NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

61. उपर्युक्त पंक्तियों में कौन सा अलंकार है?

सिय मुख सरद कमल जिमि किमि कहि जाय।
निसि मलीन वह, निसि दिन यह विगसाय ॥

Correct Answer: (c) व्यतिरेक
Solution:उपर्युक्त पंक्तियों में 'व्यतिरेक' अलंकार है। व्यतिरेक अलंकार - जहाँ उपमेय में उपमान से सकारण उत्कर्ष दिखाया जाये, वहाँ व्यतिरेक अलंकार होता है। यह चार आधार पर हो सकता है- (1) उपमेय के उत्कर्ष और उपमान के अपकर्ष का कारण दिखाकर।
(2) केवल उपमेय के अपकर्ष का कारण दिखाकर।
(3) सिर्फ उपमान के अपकर्ष का कारण दिखाकर ।
(4) उपमेय के उत्कर्ष और उपमान के अपकर्ष का कारण दिये बिना।
जैसे- सम सु वरन सुखमाकर सुखद न थोर ।
सीय अंग सखि कोमल कनक कठोर ।।

62. 'रचनाकारों का उनके जन्म वर्ष से मिलान कीजिए :

सूची-I/रचनाकारसूची-II/जन्म वर्ष
A. मैथिलीशरण गुप्तI. 1889
B. सुमित्रानन्दन पंतII. 1886
C. महादेवी वर्माIII. 1900
D. रामनरेश त्रिपाठीIV. 1907

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (b)
Solution:रचनाकारों का उनके जन्म वर्ष के अनुसार सही सुमेलन निम्नलिखित है-
रचनाकार-जन्म वर्ष (ई.)
मैथिलीशरण गुप्त-1886
सुमित्रानन्दन पंत-1900
महादेवी वर्मा-1907
रामनरेश त्रिपाठी-1889

63. वक्रोकित सिद्धान्त के संदर्भ में निम्न में से कौन सा /से कथन असत्य है हैं?

(A) जब उक्ति में भंगिमा या नयी अर्थ दीप्ति उत्पन्न करने के उद्देश्य से सर्वनाम आदि से किसी बात को छिपाया जाए तो संवृति वक्रता होती है।
(B) क्रिया के विशिष्ट प्रयोगों से चमत्कार की सृष्टि हो वहां लिंग वैचित्र्य वक्रता होती है।
(C) समास, तद्धित कृदन्त आदि के प्रयोगों से चमत्कार की |सृष्टि हो, वहां वृत्ति वक्रता होती है
(D) जहाँ बहुवचन के स्थान पर एकवचन तथा एकवचन के स्थान पर बहुवचन का प्रयोग हो, वहाँ पुरुष वक्रता होती है।
(E) धातु-पद के प्रयोग से वैचित्र की सृष्टि होने पर उपग्रह वक्रता होती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) केवल B, और D
Solution:वक्रोक्ति सिद्धान्त के संदर्भ में निम्न में से असत्य कथन है- क्रिया के विशिष्ट प्रयोगों'दुलहिन अंगिया काहे न धोवाई' में कबीर का अंगिया से क्या तात्पर्य है?

64. 'दुलहिन अंगिया काहे न धोवाई' में कबीर का अंगिया से क्या तात्पर्य है?

Correct Answer: (c) शरीर
Solution:"दुलहिन अंगिया काहे न धोवाई" पंक्ति में कबीर का 'अंगिया' से तात्पर्य शरीर है। कबीर निर्गुण काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। डॉ. बच्चन सिंह ने लिखा है- "हिन्दी भक्ति काव्य का प्रथम क्रान्तिकारी पुरस्कर्ता कबीर हैं" कबीर की भाषा के सम्बन्ध में विद्वानों ने निम्नलिखित मत प्रस्तुत किये हैं -
विद्वान-कबीर की भाषा
श्याम सुन्दरदास-सधुक्कड़ी
हजारी प्रसाद द्विवेदी-भाषा का डिक्टेटर
बच्चन सिंह-संत भाषा

65. सूची-I के साथ सूची-II मिलान कीजिए -

सूची-I/लेखकसूची-II/रचना
A.भारतेन्दु हरिश्चंद्रIप्रेमसंपत्ति लता
B.बद्रीनारायण चौधरी प्रेमघनIIप्रेम पुष्पावली
C.प्रतापनारायण मिश्रIIIवर्षा विनोद
D.जगन्मोहनIVजीर्ण जनपद
Correct Answer: (b) A-III, B-IV, C-II, D-I
Solution:सूची-I और सूची-II का उचित मिलान इस प्रकार है-
लेखक-रचना
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र-वर्षा विनोद
बद्रीनारायण चौधरी-जीर्ण जनपद
प्रतापनारायण मिश्र-प्रेम पुष्पावली
जगमोहन-प्रेमसंपत्ति लता

66. "इसका अध्ययन हिंदी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है, यह इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढांचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने लोकप्रसिद्ध ग्रन्थ 'रामचरितमानस' की रचना की।" यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा किस रचनाकार के संदर्भ में कहा गया-

