NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

11. याज्ञवल्क्यानुसारेण अधिकलाभार्थम् अर्जनार्थं वा स्वीकृत्य समुद्रं प्रति ये गच्छन्ति तेभ्यः कियान् भागः वृद्धिरूपेण स्वीकर्तव्यः ?

Correct Answer: (d) विंशकं शतम्
Solution:याज्ञवल्क्यानुसारेण अधिकलाभार्थम् अर्जनार्थं वा स्वीकृत्य समुद्रं प्रति ये गच्छति तेभ्यः विंशकं शतम् भागः । अर्थात् याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार अधिक लाभ के लिए व कमाने के लिए स्वीकार जो समुद्र में जाते हैं। उनसे 20% का ब्याज लिया जाता है।

कान्तारगास्तु दशकं सामुद्रा विंशकं शतम्
जो व्यक्ति सूद पर लेकर जंगल में जाए उससे 10 प्रतिशत
जो व्यक्ति, सूद पर लेकर समुद्र में जाए उससे चाहिए - 20 प्रतिशत लेना

अतः विकल्प (d) सही है।

12. लिङ्गप्रमाणस्य द्वैविध्यं भवति-

A. असामान्यसम्बन्धबोधक प्रमाणान्तरसापेक्षम्
B.सामान्यसम्बन्धबोधकप्रमाणान्तरसापेक्षम्
C. सामान्यासम्बन्धबोधकप्रमाणान्तरसापेक्षम्
D. सामान्यसम्बन्धबोधकप्रमाणान्तरानपेक्षम्
E. सामान्यासम्बन्धबोधकप्रमाणान्तरानपेक्षम्

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (a) B & D केवलम्
Solution:लिङ्गप्रमाणस्य द्वैविध्यं सामान्यासम्बन्धबोधक प्रमाणान्तरसापेक्षम्, सामान्यसम्बन्धबोधकप्रमाणान्तरानपेक्षम् भवति ।

अर्थात् लिङ्ग प्रमाण दो प्रकार का होता है।

(1) सामान्य सम्बन्ध बोधक प्रमाणान्तर सापेक्ष
(2) सामान्य सम्बन्ध बोधक प्रमाणान्तर अवपेक्ष

अतः विकल्प (a) सही है।

13. केन कविना इन्द्रायुधनामा अश्वः स्वकाव्ये वर्णितः ?

Correct Answer: (d) बाणभट्टेन
Solution:बाणभट्टेन कविना इन्द्रायुधनामा अश्वः स्वकाव्ये वर्णितः । अर्थात् बाणभट्ट ने अपने काव्य ग्रन्थ में इन्द्रायुध नामक अश्व (घोड़े) का वर्णन किया है। विशखदत्त का मुद्राराक्षस नाटक है जोकि नायिका और विदूषक विहीन नाटक है। माघ की रचना शिशुपालवध है।

जिसमें प्रथम सर्ग में नारद का आगमन एवं इन्द्र सन्देश का वर्णन है। अश्वघोष ने बुद्धचरित की रचना की है। जिसमें 28 अध्याय थे लेकिन वर्तमान में 14 अध्याय ही प्राप्त हैं।

14. क्रमबोधकप्रमाणेषु क्रमः-

A. स्थानम्
B.प्रवृत्तिः
C. अर्थः
D. मुख्यः
E. पाठः

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (d) C, E, A, D, B
Solution:क्रमबोधकप्रमाणेषु क्रमः अर्थः, पाठः, स्थानम्, मुख्य, प्रवृत्तिः, अस्ति। अर्थात् क्रम का बोध कराने वाले प्रमाणों का क्रमअर्थ, पाठ, स्थान, मुख्य एवं प्रवृत्ति है।

मीमांसा दर्शन द्वारा क्रम का अर्थ पौर्वापर्यभाव (पूर्व एवं उत्तर भाव) अथवा एक विशेष प्रकार का विस्तार है। क्रम का बोध कराने वाले छः प्रमाण हैं -

