ष को काटने की इजाजत नहीं दे सकता।
B. क्लर्क4. मगर एक आदमी की जान का सवाल है।
C. माली1. अच्छा हुआ कि तना तुम्हारे कूल्हे पर गिरा, अगर कमर पर गिरता तो रीढ़ की हड्डी टूट जाती।
D. आदमी2. मगर इस तरह तो मैं मर जाऊँगा।

→ 'जामुन का पेड़' कृष्णचन्दर की एक प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कथा है। जामुन का पेड़ हमारी राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर एक करारा व्यंग्य है। एक आदमी तूफान में जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता है अब उसे बचाने के लिए पेड़ काटा जाय या न काटा जाय, इसी सवाल को सुलझाने के लिए प्रशासन और उसके कारिन्दे इस तरह की कार्यशैली अपनाते है कि आदेश आने तक व्यक्ति की मौत हो जाती है।

14. निम्नलिखित में से कौन से युग्म सही हैं :

(A) मूर्खता मेरी जन्मजात विरासत थी - मुर्दहिया
(B) कर्म बहुत से आघात सहने का एकमात्र उपाय होता है - एक बूँद सहसा उछली
(C) जनविज्ञान की पहली कसौटी रंग की है - माटी की मूरतें
(D) आरंभ जितना महत्वपूर्ण होता है, अन्त उतना ही महत्व हीन - आवारा मसीहा
(E) किसी भी शासन के दो प्रमुख अंग होते हैं - सुरक्षा और विधि व्यवस्था क्या भूलूँ कया याद करूँ
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) (A), (D), (E)
Solution:कथन एवं संबंधित रचनाओं के सही युग्म हैं-
(A) मूर्खता मेरी जन्मजात विरासत थी मुर्दहिया।
(D) आरंभ जितना महत्वपूर्ण होता है, अन्त उतना ही महत्वहीन आवारा मसीहा।
(E) किसी भी शासन के दो प्रमुख अंग होते हैं सुरक्षा और विधि व्यवस्था - क्या क्या कया याद करूँ
→  तुलसीराम की आत्मकथा का प्रथम भाग मुर्दहिया (2010) में उनकी बाल्यावस्था से लेकर युवावस्था के बीच की घटनाओं का केवल चित्रण ही नही है, बल्कि लेखक ने अपनी आत्मकथा में भारतीय समाज के विविध सामाजिक यथार्थ का अनावरण भी किया है। मुर्दहिया के माध्यम से उन्होंने दलित बस्ती की जिन्दगी और अनेकानेक घटनाओं के बहाने वहाँ के लोकजीवन पर भी प्रकाश डाला है। तुलसीराम की आत्मकथा का दूसरा भाग मणिकार्णिका 2013 में प्रकाशित हुई।
→ आवारामसीहा विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित प्रसिद्ध बांग्ला लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी है। 'आवारा मसीहा' का प्रथम संस्करण 1974 में प्रकाशित हुआ था। इसके तीन भाग है- 1- दिशाहारा 2 - दिशा की खोज 3- दिशांत
→ 'क्या भूलू क्या याद करू 1969 में प्रकाशित हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा का प्रथम भाग है। इसके प्रारम्भ में उत्तर प्रदेश की अमोढ़ा (बस्ती) गाँव का उल्लेख है। इसमें तत्कालीन समय के संयुक्त परिवार तथा गरीबी में भी लोगों का एक साथ रहने का वर्णन है।
→ एक बूँद सहसा उछली' अज्ञेय का यात्रावृत्तान्त है जो 1960 में प्रकाशित हुआ था।
→ 'माटी की मूरते' रामवृक्ष बेनीपुरी का 1946 में प्रकाशित रेखाचित्र है।

15. निम्नलिखित में से कौन से युग्म सही हैं :