Correct Answer: (b) जायसी
Solution:"इसका अध्ययन हिन्दी साहित्य की जानकारी के लिए कितना आवश्यक है इसी से अनुमान किया जा सकता है कि इसी के ढाँचे पर 34 वर्ष पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी अपने लोक प्रसिद्ध ग्रन्थ रामचरितमानस की रचना की।" उपर्युक्त कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा 'जायसी' के संदर्भ में कहा गया है।
जायसी सूफी या प्रेममार्गी शाखा के प्रमुख कवि थे। इनके द्वारा रचित प‌द्मावत महाकाव्य में कुल 57 खण्ड हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने जायसी कृत तीन ग्रन्थों का उल्लेख किया है-
(1) पद्मावत (2) अखरावट (3) आखिरी कलाम
सूरदास - सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी ।

67. 'नागमती वियोग खण्ड' में पिउ वियोग अस बाउर जीऊ' में 'बाउर' का अर्थ है :

Correct Answer: (d) बावला
Solution:नागमती वियोग खण्ड में पिउ वियोग अस बाउर जीउ पंक्ति में बाउर का अर्थ 'बावला' है। पद्मावत के विषय में कहा है- पद्मावत हिन्दी में अपने ढंग की अकेली ट्रैजिक कृति है।
जायसी - पद्मावत, अखरावट, आखिरी कलाम, चित्ररेखा कहरानामा, मसलानामा, कन्हावत ।

68. 'कोसी का घटवार' कहानी के आधार पर ध्वनि और वस्तु का कौन-सा युग्म सही है?

Correct Answer: (b) छच्छिर छच्छिर : मथानी
Solution:'कोसी का घटवार' कहानी के आधार पर ध्वनि और वस्तु का सुमेलित युग्म 'छच्छिर छच्छिर: मथानी' है। यह शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी है। इसका प्रकाशन सन् 1958 ई. में हुआ था। यह कहानी प्रेम की व्यथा, समाज के परिदृश्य और जीवन की कहानी को दिखाती है। जिसमें गुसाई एक रिटायर्ड फौजी है जो रिटायर्ड होने के बाद कोसी नदी के किनारे घट लगवा लेता है। गुसाई अपने प्रेम में असफल होने के बाद फौज में 15 वर्षों तक नौकरी करता है। वह गाँव की लछिमा नाम की लड़की से प्रेम करता है। पर उसका विवाह किसी और से होने पर वह टूट जाता है। शेखर जोशी साथ के लोग (1978), हलवाहा (1981), मेरा पहाड़ (1989), नौरंगी बीमार है (1990), डाँगरी वाले (1994)।

69. मीरा की काव्य पंक्तियों के संदर्भ में कौन सा/से कथन असत्य है/हैं?

सूची-I-सूची-II
A.थैं तो पलक उघाड़ो दीनानाथ मैं हाजिर नाजिर कब की खड़ी-राजस्थानी भाषा का प्रयोग
B.मन की मैल हिय ते न छूटी दियो तिलक सिर धोय-पंजाबी भाषा का प्रयोग
C.हो काँनाँ किन गूँथी जुल्फों कारियाँ-पंजाबी भाषा का प्रयोग
D.प्रेमनी प्रेमनी रे, मने लागी कटारी प्रेमनी-गुजराती भाषा का प्रयोग
E.दादुर मोर पपीहा बोले,कोयल सबद सुनावै-गुजराती भाषा प्रयोग

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) केवल B, E
Solution:मीरा की काव्य पंक्तियों के संदर्भ में असत्य कथन हैं-
• "मन की मैल हिय ते न छूटी दियो तिलक सिर धोय पंजाबी भाषा का प्रयोग।"
• "दादुर मोर पपीहा बोले, कोयल सबद सुनावै गुजराती भाषा का प्रयोग।" मीरा की भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रज है। मीरा के पद 'मीराबाई की पदावली' नाम से प्रकाशित है। मीरा की भक्ति माधुर्य भाव की है।
मीराबाई की प्रमुख रचनाएँ - गीत गोविन्द की टीका, राग सोरठा मलार राग, रुक्मणी मंगल इत्यादि ।

70. 'और बहुत जल्दी हो तो बिल करके काम चला लीजिए, जब तक कागज के घोड़े दौड़ते हैं रुपे की क्या कमी है?' 'परीक्षा गुरु' उपन्यास के अंतर्गत यह कथन किसका है?

Correct Answer: (b) लाला ब्रजकिशोर
Solution:"और बहुत जल्दी हो तो बिल करके काम चला लीजिए, जब तक कागज के घोड़े दौड़ते हैं। रुपे की क्या कमी है?" परीक्षा गुरु उपन्यास के अंतर्गत यह कथन लाला ब्रजकिशोर का है। परीक्षा गुरू उपन्यास के रचनाकार श्रीनिवासदास हैं। इसका प्रकाशन सन् 1882 ई. है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इस उपन्यास को हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना है। इस उपन्यास में मदनमोहन नामक एक रईस व्यापारी के बुरी संगत में पड़ने पर पतन फिर सुधार की कहानी है।
लाला श्रीनिवासदास की रचनाएँ - प्रह्ललाद चरित्र, तप्तासंवरण, संयोगिता स्वयंवर, रणधीर प्रेम मोहिनी।