NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

31. प्रकाशन वर्ष की दृष्टि से उपन्यासों का सही क्रम क्या है?

(A) त्रिवेणी
(B) परीक्षा गुरु
(C) चंद्रकांता
(D) तारा
(E) आदर्श हिन्दू
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (e) (*)
Solution:प्रकाशन वर्ष की दृष्टि से उपन्यासों का सही क्रमपरीक्षा गुरु - चन्द्रकांता त्रिवेणी तारा आदर्श हिन्दू।
→ परीक्षा गुरु (1882), लाला श्रीनिवास दास का हिन्दी का प्रथम अंग्रेजी ढंग का मौलिक उपन्यास है। रामचन्द्र शुक्ल ने इसे हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना है। यह रचना उपदेश प्रधान है, जिससे दिल्ली के रईस लाला मदनमोहन तथा उनके चरित्रवान एवं विवेकशील मिश्र लाला ब्रजकिशोर का चित्रण है।
→ चन्द्रकांता (1888) देवकीनंदन खत्री का उपन्यास है। डॉ. कृष्ण लाल ने इसे हिन्दी प्रथम उपन्यास माना है। इस उपन्यास में नौगढ़ के राजा सुरेन्द्र सिंह के पुत्र राजकुमार वीरेन्द्र सिंह एवं विजयगढ़ के राजा जयसिंह की पुत्री राजकुमारी चन्द्रकांता की प्रेमकहानी वर्जित हैं
→ त्रिवेणी वा सौभाग्यश्रेणी 1890 में प्रकाशित किशोरीलाल गोस्वामी का उपन्यास है। जिसमें मनोहरदास नामक एक धर्मात्मा व्यक्ति की कहानी है।
→ तारा वा क्षत्रकुलकमलिनी 1902 में प्रकाशित किशोरीलाल गोस्वामी का ऐतिहासिक उपन्यास है।
→ आदर्शहिन्दु 1915 में प्रकाशित लज्जाराम मेहता का उपन्यास है। इसमें पं. प्रियानाथ और उनके अनुज कान्तानाथ की कहानी कही गयी है।
नोट- UGC की उत्तरमाला के अनुसार विकल्प (a) सही है परन्तु प्रकाशन वर्ष की दृष्टि से विकल्प का कोई भी कूट सही नहीं है।

32. 'निपुणिका' कौन से उपन्यास की पात्र है?

Correct Answer: (c) बाणभट्ट की आत्मकथा
Solution:'निपुणिका' 'बाणभट्ट की आत्मकथा' उपन्यास की पात्र है।
→ 'बाणभट्ट की आत्मकथा' 1942 में प्रकाशित हजारी प्रसाद द्विवेदी का उपन्यास है। इस उपन्यास में स्वच्छन्दतावाद के सभी तत्व विद्यमान है। वस्तुतः बाणभट्ट स्वयं स्वच्छन्द प्रवृत्ति का नायक है। कल्पना प्रियता, भावावेग, आदर्शप्रणय, सौन्दर्यप्रियता, प्रकृति प्रेम, रहस्यप्रियता, विचित्रता और अलौकिकता के समावेश से यह उपन्यास स्वच्छन्दतावाद की सभी विशेषताओं से युक्त है।
'बाणभट्ट की आत्मकथा' उपन्यास के पात्रः-
स्त्री पात्र-
निपुणिका (निउनिया), भट्टिनी, सुचरिता, महामाया
पुरुष पात्र- बाणभट्ट, अघोर भैरव, विरतिवज्र ।

33. शेखर एक जीवनी भाग-1 का प्रकाशन वर्ष कौन सा है?

Correct Answer: (b) 1941
Solution:'शेखर एक जीवनी' मनोविश्लेषणवादी उपन्यासकार अज्ञेय का उपन्यास है। यह दो भागों में विभक्त है- इसका पहला भाग- 1941 में तथा दूसरा भाग 1944 में प्रकाशित हुआ था।

→ 'शेखर एक जीवनी' अज्ञेय की प्रौढ़, एवं सशक्त रचना है। इस उपन्यास के नायक शेखर के व्यक्तित्व को उपन्यास का विजन बनाया गया है। इसके प्रथम भाग में शेखर के बाल, वयःसन्धि और किशोर मन का मनोवैज्ञानिक अंकन किया गया है। यह उपन्यास फ्लैश बैक शैली में लिखा गया। इस उपन्यास पर रोमा रोला की पुस्तक 'ज्यां क्रिस्टॉक' का प्रभाव माना जाता है। आलोचक इस उपन्यास को 'प्रकाशमान पुच्छल तारा' कहकर आलोचना करते है।
शेखरः एक जीवनी उपन्यास के पात्रः- शेखर, सरस्वती, राशि, शारदा, शान्ति, रामेश्वर, बाबा मदन सिंह ।

34. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध 'कविता क्या है' में निबन्धकार को कवि से कैसी कल्पना अपेक्षित है?

