NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

41. प्रमाणानाम् अङ्गीकारदृष्ट्या अनयोः सम्बन्धः भवति -

A. पौराणिकः
B. भासर्वजः
C. भाट्टः
D. उदयनः
E. सांख्यः

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (b) B & E केवलम्
Solution:प्रमाणानां अङ्गीकारदृष्टया भासर्वज्ञः सांख्यः च सम्बन्धः भवति

अर्थात् प्रमाणो के अंगीकार की दृष्टि से भासर्वज्ञ और सांख्य का सम्बन्ध होता है। अतः विकल्प (b) सही है।

42. ऋक्-मन्त्राणां लक्षणमिदम्-

A. गीतिः
B. अर्थः
C. पादव्यवस्था
D. प्रश्लिष्टपठितत्वम्
E. मननरूपत्वम्

 समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (c) B & C केवलम्
Solution:ऋ मन्त्राणां लक्षणमिदम् अर्थः पादव्यवस्था च अस्ति। अर्थात् ऋग्मंत्रों के लक्षण अर्थ और पादव्यवस्था होते है गीति सामवेद के मंत्रों के गायन का विषय है। अतः विकल्प (c) सही है।

43. पुराणपञ्चलक्षणं क्रमेण स्थापयत-

A. वंशानुचरितम्
B. मन्वन्तरम्
C. वंशः
D. प्रतिसर्गः
E. सर्गः

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (c) E, D, C, B, A
Solution:पुराणपञ्चलक्षणं क्रमेण स्थापयत सर्गः प्रतिसर्गः वंशः मन्वन्तरम् वंशानुचरितम्

सर्ग - सृष्टि की उत्पत्ति प्रतिसर्ग - प्रलय एवं पुनः सृष्टि का सृजन वंश - सूर्य चन्द्रादि वंशों का वर्णन मन्वन्तर मनु, मनुपुत्र देव, सप्तर्षि, इन्द्र और भगवान के अवतारों का वर्णन वंशानुचरित - प्रति वंश के प्रसिद्ध पुरुषों का वर्णन इस तरह से पुराण के पाँच लक्षण माने जाते हैं।

अतः विकल्प (c) सही है।

44. परस्परं समुचितं मेलयत

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. मत्सरीI. खरः
B. परिभोक्ताII. श्वा
C. परिवादीIII. कीटः
D. निन्दकःIV. कृमिः

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) A-III, B-IV, C-I, D-II
Solution:परस्परं समुचितं मेलयत

मत्सरी - कीटः
परिभोक्ता - कृमि
परिवादी - खरः
निन्दकः श्वा
अतः परीवादात् खरोभवति श्वा वैभवति निन्दकः ।
परिभोक्ता कृमिर्भवति कीटो भवति मत्सरी ।।

अतः विकल्प (b) सही है।

45. विकृतीनाम् अयं क्रमः-

A. रेखा
B. माला
C. घनः
D. दण्डः
E. ध्वजः

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (b) B, A, E, D, C
Solution:विकृतीनाम् अयं क्रमः  प्रतिसर्गः माला रेखा ध्वजः दण्डः घनः अस्ति

अर्थात् विकृतिपाठ का क्रम है।
जटा माला शिखा रेखा, ध्वजोदण्डो रथोधनः ।
अष्टौ विकृतयः प्रोक्ताः क्रम पूर्वाः महर्षिभिः।।
अतः विकल्प (b) सही है।

46. अधोलिखितेषु क्षेत्रेषु कानि कानि क्षेत्राणि ब्रह्मर्षिदेशे नान्तर्भवन्ति?

A. कुरुक्षेत्रम्
B. मध्यदेशः
C. मत्स्यदेशः
D. ब्रह्मावर्तदेशः
E.पाञ्चालदेशः

दत्तविकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनु

Correct Answer: (c) B, D केवलम्
Solution:अधोलिखितेषु क्षेत्रेषु मध्यदेश, ब्रह्मावर्तदेशः च क्षेत्राणि ब्रह्मार्षिदेशे नान्तर्भवन्ति। अर्थात् निम्नलिखित क्षेत्रों में ब्रह्मर्षि देश के अन्तर्गत गणना नहीं की जाती है। मध्य देश और ब्रह्मावर्तदेश की ब्रह्मर्षियों के निवास योग्य देश-

(1) "कुरूक्षेत्र (हरियाणा), (2) मत्स्य (राजस्थान), (3) पांचाल (पंजाब), (4) शूरसेन (मथुरा) देश ब्रह्मर्षि निवास योग्य देश बतलाया गया है।

