NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 (दृश्य कला)

Total Questions: 100

31. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन (I) : चित्र पूर्ण होने की प्रक्रिया, पहले चित्र निर्माण, तत्पश्चात फ्रेमिंग से होती है।

कथन (II) : चित्र के लिए फ्रेंमिंग आवश्यक नहीं है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) कथन । अत्य है, लेकिन कथन II सत्य है
Solution:

चित्र पूर्ण होने की प्रक्रिया पहले चित्र निर्माण तत्पश्चात फ्रेमिंग से होती है। क्योंकि चित्र के लिए फ्रेमिंग आवश्यक नहीं है। अतः कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

32. यूनानी कला की कांस्य मूर्तियों की पहचान कीजिए |

(A) चैरियटियर आफ डेल्फी
(B) डिस्कोबोलोस
(C) डोरीफोरस
(D) प्राक्सीटेल्स
(E) एथिनियन मेडेंस
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (A), (B) और (C)
Solution:

यूनानी कला की कांस्य मूर्तियों की पहचान इस प्रकार है चैरियटियर ऑफ डेल्फी, डिस्कोबोलोस, डोरीफोरस ।

33. मथुरा में ब्राह्मणवादी प्रतिमा विज्ञान के गलत विकल्प का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) विष्णु-गदा
Solution:

मथुरा में ब्राह्मणवादी प्रतिमा विज्ञान के गलत विकल्प का चयन - विष्णु-गदा है।

34. अजंता के गुफा नम्बर 16 में निम्नलिखित में से किस मुद्रा में बुद्ध को प्रलम्ब पद आसन में बैठे हुए उत्केरित किया गया है?

Correct Answer: (b) धर्मचक्र मुद्रा
Solution:

अजन्ता के गुफा नम्बर 16 में धर्मचक्र मुद्रा में बुद्ध को प्रलम्ब पद आसन में बैठे हुए उकेरित किया गया है। इस विहार में अभी भी बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं से सम्बन्धित चौदह चित्र अच्छी स्थिति में मिलते है, जिनमें बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित घटनाओं में माया देवी का स्वप्न, धर्मोपदेश, नन्द की दीक्षा आदि है।

35. निम्नलिखित ग्रंथों के सही कालक्रम का चयन कीजिए:

(A) उपनिषद्
(B) अरण्यक
(C) वेद
(D) रामायण
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) (C), (B), (A), (D)
Solution:

निम्नलिखित ग्रन्थों के सही कालक्रम इस प्रकार है - वेद, अरण्यक, उपनिषद् और रामायण ।

36. उस व्यक्तित्व को पहचानिए जिसका संबंध नवजागरण काल के चित्रकारों से नहीं है :

Correct Answer: (a) डोनाटेल्लो
Solution:

डोनाटेल्लो का सम्बन्ध नवजागरण काल के चित्रकारों से नहीं था। इनका जन्म 1386 ई. में फ्लोरेंस (इटली) में हुआ था। डोनाटेल्लो फ्लोरेंस का प्रथम महान शिल्पी था। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति इनके द्वारा बनाई गई डेविड की दो मूर्तिशिल्प है प्रथम संगमरमर और दूसरी काँसे की है।
नोट: इनमें से सभी कलाकार का सम्बन्ध नवजागरण काल से है।

37. निम्नलिखित में से कौन से कलाकार बट तला छापा निर्माण दृश्यावली से संबंधित नहीं है?

(A) बांमापाड़ा बनर्जी
(B) गोविंद चंद्र रॉय
(C) नित्यलाल दत्त
(D) वासुदेव एच. पांड्या
(E) मानवचंद्र दास
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A) और (D)
Solution:

निम्नलिखित में से बांमापाड़ा बनर्जी और वासुदेव एच. पांड्या कलाकार बट तला छापा निर्माण दृश्यावली से सम्बन्धित नहीं है। जबकि गोविन्द चन्द्र रॉय, नित्यलाल दत्त और मानव चन्द्र दास बट तला छापा निर्माण दृश्यावली से सम्बन्धित है।

38. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन (I) : "काव्यालंकार सूत्रवत्ती" ग्रथ साहित्यिक आलोचक नग्नजित द्वारा लिखी गयी थी।

कथन (II) : "काव्यालंकार सूत्रावत्ती" के आलोचक ने प्रतिपादित किया है कि शैली काव्य की आत्मा है। उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है
Solution:

काव्यालंकार सूत्रवत्ती ग्रन्थ साहित्यिक आलोचक नग्नजित द्वारा लिखी गई थी। क्योंकि काव्यालंकार सूत्रवत्ती के आलोचक ने प्रतिपादित किया है कि शैली काव्य की आत्मा है। अतः कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।

39. ममल्ला शैली में कुडु (होर्सशू आर्चेज) के विकास के बारे में सही कालक्रम का चयन कीजिए :

(A) मदुरै
(B) पाण्डियन
(C) चोल
(D) विजयनगर
(E) पल्लव
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) (E), (C), (B), (D) और (A)
Solution:

ममल्ला शैली में कुडु (होर्सशू आर्चेज) के विकास के सही कालक्रम का चयन इस प्रकार है पल्लव, चोल, पाण्डियन, विजयनगर और मदुरै है।

40. निम्नलिखित में से कौन-से कलाकारों ने 'बापूजी' जैसे समान शीर्षक से छापा कलाकृति सृजित की है?

(A) कृष्ण आहूजा
(B) नन्दलाल बोस
(C) मुकुल डे
(D) ललित मोहन सेन
(E) जयकृष्ण अग्रवाल
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (B) और (D)
Solution:

निम्नलिखित में से नन्दलाल बोस और ललित मोहन सेन नामक कलाकारों ने बापू जी जैसे समान शीर्षक से छापा कलाकृति सृजित की है।