(A) ध्रुवदेवी को लेकर क्या साम्राज्य से भी हाथ धोना पड़ेगा?
(B) मैं उपहार में देने की वस्तु हूँ।
(C) यहाँ ऐसी निर्लज्जता का नाटक मैं नहीं देखना चाहती।
(D) यहाँ मर्द रामगुप्त अपने पिता की तरह दिग्विजय करने निकला था।
(E) तुम्हारा और मेरा जीवन मरण साथ नहीं हो सकता।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
Correct Answer: (b) केवल (A), (C)
Solution:'ध्रुवस्वामिनी' नाटक के संदर्भ में प्रश्नगत कथनों में सत्य कथन निम्नखित हैं-
→ रामगुप्तः- “ध्रुवदेवी को लेकर क्या साम्राज्य से भी हाथ धोना पड़ेगा।
→ ध्रुवस्वामिनीः- "यहाँ ऐसी निर्लज्जता का नाटक मैं नहीं देखना चाहती" । ध्रुवस्वामिनी (1933) नाटक को जयशंकर प्रसाद ने विशाख के 'देवी चन्द्रगुप्तम' के आधार पर लिखा है। इस नाटक में प्रसाद जी ने नूतन प्रयोग किया है। इसमें वे समस्या नाटकों की परम्परा का सूत्रपात किया है। समस्या, नारी की सामाजिक स्थिति से सम्बन्ध है मुख्यतः अनमेल विवाह का प्रश्न सामने रखा गया है। विधान की दृष्टि से भी नाटक में नवीन प्रयोग मिलता है। इस नाटक में कुल तीन अंक है। प्रत्येक अंक में कुल एक ही दृश्य है।
→ प्रसाद ने कुल 12 नाटकों की रचना की है जो इस प्रकार हैं- सज्जन (1910), करुणालय (1913), प्रायश्चित (1913), राज्यश्री (1914), विशाख (1921), अजातशत्रु (1922), जनमेजप का नागयज्ञ (1926), कामना (1927), स्कंदगुप्त (1928), एक घूँट (1929), चन्द्रगुप्त (1931), ध्रुवस्वामिनी (1933) ।
ध्रुवस्वामिनी नाटक के पात्रः-
पुरुष पात्रः- चंद्रगुप्त, रामगुप्त, शिखरस्वामी, पुरोहित, शकराज, खिंगल, मिहिरदेव ।
नारी पात्रः- ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा