NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

71. क्रोचे के अनुसार अभिव्यंजना के संबंध में कथन है-

A. अंतःप्रज्ञा और अभिव्यंजना में अभेद है।
B. प्रत्येक अंतःप्रज्ञा कला नहीं होती है।
C. कला-सृष्टि केवल आंतरिक है।
D. कला रूप और वस्तु दोनों में होती है।
E. कला अखंड है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल A, C, E
Solution:क्रोचे के अनुसार अभिव्यंजना के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित हैं-
1. अंतः प्रज्ञा और अभिव्यंजना में अभेद है।
2. कला-सृष्टि केवल आंतरिक है।
3. कला अखंड है।
4. प्रत्येक अंतः प्रज्ञा कला है और प्रत्येक कला अन्तःप्रज्ञा है।
5. कला वस्तु में नहीं होती बल्कि वस्तु द्वारा अभिव्यक्त रूप में होती है।
• क्रोचे ने सर्वप्रथम 1900 में अपना निबन्ध 'एस्थेटिक ऐज द साइंस ऑफ एक्सप्रेशन एण्ड जनरल लिंग्विस्टिक्स' लिखा। इसी निबन्ध का विस्तृत रूप 'ईस्थेटिक' (1902 ई.) पुस्तक है।
• क्रोचे ने सन् 1902 ई. में 'ला क्रितीका' पत्रिका का प्रकाशन किया।
• क्रोचे ने कला निर्माण में प्रतिभा को मूल कारण माना है।

72. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I (कविता की पंक्तियाँ)सूची-II (कवि)
A. अब तक क्या किया जीवन क्या जियाI. अज्ञेय
B. विस्तृत नभ का कोई कोनाII. निराला
C. आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तरIII. महादेवी वर्मा
D. श्रेय नहीं कुछ मेरा, मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में।IV. मुक्तिबोध

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IIIIIIIV
(c)IIIIVIII
(d)IVIIIIII
Correct Answer: (d)
Solution:सूची-I के साथ सूची-II का सही मिलान इस प्रकार है-
कविता की पंक्तियाँकविताकवि
● अब तक क्या किया जीवन क्या जियाअंधेरे मेंमुक्तिबोध
● विस्तृत नभ का कोई कोनामैं नीर भरी दुःख की बदलीमहादेवी
● आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तरराम की शक्ति पूजानिराला
● श्रेय नहीं कुछ मेरा, मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य मेंअसाध्य वीणाअज्ञेय

73. 'आगरा बाजार' नाटक में पात्रों के पहले से बाद के संवादों का सही अनुक्रम है:

A. तरबूजवाला B. ककड़ीवाला C. पानवाला
D. लड्डूवाला E. बरफ़वाला
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) D, A, E, B, C
Solution:'आगरा बाजार' नाटक में पात्रों के पहले से बाद के संवादों का सही अनुक्रम इस प्रकार है -
लड्डूवाला, तरबूजवाला, बरफवाला, ककड़ीवाला, पानवाला।
• हबीब तनवीर कृत 'आगरा बाजार' नाटक का रचनाकाल 1954 ई. है। स्थान आगरा के 'किनारी बाजार' का एक चौराहा है।
• नाटक के दो अंक हैं। नाटक में हास्य रस का प्रयोग अधिक है।
• इस नाटक का सर्वप्रथम मंचन 14 मार्च, 1954 को 'जामिया मिलिया इस्लामिया' के कला विभाग के खुले मंच पर किया गया।
• आगरा बाजार नाटक की रचना हबीब तनवीर ने 18वीं सदी के भारतीय शायर एवं नज़्म के पिता कहे जाने वाले नजीर अकबराबादी को प्रतिष्ठित करने के लिए किया।
इनके प्रमुख नाटक - आगरा बाजार (1954 ई.), मिट्टी की गाड़ी (1958 ई.), चरणदास चोर (1975 ई.) आदि।

74. 'सिंदूर की होली' नाटक में मनोरमा के कथन हैं :