(1) श्रुति
(2) अर्थ
(3) पाठ
(4) स्थान
(5) मुख्य एवं
(6) प्रवत्ति ।

15. कौटिलीयेऽर्थशास्त्रे वेदाङ्कनामयं क्रमः सूचितः-

A. कल्पः
B. निरुक्तम्
C. शिक्षा
D. व्याकरणम्
E. ज्यौतिषम्

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (a) C, A, D, B, E
Solution:कौटिलीयेऽर्थ शास्त्रे वेदाङ्गानामयं क्रमः शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्तम्, ज्यौतिषम् । कौटिल्य ने त्रयी विद्या के अन्तर्गत 'सामर्यजुर्वेदाः' त्रयस्त्रयी । अथर्ववेदेतिहासवेदौ च वेदाः।

शिक्षा कल्पो व्याकरणं निरुक्तं छन्दोविचितज्योतिषमिति चाङ्गानि। एषः त्रयी धर्मः चतुर्णां वर्णानामाश्रमाणां स्वधर्म स्थापनादौपकारिकः । अतः विकल्प (a) सही है।

16. पारिवारिकवर्गीकरणानुसारेण अफ्रीकाभूखण्डस्य परिवारः एषु कोऽस्ति?

Correct Answer: (b) बान्तूपरिवारः
Solution:पारिवारिकवर्गीकरणानुसारेण अफ्रीकाभूखण्डस्य बान्तूपरिवारः अस्ति। अर्थात् पारिवारिक वर्गीकरण के अनुसार अफ्रीका भूखण्ड के अन्तर्गत बान्तु परिवार आता है। विश्व की भाषाओं में पारिवारिक वर्गीकरण के (18) भेद माने गए हैं। अफ्रीका भूखण्ड में सूडानी, बान्तू एवं होतेन्तोत परिवार आते हैं।

द्रविड़ परिवार > यूरेशिया भूखण्ड।
बास्क परिवार -
पापुई परिवार - प्रशान्त महासागरीय भूखण्ड

17. महाकाव्येतरकृतीः चिनुत

A. दशकुमारचरितम्
B. नैषधीयचरितम्
C. बुद्धचरितम्
D. उत्तररामचरितम्
E. हर्षचरितम्

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (d) A, D, E केवलम्
Solution:दशकुमारचरितम्, उत्तररामचरितम्, हर्षचरितम् महाकाव्येतरकृतिः अस्ति। अर्थात् दशकुमारचरितम्, हर्षचरितम् उत्तररामचरितम् ये ग्रन्थ महाकाव्य से इतर है। नैषधीयचरितम्,एवं बुद्धचरितम् ये दोनों ही महाकाव्य हैं। रामायण, महाभारत, कुमारसंम्भव, रघुवंश, किरातार्जुनीयम्, शिशुपाल वधम्, भट्टिकाव्यं, ये सभी महाकाव्य है।

18. विकर्षणादिः भवति-

Correct Answer: (c) सन्तानः
Solution:विकर्षणादि सन्तानः भवति । अर्थात् विकर्षण आदि सन्तान होती है। अतः विकल्प (c) सही है।

19. प्रदीपकारः कैयटः कस्य शिष्यः आसीत्?

Correct Answer: (a) महेश्वरस्य
Solution:प्रदीपकारः कैयटः महेश्वरस्य शिष्यः आसीत्। अर्थात् प्रदीपकार कैयट महेश्वर के शिष्य थे। भर्तृहरि के गुरू वसुरात हिन्दू धार्मिक पुस्तकों के अनुसार गोरखनाथ गुरू थे। कात्यायन के गुरू शौनक थे, जबकि मम्मट के पिता का नाम जैयट था। अतः विकल्प (a) सही है।

20. डा. की थमहोदयानुसारेण रामायणस्य मूलरचनाकालः कः ?

Correct Answer: (a) ई.पू. 400
Solution:डा. कीथमहोदयानुसारेण रामायणस्य मूलरचनाकालः 400 ई.पू.अस्ति। अर्थात् डॉ. कीथ महोदय के अनुसार रामायण की मूल रचना की तिथि 400 ई. पू. मानी है। तथा याकोबी ने 800 ई. पू. से 500 ई.पू. के बीच रामायण की रचना मानी है।

कामिल बुल्के ने 600 ई.पू. में स्वीकार करते हैं। मैकडोनल ने इसकी मूल रचना 500 ई.पू. में स्वीकार किया है। विन्टरनित्स 300 ई. पू. रामायण की मूल रचना को मानते हैं।