NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

41. निम्नलिखित में से कौन से युग्म सही हैं?

(A) स्वामी गोकुलनाथ - चौरासी वैष्णवन की वार्ता
(B) ओंकार शरद - राम मनोहर लोहिया
(C) जगदीश चन्द्र माथुर - जिन्होंने जीना जाना
(D) तेज बहादुर चौधरी - अग्निसेतु
(E) भारतेन्दु - सुकवि संकीर्तन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (B), (C) और (A)
Solution:'स्वामी गोकुलनाथ चौरासी वैष्णवन की वार्ता', 'ओंकार शरद राम मनोहर लोहिया', 'जगदीश चन्द्र माथुर - जिन्होंने जीना जाना' सही युग्म है।
→ चौरासी वैष्णवन की वार्ता गद्य ग्रंथ ब्रज भाषा में लिखा गया है। इसमें बल्लभाचार्य के पुष्टि सम्प्रदाय के शिष्यों की कथाएं संकलित है। गोकुल नाथ, गोस्वामी विठ्ठलनाथ के चौथे पुत्र थे। गोकुलनाथ ने दो वार्ता ग्रंथों की रचना की-
1- चौरासी वैष्णवन की वार्ता
2- दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता
→ राम मनोहर लोहिया पुस्तक 2017 में प्रकाशित ओंकार शरद की है। जो चिन्तक लोहिया के समग्र का एक प्रतिनिधि संकलन है।
→ जिन्होंने जीना जाना 1971 में प्रकाशित जगदीश चन्द्र माथुर की रचना है जिसमें इन्होंने 12 व्यक्तियों का चरित्र चित्रण किया है। यह संस्मरण विधा की रचना है।
→ 'अग्निसेतु' 1976 में प्रकाशित बंग्ला के विद्रोही कवि काजी नज़रूल इस्लाम की जीवनी है जिसके लेखक विष्णु चन्द्र शर्मा है।

42. भारतेन्दु कृत 'सती प्रताप' नाटक का नाट्यरूप कौनसा है?

Correct Answer: (b) गीतिरूप
Solution:भारतेन्दु कृत 'सती प्रताप' (1885) नाटक का नाट्यरूप 'गीतिरूपक' है।
→ इस नाटक में पौराणिक कथा के आधार पर सावित्री सत्यवान के महत्वपूर्ण जीवन चित्रण हैं रामचन्द्र शुक्ल ने सती प्रताप को अधूरा माना है।
→ भारतेन्दु ने नाटकों के माध्यम से जनसामान्य को जायत करने का कार्य किया। साथ ही प्राचीन संस्कृति के प्रति प्रेम जगाने, मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था बनाये रखने का भी प्रयास किया। इनके नाटकों में देशप्रेम, न्याय, त्याग, उदारता जैसे मानवीय मूल्य नाटकों की मूल संवेदना बनकर आए है। भारतेन्दु ने सन् 1883 ई. नाटक के लिए उपयोगी 'नाटक' नामक एक महत्वपूर्ण निबन्ध लिखा।
भारतेन्दु के मौलिक नाटक इस प्रकार है-
नाटकवर्षप्रहसन
वैदिकी हिंसा हिंसा न भवित1873प्रहसन
पांचवे पैगम्बर1873
प्रेम जोगिनी18754 अंको की नाटिका
भारत दुर्दशा1876लास्य रूपक
श्री चन्द्रावली1876नाटिका
विषस्य विषमौषधम्1876भाण
अंधेर नगरी1881प्रहसन
नीलदेवी1881गीतिरूपक
सतीप्रताप1885गीतिरूपक

43. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए।

सूची-I/(रचनाकार)सूची-II/(रचना)
A.नागार्जुन1.बुनी हुई रस्सी
B.भवानीप्रसाद मिश्र2.पाषाणी
C.अज्ञेय3.महाराणा का महत्व
D.जयशंकर प्रसाद4.हरी घास पर क्षण भर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c)
Solution:रचनाकार और रचना का सही सुमेलन है-
रचनाकार  रचना  
A. नागार्जुन2. पाषाणी
B. भवानीप्रसाद मिश्र1. बुनी हुई रस्सी
C. अज्ञेय4. हरी घास पर क्षण भर
D. जयशंकर प्रसाद3. महाराणा का महत्व

→ 'बुनी हुई रस्सी' (1971) दूसरे सप्तक के कवि और स्वयं को 'गांधी का बेटा' कहने वाले भवानी प्रसाद मिश्र की काव्यसंग्रह है। इस संग्रह की कविताएँ लगातार मुहूर्त में पंद्रह बीस दिन तक लिखी है। यह भावनाओं की मार्मिकता और अभिव्यक्ति को धारण करने वाले गीतों का संयोजन है। इसमें कवि के रचनात्मक दायित्व के सामाजिक अनुभव है, अतः कविता का विषय अपने प्रौढ़ रूप में दिखाई देता है।
→ 'पाषाणी' प्रगतिवाद में प्रतिनिधि कवि नागार्जुन की कविता है। जो 'प्रतीक' पत्रिका में 1947 में प्रकाशित हुई थी। यह लम्बी कविता नागार्जुन ने बरवै छंद में रची। नागार्जुन की यह कविता 220 पंक्तियों की अहिल्या पर केन्द्रीत एक मिथकीय लम्बी कविता है। यह कविता पुरुष सत्ता के क्रूर, क्षणमति, दुर्विग्ध संशय को रेखांकित करती है।
→ हरी घास पर क्षण भर, 1949 में प्रकाशित प्रयोगवाद के प्रवर्तक कवि अज्ञेय की काव्य संग्रह है। अज्ञेय ने प्रकृति के मर्म को समझा, इसलिए उनका प्रकृति के साथ प्रेम का सच्चा साहचर्य घटित होता है। कवि नगर के कोलाहल से भागकर प्रकृति में शरण चाहते है, कृत्रिमता से मुक्त सहज जीवन के आकांक्षी है।
→ महाराणा का महत्व (1914) में प्रकाशित जयशंकर प्रसाद की अतुकांत रचना है। जयशंकर प्रसाद का यह एक ऐतिहासिक काव्य है।

44. प. गोविन्दवल्लभ पंत विरचित नाटक 'वरमाला' किस पुराण की कथा पर आधारित है?

Correct Answer: (c) मार्कण्डेय पुराण
Solution:पं. गोविन्द बल्लभ पंत विरचित नाटक 'वरमाला' मार्कण्डेय पुराण की कथा पर आधारित है। यह एक भावनाटक है। पं. गोविन्द बल्लभ पंत प्रसादोत्तर युग के समस्या प्रधान नाटक लिखने वाले नाटककार है। इनके नाटक इस प्रकार है- राजमुकुट (1935), अंतःपुर का छिद्र (1940), ययाति (1951), तुलसीदास (1974), आत्मदीप (1978)।

45. 'चंदन बाला रास' की रचना कब हुई है?

Correct Answer: (b) 1200 ई.
Solution:'चंदन बाला रास' 1200 ई. में जैन कवि आसगु द्वारा लिखा 35 छंदों का खण्डकाव्य है।

46. 'भारत वर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है' निबन्ध को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने पहले व्याख्यान के रूप में किस मेले में प्रस्तुत किया था?

Correct Answer: (d) ददरी मेले में
Solution:'भारत वर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है' निबन्ध को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने पहले व्याख्यान के रूप में 'ददरी मेले' में प्रस्तुत किया।
→ 1884 ई. में बलिया के ददरी मेले में आयोजित 'आर्यदेशोपकरिणी सभा' में भाषण के लिए भारतेन्दु ने 'भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है' की रचना की, जिसमें रूढ़ियों, अंधविश्वासों तथा कुरीतियों को पीछे छोड़ शिक्षा ग्रहण करने, उद्योग लगाने एवं आपसी सहयोग की प्रेरणा दी। इसकी अंतिम पंक्ति “परदेशी वस्तु और परदेशी भाषा का भरोसा मत रखो। अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।

47. मनोविश्लेषणवाद से संबंधित निम्न में से कौन-सी मान्यताएँ सही हैं?

