NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

31. मैक्समूलरमतानुसारेण ऋग्वेदस्य कालः भवति -

Correct Answer: (b) 1200 विक्रमपूर्वम्
Solution:मैक्समूलर मतानुसारेण ऋग्वेदस्य कालः 1200 विक्रमपूर्वम् भवति । अतः मैक्समूलर मत के अनुसार ऋग्वेद काल 1200 ईसा पूर्वविक्रम पूर्व है।
(क) 1200 ई.पू. से 1000 ई.पू.। यह छन्द काल है।
(ख) 1000 ई.पू. से 800 ई.पू.। यह मन्त्र काल का समय है।
(ग) 800 ई.पू. से 600 ई.पू.। यह ब्राह्मण काल का समय है।
(घ) 600 ई.पू. से 400 ई.पू.। यह सूत्रकाल का समय है। लेकिन बोगाजकोई 1400 ई.पू. के शिलालेख मिलने से मैक्समूलर का मत स्वतः खण्डित हो गया है। ईसवी और विक्रम संवत् में मात्र 57 वर्ष का अन्तर है। यह 1 ईसवी से 57 वर्ष आगे रहता है।

अतः विकल्प (b) सही है।

32. तर्कभाषाग्रन्थे प्रतिपादितः निग्रहस्थानानां क्रमः-

A. अर्थान्तरम्
B. अधिकतम्
C. अप्रतिभा
D. विरोधः
E. मतानुज्ञा

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (c) B, A, C, E, D
Solution:तर्क भाषाग्रन्थे प्रतिपादितः निग्रह स्थानानां क्रमः अधिकम्, अर्थान्तरम्, अप्रतिभा, मतानुज्ञा, विरोधम् च सन्ति । पराजय हेतुः निग्रहस्थानम् । तच्चः न्यून अधिक अपसिद्धान्तअर्थान्तर अप्रतिभा मतानुज्ञा विरोधादि भेदादि बहुविधं अपि विस्तरभयान्नेह कृत्स्नमुच्यते ।

अर्थात् वह निग्रहस्थान न्यून, अधिक, अपसिद्धान्त, अर्थान्तर अप्रतिभा, मतानुज्ञा, विरोध आदिभेदों के कारण बाईस (22) प्रकार है। यद्यपि ग्रंथ विस्तार के भय से इस ग्रंथ में उसे पूर्णतया नहीं बता रहे हैं। तथापि उसके 7 भेदों को बताया गया है। निग्रह स्थान की व्युत्पत्ति - निग्रहस्य खली कारस्य स्थानं ज्ञापनं निग्रहस्थानं । अतः विकल्प (c) सही है।

33. कस्यार्थस्याभिधानं मुख्यवृत्या भवति ?

Correct Answer: (b) सङ्केतितार्थस्य
Solution:सङ्ककेतितार्थस्याभिधानं मुख्यवृत्या भवति । शब्दस्य लक्षणं साक्षात्संकेतितं योऽर्थमभिधत्ते स वाचकः अर्थात् जो शब्द साक्षात् संकेतित अर्थ को अभिधा शाक्ति के द्वारा कहा जाता है, वह वाचक शब्द कहलाता है।

संकेतग्रह- 4 होते है। संकेतितश्चतुर्भेदो जात्यादिर्जातिरेव वा।
(1) जाति (2) गुण (3)क्रिया (4) यदृच्छा अतः विकल्प (b) सही है।

34. 'श्रेयसि केन तृप्यते' इतीयं सूक्तिः कुत्र विद्यते?

Correct Answer: (c) शिशुपालवधे
Solution:'श्रेयसि केन तृप्यते' इतीयं सूक्तिः शिशुपालवधे विद्यते । श्लोक विलोकनेनैव तवामुना मुने, कृतः कृतार्योऽस्मिनिबर्हितांहसा तथापि शुश्रूषुरहं गरीयसीर्गिरोऽथवा श्रेयसि केन तृप्यते । । 29 ।। भगवान् कृष्ण कहते है कि हे मुनि नारद आपके दर्शन मात्र से ही मुझे संतुष्टि हो गई है,

और आपने मुझे दर्शन देकर कृतार्थ कर दिया है, और मेरे पाप नष्ट हो गये है। फिर भी आप ने अपनी गरिमामयी वाणी को श्रवण करा कर और भी धन्य कर दिया है, अतः कल्याण से कौन सन्तुष्ट होता है? अतः विकल्प (c) सही है।

35. सतः असज्जायते इति-

Correct Answer: (c) नैयायिकाः
Solution:सतः असज्जायते इति नैयायिकाः नैयायिको का मत असत्कार्यवाद है, उनके मत मे सत् से असत् उत्पन्न होता है। जैसे सत् भावरूप के मृदा परमाणु से असत् पूर्व अविद्यमान द्वयणु घटादि कार्य उत्पन्न होते है।