(A) विलियम वर्डस्वर्थ - स्वच्छन्दतावाद
(B) क्रोंचे - अभिव्यंजनावाद
(C) अरस्तू - त्रासदी
(D) लांजाइनस नयी समीक्षा
(E) ऐलन टेट संरचना और बनावट
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) केवल (A), (B), (C)
Solution:'विलियम वर्डस्वर्थ- स्वच्छन्दतावाद, क्रोंचे अभिव्यंजनावाद, अरस्तू त्रासदी' युग्म सही है। स्वच्छन्दतावाद एक वैश्विक परिघटना है। यह अलग-अलग देशों में अलग-अलग कालखण्डों में घटित हुई। अंग्रेजी स्वच्छन्दतावाद का कालखण्ड 1798 से सन् 1835 ई. है। यही काल वसवर्थ की रचनाओं का भी है। वसवर्थ ने अपनी कविताओं और समीक्षात्मक टिप्पणियों से स्वच्छन्दतावाद की साहित्य जगत में एक पहचान दिलायी। वईसवर्थ 1995 ई. में कॉलरिज के मित्र बने तथा उनके ही सहलेखन में 'लिरिकल बैलेड्स' नामक कविता संग्रह सन् 1798 ई. प्रकाशित हुआ। लिरिकल बैलेड्स को स्वच्छन्दतावादी काव्यांदोलन का घोषणा पत्र माना जाता है।
वर्डसवर्थ की काव्य सम्बन्धी मान्यतायें:-
→ काव्य में ग्रामीणों की दैनिक बोलचाल की भाषा का प्रयोग होना चाहिए।
→ काव्य और गद्य की भाषा में कोई तात्विक भेद नही है। यह अन्तर केवल छन्द के कारण होता है।
→ क्रोचे एक आत्मवादी विचारक थे और उसने कलाओं का विवेचन भी इसी आधार पर किया है। क्रोचे ने 'ईस्थेटिक', न्यू एसेज आन एस्थेटिक (1920), डिफेंस ऑफ पोएट्री (1933) नामक पुस्तकों की रचना की। क्रोचे के अनुसार अन्तःप्रज्ञा कला है और प्रत्येक कला अन्तःप्रज्ञा हैं। इन्होंने कला निर्माण में प्रतिभा को मूल कारण माना है।
→ जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से श्रेष्ठ होता है और जिसमें करुणा और त्रास की व्याप्ति होती है, वह त्रासदी कहलाती है। तथा जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से निकृष्ट होता है त्रासदी के समान महाकाव्य का विषयम भी गंभीर एवं श्रेष्ठ होता है। अरस्तू त्रासदी को काव्य का सर्वश्रेष्ठ रूप मानते हैं।
→ लोजाइनस के ग्रंथ का ना 'पेरिहुप्सुस' है। इन्होंने उदात्त सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था। लौंजाइनस ने उदात्त की उत्पत्ति के लिए प्रतिभा को सर्वाधिक महत्व दिया।

16. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची-I (उच्चारण)सूची-II (व्यंजन)
A. कंठ्य1.
B. मूर्धन्य2.
C. दन्त्य3.
D. ओष्ठ्य4.

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b)
Solution:
उच्चारणव्यंजन
कंठ्य
मूर्धन्य
दन्त्य
ओष्ठ्य

उच्चारण स्थान के आधार पर ध्वनियों का वर्गीकरणः-

उच्चारण स्थानस्वरव्यंजन
कंठ्यअ, आ और विसर्गक, ख, ग, घ, ङ, ह
तालव्यइ, ईच, छ, ज, झ, ञ, य
मूर्धन्यट, ठ, ड, ढ, ण, र, ल, ष
दंत्यत, थ, द, ध, न, स
ओष्ठ्यउ, ऊप, फ, ब, भ, म
अनुनासिकअनुस्वार ( ं )ङ, ञ, ण, न, म
कंठोष्ठ्यए, ऐ
कंठोष्ठ्यऑ, ओ, औ
दंत्योष्ठ्य
वत्स्यन, स, र, ल

