NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

21. 'आवारा मसीहा' के आधार पर निम्नलिखित में से कौन से कथन असत्य हैं?

(A) नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में देशबंधु चाहते थे कि असहयोग का प्रस्ताव पास हो।
(B) देशबन्धु अपने खर्चे पर 200 प्रतिनिधियों का दल लेकर आए थे।
(C) देशबंधु दास ने घोषणा की थी कि वे अपनी वकालत छोड़ देंगे।
(D) देशबंधु दास की आय और उनके ऐश्वर्य की कोई सीमा न थी।
(E) देशबंधु के वकालत छोड़ने के समय शरत् बाबू बड़ोदरा में रहते थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) (A), (B), (E)
Solution:आवारा मसीहा के आधार पर असत्य कथन है।
(A) नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में देशबंधु चाहते थे कि असहयोग  का प्रस्ताव पास हो।
(B) देशबन्धु अपने खर्चे पर 200 प्रतिनिधियों का दल लेकर आए थे।
(E) देशबंधु के वकालत छोड़ने के समय शरत् बाबू बड़ोदरा में रहते थे।
→ 'आवारा मसीहा' विष्णु प्रभाकर कृत बंग्ला के अमर कथाशिल्पी शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की प्रामाणिक जीवन गाथा है। इसका प्रथम संस्करण मार्च 1974 में प्रकाशित हुआ था। विष्णु प्रभाकर को इस जीवनी को लिखने में 14 वर्ष लगे।
यह तीन पर्वों में विभाजित है जो इस प्रकार हैं-
1- प्रथम पर्व - दिशाहारा - इससे 18 उपशीर्षक है।
2- द्वितीय पर्व - दिशा की खोज - इससे भी 18 उपशीर्षक है।
3- तृतीय पर्व - दिशांत - इससे 29 उपशीर्षक है।

22. "उत्तर अपभ्रंश ही पुरानी हिन्दी है", यह कथन किस विद्वान का है?

Correct Answer: (b) चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
Solution:"उत्तर अपभ्रंश ही पुरानी हिन्दी है", यह कथन चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का हैं।
→ चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने सन् 1921 की नागरी प्रचारिणी पत्रिका में 'पुरानी हिन्दी' शीर्षक से एक लेखमाला की शुरूआत की। इसमें उन्होंने लिखा है- "विक्रम की 7वीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक अपभ्रंश की प्रधानता रही और फिर वह पुरानी हिन्दी में परिणत हो गई।"
→ गुलेरी जी अपभ्रंश को स्पष्टतः दो भागों में बाँट देते है- पुरानी अपभ्रंश और परवर्ती अपभ्रंश। बाद में चलकर इस परवर्ती अपभ्रंश को हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्मिलित किया जाने लगा।

23. कामता प्रसाद गुरु ने व्युत्पत्ति के अनुसार सार्वनामिक विशेषण के कितने भेद माने हैं?

Correct Answer: (a) दो
Solution:कामता प्रसाद गुरु ने व्युत्पत्ति के अनुसार सार्वनामिक विशेषण के दो भेद माने है।
सार्वनामिक विशेषणः - पुरुष वाचक और निजवाचक सर्वनामों को छोड़कर शेष सर्वनामों का प्रयोग विशेषण के समान होता है। जब ये शब्द अकेले आते है तब सर्वनाम होते है और जब इनके साथ संज्ञा आती है तब ये विशेषक होते है। जैसे- वह बाहर खड़ा है।,नौकर आया।
→ सार्वनामिक विशेषण व्युत्पत्ति के अनुसार दो प्रकार के होते हैं-
1. मूल सर्वनामः जो बिना किसी रूपान्तर के संज्ञा के साथ आते हैं। जैसे- वह लड़का, वह घर, कोई नौकर इत्यादि ।
2. यौगिक सर्वनामः जो मूल सर्वनामों में प्रत्यय लगाने से बनते है और संज्ञा के साथ आते है, जैसे ऐसा आदमी, कैसा घर आदि।

