NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

61. निम्नलिखित में से किशोरीलाल गोस्वामी का उपन्यास नहीं है :

Correct Answer: (c) श्यामा स्वप्न
Solution:

'श्यामा स्वप्न' (1888 ई.) किशोरी लाल गोस्वामी का उपन्यास नहीं है बल्कि यह ठाकुर जगमोहन सिंह द्वारा रचित उपन्यास है। जबकि तारा (1902 ई.), कुसुम कुमारी (1889 ई.), सुल्ताना रजिया बेगम (1905 ई.) आदि किशोरी लाल गोस्वामी के उपन्यास हैं।

62. पालि के प्रसिद्ध वैयाकरण कच्चायन के अनुसार पालि में कितनी ध्वनियाँ थीं?

Correct Answer: (b) 41
Solution:पालि के प्रसिद्ध वैयाकरण कच्चायन के अनुसार पालि में 41 ध्वनियाँ हैं तथा मोग्गलान के अनुसार पालि में कुल 43 ध्वनियाँ होती हैं।
• कच्चायन के अनुसार पालि में 8 स्वर तथा 33 व्यंजन होते हैं तथा मोग्गलान के अनुसार 10 स्वर तथा 33 व्यंजन होते हैं।
• सर्वसम्मति से विद्वानों ने पालि भाषा का प्रदेश, मध्य प्रदेश की बोली को स्वीकार किया है।

63. 'संस्कृति और सौन्दर्य' के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने अंतिम दिनों में किस नाम से पुस्तक लिख रहे थे?

Correct Answer: (b) लालित्य मीमांसा
Solution:'संस्कृति और सौंदर्य' के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने अंतिम दिनों में 'लालित्य मीमांसा' नाम से पुस्तक लिख रहे थे।
'संस्कृति और सौन्दर्य' निबन्ध नामवर सिंह द्वारा रचित है। इसका प्रकाशन 1982 ई. में हुआ।
• नामवर सिंह प्रगतिवादी समीक्षक हैं।
• नामवर सिंह की प्रमुख रचनाएँ - हिन्दी के विकास में अपभ्रंश (1952 ई.), छायावाद (1955 ई.), इतिहास और आलोचना (1957 ई.), कहानी नयी कहानी (1965 ई.), कविता के नये प्रतिमान (1968 ई.), दूसरी परंपरा की खोज (1982 ई.) आदि।

64. भारत सरकार के राजभाषा विभाग का सी-डैक की सहायता से 'लीला हिन्दी प्रबोध' नामक सॉफ्टवेयर किसने तैयार किया?

Correct Answer: (d) हेमंत दरबारी
Solution:भारत सरकार के राजभाषा विभाग का सी-डैक की सहायता से 'लीला हिन्दी प्रबोध' नामक सॉफ्टवेयर हेमंत दरबारी ने तैयार किया।
लीला हिन्दी प्रबोध सॉफ्टवेयर हिन्दी सीखने के लिए बनाया गया एक मल्टीमीडिया ऐप है। यह ऐप केन्द्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने विकसित किया है। लीला ऐप के जरिए 14 भारतीय भाषाओं की मदद से हिन्दी सीखी जा सकती है।

65. 'अंधेर नगरी' नाटक में 'तीसरा अंक' का स्थान है :

Correct Answer: (a) जंगल
Solution:'अंधेर नगरी' नाटक में तीसरा अंक का स्थान 'जंगल' है।
• 'अंधेर नगरी' प्रहसन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित 1881 ई. में प्रकाशित हुआ। इस प्रहसन में कुल छः दृश्य हैं -

भारतेन्दु के मौलिक नाटक - वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873 ई.), सत्यहरिश्चन्द्र (1875 ई.), विषस्य विषमौषधम् (1876 ई.) भारतदुर्दशा (1880 ई.), नीलदेवी (1881 ई.), प्रेमजोगिनी (1875 ई.) आदि।

66. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची-I (अंधायुग अंक)सूची-II (शीर्षक)
A. दूसरा अंकI. अश्वत्थामा का अर्द्धसत्य
B. तीसरा अंकII. गांधारी का शाप
C. चौथा अंकIII. पशु का उदय
D. पाँचवाँ अंकIV. विजय : एक क्रमिक आत्महत्या

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन  कीजिए :

Correct Answer: (b)
Solution:सूची-I के साथ सूची-II का सही मिलान इस प्रकार है-
सूची-I (अंधा युग अंक)सूची-II (शीर्षक)
दूसरा अंकपशु का उदय
तीसरा अंकअश्वत्थामा का अर्द्धसत्य
चौथा अंकगांधारी का शाप
पाँचवा अंकविजय एक क्रमिक आत्महत्या

• इस नाटक में पाँच अंक और आठ भाग हैं। स्थापना, अंतराल और समापन ये तीनों अंक नहीं हैं।
• प्रथम अंक - कौरव नगरी है।, समापन 'प्रभु की मृत्यु' ।
नाटक के पात्र - नाटक में कुल सोलह (16) पात्र हैं। जिसमें 15 पुरुष पात्र और एक स्त्री पात्र हैं।
• धर्मवीर भारती कृत अंधा युग गीति नाटक 1955 ई. में प्रकाशित हुआ।
इनकी अन्य काव्यकृतियाँ - ठंडा लोहा (1946 ई.), कनुप्रिया (1959 ई.), सात गीत वर्ष, सपना अभी भी आदि।

67. लौन्जाइनस उदात्त के पाँच स्रोत मानते हैं, इनका सही अनुक्रम है?