Correct Answer: (a) विधायक
Solution:रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध 'कविता क्या है' में निबन्धकार को कवि से विधायक कल्पना अपेक्षित है।
→ 'कविता क्या है' शुक्ल जी का निबन्ध सन् 1909 ई. में सर्वप्रथम सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इसमें शुक्ल जी ने अपनी काव्यशास्त्रीय मान्यतायें प्रस्तुत की है। यह निबन्ध शुक्ल जी के निबन्ध संग्रह 'चिन्तामणि भाग-I' में संकलित है।
→ शुक्लजी के निबन्ध 'चिंतामणि' (चार भाग) में संकलित है। सन् 1930 में चितामणि (भाग-एक) शुक्लजी का प्रथम निबन्ध संग्रह प्रथमतः 'विचारवीथी' नाम से प्रकाशित हुआ। चिन्तामणिः कुछ तथ्य
निबन्ध संग्रहसंपादकवर्ष
चिंतामणि भाग-1रामचन्द्र शुक्ल1939
चिंतामणि भाग-2विश्वनाथ प्रसाद मिश्र1945
चिंतामणि भाग-3नामवर सिंह1983
चिंतामणि भाग-4कुसुम चतुर्वेदी एवं ओमप्रकाश सिंह2004

35. "चीफ की दावत में उपेक्षिता और परिवार में कूड़ा- करकट की तरह छिपाई जाने वाली वृद्धा माँ का महत्व उजागर करके प्रतीकात्मक ढंग से परंपरा का महत्व दिखाया गया है।"

उपरोक्त कथन किस आलोचक का है?

Correct Answer: (c) विश्वनाथ त्रिपाठी
Solution:उपर्युक्त कथन आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी का है।
→ 'चीफ की दावत' भीष्म साहनी की सर्वाधिक लोकप्रिय कहानी है। यह वृद्ध विमर्श की अनुपम कहानी है। कहानी में एक ओर बुजुर्ग माँ के प्रेम और त्याग का चित्रण हुआ है वही दूसरी ओर युवा पुत्र की स्वार्थपरता, हृदयहीनता, अवसरवादिता के माध्यम से नई पीढ़ी की मूल्यहीनता का यथार्थ के धरातल पर कठोर चित्रण किया गया है।
भीष्म साहनी की कहानी संग्रहः-
भाग्यरेखा (1953), पहला पाठ (1957), भटकती राख (1966), पटरियाँ (1973), वाङ्चू (1978), शोभा यात्रा (1981), निशाचर (1983), पाली (1988), डायन (1998)।

36. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I/(कविता)सूची-II/(कवि)
A. टूटा पहिया1. लीलाधर जगूड़ी
B. नाटक जारी है2. कुमार विमल
C. जंगल का दर्द3. धर्मवीर भारती
D. एक छोटी सी लड़ाई4. सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d)
Solution:कविता और कवि का सही मिलान इस प्रकार है-
कविताकवि
टूटा पहियाधर्मवीर भारती
नाटक जारी हैलीलाधर जगूड़ी
जंगल का दर्दसर्वेश्वर दयाल सक्सेना
एक छोटी सी लड़ाईकुमार विमल

→ 'टूटा पहिया' दूसरे सप्तक के कवि धर्मवीर भारती की प्रतीकात्मक कविता है। इसमें 'टूटा पहिया' लघु और उपेक्षित मानव का प्रतीक है। इस प्रतीक को कवि ने महाभारत के कथानक से लिया है।
→ 'नाटक जारी है' 1962 ई में समकालीन कवि लीलाधर जगूड़ी का काव्य संग्रह है। 'नाटक जारी है' सचमुच 'पेट और प्रजातंत्र' के बीच ही नहीं बल्कि लीलाधर शर्मा और लीलाधर जगूड़ी के बीच में घटित हुआ। 'जंगल का दर्द' (1976) में तीसरे सप्तक के कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने अपने अन्तर्जगत और बाह्य जगत के जानवरो से लड़ाई, समसामयिक हिन्दी कविता की उपलब्धि है।
→ 'एक छोटी सी लड़ाई' समकालीन कवि कुमार विकल की कविता है जो 1980 में प्रकाशित हुई थी। कुमार विकल की कविता एक बैचेन मन की कविता है।

37. 'कानों में कंगना' कहानी संवत् 1970 में कौन-सी 40. पत्रिका में प्रकाशित हुई?