24. अज्ञेय की रचनाओं के आधार पर सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (पंक्ति)सूची-II (रचना)
A. आदमी का घर जब जलता है, तब उसे दुख होता है1. विपथगा
B. वह चाहता था, एकदम इन सबके जीवन से निकल जाए2. द्रोही
C. धर्म ? वही धर्म, जिसे तुम एक स्कूल की नौकरी के लिए बेच खाते हो?3. गैंग्रीन
D. मुझे ऐसा लग रहा था कि इस घर पर जो छाया घिरी हुई है, वह अज्ञात रहकर भी मानो मुझे वश में कर रही है।4. हरसिंगार

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही कीजिए :

Correct Answer: (a)
Solution:अज्ञेय की रचनाओं के आधार पर सूची-I से सूची-I का मिलान इस प्रकार है-
पंक्ति रचना 
आदमी का घर जब जलता है, तब उसे दुख होता हैद्रोही
वह चाहता था, एकदम इन सबके जीवन से निकल जाएहरसिंगार
धर्म? वही धर्म, जिसे तुम एक स्कूल की नौकरी के लिए बेच खाते हो?विपथगा
मुझे ऐसा लग रहा था कि इस घर पर जो छाया घिरी हुई है, वह अज्ञात रहकर भी मानों मुझे वश में कर रही है।गैंग्रीन

→ विपथगा में अज्ञेय ने स्वछन्द भावधारा का अनुसरण करते हुए भी तत्कालीन मानसिकता के आधार पर क्रान्ति को समर्थन दिया है। इसकी कथावस्तु रूसी क्रान्ति को आधार बनाकर प्रस्तुत की गई है, जिसके अन्तर्गत एक युवती क्रान्तिकारिणी (मेरिया इवानोपना) के अभूतपूर्व त्याग का दृष्टान्त उपस्थित किया गया है।
→ ग्रैंग्रीन कहानी मध्यवर्गीय परिवार में यांत्रिक जीवन जीने वाली अकेलेपन में घुटती हुई, अभावग्रस्त, नीरस, उदास, दुःख से छटपटाती स्त्री की करुणा का चित्र है। यह कहानी पहले ग्रैंग्रीन नाम से प्रकाशित हुआ था बाद में इसका नाम बदल कर 'रोज' शीर्षक से छापा गया। मालती, महेश्वर, टिटी, कथाकार इस कहानी के प्रमुख पात्र हैं।
→ अज्ञेय की अधिकांश कहानियों का मूल स्वर व्यक्ति के अंतर्मन की खोज है। शहरीकरण, मध्यवर्ग के विस्तार आदि के कारण किस प्रकार व्यक्ति यांत्रिक जीवन का शिकार हो जाता है, किस प्रकार ऊब और घुटन जैसे तत्व उसके जीवन में शामिल हो जाते है। यह तत्व इनकी कहानियों में प्रबल है। अपने रोमानी रुझान के कारण अज्ञेय का मन सबसे अधिक स्त्री और प्रेम संबन्धों के अंकन में रमता है। इस दृष्टि से 'अमर वल्लरी' और 'हरसिंगार' कहानियाँ उल्लेखनीय है।
अज्ञेय के कहानी संग्रहः- विपथगा (1937), परंपरा (1940), कोठरी की बात (1945), अमरवल्लरी (1945), शरणार्थी (1948), जयदोल (1951), ये तेरे प्रतिरूप (1961)

25. निम्नलिखित रचनाओं के उनकी विधाओं के साथ सुमेलित सही युग्म कौन से हैं?

(A) भोलाराम का जीव - व्यंग्य
(B) नेत्रदान - आत्मकथा
(C) मुर्दहिया - कहानी
(D) कुसुमांजलि - नाटक
(E) आवारा मसीहा जीवनी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) (A), (E)
Solution:'भोलाराम का जीव व्यंग्य', आवारा मसीहा जीवनी' रचना और उनकी विधा के साथ सुमेलित युग्म है।
→ 'भोलाराम का जीव व्यंग्य' हरिशंकर परसाई की ऐसी कहानी है जिसमें व्यंग्य की तीखी मार स्पष्ट झलकती है। इस कहानी में सामाजिक विसंगतियों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को केन्द्र में रखा गया है। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और सिफारिश का जो आलम है उसे व्यंग्य विनोद के सहारे 'भोलाराम का जीव' में अभिव्यक्त किया गया है।
हरिशंकर परसाई के कहानी संग्रहः- दो नाक वाले लोग, हसते हैं रोते हैं, भोलाराम का जीव । → मुर्दहिया डॉ. तुलसीराम की आत्मकथा है। यह सात अध्यायों में विभाजित है। लेखक ने अपनी आत्मकथा में एक साथ दो पीड़ाओं की अभिव्यक्ति की है एक तो जातिगत भेदभाव जनित पीड़ा थी जो उन्हें समाज में झेलनी पड़ती थी दूसरी पीड़ा उन्हें (कनवा) एक आँख के चले जाने के कारण झेलनी पड़ती थी। इसमें लेखक के आरंभिक पढ़ाई से लेकर मैट्रिक तक की पढ़ाई का चित्रण है।

26. इनमें से सही युग्म कौन से हैं?