(A) फ्रायड के अनुसार कला और धर्म दोनों का उद्भव अवचेतन मानस की संचित प्रेरणाओं और इच्छाओं से होता है।
(B) एडलर के मनोविज्ञान में आत्म स्थापन की प्रवृत्ति प्रमुख है।
(C) कला और साहित्य पर फ्रायड के विकारों का सतही प्रभाव पड़ा।
(D) मनोविश्लेषण केवल फ्रायड के सिद्धांतों तक सीमित है। (E) इडिपस कॉम्प्लेक्स का फ्रायड के सिद्धांत में महत्व नहीं है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही
का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (B)
Solution:“फ्रायड के अनुसार कला और धर्म दोनों का उद्भव अवचेतन मानस की संचित प्रेरणाओं और इच्छाओं से होता है।"
(B) “एडलर के मनोविज्ञान में आत्म स्थापन की प्रवृत्ति प्रमुख है।" मनोविश्लेषणवाद से संबंधित दोनों मान्यताएँ सही है।
→ सिगमंड फ्रायड द्वारा 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में मानसिक रोगियों का इलाज करते हुए मानसिक व स्नायविक विकारों के सम्बन्ध में दिया गया सिद्धान्त व व्यवहार मनोविश्लेषण कहलाता है। इससे ही मनोविश्लेषणवाद बना। फ्रायड के अनुसार अचेतन मानस की संचित प्रेरणाओं और इच्छाओं से ही कला और धर्म, दोनों का का उद्भव होता है साहित्य और कला का जन्म तब होता है जब दमित वासनाएँ उदात्त रूप में अभिव्यक्ति पाती है। साहित्य, कला, धर्म आदि सभी को फ्रायड इन्ही संचित वासनाओं और प्रेरणाओं से उद्भूत मानता है। फ्रायड के सिद्धान्त 'इडिपस कुण्ठा' का विशेष महत्व है। फ्रायड के विचारों का कला और साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा।
→ एडलर के मनोविज्ञान में 'लिबिडो' अथवा 'कामवृत्ति' से अधिक महत्व 'अहम्' को दिया गया है। इनके मनोविज्ञान में आत्म स्थापन की प्रवृत्ति ही प्रमुख है।

48. निम्नलिखित काव्य रचनाओं का सही कालक्रम क्या है ?

(A) लहर
(B) कुकुरमुत्ता
(C) कला और बूढ़ा चाँद
(D) निहार
(E) सांध्यगीत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) (D), (A), (E), (B), (C)
Solution:निम्नलिखित काव्य रचनाओं का सही कालक्रम इस प्रकार है- नीहार (1930 ई.), लहर (1933), सांध्यगीत (1936 ई.), कुकुरमुत्ता (1942), कला और बूढ़ा चाँद (1959 ई.)।
→ कला और बूढ़ा चाँद, सुमित्रानंदन पंत का काव्य संग्रह है। जिसे पंत ने स्वयं 'रश्मिपदी काव्य' कहा है। इसमें इनकी 1958 की रचनाएँ संग्रहीत है। चेतन अवचेतन के स्तरों का भेदन करते हुए अतिचेतन का अवलोकन इन कविताओं की विषयवस्तु है, जिसे पंत ने दार्शनिक और तात्विक प्रतीकों के विषयवस्तु है, जिसे पंत ने दार्शनिक और तात्विक प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रत्यत्न किया है।
→ 'कुकुरमुत्ता' निराला का प्रगतिवादी एवं व्यंग्यपरक रचना है। इसमें गुलाब पूँजीपति वर्ग का एवं कुकुरमुत्ता सर्वहारा वर्ग का प्रतीक हैं रामविलास शर्मा ने इसे पंत के विरोध में लिखी गई कविता माना।
→ 'सांध्यगीत' में महादेवी वर्मा के 45 गीतों का संकलन है। इनमें जीवन की विभिन्न अनुभूतियों को महत्व दिया गया है इसमें महादेवी वर्मा के दार्शनिक विचारों की प्रौढ़ता दिखाई देती है।
→ महादेवी वर्मा कृत 'नीहार' की भूमिका अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने लिखी थी। 'नीहार' में महादेवी वर्मा की कुल 47 गीतों का संकलन है जो सन् 1924-1928 के बीच लिखे गए। इनमें प्रमुख है विसर्जन, मिलन, उस पार, स्वप्न आँसु आदि है।

