NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

61. 'अंधेरे में' कविता का 1964 में 'आशंका के द्वीप अंधेरे में' नाम से प्रकाशन किस पत्रिका में हुआ?

Correct Answer: (b) कल्पना
Solution:'अंधेरे में' कविता का 1964 में 'आशंका के द्वीप अंधेरे में' नाम से प्रकाशन 'कल्पना' पत्रिका में हुआ।
→ 'अंधेरे में' कविता मुक्ति बोध द्वारा रचित काव्य संग्रह 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' में संकलित है। 'अंधेरे में' मुक्तिबोध की बहुचर्चित व लम्बी कविता है। जिसमें मुक्तिबोध की रचनात्मकता का उत्कर्ष 'अंधेरे में देखा जा सकता है। यह कविता फैंटेसी शैली में लिखी गई है। इस कविता का रचनाकाल 1857 से 1964 ई के बीच का रहा है।
→ श्रीकांत वर्मा ने 'अंधेरे में' कविता को 'कविता का हिन्दूस्तान' कहते है।
→ नामवर सिंह इस कविता को 'अस्मिता की खोज' बताते है।
→ निर्मला जैन 'अंधेरे में' कविता को 'अंतःस्थल का विप्लव' कहा है।

62. भीष्म साहनी की रचनाओं के आधार पर सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b)
Solution:भीष्म साहनी की रचनाओं के आधार पर सूची-I और सूची-IIका सही मिलान इस प्रकार है-
→ 'पाली' कहानी भीष्म साहनी द्वारा लिखी गई भारत-पाकिस्तान के विभाजन की त्रासदी पर बनी सामाजिक पृष्ठभूमि की कहानी है। इस कहानी में करुणा का परिपाक अद्भुत ढंग से मर्मस्पर्शी है।
→ 'डायन' कहानी भीष्म साहनी के जीवन काल में प्रकाशित उनका अन्तिम कहानी संग्रह था। डायन कहानी मध्यवर्गीय मानसिकता की ऊहापोह का बिम्ब है।
→ 'भटकती राख' कहानी संग्रह की कहानियों में भीष्मसाहनी ने वर्तमान जगत की समस्याओं को अतीत के परिप्रेक्ष्य में रखकर देखने की कोशिश की है। इसलिए ये कहानियाँ काल के किसी दीप पर ठहरती नहीं, वरन् निरन्तर प्रवाहित इतिहास धारा का जीवन्त हिस्सा बन जाती है।
→ शोभायात्रा में 11 कहानियाँ संकलित हैं। जो इस प्रकार हैं- निमित्त, खिलौने, मेड इन इटली, भटकाव, फैसला, रामचन्दानी शोभायात्रा, धरोहर, लीला नन्दलाल की, अनूठे साक्षात् सड़क पर। नोट:- UGC के उत्तरमाला में पाली का प्रकाशन वर्ष 1984 माना है। जो सही नहीं है।

63. सही पंक्तियों को कहानी के साथ सुमेलित कीजिए :

(A) उसे बार-बार यह लग रहा था कि उसकी देशभक्ति सच्ची देशभक्ति नहीं वरन् मजाक है। - राही
(B) मैं रसाल की डाली थाम कर पास ही खड़ा था। - पिता
(C) मैंने देखा, प्रकाश से धुंधले नीले आकाश के तट पर जो चमगादड़ नीरव उड़ान से चक्कर काट रहे हैं। -परिदे
(D) उसके अंदर प्रकाश है, बाहर आशा। विपत्ति अपना सारा दल-बल लेकर आए ईदगाह
(E) हाथ धोते समय वह हेमा की उन चूड़ियों से भरी कलाइयों को बेझिझक देखता रहा - राजा निरबंसियाँ
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (D)
Solution:“उसे बार-बार यह लग रहा था कि उसकी देशभक्ति सच्ची देशभक्ति नहीं वरन् मजाक है। राही" यह कथन सुभद्राकुमारी चौहान की कहानी 'राही' में अनीता का कथन है। राही कहानी सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपने कारागार के अनुभवों के ऊपर लिखी है। राही की विवशता के कारण की गई चोरी की जानकारी से दुखी होकर अनीता द्वारा तत्कालीन कांग्रेसी आंदोलनकारियों की सत्तालोलुपता और ढोंग पर चिंतन तथा विवशगरीबों की सेवा को वास्तविक देशभक्ति समझने वाले स्वप्न से बनी कहानी। - जेल का परिवेश।
इस कहानी के पात्रः-
राही (मांगरोरी जाति की एक गरीब असहाय स्त्री)
अनीता (स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लेने वाली जेल में बंद स्त्री)
→ "उसके अन्दर प्रकाश है, बाहर आशा । विपत्ति अपना सारा दल-बल लेकर आए ईदगाह" अमीना का कथन
→ ईदगाह प्रेमचन्द की कहानी सर्वप्रथम 1933 ई. में चाँद पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। यह बाल मनोविज्ञान पर लिखी गई हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानी है। इसमें प्रेमचंद हामिद नामक बच्चे के माध्यम से दिखाते हैं कि गरीबी और अभावों में किस प्रकार बचपन की मासूतियत खत्म हो जाती है और बच्चे को समय से पहले परिपक्व हो जाना पड़ता है।
ईदगाह कहानी के पात्रः-
हामिद, अमीना, मोहसिन, महमूद, नूरे, सम्मी।