A. मैं तुम्हें अपना दूल्हा तो नहीं बना सकती लेकिन प्रेमी बना लूँगी।
B. तुम जानती हो मैं किसे प्रेम करती हूँ, प्रेम दो-चार से तो नहीं हो सकता और फिर अब प्रथम दर्शन में प्रेम का समय भी नहीं रहा।
C. कला की भावना किसके भीतर नहीं होती? शिक्षा और कला का सम्बन्ध कुछ नहीं है। कला का आधार तो है विश्वास और शिक्षा का संदेह ।
D. पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है पुरुष ।
E. तुम कहते हो कि तुम जीवन भर अविवाहित रहोगे। इतना ही नहीं कितनी अनर्गल बातें तुम कह जाते हो। दस वर्ष का समय बीत गया। मेरा व्यवहार तुम्हारे साथ कैसा रहा, तुम स्वयं जानते हो।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल A, C और D
Solution:'सिंदूर की होली' नाटक में मनोरमा के कथन निम्नलिखित हैं -
1. मैं तुम्हें अपना दूल्हा तो नहीं बना सकती लेकिन प्रेमी बना लूँगी।
2. कला की भावना किसके भीतर नहीं होती? शिक्षा और कला का सम्बन्ध कुछ नहीं है। कला का आधार तो है विश्वास और शिक्षा का संदेह ।
3. पुरुष का सबसे बड़ा रोग स्त्री है और स्त्री का सबसे बड़ा रोग है। पुरुष ।
• पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र कृत 'सिंदूर की होली' नाटक का प्रकाशन वर्ष 1934 ई. है। यह समस्या प्रधान नाटक है।
• लक्ष्मी नारायण मिश्र को समस्या प्रधान नाटक का जनक कहा जाता है।
• इस नाटक के तीन अंक हैं। तीनों अंकों में दृश्य स्थल एक ही है। डिप्टी कलेक्टर मुरारीलाल के बंगले की बैठक ।
नाटक के पुरुष पात्र - रजनीकांत, मनोजशंकर, मुरारीलाल, माहिर अली, भगवंत सिंह, हरनंदन सिंह, डॉक्टर ।
स्त्री पात्र - चंद्रकला, मनोरमा।
इनके प्रमुख नाटक - अशोक (1927 ई.), संन्यासी (1930 ई.), राक्षस का मन्दिर (1931 ई.), मुक्ति का रहस्य (1932 ई.), राजयोग (1933 ई.), आधी रात (1936 ई.), गरुड़ ध्वज (1945 ई.), गंगाद्वार (1974 ई.) नारद की वीणा (1946 ई.) चक्रव्यूह (1954 ई.) आदि।

75. हिन्दी निबंध और निबंधकार का सही युग्म है :

A. सब मिट्टी हो गया - माधव प्रसाद मिश्र
B. धरती और धान - रामवृक्ष बेनीपुरी
C. मुझे मेरे मित्रों से बचाइए - पद्म सिंह शर्मा
D. उजड़ा स्वर्ग - रघुवीर सिंह
E. नगर वधू - पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र'
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल A, C, D
Solution:हिन्दी निबन्ध और निबंधकार का सही युग्म इस प्रकार है -
निबन्धनिबन्धकार
सब मिट्टी हो गयामाधव प्रसाद मिश्र
मुझे मेरे मित्रों से बचाइएपद्म सिंह शर्मा
उजड़ा स्वर्गरघुवीर सिंह
धरती और धानपाण्डेय बेचन शर्मा 'उग्र'

76. निम्नलिखित में से किस कृति को 'जिन्दगी का एक टुकड़ा मात्र' कहा गया है?

Correct Answer: (b) एक कहानी यह भी
Solution:मन्नू भण्डारी कृत 'एक कहानी यह भी' (2007 ई.) को 'जिन्दगी का एक टुकड़ा मात्र' कहा गया है। यह आत्मकथात्मक कहानी है।
प्रमुख पात्र- जीतमल, सुशीला, शीला अग्रवाल, डॉ. अंबालाल, मिस्टर सेठी, कोमल कोठारी, डॉ. शैल कुमारी, अर्चना वर्मा आदि।
इनकी प्रमुख कृतियाँ - एक प्लेट सैलाब (1962 ई.), मैं हार गई (1957 ई.), तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है (1966 ई.), त्रिशंकु, आँखों देखा झूठ आदि।
• तुलसीराम ने अपनी आत्मकथा दो भागों में लिखा है, जिसका पहला भाग - मुर्दहिया (2010 ई.) में तथा दूसरा भाग – मणिकर्णिका (2014 ई.)।
• 'मुर्दहिया' दलित समाज की त्रासदी और भारतीय समाज की विडंबना का सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आख्यान है।
• हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार भागों में लिखी जो क्रमशः है - क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969 ई.), नीड़ का निर्माण फिर (1970 ई.), बसेरे से दूर (1977 ई.) और दशद्वार से सोपान तक (1985 ई.)।
• रमणिका गुप्ता की आत्मकथा दो भागों में है - (1) आप दरी, (2) हादसे (2005)

77. अंग्रेजी राज्य के सन्दर्भ में यह कथन भारतेंदु के किस निबंध का है?