(A) कला विवेचन - कुमार विमल
(B) शब्द और स्मृति - निर्मल वर्मा
(C) नयी कविता के प्रतिमान - नामवर सिंह
(D) आधुनिकता के पहलू - विपिन कुमार अग्रवाल
(E) नयी कविता स्वरूप और समस्याएँ - लक्ष्मीकांत वर्मा
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (A), (B), (D)
Solution:(A) कला विवेचन कुमार विमल', 'शब्द और स्मृति निर्मल वर्मा', 'आधुनिकता के पहलू - विपिन कुमार अग्रवाल' सही युग्म हैं।
→ कुमार विमल समकालीन आलोचक है इनकी आलोचनात्मक कृतियाँ इस प्रकार हैं- सौन्दर्यशास्त्र के तत्व, छायावाद का सौन्दर्य शास्त्रीय अध्ययन, कला विवेचन (1968)।
→ शब्द और स्मृति में निर्मल वर्मा ने अधिकांश उन निबन्धों को संकलित किया है, जो शिमला इंस्टिट्यूट के आवास (1972-72) में लिखे थे। निर्मल वर्मा इन निबन्धों को गैर आधुनिक कहते है
क्योंकि इनमें आधुनिकता के उन सब अन्धविश्वासों, रूढ़िगत फैशनों और फामूलों पर शंका प्रकट की गई है जिन्हें हम आँखे मूंदकर स्वीकार कर लेते हैं। निर्मल वर्मा के निबंध संग्रह इस प्रकार हैं-
हर बारिश में (1970), शब्द और स्मृति (1976), कला का जोखिम (1981), ढलान से उतरते हुए (1985), भारत और यूरोप, प्रतिश्रुति का क्षेत्र (1991), शताब्दी के ढलतें वर्षों में (1995), दूसरे शब्दों में (1947), आदि अंत और आरम्भ (2001)।
→ नयी कविता के प्रतिमान (1957) लक्ष्मीकांत वर्मा की आलोचनात्मक कृति है।
→ 'नयी कविता: स्वरूप और समस्याएँ' जगदीश गुप्त की आलोचनात्मक कृति है। कविता के नए प्रतिमान नामवर सिंह की पुस्तक है।

27. "चढ़ली जवानी मोरा अंग अंग फड़के से, कब होइहै गवना हमार भउजियाऽऽऽ " 'मैला आँचल' के इस गीत का प्रकार निम्न में से कौन-सा है।

Correct Answer: (c) भउजिया गीत
Solution:मैला आँचल के इस गीत का प्रकार भउजिया गीत है। मैला आँचल में यह गीत पक्की सड़क पर गाड़ीवानों का दल गाड़ी हाकते हुए गाते हैं।

28. 'मुर्दहिया' के संदर्भ में निम्नलिखित में कौन से कथन असत्य हैं?

(A) शांई के शरपतवा के शांप बोलेला, शांई मारै शिटकुनिया शे शपशपाशप ।
(B) धर्मदेव मिश्र स्वयं कवि थे। कवि होने के नाते उन्होंने अपना उपनाम 'रमेश' रख रखा था।
(C) जब मैने अपनी माँ को बताया कि चिन्तामणि सिंह ने मुझे बत्तीस साल पुराना चावल खिलाया।
(D) हिन्दी न बोलने वाले लोगों को छोटा 'स' तथा बड़ा 'श' के बीच लिखते समय या बोलते समय फर्क करना नहीं आता ।
(E) इस संदर्भ में एक अफवाह उड़ी कि 7 जून, 1965 को परिणाम आने वाला है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (B), (D), (E)
Solution:तुलसीराम की आत्मकथा मुर्दहिया के संबंध में असत्य कथन हैं-
(B) धर्मदेव मिश्र स्वयं कवि थे। कवि होने के नाते उन्होंने अपना उपनाम 'रमेश' रख रखा था।
(C) जब मैने अपनी माँ को बताया कि चिन्तामणि सिंह ने मुझे बत्तीस साल पुराना चावल खिलाया
(E) इस संदर्भ में एक अफवाह उड़ी कि 7 जून, 1965 को परिणाम आने वाला है।
इसके अतिरिक्त विकल्पगत अन्य कथन सत्य हैं।

