NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

51. 'हमने बहुत से अपने वीर हिंदुस्तान में भेजे हैं। परंतु मुझको तुमसे जितनी आशा है उतनी और किसी से नहीं है।' उपरोक्त कथन भारत दुर्दशा नाटक में किन-किन पात्रों का आपसी संवाद है?

Correct Answer: (d) भारत दुर्देव-मदिरा
Solution:हमने बहुत से अपने वीर हिंदुस्तान में भेजे हैं परन्तु मुझको तुमसे जितनी आशा है उतनी और किसी से नहीं है।"
उपर्युक्त कथन 'भारत दुर्दशा' नाटक में भारत दुर्देव और मदिरा का आपसी संवाद है। यह नाटक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा सन् 1880 ई. में रचित है। इसके प्रमुख पात्र भारत, भारत दुर्देव एवं भारत भाग्य, योगी, आलस्य मदिरा, सत्यानाशी आदि हैं। इस नाटक में 6 अंक हैं।
भारतेन्दु के मौलिक नाटक- (1) वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873), (2) विषस्य विषमौषधम् (1876), (3) प्रेमजोगिनी (1875), (4) चन्द्रवली (1876), (5) नील देवी (1881), (6) अँधेरनगरी (1881)।
भारतेन्दु के अनुदित नाटक - 
रत्नावली (1868), विद्यासुन्दर (1868), पाखण्ड विडम्बन (1872), धनंजयविजय (1873), मुद्राराक्षस (1878), दुर्लभबंधु (1880), कर्पूरीमंजरी (1875), सत्यहरिश्चन्द्र (1875), भारतजननी (1877)1

52. उपर्युक्त पंक्ति में वीर रस के किस भेद का उल्लेख है?

'पंचनि के देखत प्रपंच करि दूर सबै, पंचन को स्वत्व पंचतत्व में मिलैहौ मैं, हरि पन हारी जस धारिके धरौं हौं सांत, सांतनु को सुभट सुपूत कहिवैहाँ मैं।

Correct Answer: (c) युद्धवीर
Solution:पंचनि के देखत प्रपंच करि दूर सबै,
पंचन को स्वत्व पंचतत्व में मिले हौ मैं,
हरि-पन-हारी जस धारिकै धरौ हौं सांत,
सांतनु को सुभट सुपूत कहिवैहौं मैं।।
उपर्युक्त पंक्ति में वीर रस के युद्धवीर भेद का उल्लेख है।
वीर रस के चार प्रमुख भेद हैं- युद्धवीर, दानवीर, दयावीर तथा धर्मवीर ।

53. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए

सूची-I (रचना)सूची-II (रचनाकार)
A. पेरिपोइयतिकेसI. कॉलरिज
B. बायोग्रेफिया लिटरेरियाII. आई.ए. रिचर्ड्स
C. द सेक्रेड वुडIII. अरस्तू
D. प्रिंसिपल्ज़ ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज्मIV. टी एस इलियट

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) A-III, B-I, C-IV, D-II
Solution:रचना और रचनाकार का सही सुमेलन इस प्रकार है-
सूची-I (रचना)-सूची-II (रचनाकार)
पेरिपोइएतिकेस-अरस्तू
बायोग्रेफिया लिटरेरिया-कॉलरिज
द सेक्रेड वुड-टी.एस. इलियट
प्रिंसिपल्स ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज़्म-आई.ए. रिचर्ड्स

54. निम्न में से किस साधन की सहायता से आर्थी व्यंजना के अन्तर्गत प्रतीयमान अर्थ की प्रतीति नहीं होती

Correct Answer: (c) साहचर्य
Solution:'साहचर्य' साधन की सहायता से आर्थी व्यंजना अन्तर्गत प्रतीयमान अर्थ की प्रतीति नहीं होती। व्यंजना के दो भेद हैं-
क- शाब्दी व्यंजना
ख- आर्थी व्यंजना

55. खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य किसे माना जाता है?

Correct Answer: (a) प्रियप्रवास
Solution:खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य प्रियप्रवास है। यह हरिऔध द्वारा सन् 1914 ई. में रचित महाकाव्य है। इस महाकाव्य को 17 सर्गों में लिखा गया है जिसमें कृष्ण के बचपन से लेकर मथुरा प्रस्थान तक की कथा का वर्णन है। 'प्रियप्रवास' का सर्वप्रथम नाम 'ब्रजांगना विलाप' था। यह सम्पूर्ण काव्य संग्रह वर्णवृत्तों पर आधारित है। पारिजात और वैदेही वनवास हरिऔध द्वारा रचित अन्य काव्य ग्रन्थ हैं। जबकि 'आँसू' जयशंकर प्रसाद, 'भारत-भारती' मैथिलीशरण गुप्त तथा 'सरोज स्मृति' निराला द्वारा रचित रचनाएँ हैं।

56. संस्कृति के चार अध्याय किस लेखक का भारतीय संस्कृति के मूल उपादानों का ऐतिहासिक विकास प्रस्तुत करने वाला प्रसिद्ध ग्रंथ है?