"बागबाँ आया गुलिस्तों में कि सैय्याद आया,
जो कोई आया मेरी जान को जल्लाद आया।'

Correct Answer: (a) बादशाह - दर्पण
Solution:"बागबाँ आया गुलिस्ता में कि सैय्याद आया,
जो कोई आया मेरी जान को जल्लाद आया।" अंग्रेजी राज्य के सन्दर्भ में यह कथन भारतेन्दु के 'बादशाह दर्पण' निबंध का है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित 'वैष्णवता और भारतवर्ष' नामक निबन्ध पहले 'रामायण का समय' नामक लेख में 1884 ई. में आया। यह धर्म सम्बन्धी निबंध है।
• भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को निबंध का जनक माना जाता है।
• भारतेन्दु के विद्या गुरु राजा शिव प्रसाद सितारे हिन्द थे।
• भारतेन्दु के संबंध में डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी ने लिखा है,
"कविता में उनका संस्कार है, गद्य में विचार।"
• भारतेन्दु के प्रमुख निबन्ध -  अथ अंग्रेज स्तोत्र लिख्यते, पाँचवा पैगम्बर, कश्मीर कुसुम, उदय पुरोदय, कालचक्र, बादशाह दर्पण, तदीयसर्वस्व, हिन्दीभाषा, भ्रूणहत्या, काशी, मणिकर्णिका, नाटक, भारत वर्षोन्नति कैसे हो आदि।

78. "योरप का यह अभिव्यंजनावाद हमारे यहाँ के पुराने वक्रोक्तिवाद 'वक्रोक्तिः काव्य जीवितम्' का ही नया रूप या विलायती उत्थान है।" - यह किस आलोचक का कथन है?

Correct Answer: (c) रामचंद्र शुक्ल
Solution:

"योरप का यह अभिव्यंजनावाद हमारे यहाँ के पुराने वक्रोक्तिवाद 'वक्रोक्तिः काव्य - जीवितम्' का ही नया रूप या विलायती उत्थान है।" - यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है।
• "अन्तःकरण की वृत्तियों के चित्र का नाम कविता है।" कथन आलोचक महावीर प्रसाद द्विवेदी का है।
• "काव्य तो प्रकृत मानव अनुभूतियों का नैसर्गिक कल्पना के सहारे, ऐसा सौन्दर्यमय चित्रण है जो मनुष्य मात्र में स्वभावतः अनुरूप भावोच्छवास और सौन्दर्य संवेदन उत्पन्न करता है। इसी सौन्दर्य-संवेदन को भारतीय पारिभाषिक शब्दावली में रस कहते हैं।" - नन्द दुलारे वाजपेयी
• "जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है उसी प्रकार हृदय की यह मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है।" - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

79. यह पंक्तियाँ किस काव्य संग्रह से हैं?

'बच्चे प्रत्याशा में होंगे, नीड़ों से झाँक रहे होंगे।
यह ध्यान परों में चिड़िया के भरता, कितनी चंचलता है।'

Correct Answer: (c) निशा-निमंत्रण
Solution:'बच्चे प्रत्याशा में होंगे, नीड़ों से झाँक रहे होंगे।
यह ध्यान परों में चिड़िया के भरता, कितनी चंचलता है।' यह पंक्तियाँ हरिवंश राय बच्चन कृत 'निशा-निमंत्रण' काव्य संग्रह से है।
'हरिवंश राय बच्चन' की प्रमुख कविता - विषादराग, एकांत संगीत, आकुल-अंतर, मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, सतरंगिनी, खादी के फूल, सूत की माला, दो चट्टाने आदि।

80. भरतमुनि ने काव्य गुणों की संख्या कितनी मानी है?

Correct Answer: (c) 10
Solution:भरतमुनि ने काव्य-गुणों की संख्या दस मानी है
भरतमुनि को संस्कृत काव्यशास्त्र का प्रथम आचार्य माना जाता है।
भरतमुनि की प्रसिद्ध रचना नाट्यशास्त्र है। इसे भरतमुनि ने 'पंचमवेद' भी कहा है।
नाट्यशास्त्र में 36 अध्याय तथा पाँच हजार श्लोक हैं।
भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में दस गुण, दस दोष तथा चार अलंकार (यमक, उपमा, रूपक तथा दीपक) की मीमांसा की है। नाट्यशास्त्र के षष्ठम् एवं सप्तम् अध्याय में रस तथा भाव का वर्णन किया गया है। भरतमुनि ने रसों की संख्या आठ मानी है।