Correct Answer: (c) इंदु
Solution:'कानों में कंगना' कहानी संवत् 1970 (1913) में इंदु पत्रिका में पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसके लेखक राधिका रमण सिंह है।
→ इस कहानी में कथानायक नरेन्द्र द्वारा अपनी पत्नी की उपेक्षा तथा किन्नरी नामक वेश्या के प्रति आकर्षित होने तथा बाद में पश्चाताप की कथा वर्णित है।
राधिका रमण सिंह प्रेमचंद-पूर्व-युग के कहानीकार है। इनकी कहानियाँ इस प्रकार है-
कानों में कंगना (1913), कुसुमांजलि, गाँधी टोपी (1938), सावनी समाँ (1938), पैसे की घुघनी, दरिद्रनारायण, बिजली।

38. पूर्वी हिन्दी का विकास किस अपभ्रंश से हुआ है?

Correct Answer: (b) अर्ध मागधी अपभ्रंश
Solution:पूर्वी हिन्दी का विकास अर्ध मागधी अपभ्रंश अपभ्रंश से हुआ है
अपभ्रंशउपभाषाबोली
शौरसेनीराजस्थानी हिंदीमारवाड़ी, मालवी, मेवाती, जयपुरी
पहाड़ी हिन्दीकुमाऊँनी, गढ़वाली
पश्चिमी हिन्दीब्रजभाषा, कन्नौजी, बुन्देली (ओकार बहुला) खड़ी बोली, हरियाणवी, दक्खिनी (आकार बहुला)
पूर्वी हिन्दीपूर्वी हिन्दीअवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी
मागधीबिहारी हिन्दीभोजपुरी, मगही, मैथिली

39. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I (पत्रिका/पत्र)सूची-II (संपादक)
A.हिंदी बंगवासी1.राजा राम मोहन राय
B.उदंत मार्त्तंड2.योगेशचन्द्र वसु
C.बंगदूत3.रामकृष्ण वर्मा
D.भारत जीवन4.जुगुल किशोर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b)
Solution:
पत्रिका/पत्रसंपादक
A.हिंदी बंगवासी (1890)योगेशचन्द्र वसु (साप्ताहिक, कलकत्ता)
B.उदंत मार्त्तंड (1826)जुगुल किशोर (साप्ताहिक, कलकत्ता)
C.बंगदूत (1829)राजा राम मोहन राय (साप्ताहिक, कलकत्ता)
D.भारत जीवन (1884)रामकृष्ण वर्मा

40. निम्नलिखित में से कौन से युग्म सही हैं?

(A) हस्व स्वर - अ                                      (B) दीर्घ स्वर - इ
(C) दीर्घ स्वर - आ                                     (D) प्लुत - ई
(E) हस्व स्वर उ
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) (A), (C), (E)
Solution:हस्व स्वर अ, दीर्घ स्वर आ, हस्व स्वर उ युग्म सही है।
→ उत्पत्ति के अनुसार स्वरों के दो भेद है-
1- मूल स्वर 2- संधि स्वर
→ जिन स्वरों की उपत्ति किन्ही दूसरे स्वरों से नहीं होती, उन्हे मूल स्वर या हस्व स्वर कहते है। ये चार है- अ,इ, उ, ऋ ।
→ मूल स्वरों के मेले बने स्वर संधि स्वर कहलाते है। जैसे आ ई, ए, ऐ, ओ, औ। संधि स्वर के दो भेद है- दीर्घ स्वर और संयुक्त स्वर
→ किसी एक मूल स्वर में उसी मूल स्वर के मिलाने से जो स्वर उत्पन्न होता है, उसे दीर्घ स्वर कहते है।
जैसे अ + अ आ इ ई = ई, उ + उ = ऊ।