A. महान विचारों की उद्भावना की क्षमता
B. रचना की गरिमा और उत्कर्ष का समुचित प्रभाव
C. प्रबल तथा अंतः प्रेरित भाव
D. अलंकारों-विचारालंकार और शब्दालंकार का समुचित प्रयोग
E. भव्य शब्द-योजना
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) A, C, D, E, B
Solution:लोंजाइनस उदात्त के पाँच स्रोत मानते हैं, इनका सही अनुक्रम इस प्रकार है -
1. महान विचारों की उद्भावना की क्षमता।
2. प्रबल तथा अन्तःप्रेरित भाव
3. अलंकारों-विचारालंकार और शब्दालंकार का समुचित प्रयोग।
4. भव्य शब्द-योजना
5.रचना की गरिमा और उत्कर्ष का समुचित प्रभाव
• लोंजाइनस ने कहा है, उदात्त महान आत्मा की प्रतिध्वनि है।
• लोंजाइनस ने उदात्त की उत्पत्ति के लिए 'प्रतिभा' को सर्वाधिक महत्व दिया।
• लोंजाइनस उदात्त के तीन अवरोधक मानते हैं -
1. शब्दाडंबर
2. बालिशता
3. भावाडंबर
• अनास्था, अनपेक्षित और अनुचित भावातिरेक भावाडंबर हैं।

68. दिनकर के गीति-नाट्य 'उर्वशी' में निम्नलिखित विशेषताएँ दृष्टिगत होती हैं -

A. उर्वशी में स्त्री देह के प्रति उपेक्षा का भाव है।
B. उर्वशी प्रेम और श्रृंगार के आवेग का काव्य है।
C. उर्वशी और पुरुरवा के बीच प्रेम बहुत आध्यात्मिक स्तर का है।
D. उर्वशी अपने नवजात शिशु की देखभाल स्वयं करती है।
E. उर्वशी में रति चित्रों की पुनरावृत्ति बहुत है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (e) (*)
Solution:रामधारी सिंह दिनकर के गीतिनाट्य 'उर्वशी' में निम्नलिखित विशेषताएँ दृष्टिगत होती हैं -
1. उर्वशी प्रेम और श्रृंगार के आवेग का काव्य है।
2. उर्वशी अपने नवजात शिशु की देखभाल स्वयं करती है।
3. उर्वशी में रति चित्रों की पुनरावृत्ति बहुत है।
• उर्वशी रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित काव्य नाटक है। इसका प्रकाशन 1961 ई.में हुआ।
• इस काव्य को दिनकर ने उर्वशी और पुरुरवा के प्राचीन आख्यान को एक नये अर्थ से जोड़ा है।
• उर्वशी राष्ट्रवाद और वीर रस प्रधान रचना है। उर्वशी गीतिनाट्य के लिए दिनकर को 1972 ई. में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया।
इनकी प्रमुख कृतियाँ - कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, हुंकार, संस्कृति के चार अध्याय, परशुराम की प्रतीक्षा आदि।
नोट- इस प्रश्न का कोई भी विकल्प सही न होने के कारण आयोग ने इसे (F) माना है।

69. कामायनी के सर्गों का सही अनुक्रम क्या है?

A. संघर्ष                       B. स्वप्न                       C. निर्वेद
D. दर्शन                      E. कर्म
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन  कीजिए:

Correct Answer: (b) E, B, A, C, D
Solution:जयशंकर प्रसाद कृत 'कामायनी' (1935 ई.) महाकाव्य है। इसमें 15 सर्ग हैं जिनका क्रम निम्नलिखित है- (1) चिन्ता, (2) आशा, (3) श्रद्धा, (4) काम, (5) वासना, (6) लज्जा, (7) कर्म, (8) ईर्ष्या, (9) इड़ा, (10) स्वप्न, (11) संघर्ष, (12) निर्वेद, (13) दर्शन, (14) रहस्य, (15) आनन्द ।
• आचार्य शांतिप्रिय द्विवेदी ने 'कामायनी' को छायावाद का उपनिषद् कहा है।
• जयशंकर प्रसाद को प्रेम और सौन्दर्य का कवि माना जाता है।
जयशंकर प्रसाद की महत्त्वपूर्ण काव्य कृतियाँ - उर्वशी (1909 ई.), वनमिलन (1909 ई.), प्रेमराज्य (1909 ई.), अयोध्या का उद्धार (1910 ई.), शोकोच्छवास (1910 ई.), कानन कुसुम (1913 ई.), प्रेमपथिक (1914 ई.), झरना (1918 ई.) आँसू (1925 ई.), लहर (1933 ई.) आदि।

70. "पृथ्वीराज रासो" मध्यकालीन ब्रजभाषा में ही लिखा गया है, पुरानी राजस्थानी में नहीं, जैसा कि साधारणतया इस विषय में माना जाता है।" यह कथन किसका है?

Correct Answer: (a) धीरेन्द्र वर्मा
Solution:"पृथ्वीराज रासो” मध्यकालीन ब्रजभाषा में ही लिखा गया है, पुरानी राजस्थानी में नहीं, जैसा कि साधारणतया इस विषय में माना जाता है।" यह कथन धीरेन्द्र वर्मा का है।
• चन्दवरदाई कृत 'पृथ्वीराज रासो' महाकाव्य 13वीं शती की रचना है। इसमें 69 सर्ग (समय) है।
• आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी ने 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' में लिखा है - पृथ्वीराज रासो ढाई हजार पृष्ठों का बहुत बड़ा ग्रंथ है जिसमें 69 समय (सर्ग या अध्याय) हैं। प्राचीन समय में प्रचलित प्रायः सभी छंदों का व्यवहार हुआ है। मुख्य छंद है कवित्त (छप्पय), दूहा, तोमर, त्रोटक, गाहा और आर्या।
• चंदवरदाई ने अपने पुत्र जल्हण के हाथ में रासो की पुस्तक देकर उसे पूर्ण करने का संकेत किया।