NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा (निरस्त), जून-2024 (दृश्य कला)

Total Questions: 100

91. प्रश्न संख्या 91-95 के लिए चित्र:

चित्र का शीर्षक क्या है?

 

Correct Answer: (c) मंड़ाई ( शिंग)
Solution:

चित्र का शीर्षक मँड़ाई (थ्रेशिंग) है और इसके चित्रकार के. के. हैब्बर थे। इनकी अन्य प्रमुख कृतियाँ धान कूटते हुए,

मुर्गे की लड़ाई, स्वीपर्स, मदर एंड चाइल्ड, कविता का जन्म, प्यासी आत्मा, रिक्शा खींचने वाला, अंधकार के पार, केला बेचने वाले, सूखा, द ड्रम, सुनहरे व लाल जाड़े की रात, महिम दरगाह, बाढ़, टाइल फैक्ट्री, भिखारी, विक्टिम्स, स्नानमग्ना युवती आदि हैं।

92. प्रदत्त पेंटिंग का माध्यम क्या है?

Correct Answer: (a) कागज पर टेंपरा
Solution:

मँड़ाई (थ्रेशिंग) पेंटिंग का माध्यम कागज पर टेम्परा है। इसे के. के. हैब्बर ने बनाया था, हैब्बर का जन्म 1912 ई. में कर्नाटक के कटिंगेरी में हुआ था।

इनका पूरा नाम कटिंगेरी कृष्ण हैब्बर था। इन्होंने 1934-38 ई. की अवधि में जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से चित्रकला में डिप्लोमा प्राप्त किया था। इन्हें 1989 ई. में भारत सरकार के द्वारा पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।

93. दी गई पेंटिंग का रचना वर्ष निम्नांकित में से कौन सा है?

Correct Answer: (d) 1944
Solution:

मॅड़ाई (थ्रेशिंग) पेंटिंग की रचना 1944 ई. में के.के. हैब्बर के द्वारा की गई थी। हैब्बर की कला शैली में एक विशिष्ट लयात्मकता दृष्टिगत होती है।

प्रारम्भिक रेखांकन लयात्मक होने के साथ रोमांसवादी भावना भी उत्पन्न करता है। वस्तुतः हैब्बर की कला रेखांकन की संवेदनशीलता से अधिक प्रभावित रही है। सन् 1980-1984 तक हैब्बर राष्ट्रीय ललित कला अकादमी नई दिल्ली के अध्यक्ष रहे।

94. इस पेंटिंग के कलाकार किस कला स्कूल में संबंधित हैं?

Correct Answer: (b) जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई
Solution:

मॅड़ाई पेंटिंग के कलाकार के.के. हैब्बर जे. स्कूल ऑफ आर्ट मुंबई से संबंधित थे। हैब्बर की प्रारंभिक औपचारिक कला शिक्षा नूतन कला मंदिर मुंबई में हुई। तत्पश्चात आपने सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स मुंबई से कला डिप्लोमा किया।

आपने कला अध्ययन हेतु यूरोप की यात्रा भी की थी। हैब्बर को तीन बार ललित कला अकादमी नई दिल्ली से राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

95. दी गई पेंटिंग का कलाकार निम्नांकित में से कौन है?

Correct Answer: (b) के.के. हेब्बार
Solution:

मंड़ाई पेंटिंग का कलाकार के.के. हैब्बर था। हैब्बर ने समकालीन कला के भाव बोध तथा कला भाषा के प्रति सजग तकनीक व माध्यम वैविध्य का पूर्ण प्रयोग किया। कलाकार के रूप में हैब्बर ने प्रयोगों की राह पर अनवरत चलते हुए

रचनाशील कलाकार के रूप में निजत्व के साथ मानवीय आदर्शों तथा भावों को अभिव्यक्ति दी। हैब्बर की कलाकृतियाँ ग्रामीण कल्पना तथा शहरी परिष्कार की लचीली अभिव्यक्ति है। इनकी कला पर जैन, मुगल और अजंता की चित्रकारी का प्रभाव परिलक्षित होता है।

96. प्रश्न संख्या 96-100 के लिए चित्रः

उपर्युक्त मूर्तिशिल्प के कलाकार निम्नांकित में से कौन हैं?