29. 'ध्रुवस्वामिनी' नाटक के संदर्भ में निम्न में से कौन से कथन सत्य हैं?

(A) ध्रुवदेवी को लेकर क्या साम्राज्य से भी हाथ धोना पड़ेगा?
(B) मैं उपहार में देने की वस्तु हूँ।
(C) यहाँ ऐसी निर्लज्जता का नाटक मैं नहीं देखना चाहती।
(D) यहाँ मर्द रामगुप्त अपने पिता की तरह दिग्विजय करने निकला था।
(E) तुम्हारा और मेरा जीवन मरण साथ नहीं हो सकता।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (C)
Solution:'ध्रुवस्वामिनी' नाटक के संदर्भ में प्रश्नगत कथनों में सत्य कथन निम्नखित हैं-
रामगुप्तः- “ध्रुवदेवी को लेकर क्या साम्राज्य से भी हाथ धोना पड़ेगा।
ध्रुवस्वामिनीः- "यहाँ ऐसी निर्लज्जता का नाटक मैं नहीं देखना चाहती" । ध्रुवस्वामिनी (1933) नाटक को जयशंकर प्रसाद ने विशाख के 'देवी चन्द्रगुप्तम' के आधार पर लिखा है। इस नाटक में प्रसाद जी ने नूतन प्रयोग किया है। इसमें वे समस्या नाटकों की परम्परा का सूत्रपात किया है। समस्या, नारी की सामाजिक स्थिति से सम्बन्ध है मुख्यतः अनमेल विवाह का प्रश्न सामने रखा गया है। विधान की दृष्टि से भी नाटक में नवीन प्रयोग मिलता है। इस नाटक में कुल तीन अंक है। प्रत्येक अंक में कुल एक ही दृश्य है।
→ प्रसाद ने कुल 12 नाटकों की रचना की है जो इस प्रकार हैं- सज्जन (1910), करुणालय (1913), प्रायश्चित (1913), राज्यश्री (1914), विशाख (1921), अजातशत्रु (1922), जनमेजप का नागयज्ञ (1926), कामना (1927), स्कंदगुप्त (1928), एक घूँट (1929), चन्द्रगुप्त (1931), ध्रुवस्वामिनी (1933) ।
ध्रुवस्वामिनी नाटक के पात्रः-
पुरुष पात्रः- चंद्रगुप्त, रामगुप्त, शिखरस्वामी, पुरोहित, शकराज, खिंगल, मिहिरदेव ।
नारी पात्रः- ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा

30. पंक्तियाँ 'अन्धेर नगरी' नाटक के किस अंक से ली गई हैं?

"चूरन अमलबेद का भारी
जिसको खाते कृष्ण मुरारी
मेरा पाचक है पचलोना
जिसको खाता श्याम सलोना"

Correct Answer: (d) दूसरा अंक
Solution:उपर्युक्त पंक्तियाँ 'अन्धेर नगरी' नाटक के द्वितीय अंक से ली गयी है।
→ यह गीत अंधेर नगरी में पाचक वाला गाता है।
→ 'अन्धेर नगरी' भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत 1881 में प्रकाशित एक प्रहसन है। यह कुल 6 अंकों में विभक्त है। यह नाटक तत्कालीन शासन के ऊपर बहुत बड़ा व्यंग्य है। कहते है कि बिहार प्रान्त के किसी बड़े जमींदार के अन्धेर को भारतेन्दु ने इस नाटक की रचना एक रात में की।
अंधेरनगरी नाटक के पात्रः- महंत, नारायण दास (शिष्य), गोवर्धनदास (शिष्य), घासीराम, कुजड़िन, पाचकवाला, मछलीवाली, जातवाला (ब्रोह्मण)।