Solution:लेखांकन के रूढ़िवादिता सिद्धांत के अनुसार, संभावित हानियों और दायित्वों को तुरंत मान्यता दी जानी चाहिए, जबकि आय और संपत्तियों को केवल तभी मान्यता दी जानी चाहिए जब वे निश्चित हो। यह सिद्धांत वित्तीय विवरणों को सतर्क और सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में मदद करता है।
रूढिवादिता सिद्धांत के अनुप्रयोग-
A. स्टॉक का मूल्यांकन लागत या बाजार मूल्य में से जो भी कम हो, के आधार पर करना- स्टॉक को लागत या शुद्ध प्राप्य मूल्य (बाजार मूल्य) में से जो भी कम हो, के आधार पर मूल्यांकित किया जाता है, ताकि संपत्ति को अधिक न दिखाया जाए।
C. संदिग्ध और बुरे ऋणों के लिए प्रावधान करना - जिन ऋणों के वसूल न हो पाने की संभावना हो, उनके लिए पहले से प्रावधान कर लाभ को अधिक नहीं दिखाया जाता।
E. निवेश परिवर्तन विधि- निवेशों के बाजार मूल्य में गिरावट की संभावना को ध्यान में रखते हुए यह प्रावधान किया जाता है।