Correct Answer: (b) रामधारी सिंह 'दिनकर'
Solution:'संस्कृति के चार अध्याय' रामधारी सिंह दिनकर का भारतीय संस्कृति के मूल उपादानों का ऐतिहासिक विकास प्रस्तुत करने वाला प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं। दिनकर को 'उर्वशी' महाकाव्य के लिए सन् 1972 ई. में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ।
दिनकर की अन्य प्रमुख कृतियाँ- रेणुका (1935), कुरुक्षेत्र (1946), सामधेनी (1947), रश्मिरथी (1952), दिल्ली (1954), उर्वशी (1961), इतिहास के आँसू (1951)
मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख कृतियाँ- रंग में भंग (1909), जयद्रथ वध (1910), किसान (1917), गुरुकुल (1929), साकेत (1931), भारत-भारती (1912), यशोधरा (1932), वैतालिक, पंचवटी (1925 ई.)।
हजारी प्रसाद द्विवेदी की कृतियाँ- अशोक के फूल (1948), कल्पलता (1951), विचार और वितर्क (1957), विचार प्रवाह (1959), कुटज (1964), साहित्य सहचर (1965), आलोक पर्व (1972)1
रामविलास शर्मा की कृतियाँ - प्रगति और परम्परा (1949), साहित्य और संस्कृति (1949), भाषा, साहित्य और संस्कृति (1954), लोक जीवन और साहित्य (1955), भारतेन्दु युग और हिन्दी भाषा की विकास परम्परा (1985), परम्परा का मूल्यांकन (1981) विराम चिह्न (1985)।

57. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित रचनाओं पर विचार कीजिए :

A. ध्रुवस्वामिनी
B. आधे-अधूरे
C. अंधायुग
D.सिंदूर की होली
E. स्कंदगुप्त
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (e) (*)
Solution:प्रकाशन वर्ष के अनुसार दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प संगत नहीं है। अतः आयोग द्वारा इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया है। प्रकाशन वर्ष के अनुसार उपर्युक्त रचनाओं का संगत क्रम इस प्रकार है -
रचनारचनाकारप्रकाशन वर्ष (ई.)
स्कंदगुप्तजयशंकर प्रसाद1928
ध्रुवस्वामिनीजयशंकर प्रसाद1933
सिन्दूर की होलीलक्ष्मीनारायण मिश्र1934
अंधायुगधर्मवीर भारती1954
आधे अधूरेमोहन राकेश1969

58. सूची- I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची - I / संपादकसूची - II / पत्रिका
A. राजेन्द्र कुमारI पहल
B. ज्ञानरंजनII नयी कविता
C. जगदीश गुप्तIII अभिप्राय
D. विजयदेव नारायण साहीIV आलोचना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) A-III, B-I, C-II, D-IV
Solution:सूची-I और सूची-II का सही मिलान इस प्रकार है-
संपादक-पत्रिका
राजेन्द्र कुमार-अभिप्राय
ज्ञानरंजन-पहल
जगदीश गुप्त-नयी कविता
विजयदेव नारायण साही-आलोचना

59. 'आगरा बाजार' नाटक के पात्रों को उनके वक्तव्य के साथ सुमेलित कीजिए :

सूची-Iसूची-II
वक्तव्य
A.आपस में तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। बात-बात में एक अच्छा-खासा हंगामा शुरू हो गया।
B.अबे मैंने तुम लोगों का क्या बिगाड़ा था। एक तो मंदा बाजार, ऊपर से यह टोटा।
C.बादशाह सलामत के उस्ताद हैं, अगर तारीफ करें तो जर्रे को आफताब बना दें।
D.आपका दिमाग जैसे आसमान पर सूरज मेरी हैसियत जैसे जमीन।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) A-IV,B-III,C-I. D-II
Solution:आगरा बाजार नाटक के पात्रों का उनके वक्तव्य के साथ सही सुमेलन इस प्रकार है-
वक्तव्यपात्र
आपस में तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई, बात-बात में एक अच्छा खासा हंगामा शुरू हो गया।किताबवाला
अबे, मैंने तुम लोगों का क्या बिगाड़ा था? एक तो मंदा बाजार, ऊपर से यह टोटा।बरतनवाला
बादशाह सलामत के उस्ताद हैं, अगर तारीफ करें तो जर्रे को आफताब बना दें।हमजोली
आपका दिमाग जैसे आसमान पर सूरज मेरी हैसियत जैसे जमीन।ककड़ीवाला

60. आचार्य मम्मट द्वारा निम्न पंक्तियों में किस प्रयोजन की ओर संकेत नहीं किया गया है?

काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतरक्षतये ।
सद्यः परनिर्वृत्तये कान्तासम्मिततयोपदेश युजे।

Correct Answer: (c) लोकोपदेश
Solution:उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा आचार्य मम्मट ने 'लोकोपदेश' काव्य प्रयोजन की ओर संकेत नहीं किया है। उपर्युक्त पंक्ति द्वारा आचार्य मम्मट ने निम्नलिखित काव्य प्रयोजन की ओर संकेत किया है- यश प्राप्ति, वित्तीय लाभ, लोक व्यवहार, शिवेतर क्षतये (अमंगल का नास), सद्यः पर निर्वृति (तत्काल परमानन्द की प्राप्ति), कान्ता सम्मित उपदेश।
• आचार्य मम्मट का समय 11 वीं शती का उत्तरार्द्ध स्वीकार किया जाता है। इन्होंने 'काव्य प्रकाश' नामक ध्वनि विरोधी ग्रंथ की रचना की, जिसमें 10 उल्लास (अध्याय) हैं।