64. 'सुदामा चरित्र' के रचनाकार है :

Correct Answer: (d) नरोत्तमदास
Solution:'सुदामा चरित्र' के रचनाकार नरोत्तमदास है।
→ शिवसिंह सरोज के अनुसार ये 1525 ई में उपस्थित थे। इनका बनाया 'सुदामा चरित्र' सवैया छन्द में अत्यन्त लोकप्रिय खण्डकाव्य है। इसमें सुदामा की दरिद्रता और मित्र कृष्ण की उदारता और मैत्री का वर्णन सहृदयता के साथ किया गया है।

65. 'प्रतिभा' काव्य हेतु से संबंधित पंक्तियों के रचनाकारों के सही युग्म कौन से हैं?

(A) तस्य च कारणं कविगता केवला प्रतिभा चा - वाग्भट्ट प्रथम
(B) प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता - भट्टतौत
(C) कवित्वबीजं प्रतिभानम् - वामन
(D) प्रतिभा कारणं तस्य व्युत्पत्तिस्तु विभूषणम् - भामह
(E) काव्यं तु जायते जातु कस्यचित् प्रतिभावतः - आ. जगन्नाथ
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (B), (C)
Solution:संस्कृत काव्य शास्त्र में मुख्यतः तीन काव्य हेतुओं को माना गया है- प्रतिभा, व्युत्पत्ति और अभ्यास ।
'प्रतिभा' काव्य हेतु से संबंधित आचार्यों की पंक्तियाँः-
प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता - भट्टतौत
कवित्वस्य बीजम् प्रतिभानम् - वामन
सा (प्रतिभा) काव्यघटनानुकूल शब्दोपस्थितिः - जगन्नाथ
प्रतिभा अपूर्ववस्तु निर्माणक्षमा प्रज्ञा - अभिनवगुप्त
शक्तिः कवित्वबीजरूपः संस्कार विशेषः - मम्मट

66. "जले लिया भार अपने सिर पर मनु ने, यह अपना विषम आज, हँस पड़ी उषा प्राची नभ में, देख नर अपना राज-काज" पंक्तियाँ 'कामायनी' के किस सर्ग से ली गई हैं?

Correct Answer: (a) इड़ा
Solution:उपर्युक्त पंक्तियाँ 'कामायनी' के इड़ा सर्ग से ली गई है।
→ कामायनी प्रसाद की अन्तिम और अन्यतम कृति है। इसमें कुल 15 सर्ग है जो इस प्रकार है- चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इडा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य तथा आनन्द । इसमें वर्णित घटनाक्रम शतपथ ब्राह्माण से लिया गया है। इसका मुख्य रस शान्त रस या निर्वेद रस तथा मुख्य छन्द के रूप में ताटंग छन्द का प्रयोग हुआ है।
→ कामायनी में बुद्धिवाद के विरोध में हृदयतत्व की प्रतिष्ठा करते हुए कवि ने शैव दर्शन के आनन्दवाद को जीवन के पूर्ण उत्कर्ष का साधन स्वीकार किया है।
कामायनी के मुख्य पात्रः-
मनु (मन), श्रद्धा (हृदय), इड़ा (बुद्धि), कुमार (मानव)
कामायनी के सम्बन्ध में विद्धानों के कथनः-
* मानवता का रसात्मक इतिहास नंददुलारे वाजपेयी
* छायावाद का उपनिषद शांतिप्रिय द्विवेदी
* मानव चेतना के विकास का महाकाव्य डॉ. नगेन्द्र
* आधुनिक सभ्यता का प्रतिनिधि महाकाव्य नामवर सिंह
* रहस्यवाद का पहला महाकाव्य सूर्यकांत त्रिपाठी निराला।

67. "केवल अतीत ही वर्तमान के रूप को मर्यादित नहीं करता, वर्तमान भी अतीत को प्रभावित करता है।" यह कथन किस पाश्चात्य विचारक का है?

