NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

51. सांख्याभिमतप्रमाणसंख्या भवति -

Correct Answer: (c) 3
Solution:सांख्याभिमत प्रमाण संख्या त्रयः अस्ति। अर्थात् सांख्यदर्शन के अनुसार प्रमाणों की संख्या तीन है। यहाँ तीन प्रमाण माने जाते हैं (1) दृष्ट (2) अनुमान (3) आप्त वचन प्रमाण है। दृष्टमनुमानमाप्त वचनं च सर्वप्रमाण सिद्धत्वात् त्रिविध प्रमाणमिष्टं प्रमेय सिद्धिः प्रमाणाद्धिः ।। प्रतिविषयाध्यावसायो दृष्टम् त्रिविधमनुमानमाख्यातम् । तल्लिङ्गलिङ्गिपूर्वकमाप्तवृतिराप्त वचनं तु ।।

52. 'मीमांसा' इति पदस्य फलितार्थः भवति -

Correct Answer: (b) विचारः
Solution:"मीमांसा” इति पदस्य फलितार्थ विचारः भवति। अर्थात् मीमांसा पद का अर्थ 'पूजित विचार' है यही इसका फलितार्थ है। मीमांसा दर्शन के प्रथम आचार्य महर्षि जैमिनी हैं। उनके द्वारा विरचित ग्रन्थ द्वादशलक्षणी है। मीमांसा के प्रमुख आचार्य - (1) प्रभाकर मिश्र (2) कुमारिल भट्ट, मुरारि मिश्र आदि है। मीमांसा दर्शन में 6 प्रमाण माने गये हैं। (1) प्रत्यक्ष (2) अनुमान (3) उपमान (4) शब्द, (5) अर्थापत्ति, (6) अनुपलब्धि । √मान् पूजायाम् धातु से सन् प्रत्यय होकर मीमांसा शब्द निष्पन्न होता है। 53. वेदः

53. वेदः __ बोधयति ।

A. धर्ममात्रम्
B.अधर्मम्
C. धर्मम्
D.अधर्ममात्रम्
E. अज्ञानम्

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (d) B & C केवलम्
Solution:वेदः अधर्मम् धर्मम् च बोधयति । अर्थात् वेद अधर्म तथा धर्म का बोध कराते हैं।

54. परस्परं समुचितं मेलयत

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. हाथीगुम्फाI. 350 ई.पू.
B. एरण-शाणकम्II. 250 ई.पू.
C. घमसुदीIII. 160 ई.पू.
D. भरहुतIV. 150 ई.पू.

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) A-III, B-I, C-II, D-IV
Solution:कथनानुसारं समुचितं मेलनम् अस्ति।
स्तम्भः १स्तम्भः २
A. हाथीगुम्फाIII. 160 ई.पू.
B. एरणनाणकम्I. 350 ई.पू.
C. घमसुदीII. 250 ई.पू.
D. भरहुतIV. 150 ई.पू.

हाथी गुम्फा अभिलेख कलिंगराजखारवेल ने उत्कीर्ण कराया था, एरण नाणकम् अभिलेख मध्य प्रदेश राज्य में प्राप्त होता है। घसुन्दी शिलालेख राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के पास प्राप्त हुआ है। भरहुत शिलालेख मध्य प्रदेश राज्य में सतना जिले में प्राप्त होता है।

55. "तृतीयासप्तम्योर्बहुलम्" इति सूत्रेण किं विधीयते?

Correct Answer: (d) तृतीयासप्तम्योः अम्-भावः
Solution:"तृतीया सप्तम्योर्बहुलम्” इति सूत्रेण तृतीया सप्तम्योः अम् भावः विधीयते। इस सूत्र के अनुसार अदन्त अव्ययीभाव से परे तृतीया तथा सप्तमी विभक्ति में विकल्प से अव्यय से परे विभक्ति का लोप नहीं होता अम् भाव हो जात है यथा अपदिशम् अपदिशेन, अधिगोपेन अधिगोपम् -

अपदिशे, अपदिशम्, अधिगोपे अधिगोपम्

56. दर्शपूर्णमासयोः प्राधान्येन यागाः भवन्ति

Correct Answer: (b) 6
Solution:दर्शपूर्ण मासयोः प्राधान्येन षड्यागाः भवन्ति । अर्थात् दर्श पूर्ण मासों में प्रधानता से षड्याग होते हैं।

57. इमाः सन्ति भासेतरकविरचना:-

A. अविमारकम्
B.कर्णभारम्
C. किरातार्जुनीयम्
D. हर्षचरितम्
E. महावीरचरितम्

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (a) C, D, E केवलम्
Solution:"किरातार्जुनीयम्, हर्षचरितम्, महावीरचरितम्” इमाः भासेतर कवि रचनाः सन्ति। किरातार्जुनीयम्, हर्षचरितम्, महावीर चरितम् ये भास से भिन्न कवि की रचनायें हैं। किरातार्जुनीयम महाकवि भारवि की रचना है।

हर्षचरितम् महाकवि बाणभट्ट की रचना है, महावीरचरितम् कवि भवभूति की रचना है। अविमारक, तथा कर्णभार संस्कृत साहित्य के प्रथम नाट्यकार महाकवि भास की रचना है।

58. अयथार्थस्य भेदाः भवन्ति-

Correct Answer: (c) 3
Solution:अयथार्थस्य त्रयः भेदाः सन्ति, न्याय दर्शनानुसारं । न्याय दर्शन के अनुसार अयथार्थ के तीन भेद होते हैं। अयथार्थानुभवः त्रिविधः संशय, विपर्यय, तर्काः ।।

59. ऋग्वेदे शब्दाः भवन्ति-

Correct Answer: (c) 1,53,816
Solution:ऋग्वेद 1,53,816 शब्दाः भवन्ति। ऋग्वेद में 'एक लाख तिरपन हजार आठ सौ सोलह' शब्द हैं। ऋग्वेद का विभाजन दो क्रमों में हुआ है। मण्डल क्रम तथा अष्टक क्रम है। मण्डल क्रम में मण्डलों की संख्या 10 है तथा अष्टक क्रम में अष्टकों की संख्या 8 है।

60. ब्राह्मणग्रन्थेषु प्रतिपाद्यविषयाणां क्रमः अयमुक्तः-

A. विधिः
B. निर्वचनम्
C. व्यवधारणकल्पना
D. प्रशंसा
E. पुराकल्पः

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (b) B, D, A, E, C
Solution:ब्राह्मण ग्रन्थेषु प्रतिपाद्य विषयाणां क्रमः निर्वचनम् प्रशंसा, विधिः, पुराकल्पः, व्यवधारण कल्पना अयमुक्तः । ब्राह्मण ग्रन्थों के प्रतिपाद्य विषयों का क्रम है निर्वचन, प्रशंसा, विधिः पुराकल्प, व्यवधारण कल्पना, है।