वियोजित कोशिकाओं व ऊतकों पर हाइपोक्सिक स्थितियो में विश्लेषित अध्ययनों की भाँति, उंचाई पर मनुष्यों पर किए गए अध्ययन कार्बोहाइड्रेट से निगमित ऊर्जा स्रोतों के प्रति वरीयता दर्शाते हैं। जब तक आवश्यकता पूर्ति हेतु आहारी ऊर्जा अंतर्ग्रहण पर्याप्त है, अधिक ऊँचाईयों पर कार्यशील पेशियाँ बहुत कम लिपिड का उपयोग करती है।
"लेक्टेट विरोधाभास" की शास्त्रीय संकल्पनाओं में परिकल्पित अवायवी उपापचय के "पास्तेर प्रभाव" का संदर्भ कतिपय समकालिक अध्ययनों द्वारा समर्थित नहीं है। अधिक ऊँचाईयों पर लेक्टेट शटलिंग प्रधान होती है, विभिन्न ऊतक संस्तरों पर लेक्टेट उत्पन्न होता है और ऊँचाई पर कम से कम दो कार्य करता है; कार्यशील पेशियों मे लेक्टेट वरीय ईंधन होता है और अधिक ऊँचाईयों पर ग्लाइसीमिया के समर्थन में प्रमुख ग्लुकोनेजेनिक पूर्वगामी है।
लेक्टेट का एक तीसरा कार्य, अर्थात एच आई एफ1 अभिव्यंजन में वृद्धि द्वारा ऊँचाई पर कोशिका अनुकूलन का संवर्धन है और साहित्य में उसका सुझाव हैं जबकि नियंत्रित प्रयोगशाला अध्ययन अवआक्सीयता स्थिति के अंतर्गत कार्बोहाइड्रेट से निगमित ईंधन के प्रति स्पष्ट वरीयता दर्शाते हैं, पर्वतारोहियों में कोचेक्सिया आम है। अधिक ऊँचाईयों पर भूख न लगने और आहारी ऊर्जा अपर्याप्तता के कारण कायिक क्षय होता है।
जहाँ तक ऊर्जा अंश का प्रश्न है, कार्बोहाइड्रेट खाद्य लाने ले जाने अथवा परिवहन में कम प्रभावी है और इन्हें पकाने मे जल की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरूप, प्रवृत्ति यही होती है कि ऊँचाई पर ऊर्जा सघन, अत्यधिक वसा व प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ ले जाए जाएँ। कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा स्रोतों हेतु सी एन एस व परिधीय तंत्रिकाओं और कार्यशील पेशियों की आवश्यकताओं और ऊँचाई पर आहारी कार्बोहाइड्रेट आपूर्ति में असमानता के कारण ग्लाइकोनिओजेनिक पूर्वगामी की आपूर्ति हेतु तनु ऊतकों को और ग्लिसरोल व वसा अम्लों हेतू वसा ऊतकों को जुटाया जाता है।
लेक्टेट किस प्रकार ऊँचाईयों पर ग्लाइसेमिया की सहायता करता है?
Correct Answer: (d) लेक्टेट एक प्रमुख ग्लुकोनिओजेनिक पूर्णगामी के रूप में कार्य करता है।
Solution:लेक्टेट एक प्रमुख ग्लुकोनिओजेनिक पूर्णगामी के रूप में कार्य करता है।