Correct Answer: (b) इलियट
Solution:उपर्युक्त कथन पाश्चात्य विचारक इलियट का है। काव्य तथा अलोचना के सन्दर्भ में इलियट के कथनः-
→ भोगने वाले मन और रचना करने वाले मन में अनिवार्यतः एक अन्तराल बना रहता है और जितना ज्यादा यह अन्तराल होता है, रचना उतनी ही महान होती है।
→ कविता मात्र कवि के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नही है, बल्कि व्यक्तित्व से पलायन है।
→ आलोचना साँस की तरह अनिवार्य एवं नैसर्गिक क्रिया है।
→ सच्ची आलोचना तथा सूक्ष्म प्रशंसा का लक्ष्य कवि नही बल्कि काव्य है।

68. उपर्युक्त पंक्तियों में 'गुणीभूत व्यंग्य' का कौन-सा भेद पाया जाता है?

"पुत्रवती युवती जग सोई।
रामभक्त सुत जाकर होई ॥"

Correct Answer: (a) अगूढ़ व्यंग्य
Solution:उपर्युक्त पंक्तियों में 'गुणीभूत व्यंग्य' का अगूढव्यंग्य भेद पाया जाता है।
→ अगूढ़ व्यंग्यः जो व्यंग्य वाच्यार्थ के समान स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है वह अगूढ़ व्यंग्य कहलाता है। जैसे- पुत्रवती युवती जग सोई। रघुवर भगत जासु सुत होई।
→ गुणीभूत व्यंग्य वाच्य की अपेक्षा गौण व्यंग्य को गुणीभूत व्यंग्य कहते है। गुणीभूत का अर्थ है अप्रधान बन जाना अर्थात वात्यार्थ से अधिक चमत्कार न होना। अभिप्राय यह कि जहाँ व्यांग्यार्थ वाच्यार्थ से उत्तम न हो वहाँ गुणभूत व्यंग्य होता है।
इसके आठ भेद है- अगूढ़ व्यंग्य, अपरांग व्यंग्य, वाच्य सिद्धान्त व्यंग्य, अस्फुट व्यंग्य, संदिग्ध प्राधान्य व्यंग्य, तुल्य प्राधान्य व्यंग्म, काकाक्षित व्यंग्य असुन्दर व्यंग्य ।

69. "प्रकृति क्रियाशील है, समय पुरुष और स्त्री की गेंद लेकर दोनों हाथ से खेलता है।" यह कथन स्कन्दगुप्त नाटक के किस पात्र द्वारा कहा गया है?

Correct Answer: (e) (*)
Solution:उपर्युक्त कथन स्कन्दगुप्त नाटक के पात्र धातुसेन द्वारा कहा गया है। स्कन्दगुप्त जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित नाटक है। नोट:- आयोग ने प्रश्नगत कथन के आलोक ने विकल्प (a) धातुसेन तथा विकल्प (c) कुमारदास दोनों को सही माना है।

70. रसनिष्पत्ति के व्याख्याकारों में से किसने 'अनुमान' को महत्व देकर 'चित्र तुरंग न्याय' की चर्चा की है?

Correct Answer: (b) शंकुक
Solution:रसनिष्पत्ति के व्याख्याकारों में शंकुक ने 'अनुमान को महत्व देकर 'चित्र तुरंग न्याय' की चर्चा की। भरतमुनि के रससूत्र के प्रख्यात व्याख्या और उसके व्याख्याकारः-
आचार्य (दर्शन)व्याख्यासंयोगनिष्पत्ति
भट्ट लोल्लट (मीमांसा)उत्पत्ति (आरोपवाद)संबंधउत्पत्ति
श्रीशंकुक (न्याय)अनुमितिवादअनुमानअनुमिति
भट्टनायक (सांख्य)भुक्तिवाद (भोगवाद)विभावादिभुक्ति
अभिनवगुप्त (शैव)अभिव्यक्तिवादअभिव्यंजनाअभिव्यक्ति