49. नागार्जुन के उपन्यासों को कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित करें :

(A) बाबा बटेसरनाथ
(B) बलचनमा
(C) नई पौध
(D) रतिनाथ की चाची
(E) वरुण के बेटे
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) (D), (B), (C), (A), (E)
Solution:नागार्जुन के उपन्यासों का सही कालक्रम इस प्रकार है- रतिनाथ की चाची (1948), बलचनमा (1952), नई पौध (1953), बाबा बटेसरनाथ (1954), वरुण के बेटे (1957)।
→ नागार्जुन आंचलिक उपन्यासकार है। इन्होंने ने मिथिलांचल के गाँवों को अपनी कथा का आधार बनाया है।
→ 'रतिनाथ की चाची' एक मैथिल विधवा के जीवन पर केन्द्रित है। यह उपन्यास मिथिलांचल एवं मैथिल ब्राह्मण समाज के अन्तर्विरोधों को उजागर करता है।
→ 'बलचनामा' आजादी से पूर्व के दरभंगा जिले को केन्द्र में रखकर विकसित होता है। इसका नायक बलचनामा दलित युवक राजनीति के दाँव सीखने के पश्चात् अन्याय एवं अत्याचार के विरूद्ध संघर्ष करता है।
→ 'नयी पौध' में अनमेल विवाह एवं अप्रासंगिक रूढ़ियों के विरोध का चित्रण हुआ है।
→ 'बाबा बटेसरनाथ' में बरगद के वृक्ष को बचाने हेतु किए गये किसानों के संघर्ष का चित्रण है।
→ 'वरूण के बेटे' उपन्यास में मिथिला के जमींदारों के विरूद्ध वहाँ के मछुआरों के संघर्ष का अंकन हुआ है।

50. निम्नलिखित में से कौन से युग्म सही हैं?

(A) कहानी - कंकाल
(B) उपन्यास - तितली
(C) नाटक - संग्राम
(D) उपन्यास साहित्य का उद्देश्य
(E) संस्मरण गबन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (B), (C)
Solution:'उपन्यास तितली', 'नाटक संग्राम' युग्म सही है।
→ 'तितली' प्रेमचन्द युग के उपन्यासकार जयशंकर प्रसाद का 1934 ई. में प्रकाशित उपन्यास है। जिसमें किसान मजदूर वर्ग पर होने वाले अत्याचारों तथा निम्न वर्ग की दयनीय स्थिति का चित्रण हुआ है। जयशंकर प्रसाद के उपन्यास कंकाल, तितली, इरावती है।
→ 'संग्राम' 1922 ई. में प्रकाशित प्रेमचंद का एक सामाजिक नाटक है। यह कुल पाँच अंकों का नाटक है। इस नाटक के प्रमुख पात्र इस प्रकार है हलधर, फत्तू, मंगरू, हरदास, राजेश्वरी, सलोनी, सबल सिंह, कञ्चन सिंह, अचल सिंह, ज्ञानी इत्यादि।
→ गबन 1931 में प्रकाशित प्रेमचंद का उपन्यास है।
→ 'साहित्य का उद्देश्य' प्रेमचंद का निबन्ध है।