NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 संस्कृत

Total Questions: 100

81. परस्परं समुचितं मेलयत-

सूचीः १सूचीः २
A. वायुःI. मुखाध्यापकोशिका
B. आत्मानन्दःII. मोक्षप्रदा
C. एतेचारपञ्चकम्III. अथर्ववाच्यम्
D. द्विवाकुःIV. पक्षी

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) A-IV, B-III, C-II, D-I
Solution:कथनानां परस्परं समुचितं मेलयत ।
सूचीः १सूचीः २
A. वायुःIV. पक्षी
B. आत्मानन्दःIII. अथर्वणीय
C. ऐतेरायणपञ्चकम्II. मोक्षप्रदा
D. द्विवाकुःI. मुखाध्यापकोशिका

82. हिरण्यगर्भसूक्तस्य अपरं नाम भवति-

Correct Answer: (d) प्रजापतिसूक्तम्
Solution:हिरण्यगर्भसूक्तस्य अपरं नाम प्रजापतिसूक्तम् अस्ति। हिरण्यगर्भसूक्त का दूसरा नाम प्रजापति सूक्त भी है। ऋग्वेद के दशम मण्डल के 121 वे सूक्त को हिरण्यगर्भ सूक्त तथा प्रजापति सूक्त भी कहते हैं।

83. शिवि-उपाख्यानं महाभारतस्य कस्मिन् पर्वणि विद्यते?

Correct Answer: (b) वनपर्वणि
Solution:शिवि उपाख्यानं महाभारतस्य वन पर्वणि विद्यते। अर्थात् शिवि उपाख्यान महाभारत के वनपर्व में प्राप्त होता है। महाभारत में 18 पर्व प्राप्त होते हैं। वनपर्व में, नलोपाख्यान, रामोपाख्यान, आदि प्राप्त होते हैं। आदिपर्व में शकुन्तलोपाख्यान प्राप्त होता है।

84. समुचितयुग्मकानि चित

A. भट्टनारायणः मुद्राराक्षसम्
B. बिल्हणः-विक्रमाङ्क देवचरितम्
C. अम्बिकादत्तव्यासः सत्याग्रहगीता
D. कालिदासः मालतीमाधवम्
E. वी.राघवन् -मुत्तुस्वामिचरितम्

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (b) B, E केवलम्
Solution:कथनानुसारेण समुचित युग्मम् अस्ति। अर्थात् कथनानुसार समुचित युग्म है।
B. विल्हण - विक्रमाङ्क देवचरितम्
E. बी.राघवम् - मुत्तुस्वामिचरितम्

भट्टनारायण की रचना वेणीसंहार है, मुद्राराक्षस महाकवि विशाखादत्त की रचना है। अम्बिकादत्त व्यास की रचना शिवराज विजयम् है। सत्याग्रहगीता पण्डिता क्षमाराव की रचना है। मालती माधव महाकवि भवभूति का प्रकरण ग्रन्थ है।

85. अधस्तनकृतयः कालस्य आरोहक्रमेण विलिख्यन्ताम्।

A. कादम्बरी
B. पञ्चरात्रम्
C. मालविकानिमित्रम्
D. अनारकली
E. मालतीमाधवम्

समुचितं विकल्पं चिनुत- 

Correct Answer: (a) B, C, A, E, D
Solution:कृतीनाम् कालस्य आरोह क्रमेण लेखनं अस्ति ।
सूचीः १सूचीः २
B. पञ्चरात्रम्- भास की रचना है
C. मालविकाग्निमित्रम्- कालिदास की रचना है
A. कादम्बरी- बाणभट्ट की रचना है
E. मालती माधवम्- भवभूति की रचना है
D. अनारकली- V. राघवन्

86. योगसूत्रं भवति-

A.आप्तोपदेशो वाक्यम्।
B. अथ योगसाधनम्
C. अभावप्रत्ययालम्बना वृत्तिः निद्रा
D.योगश्चित्तवृत्तिविरोधः
E. तत्परं पुरुषाख्यातेः गुणवैतृष्ण्यम्

समुचितं विकल्पं चिनुत-

Correct Answer: (c) B & D केवलम्
Solution:C. अभावप्रत्ययालम्बना वृत्तिः निद्रा । E. तत्परं पुरुषाख्यातेः गुणवैतृष्ण्यम्, योग सूत्रं भवति । यहाँ शेष विकल्प योग सूत्र से सम्बन्धित नहीं हैं।

87. "सारत्थदीपनी" इति टीका भवति-

Correct Answer: (c) अभिधम्मपिटकस्य
Solution:“सारत्थदीपनी" इति टीका अभिधम्मपिटकस्य भवति । सारत्थदीपानी टीका अभिधम्मपिटक की है। यह 'सारत्थदीपनी' टीका, भदन्त सारि ने लिखी है। अभिधम्म पिटक में सात बृहद् ग्रन्थ सम्मिलित हैं जिनके नाम (1) धम्मसंगणि (धर्म का सारांश), (2) विभंग (विभाजन या वर्गीकरण), (3) धातुकथा (तत्वों की चर्चा), (4) पुग्गलपन्नाति (व्यक्ति का पदनाम), (5) कथावत्थु (विवाद के बिन्दु), (6) यामाका (जोड़े), (7) पथना (सक्रियण या कारण)। बौद्ध साहित्य में पिटकों की संख्या (3) है - (1) सुत्तपिटक (2) विनय पिटक (3) अभिधम्म पिटक, इन्हें त्रिपिटक के नाम से जाना जाता है।

88. याज्ञवल्क्यस्मृत्यनुसारेण एषु कः कः धर्मप्रवर्तको नास्ति?

A. मनुः
B. विश्वामित्रः
C. अत्रिः
D. अङ्गिराः
E. दुर्वासाः

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) B, E केवलम्
Solution:याज्ञवल्क्यस्मृत्यनुसारेण एषु B. विश्वामित्रः E. दुर्वासा धर्मप्रवर्तको नास्ति। याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार विश्वामित्र तथा दुर्वासा धर्म चक्र प्रवर्तक नहीं हैं।

89. अधोलिखितधातुरूपाणि लट्-लिट् इत्यादिक्रमानुसारं व्यवस्थापयत

A. ऐधत
B. देविता
C. ए त
D. तन्यात्
E. असावीत्

दत्तेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) B, A, C, D, E
Solution:उपरिलिखित धातु रूपाणाम् लट्, लिट्, इत्यादि क्रमानुसार समुचित व्यवस्थितम् अस्ति।
सूचीः १सूचीः २
B. देविना- लुट्लकार
A. ऐषत्- लङ्लकार
C. ऐषीत्- विधिलिङ्लकार
D. तन्यात्- आशीर्लिङ्लकार
E. असवीत्- लुड् लकार

90. परस्परं समुचितं मेलयत-

सूचीः १सूचीः २
A. अपह्नुतिःI. विना कारणं कार्योत्पत्तिः
B. उपमाII. व्यवहारारोपः
C. विभावनाIII. उपमेयोपमानसादृश्यम्
D. समासोक्ति:IV. उपमेयनिषेधपूर्वकमुपमानस्थापनम्
Correct Answer: (b) A-IV, B-III, C-I, D-II
Solution:सूचीद्वयं साधु मेलनं-
सूचीः १सूचीः २
A. अपह्नुतिःIV. उपमेय विशेष पूर्वकथनम् उपमानस्थानम्
B. उपमाIII. उपमेयोपमान सादृश्यम्
C. विभावनाI. बिना कारण कार्यापत्ति:
D. समासोक्तिII. व्यवहारारोपः