अतः विकल्प (c) सही है।

47. सोमयागीयसंस्था भवति -

A. अग्निहोत्रम्
B. चातुर्मास्यानि
C. अग्निष्टोमः
D. आप्तोर्यामः
E.पिण्डपितृयज्ञः

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (a) C & D केवलम्
Solution:सोमयागीय संस्था अग्निष्टोमः आप्तोर्यामः च भवति । श्रीत और स्मार्त याग 21 होते हैं। जिसमें 14 श्रौत योग और 7 स्मार्त या पाक याग होते हैं। (क) स्मार्त/पाक याग (1) औपासन होम (2) वैश्वदेव (3) पार्वण (4) अष्टका (5) मासिक श्राद्ध (6) श्रवणा (7) शूलगव (ख) हविर्याग (श्रोत) (1) अग्निहोत्र (2) दर्शपौर्णमास (3) आग्रहायण (4) चातुर्मास्य (5) पशुबन्ध (6) सौत्रामणि (7) पित्रयज्ञ (ग) सोमयाग (श्रोत) अग्निष्टोम (2) अत्यग्निष्टोम (3) उक्थ्य (4) षोडसी (5) वाजपेय (6) अतिरात्र (7) आप्तोर्याम। इस प्रकार से स्मार्त और श्रीत याग का 7-7 करके विभाजन किया गया है।

अतः विकल्प (a) सही है।

48. 'प्रसिद्धौचित्यबन्धस्तु रसस्योपनिषत्परा ।' इति कारिकांशः कस्मिन् ग्रन्थे आनन्दवर्धनेनोक्तः ?

Correct Answer: (c) ध्वन्यालोके
Solution:प्रसिद्धौचित्यबन्धस्तु रस्योपनिषत्परा इति कारिकांशः ध्वन्यालोके ग्रन्थे आनन्दवर्धनेनोक्तः । अर्थात् - 'प्रसिद्धौचित्यबन्धस्तु' रसस्योपनिषत्परा यह कारिकांश ध्वन्यालोक ग्रन्थ में आनन्दवर्धन ने कहा है। अतः विकल्प (c) सही है।

49. एषु यत्' प्रत्ययान्तस्य उदाहरणानि सन्ति-

A. आज्यम्
B. देयम्
C. वृत्यम्
D. मृज्यः
E. तक्यम्

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (a) B, E केवलम्
Solution:एषु 'यत्' प्रत्ययान्तस्य उदाहरणानि देयम् तक्यम् च स्तः ।

अर्थात् - यहाँ पर यत् प्रत्ययान्त शब्द देयम् और तक्यम् है।

  • अज् + ण्यत् से आज्यम् बना है। सूत्र ऋहलोर्ण्यत् सूत्र लगा हुआ है।
  • दा + यत् - देयम् अचोयत् सूत्र से सिद्ध हुआ है।
  • तृ + क्यप् - वृत्यम् -एति स्तु शास् वृ दृ जुषः क्यप् सूत्र से सिद्ध हुआ है।
  • मृज् + क्यप् - मृज्यः मृजेर्विभाषा सूत्र से विकल्प से क्यप् प्रत्यय होता है।

अतः विकल्प (a)सही है।

50. एतेषु किं किम् अभिकथनं समीचीनमस्ति?

A. दण्डनीतिरेका विद्येति बार्हस्पत्याः
B. धर्माधर्मविषयकविचारः वार्तायां प्रवर्तते ।
C. नयापनयविषयः दण्डनीत्यां विचार्यते।
D. त्रयीवार्तादण्डनीतिश्चेति मानवाः ।
E. चतस्त्र एव विद्या इति औशनसाः ।

दत्तविकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (a) C, D केवलम्
Solution:उपर्युक्तेषु कथनेषु 'नयापनयविषयः दण्डनीत्यां विचार्यते तथा "त्रयी वार्तादण्डनीतिश्चेति मानवाः” एतत् द्वयं अभिकथनं समीचीनम् अस्ति। अर्थात् उपयुक्त कथनों में कथन C तथा D उचित कथन है।

अतः समुचित विकल्प (a) है। C. न्याय तथा अन्याय के विषय का विचार दण्डनीति में होता है। D. मनु सम्प्रदाय वादी तीन विद्यायें मानते हैं। त्रयी, वार्ता, तथा दण्डनीति मानते हैं। यह विषय अर्थशास्त्र में वर्णित है।