Correct Answer: (b) पी.वी. जानकीराम
Solution:

गणेश मूर्तिशिल्प के कलाकार पी.वी. जानकीराम हैं। इनका जन्म 1930 ई.में चेन्नई में हुआ था तथा मृत्यु भी 1995 में चेन्नई में ही हुई थी।

ये मूर्तिकार के रूप में जाने जाते हैं और ये दक्षिण भारत के मंदिरों की पारंपरिक मूर्तियों से काफी प्रभावित थे। इन्होंने मूर्तिकला से डिप्लोमा मद्रास आर्ट्स कॉलेज से प्राप्त किया था।

97. इस मूर्ति के निर्माण में किस सामग्री का प्रयोग हुआ है?

Correct Answer: (a) आक्सीकृत ताम्र की चद्दर और तार (आक्सीडाइज्ड कॉपर सीट एंड वायर)
Solution:

पी.वी. जानकीराम की मूर्ति गणेश के निर्माण में ऑक्सीकृत ताम्र की चद्दर और तार (ऑक्सीडाइज्ड कॉपर सीट एंड वायर) सामग्री का प्रयोग हुआ है। जानकीराम धातु मूर्ति शिल्प क्षेत्र में चिर-परिचित नाम है।

आपने उल्लू, गिद्ध, ईसा मसीह, वर्जिन तथा हिंदू देवी- देवताओं के विशाल पैनल निर्मित किए हैं। सभी आकृतियाँ ठोक देकर ताम्र में बनाई जिनको विविध प्रकार के तार, कांस्य व एनामेल से अतिरिक्त प्रभाव लाने के लिए सुसज्जित किया।

98. दी गई मूर्तिशिल्प किस संग्रहालय दीर्घा में रखी गई है?

Correct Answer: (d) राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एन जी एम ए), नई दिल्ली
Solution:

जानकारी राम की मूर्तिशिल्प गणेश राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एन.जी.एम.ए.) नई दिल्ली में रखी गई है। जानकीराम ने मेटल शीट में स्वतंत्र आकृतियों को उचित रूप में निर्मित कर रेखाओं द्वारा अलंकृत किया। ये अलंकरण शिल्प को चित्र स्वरूप दर्शाते हैं।

इनमें घनत्व या आयतन नहीं है तथा सामग्री, तकनीक, सूक्ष्मांकन व निरीक्षण की दृष्टि से अद्वितीय है। आपने ताम्र धातु में बहुत काम किया पर सीमेंट, मिट्टी, सीसा, कांस्य, ब्रास एनामेल, सिल्वर आदि में भी सृजन किया।

99. प्रदत्त मूर्ति की तकनीकी को चिन्हित कीजिए।

Correct Answer: (d) वेल्डेड स्कल्पचर
Solution:

गणेश मूर्तिशिल्प की तकनीकी वेल्डेड स्कल्पचर है। पी.वी. जानकीराम चित्रात्मक मूर्तिकला को मुक्त रूप में बनाने के लिए ताँबे की धातुशीट (चादर) का उपयोग किया है और रैखिक तत्वों के साथ उसकी सतह को अलंकृत किया है।

धातु की चादर को पीटकर अवतल सतह बनाई गई है और उस पर रैखिक विवरणों को वेल्ड किया गया है। ये रैखीय और अलंकारिक तत्व धार्मिक प्रतिमाओं के रूप में गंभीर चिंतन को आमंत्रित करते हैं।

100. इस मूर्ति के निर्माण का दशक निम्नांकित में से कौन सा है?

Correct Answer: (c) 1970 का दशक
Solution:

गणेश मूर्तिशिल्प ऑक्सीकृत तांबे में पी.वी. जानकीराम द्वारा 1970 में बनाया गया है। गणेश की आकृति को सम्मुख मुद्रा में तैयार किया गया है, जो कि गुफा एवं मंदिर मूर्तिशिल्प का एक महत्वपूर्ण देशज चरित्र है। इस मूर्तिशिल्प में गणेश एक संगीत वाद्ययंत्र, वीणा बजा रहे हैं।

सामग्रियों का तकनीकी सम्मिश्रण होने के बाद भी मूर्तिशिल्प का विवरण उनके शिल्प कौशल को प्रकट करता है। उन्होंने देशज कौशलता (कारीगरी) को खुलेपन की गुणवत्ता के साथ भी प्रयोग किया है।