शून्यवादी बौद्ध - असत् से सत् उत्पन्न होता है जैसे-दूध की विनष्टि होने पर दही की उत्पत्ति। विनष्टि बीज से अंकुर की उत्पत्ति ।
अद्वैत वेदान्ती - विवर्तवाद मानते है अतत्त्वतोऽन्यथा प्रथा विवर्त इति उदाहृतः ।। जैसे शुक्ति (सीपी) में रजत का भान होना या रज्जु मे सर्प का ज्ञान ही विर्वत कहलाता है। लेकिन बादरायण विवर्त न मानकर परिणामवाद मानते है।
सांख्याचार्य - सतात् सतः जायते, सत् से ही सत् का जन्म होता है ऐसा सांख्याचार्य मानते है। जैसे लकड़ी से कुर्सी मेज अदि बनायी जा सकती है, लेकिन खाद्य पदार्थ नहीं। अतः विकल्प (c) सही है।

36. "उषा वा अश्वस्य मेध्यस्य शिरः" इति वचनम् अस्यामुपनिषदि भवति -

Correct Answer: (d) बृहदारण्यकोपनिषदि
Solution:'उषा वा अश्वस्य मेहयस्य शिरः' इति वचनं वृहदारण्यकोपनिषदि अस्ति अर्थात् उषा अश्वस्य मेध्यस्य शिरः ऐसा कथन बृहदारण्यकोपनिषद में कहा गया है। अतः विकल्प (d) सही है।

37. सदोषेषु एते गण्यन्ते-

A. अकाण्डे रसच्छेदः
B. स्वशब्देन रसोक्तिः
C. निहतार्थता
D. स्वशब्देन स्थायिभावोक्तिः
E. अभवन्मतयोगता

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (a) A, B, D केवलम्
Solution:रस दोषेषु एते गण्यन्ते - अकाण्डे रसच्छेदः, स्वशब्देन
रसोक्ति स्वशब्देन स्थाई भावेक्ति ।
व्यभिचरि रस भावानां शब्दवाच्यता।
कष्टकल्पनाया व्यक्तिः अनुभाव विभावयोः ।।
प्रतिकूल विभावादिग्रहो दीप्तिः पुनः पुनः। अकाण्डे पथनच्छेदौ अङ्गस्याप्यतिविस्तृतिः । प्रकतीनां विपर्ययः । अनङ्गस्याभिधानं च रसे दोषाः स्युरीदृशाः ।। अङ्गिनोऽननुसंधानं इस प्रकार से मम्मट ने रस के (13) तेरह दोष गिनाए हैं। अतः विकल्प (a) सही है।

38. शाकुन्तले कस्य मुनेः आश्रमः स्वर्गमर्त्ययोरन्तराले दर्शितः ?

Correct Answer: (b) मारीचस्य
Solution:शाकुन्तले मारीचस्य मुनेः आश्रमः स्वर्गमर्त्ययोरन्तराले दर्शितः ।

अर्थात् - अभिज्ञानशाकुन्तल में मारीच मुनि का आश्रम स्वर्ग और मृत्यु लोक के अन्तराल (मध्य) में तिष्ठित है। कण्व शकुन्तला के पालक पिता (धर्म पिता) है। गौतम कण्व का शिष्य है। माधव्य अभिज्ञान शाकुन्तलं का विदृषक है। अतः विकल्प (b) सही है।

39. रस्परं समुचितं मेलयत

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. अश्लिष्टपूर्वयोगात्मिका भाषाI. सन्थाली
B. अश्लिष्टपूर्वान्तयोगात्मिका भाषाII. मफोर
C. श्लिष्टमध्ययोगात्मिका भाषाIII. तुर्की
D. अश्लिष्ट-अन्तयोगात्मिका भाषाIV. काफिर

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) A-IV, B-II, C-I, D-III
Solution:परस्परं समुचितं मेलयत् - अश्लिष्ट पूर्वयोगात्मिका भाषा - काफिर अश्लिष्ट पूर्वान्त योगात्मिका भाषा - मफोर अश्लिष्ट मध्ययोगात्मिका भाषा सन्थाली अश्लिष्ट अन्योगात्मिका भाषा - तुर्की अतः

विकल्प (a) सही है।

40. परस्परं समुचितं मेलयत

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. वस्तुतः विद्यमानम्I. हिरण्यगर्भः
B. समस्तसुखशरीरस्थितं चेतन्यम्II. सदेव ब्रह्म
C. प्रकाशात्मकम्III. चिद्रूपं ब्रह्म
D. पारिशुद्धदेहियम्IV. अनन्तम्

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (a) A-II, B-I, C-III, D-IV
Solution:परस्परं समुचितं मेलयत-
(A) वस्तुतः विद्यमानम् - सद्रूपं ब्रह्म
(B) समष्टि सूक्ष्म शरीरोपहितं चैतन्यं हिरण्यगर्भः
(C) प्रकाशस्वरूपम् - चिद्रूपं ब्रह्म
(D) परिच्छेदरहित - अनन्तम्

अतः विकल्प (a) सही है।