17. 'बिम्ब' के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

(A) दृश्य बिम्ब आकार वाले होते हैं।
(B) श्रव्य बिम्ब का ग्रहण कर्णेन्द्रिय के द्वारा होता है।
(C) जटिल बिम्ब में अनुभूति का बिम्ब सरल होता है।
(D) सरल अनुभूतियों से प्रेरित बिम्ब मिश्र विम्व कहलाते हैं।
(E) मिश्र बिम्ब में मिश्र अनुभूति का बिम्ब सरल विम्व कहलाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (B)
Solution:"दृश्य बिम्ब आकार वाले होते हैं। श्रव्य बिम्ब का ग्रहण कर्णेन्द्रिय के द्वारा होता है।' बिम्ब के सन्दर्भ में दोनों कथन सही हैं।
→ जब किसी पदार्थ को चित्रबद्ध करके एक मूर्त रूप दिया जाता है तो उसे बिम्ब कहते है। कवि टी. ई. ह्यूम को बिंबवाद का प्रवर्तक माना जाता है किन्तु आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने फ्लिंट को इसका प्रवर्तक माना है।
→ काव्य में बिंब का मुख्य काम सम्प्रेषण का है बिम्ब काव्य में प्रयुक्त दृश्य को स्पष्ट करता है तथा कवि की अनुभूति में एक तीव्रता पैदा करता है।
→  हिन्दी समीक्षा में 'बिम्ब' शब्द का सबसे पहले प्रयोग रामचन्द्र शुक्ल ने अपने निबन्ध 'भाव या मनोविकार' में 1915 में किया। काव्य में बिंब की चर्चा करते हुए रामचन्द्र शुक्ल ने रूपविधान को स्पष्ट किया है। शुक्ल जी के अनुसार रूपविधान के तीन प्रकार हैं-
(1) प्रत्यक्ष रूपविधान (2) स्मृत रूपविधान (3) कल्पित रूपविधान । कल्पित रूपविधान को ही काव्य के लिए आवश्यक माना जाता है। यह जरूर है कि प्रत्यक्ष और स्मृत रूपविधान कल्पित रूपविधान के आधार हैं।

18. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए

सूची-I (पात्र)सूची-II (उपन्यास)
A. सनीचर1. झूठासच
B. भट्टिनी2. मैला आँचल
C. कमली3. रागदरबारी
D. जयदेवपुरी4. बाणभट्ट की आत्मकथा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c)
Solution:सूची-I से सूची-II का मिलान सही मिलान है-
पात्रउपन्यास
सनीचररागदरबारी
भट्टिनीबाणभट्ट की आत्मकथा
कमलीमैला आँचल
जयदेवपुरीझूठासच

→ रागदरबारी (1968) श्रीलाल शुक्ल का उपन्यास है। श्रीलाल शुक्ल ने पूरा उपन्यास व्यंग्यात्मक शैली में लिखा है। इस उपन्यास में पूर्वांचल के गाँव शिवपालगंज के आर्थिक,सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन का यथार्थ चित्रण है। उपन्यास के अन्य पात्र है- वैद्यजी, रंगनाथ, प्रिंसिपल साहब, मोतीराम, रुप्पन, बद्री, छोटे, लंगड़
→ हजारी प्रसाद द्विवेदी कृत ' बाणभट्ट की आत्मकथा' में कवि बाणभट्ट के जीवन का आधार लेकर राजा हर्षवर्धन के समय की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक स्थितियों का चित्रण किया गया है। इस उपन्यास में प्रेम का उदात्त स्वरूप चित्रित हुआ है। 'बाणभट्ट की आत्मकथा' उपन्यास के पात्रः-
स्त्री पात्र- निपुणिका (निउनिया), भट्टिनी, सुचारिता, महामाया।
पुरुष पात्र- बाणभट्ट, अघोर भैरव, विरतिवज्र ।
→ मैला आँचल रेणु का आंचलिक उपन्यास है। जिसमें पूर्णिया जिले के मेरीगंज गाँव को कथा का केन्द्र बनाया गया हैं इस उपन्यास में आजाद भारत के ग्रामीण अंचलों के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक यथार्थ का जीवंत चित्रण है।
→ झूठा सच उपन्यास में यशपाल ने 1942 ई से 1957 ई. तक भारत के राष्ट्रीय एवं सामाजिक जीवन का चित्रण किया है। यह उपन्यास दो भागों में प्रकाशित है- पहला भाग- वतन और देश (1958) तथा दूसरा भाग देश का भविष्य (1960 ई.) है।
झूठा सच उपन्यास के पात्रः-
स्त्री पात्र-
कनक, उर्मिला, तारा
पुरुष पात्र- जयदेव पुरी, सूदजी, गिल, असद, सोमराज, डॉ. प्राणनाथ।

19. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची-I (नाटककार)सूची-II (नाटक)
A. हरिकृष्ण प्रेमी1. मत्स्यगंधा
B. उदयशंकर भट्ट2. तौलिए
C. जयशंकर प्रसाद3. शिवासाधना
D. उपेन्द्रनाथ अश्क4. कामना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d)
Solution:सूची-I से सूची-II का सही मिलान इस प्रकार है-
नाटककारनाटक
हरिकृष्ण प्रेमीशिवासाधना
उदयशंकर भट्टमत्स्यगंधा
जयशंकर प्रसादकामना
उपेन्द्रनाथ अश्कतौलिए

→ 'शिवासाधना' हरिकृष्ण प्रेमी का 1937 में प्रकाशित ऐतिहासिक नाटक है। जो पाँच अंकों में विभक्त है।
इस नाटक के पात्रः-
स्त्री पात्र-
जीजाबाई, सईबाई, यमुना, अकाबाई, रोशनआरा, जहाँ नारा, जेबुन्निसा, सलीमा, बड़ी साहिबा।
पुरुष पात्र- शिवाजी, शाहजी, तानाजी मालुसुरे, बाजी पासलकर, स्वामी रामदास, मोरोपंत, रघुनाथ पंत इत्यादि ।
→ जयशंकर प्रसाद कृत 'कामना' (1927), 'प्रबोध चन्द्रीदय' की शैली को आधार बनाकर लिखा गया नाटक है। यह पूर्णतः कल्पना पर आधारित नाटक है। यह प्रसाद का संस्कृति प्रधान नाटक है। जिसमें भावनाओं को पात्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह प्रसाद का सर्वथा मौलिक नाटक है। यह नाटक कामायनी की पृष्ठभूमि का कार्य करता है।
→ 'तौलिए' उपेन्द्रनाथ अश्क का पारिवारिक जीवन पर आधारित एक मनोवैज्ञानिक एकांकी है। बसन्त तथा मधु पति पत्नी है। दोनों के संस्कार भिन्न-भिन्न है। उनमें छोटी-छोटी बातों पर विवाद हो जाता है। बसन्त और मधु एकांकी के प्रमुख पात्र है।

20. "आकाशदीप' कहानी में प्रेम और घृणा की गहन आवेगमयता की गहरी टकराहट है।" उपरोक्त कथन के लेखक हैं :

Correct Answer: (b) बच्चन सिंह
Solution:"आकाशदीप' कहानी में प्रेम और घृणा की गहन आवेगमयता की गहरी टकराहट है।" कथन बच्चन सिंह का है। (हिन्दी साहित्य का दूसरा इतिहास-बच्चन सिंह-स्वच्छन्दतावाद-युग, पृष्ठ-387)
→ आकाशदीप में संगृहीत अधिकांश कहानियाँ मानसिक अन्तर्द्धन्द की कहानियाँ है। आकाशदीप कहानी संग्रह का प्रकाशन 1928 ई. में हुआ था।
→ इस कहानी की कथावस्तु अबला कही जाने वाली अनाथ युवती चंपा की स्वातन्त्र्य लालसा, पिता के हत्यारे से प्रतिशोध और फिर उसी से प्रेम करने के कारण उपजे अंतर्द्वन्द्व पर आधारित है। उसका यह अन्तर्द्वन्द्व समय और पारिस्थितियों के चलते किस प्रकार मानव सेवा में परिणित होकर उसे प्रेम का बलिदान करने के लिए प्रेरित करता है यही इस कहानी की कथावस्तु है।
प्रसाद समग्रतः रोमैटिक कथाकार है। इनकी कहानियों में स्वच्छन्दतावादी तत्व उसी सघनता में मिलते है जिस सघनता में उनके काव्य में दिखाई पड़ते है। जयशंकर प्रसाद की प्रथम कहानी 'ग्राम' 1911 ई.में इन्दु पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। 1912 में प्रसाद का प्रथम कहानी संग्रह 'छाया' प्रकाशित हुआ, जिसे हिन्दी का भी प्रथम कहानी संग्रह माना जाता है। छाया (1912), प्रतिध्वनि (1926), आकाशद्वीप (1928), आँधी (1931), इन्द्रपाल (1936)।